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दोहरी जिंदगी का त्याग करें

In Church on February 23, 2017 at 4:44 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): दोहरी जिंदगी द्वारा छोटे लोगों को बुरा उदाहरण न दें क्योंकि बुरा उदाहरण नष्ट करता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को वाटिकन स्थित संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उन्होंने कहा, ″हमें मन-परिवर्तन को नहीं रोकना चाहिए।″

प्रवचन में संत पापा ने संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु शरीर के उन अंगों को काट देने की सलाह देते हैं जो हमारे लिए पाप का कारण बनते हैं।

उन्होंने कहा, ″बुरा उदाहरण क्या है? ठोकर वह है जिसमें हम कहते कुछ हैं और करते कुछ और। यह दोहरी जिंदगी है।″ संत पापा ने उन लोगों की जिंदगी को दोहरी करार दिया जो कहते हैं कि वे काथलिक हैं प्रत्येक दिन गिरजा जाते हैं संगठनों में भाग लेते हैं किन्तु अपने मजदूरों को उचित वेतन नहीं देते, लोगों का शोषण करते तथा अपने व्यापार में बेईमानी करते हैं।″ उन्होंने कहा कि बहुत सारे ख्रीस्तीय जो इस तरह का बर्ताव करते हैं, दूसरों को बुरा उदाहरण देते हैं। वे विनाश लाते हैं और यह हर दिन हो रहा है जिन्हें हम समाचार पत्रों और टेलीविज़न में देख सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में येसु ठोकर शब्द का प्रयोग किये बिना इसके दुष्प्रभाव के बारे बतलाते हैं कि जब हम स्वर्ग पहुँच कर द्वार पर दस्तक देंगे और अंदर प्रवेश करने हेतु आग्रह करेंगे तो प्रभु कहेंगे कि मैं तुम्हें नहीं जानता कि तुम कौन हो? तब हम सफाई देने का प्रयास करेंगे कि मैं रोज गिरजा जाता था, आपके नजदीक रहता था और संगठनों में भी भाग लेने से नहीं चूकता था, मैंने बहुत सारे दान दिये हैं, क्या आप उन्हें याद नहीं करते? तब प्रभु कहेंगे- हाँ में याद करता हूँ उन लोगों की याद जो दोहरी जिंदगी जीते थे।

संत पापा ने दोहरी जिंदगी के उद्गम के बारे बतलाया कि यह हृदय की लालसा को पूरा करने के द्वारा उत्पन्न होता है। आत्मा मारू पाप आदी पाप का घाव है जिसमें लालसा को छिपाने का प्रयास किया जाता है किन्तु उन्हें पूरा करने का प्रयास भी जारी रहता है। पहला पाठ हमें बतलाता है कि यह लालसा कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मन-परिवर्तन को नहीं रोकना चाहिए।

उन्होंने दोहरी जिंदगी के बारे सचेत करते हुए कहा कि यह अच्छा होगा कि हम अपने आप पर गौर करें कि कहीं हमारा जीवन भी दोहरा तो नहीं है जिसके तहत हम एक अच्छे ख्रीस्तीय की तरह दिखाई तो देते किन्तु अंदर में कुछ और करते हैं। यदि मुझमें किसी कारण वश दोहरापन है तो हम यह निश्चित जान लें कि प्रभु हमारे हर पाप क्षमा कर देंगे। फिर भी हमें अपने में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि प्रभु के इस वचन से अपने जीवन में लाभ उठायें तथा याद रखें कि इस मामले में प्रभु बहुत सख्त हैं क्योंकि बुरा उदाहरण विनाश लाता है।


(Usha Tirkey)

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