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काथलिक एवं अंगलिकन ख्रीस्त में एक-दूसरे के भाई-बहन

In Church on February 27, 2017 at 4:28 pm

रोम, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): आज, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के साथ हम एक बपतिस्मा द्वारा एक-दूसरे को सच्चे भाई एवं बहन के रूप में पहचान रहे हैं। मित्र और तीर्थयात्री के रूप में हम येसु ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए एक साथ चलना चाहते हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को रोम स्थित सब संतों को समर्पित अंगलिकन गिरजाघर में विश्वासियों को सम्बोधित कर कही।

पल्ली के सभी सदस्यों को सम्बोधित कर संत पाप ने कहा, ″पल्ली के वर्षगाँठ समारोह को मनाने हेतु मुझे निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद देता हूँ। रोम में प्रथम अंगलिकन धर्मविधि के अनुष्ठान का अब दो सौ साल गुजर चुका है। इन दो शताब्दियों में काथलिक एवं अंगलिकन ख्रीस्तीयों में बहुत कुछ परिवर्तन हुआ है जो पहले एक-दूसरे को संदेह की नजर से देखते थे। आज ईश्वर की कृपा से, एक बपतिस्मा द्वारा एक-दूसरे को सच्चे भाई-बहन की तरह पहचान पा रहे हैं। मित्र और तीर्थयात्री की तरह ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए हम एक साथ आगे बढ़ें।

संत पापा ने ख्रीस्त की प्रतिमा पर आशीष देने के आग्रह पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ख्रीस्त हमें निहार रहे हैं तथा उनकी दृष्टि एक मुक्तिदाता, प्रेमी एवं दयालु व्यक्ति की दृष्टि है। इसी करुणामय दृष्टि ने शिष्यों के हृदय को बेध दिया था जिन्होंने अपना सबकुछ छोड़, जीवन की एक नई यात्रा शुरू की ताकि वे प्रभु के सुसमाचार की घोषणा कर सकें। इस पवित्र प्रतीक जिसके द्वारा येसु हम पर दृष्टि डालते हैं ऐसा लगता है कि मानो वे हमें देख रहे हैं, और कह रहे हैं- क्या आप बीती सभी बातों को त्यागने के लिए तैयार हैं? क्या आप मेरे प्रेम एवं करुणा की घोषणा करना चाहते हैं?

संत पापा ने कहा कि दिव्य करूणा की उनकी दृष्टि, सभी ख्रीस्तीय प्रेरिताई का स्रोत है। संत पौलुस कोरिंथियों को लिखे अपने पत्र में कहते हैं, ″ईश्वर की दया ने हमें यह सेवा कार्य सौंपा है इसलिए हम सभी हार नहीं मानते।” (2 Cor 4:1) हमारी प्रेरिताई ईश्वर की करुणा से प्रवाहित होती है। जो हमारी प्रेरिताई को पुष्ट करती एवं शक्ति खो देने से बचाती है।

संत पापा ने पत्र पर गौर करते हुए कहा कि संत पौलुस का कोरिंथ के विश्वासियों के साथ हमेशा अच्छा संबंध नहीं रहा किन्तु वे उन चुनौतियों से ऊपर उठ पाये। उन्होंने विभाजन की समस्या के बीच भी अपनी प्रेरिताई को करुणा के प्रकाश में आगे बढाते हुए अपने आप को मेल-मिलाप हेतु समर्पित किया। संत पापा ने कहा कि जब हम बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्तीय असहमति की स्थिति महसूस करते हैं तथा उस पर विजय पाने हेतु करुणावान ईश्वर की ओर मुड़ते हैं तब हम संत पौलुस के समान करते हैं जिसको उन्होंने अपने प्रथम समुदाय के लिए किया।

संत पापा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक काथलिक एवं अंगलिकन के रूप में हम कृतज्ञ हैं कि सदियों की आपसी अविश्वास के बाद, अब हम एक-दूसरे में ख्रीस्त की कृपा के परिणाम को पहचान पा रहे हैं। उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि ख्रीस्तीयों के बीच एक-दूसरे के करीब आने की भावना में वृद्धि हुई है।

उन्होंने अंगलिकन कलीसिया के विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, ″आइये, येसु के विश्वस्त शिष्य बनने हेतु हम एक दूसरे को प्रोत्साहन दें, बीती बातों के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर, एक साथ मिलकर प्रार्थना करने की इच्छा जागृत करें। इस चाह का एक उत्तम चिन्ह है ‘ट्विनिंग’, सब संतों को समर्पित काथलिक गिरजाघर एवं अंगलिकन गिरजाघर।″

संत पापा ने सभी संतों से प्रार्थना की कि वे एक साथ मिलकर हमारे लिए एक रास्ता खोल दें जहाँ हम भाईचारा एवं ख्रीस्तीय एकता के साथ आगे बढ़ सकें। जहाँ हम येसु के साथ एक हो जायेंगे तथा वे अपनी करुणावान दृष्टि हम पर डालेंगे। वे हमें एकता एवं प्रेम का माध्यम बनने हेतु पूर्ण समर्पित होने के लिए बुला रहे हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि ईश्वर का चेहरा हम पर, हमारे परिवारों एवं पूरे समुदाय पर प्रतिबिम्बित हो।


(Usha Tirkey)

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