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विवाहित दम्पतियों के समर्थन हेतु पल्ली पुरोहितों का अह्वान

In Church on February 27, 2017 at 8:54 am

वाटिकन सिटी, शनिवार, 25 फरवरी 2017 (वीआर सदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में, अपोस्तोलिक अदालत के तत्वधान में नव विवाह प्रक्रिया पर पल्ली पुरोहितों के लिए आयोजित प्रशिक्षण के प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा उन्हें सम्बोधित कर कहा कि वे हर व्यक्ति की, हर परिस्थिति में उनका साथ देने एवं उनका समर्थन करने हेतु बुलाये जाते हैं।

संत पापा ने पल्ली पुरोहितों से कहा, ″अधिकतर मामलों में आप ही उन युवाओं से प्रथम वार्ताकार हैं जो एक नये परिवार का निर्माण करना तथा जो विवाह संस्कार के बंधन में बंधना चाहते हैं। आप विशेष ध्यान उन दम्पतियों की ओर दें जो गंभीर समस्याओं एवं संकट के कारण परेशान हैं तथा जिनके विश्वास को नवीकृत किये जाने तथा संस्कार की कृपा की पुनः खोज किये जाने की आवश्यकता है। कई बार आपको विवाह की शून्यता हेतु उपाय पूछे जाते हैं। आपसे बेहतर कोई नहीं जानता और न ही कोई उनके सम्पर्क में है।″ उन्होंने कहा कि वे हर व्यक्ति की हर परिस्थिति में उनका साथ देने एवं उनका समर्थन देने हेतु बुलाये गये हैं।

संत पापा ने इस संबंध में पल्ली पुरोहितों के कर्तव्य का स्मरण दिलाते हुए कहा कि उनकी पहली चिंता विवाह संस्कार की कृपा का साक्ष्य देना है, परिवार, कलीसिया एवं समाज के मौलिक अच्छाईयों को प्रकट करना है, एक स्त्री एवं एक पुरूष के बीच विवाह की घोषणा करना है जो ख्रीस्त एवं कलीसिया के बीच विवाह की निशानी है। उन्होंने कहा कि यह साक्ष्य तब व्यवहारिक रूप लेता है जब एक दम्पति विवाह हेतु तैयार होता और वह जो कदम लेने वाला है उसके महत्व से उसे अवगत कराया जाता है। साथ युवा दम्पतियों को जीवन के उतार चढ़ाव, आनन्द और दुःख की घड़ी में, विवाह की दिव्य शक्ति एवं सुन्दरता को समझते हुए उत्साह के साथ आगे बढ़ने हेतु मदद दी जाती है।

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि काथलिक दम्पति विवाह संस्कार द्वारा ईश्वर से संयुक्त हो जाते हैं जिनमें ईश्वर प्रतिबिम्बित होते, अपनी छवि तथा अमर प्रेम प्रकट होता है। विवाह को ईश्वर का प्रतीक कहा गया है जिसकी स्थापना स्वयं ईश्वर ने की है जिसमें पिता पुत्र और पवित्र आत्मा एक दूसरे से पूर्ण रूप से जुड़े हैं।

संत पापा ने पुरोहितों को उन लोगों की विशेष देखभाल करने हेतु निमंत्रण दिया जो अपने विवाह संस्कार को सच्चा नहीं मानते और इसे तोड़ना चाहते हैं। इस जटिल परिस्थिति में संत पापा ने सलाह दी कि वे न केवल एक विशिष्ट नौकरशाही की तरह पेश आयें अथवा कानूनी बातों पर ध्यान दें किन्तु उन दम्पतियों की भावनाओं को सुनने एवं समझने का प्रयास करें।

संत पापा ने उन लोगों के विषय में पल्ली पुरोहितों से कहा जो युवा विवाह सूत्र में बधे बिना एक साथ जीवन जीना चाहते हैं वे आध्यात्मिक एवं नैतिक स्तर पर, गरीब एवं निम्न लोगों के लिए कलीसिया का स्नेह प्रकट करें। वे लोग ख्रीस्त द्वारा प्रेम किये जाते हैं उन्हें कोमलता एवं सहानुभूति प्रदान करें क्योंकि दीन लोगों की सहायता करने की प्रेरणा हमें सुसमाचार से मिलती है।


(Usha Tirkey)

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