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पवित्रआत्मा हर बाधा को दूर करते, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on March 31, 2017 at 3:00 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि पवित्र आत्मा सभी अवरोधों को दूर करते तथा संघर्षों को सहभागिता के अवसरों में बदल देते हैं।

वाटिकन में “लूथरः 500 वर्ष बाद” शीर्षक से लूथर एवं उनके सुधारों पर विचार-विमर्श हेतु ऐतिहासिक विज्ञान सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति द्वारा शुक्रवार को सम्पन्न बैठक के काथलिक एवं लूथरन प्रतिभागियों से सन्त पापा ने यह बात कही।

उन्होंने स्मरण दिलाया कि लूथर की पाँचवी शताब्दी के लिये तैयार लूथरन-काथलिक दस्तावेज़ का शीर्षक भी “संघर्ष से सहभागिता की ओर” है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि लूथर की पाँचवी शताब्दी काथलिक एवं लूथरन आचार्यों के लिये उनके सुधारों पर अध्ययन के अवसर उत्पन्न कर रही है।

सन्त पापा ने कहा कि, पूर्वाग्रहों से स्वतंत्र रहकर, उस युग की कलीसिया एवं परमाध्यक्षीय काल पर लूथर की आलोचनात्मक प्रतिक्रियाओं पर अध्ययन परस्पर अविश्वास एवं परस्पर वैमनस्यता की भावनाओं को दूर करने में मदद प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि उन पापों और ख़ामियों को स्वीकार करने की आवश्यकता है जिनके कारण कलीसिया में विभाजन उत्पन्न हुआ था। तथापि, सन्त पापा ने कहा कि, “अतीत को नकारा नहीं जा सकता, किन्तु, आज काथलिकों एवं प्रॉटेस्टेण्ट ख्रीस्तीयों के बीच पचास वर्षों से जारी एकतावर्द्धक वार्ताओं के बाद स्मृति के शुद्धिकरण हेतु स्वतः को वचनबद्ध करना सम्भव है।”

सन्त पापा ने कहा कि आज ख्रीस्तीय धर्मानुयायी होने के नाते हमारा आह्वान किया जाता है कि हम “अतीत में किये पापों के लिये एक दूसरे को क्षमा करें तथा एकसाथ मिलकर प्रभु ईश्वर से पुनर्मिलन एवं एकता के वरदान के लिये सतत् याचना करें।”


(Juliet Genevive Christopher)

पुनरुत्थान के रहस्य पर आलोकित किया फादर कानतालामेस्सा ने

In Church on March 31, 2017 at 2:58 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): वाटिकन में परमधर्मपीठीय कार्यालयों के धर्माधिकारियों के समक्ष चालीसाकालीन प्रवचनों की श्रंखला में अपने चौथे प्रवचन में उपदेशक फादर कान्तालामेस्सा ने ख्रीस्त के पुनरुत्थान के रहस्य पर प्रकाश डाला।

प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनरुत्थान को एक ऐतिहासिक तथ्य निरूपित कर फादर कान्तालामेस्सा ने कहा, “पुनरुत्थान, विशेष रूप से, एक ऐतिहासिक घटना है। यह इतिहास की सीमा पर है, यह उस रेखा के सदृश है जो समुद्र को ज़मीन से विभाजित करती है। यह, एक ही समय में, इतिहास के भीतर और बाहर भी है। यह इतिहास से परे है जो युगान्तविषयक है।”

फादर कान्तालामेस्सा ने कहा कि इतिहासकार पुनरुत्थान पर मौन इसलिये रहे हैं क्योंकि किसी ने भी प्रभु येसु ख्रीस्त को कब्र में से पुनः जी उठते नहीं देखा था। पुनर्जीवित हो जाने के बाद ही मग्दला की मरिया तथा एम्माऊस के रास्ते में मिले शिष्यों ने उनके दर्शन किये तथा उनके विषय में साक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि इतिहासकार ताचितुस ने पोन्तुस पिलातुस के काल में मारे गये किसी “क्रिस्तुत” के बारे में लिखा है किन्तु पुनरुत्थान के बारे में वे मौन ही रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पुनरुत्थान के बिना प्रभु येसु ख्रीस्त के मरण की घटना का ख्रीस्तीयों को लिये कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, “पुनरुत्थान की घटना शिष्यों के अबोधगम्य विश्वास के कारण ऐतिहासिक घटना बन गई, ऐसे विश्वास के कारण जो शहादत की कठोर कसौटी पर भी ख़रा उतरा।”

फादर कान्तालामेस्सा ने कहा, “इस बात का सही अवलोकन किया गया है कि यदि पुनरुत्थान की ऐतिहासिक और यथार्थ प्रकृति से इनकार कर दिया जाये, तो विश्वास का उद्गम एवं कलीसिया का उद्भव एक रहस्य ही रह जायेगा जो पुनरुत्थान से भी अधिक गूढ़ होगा।” उन्होंने कहा कि इतिहास का काम तथ्यों की पुष्टि करना है और पुनरुत्थान के सन्दर्भ में इतिहास केवल साक्ष्यों को सुनने के बाद खाली कब्र के तथ्य तक पहुँच सकती है, तथापि, उन्होंने कहा, “हम विश्वासियों के लिये पुनर्जीवित के दर्शन आवश्यक हैं जो केवल विश्वास की आँखों से किये जा सकते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

पीटर्स पेन्स अब सोशल नेटवर्क साईट्स पर

In Church on March 31, 2017 at 2:56 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): सम्पूर्ण विश्व के लोग अब ट्वीटर (@ ओबोलुस इएन तथा इन्स्टाग्राम जैसी सोशल नेटवर्क साईट्स के माध्यम से सीधे पीटर पेंस ऑफिस अर्थात् सन्त पापा के उदारता कार्यों सम्बन्धी कार्यालय से जुड़ सकते हैं।

वाटिकन ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर बताया कि नवम्बर 2016 में एक वेबसाइट के सफल प्रक्षेपण के बाद, समस्त विश्व के काथलिकों एवं ज़रूरतमन्दों की सहायता को तैयार सभी लोगों के साथ सही एवं पारदर्शी तरीके से जुड़ने हेतु वाटिकन के उक्त कार्यालय ने अंग्रेजी, इताली तथा स्पानी भाषाओं में नए खातों को लॉन्च किया है।

सन्त पापा फ्राँसिस के सन्देश जो पीटर्स पेन्स ऑफिस की वेबसाईट पर पहले से ही प्रकाशित किये जाते रहे हैं अब ट्वीटर एवं इन्सटेग्राम पर दैनिक तौर पर पेस्ट किये जायेंगे। परमधर्मपीठ की अन्य कल्याणकारी योजनाओं तथा उनके लिये एकत्र अनुदान के बारे में इनसे जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।

काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष का पीटर्स पेन्स ऑफिस सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त छोटी-बड़ी योजनाओं को समर्थन देने के लिये वचनबद्ध है जिसमें केन्द्रीय अफ्रीकी गणतंत्र के बांगुई में बाल चिकित्सालय तथा जॉर्डन में प्रथम काथलिक विश्वविद्यालय की स्थापना करने की योजना भी शामिल है।


(Juliet Genevive Christopher)

शांति एवं अहिंसा हेतु साथ मिलकर काम करने की वाटिकन ने की अपील

In Church on March 31, 2017 at 2:55 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): वाटिकन स्थित अन्तरधार्मिक परिसम्वाद सम्बन्धी परमधर्मपीठीय परिषद ने तीर्थंकर वर्धमान् महावीर की 2615 वीं जयंती के उपलक्ष्य में, गुरुवार को, जैन धर्मानुयायियों के नाम एक सन्देश प्रकाशित कर परिवारों में शांति एवं अहिंसा के मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु एकसाथ मिलकर काम करने की अपील की।

09 अप्रैल को जैन धर्मानुयायियों के आध्यात्मिक गुरु तीर्थंकर वर्धमान् महावीर की 2615 वीं जयंती मनाई जा रही है। जैन धर्मानुयायियों के प्रति मंगलकामनाएँ अर्पित करते हुए सन्देश में लिखा गया, “महावीर जन्म कल्याणक दिवस आपके हृदयों, परिवारों एवं समुदायों में सुख और शांति लाए।”

इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि वर्तमान युग में व्याप्त हिंसा की अनगिनत घटनाएँ महान चिन्ता का कारण है, वाटिकन के सन्देश में कहा गया कि जैन एवं ख्रीस्तीय धर्मों के लोगों को शांति एवं अहिंसा के प्रचार-प्रसार के लिये परिवारों को समर्थन प्रदान करना चाहिये।

सन्देश में कहा गया, “आज, समाज में बढ़ती हिंसा के सन्दर्भ में, यह आवश्यक है कि परिवार सभ्यता की प्रभावशाली पाठशालाएँ बनें और अहिंसा के मूल्य को पोषित करने का हर सम्भव प्रयास करें।”

इस तथ्य की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया गया कि प्रायः भय एवं अज्ञान के कारण हिंसा भड़कती है। सन्देश के शब्दों में, “दुर्भाग्यवश, भय, अज्ञानता, अविश्वास या अतिश्रेष्ठता की भावना के कारण, कुछ लोगों द्वारा, ‘अन्य’ को और, विशेष रूप से, ‘भिन्न अन्य’ को स्वीकार करने से इनकार ने, व्यापक असहिष्णुता और हिंसा का माहौल उत्पन्न किया है।”

हिंसा के माहौल को, परिवारों में प्रेम के प्रोत्साहन से, पराभूत करने का आह्वान कर परिषद ने कहा कि परिवार समाज की महत्वपूर्ण ईकाई है जहाँ बच्चों का पोषण और बहुमुँखी विकास होता है। परिषद ने स्मरण दिलाया, “परिवार वह प्रमुख स्थल है जहाँ शांति और अहिंसा की संस्कृति स्वस्थ एवं ठोस रूप से पनप सकती है। सन्त पापा फ्राँसिस के अनुसार, परिवार में माता-पिता एवं बुज़ुर्गों का उदाहरण पाकर बच्चे, “सम्वाद करना एवं एक दूसरे का ख़्याल रखना तथा मनमुटाव और यहाँ तक कि संघर्षों का निवारण भी बलप्रयोग द्वारा नहीं अपितु सम्वाद, सम्मान, अन्य की भलाई के प्रति उत्कंठा, दया और क्षमा द्वारा करना सीखते हैं” (दे. विश्व धर्माध्यक्षीय सभा के उपरान्त प्रकाशित प्रेरितिक उदबोधन, आमोरिस लेतित्सिया, 2016, अंक 90-130)।


(Juliet Genevive Christopher)

क़ैदी ख्रीस्तीयों का इस्लाम धर्म में बलात धर्मान्तरण

In Church on March 31, 2017 at 2:54 pm

पाकिस्तान: लाहौर, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): पाकिस्तान के धार्मिक नेता एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता, पंजाब में, लाहौर के उस अभियोजक के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जिसने, रिहाई के बदले में, ईसाई क़ैदियों को अपने विश्वास के परित्याग तथा इस्लाम धर्म को गले लगाने पर बाध्य किया था।

पाकिस्तानी मीडिया ने प्रकाशित किया कि उपजिला लोक अभियोजक सैयद अनीस शाह ने, लाहौर में, एक आतंकवाद विरोधी अदालत के समक्ष 42 ईसाई कैदियों से कहा था कि यदि वे इस्लाम धर्म में परिवर्तित हो जाते हैं तो वे “उनके निर्दोष होने की गारंटी” दे सकते थे।

ब्रिटेन के एक अख़बार से सम्पर्क किये जाने पर अभियोजक शाह ने पहले तो आरोप से इनकार कर दिया किन्तु बाद में स्वीकार किया कि उसने उन्हें एक विकल्प प्रदान किया था।

सभी 42 ख्रीस्तीय क़ैदी लाहौर के युहन्नाबाद ज़िले के हैं। 15 मार्च 2015 में तालेबान संगठन द्वारा दो गिरजाघरों पर आतंकवादी हमलों के बाद इन्हें, दो आतंकवादियों को पत्थरों से मारने के लिये, गिरफ्तार किया गया था।

एशियान्यूज़ से बातचीत में युहन्नाबाद में क्राईस्ट चर्च के पादरी रे. अरशद अश्कनाज़ ने कहा, “सरकार को इस मामले पर गम्भीरता से विचार करना चाहिये इसलिये कि मौत के भय के आगे कोई भी धर्मपरिवर्तन के लिये बाध्य हो सकता है।”

हालांकि, पाकिस्तान में इस प्रकार की वारदातें पहले भी होती रही हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया है कि प्रति वर्ष कम से कम एक हज़ार हिन्दु एवं ईसाई महिलाओं को बलात इस्लाम धर्म अपनाने तथा मुसलमान पुरुषों के साथ विवाह रचाने के लिये बाध्य किया जाता है।

पाकिस्तान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में पाँच ख्रीस्तीयों को बलात इस्लाम धर्म अपनाने के लिये मज़बूर किया गया था। इनमें तीन नाबालिग़ किशोरियाँ भी शामिल हैं जिनका अपहरण कर मुसलमान पुरुषों से विवाह करा दिया गया था।

पाकिस्तान के ईसाई वकील नदीम एन्थोनी के अनुसार, ईशनिन्दा कानून के उल्लंघन हेतु सज़ा-ए-मौत पानेवाली आसिया बीबी के समक्ष भी इसी प्रकार का प्रस्ताव रखा गया था। विगत सात वर्षों से ईसाई महिला आसिया बीबी कारावास में हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

प्रभु अपने लोगों से क्यों निराश हो जाते हैं

In Church on March 30, 2017 at 2:56 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): काल्पनिक एवं मिथ्य देवताओं से सावधान रहें क्योंकि केवल ईश्वर हमें प्रेम करते हैं तथा पिता के समान हमारे लिए इंतजार करते हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

निर्गमन ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने प्रवचन में अपने लोगों के लिए उनके विश्वासघात के बावजूद ईश्वर के प्रेम पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि आज हमें अपने आप से ये सवाल पूछना चाहिए कि क्या हम अन्य देवमूर्तियों एवं सांसारिक मोह-माया की ओर जाते हुए, प्रभु से अपने को दूर कर देते हैं।

संत पापा ने निर्गमन ग्रंथ में ईश्वर की आशा एवं निराशा पर अपना उपदेश केंद्रित करते हुए कहा, ″उनकी प्रजा ही उनकी आशा हैं। उन्होंने उनके लिए स्वप्न संजोये तथा उनसे प्रेम किया किन्तु लोगों ने पिता ईश्वर के प्रेम को धोखा दिया अतः वे इसराईली प्रजा से निराश होने लगे तथा मूसा को आदेश दिया कि वह पर्वत जहाँ वे संहिता प्राप्त करने हेतु गये हुए थे नीचे उतरे। लोगों को 40 दिन ईश्वर का इंतजार करने पर धीरज नहीं था। उन्होंने स्वयं एक सोने के बछड़े का निर्माण किया तथा उस ईश्वर को भूला दिया जिन्होंने उन्हें बचाया था।

ईश्वर के प्रति विश्वासघात हेतु प्रलोभन

संत पापा ने कहा, ″नबी बारूक ने इन लोगों के बारे सही कहा है तुम उन्हें भूल गये हो जिन्होंने तुम्हारा पालन-पोषण किया।″

उन्होंने कहा, ″उस ईश्वर को भूल जाना जिन्होंने हमारी सृष्टि की, बढ़ाया तथा जीवन के रास्ते पर हमारा साथ देते हैं, यही ईश्वर की निराशा है। सुसमाचार में येसु दृष्टांतों में दाखबारी के मालिक के बारे बतलाते हैं जिन्होंने दाखबारी लगाया था किन्तु वह निराश हो गया क्योंकि नौकर उसे अपने लिए ले लेना चाहते थे। मानव हृदय में ये बेचैनी सदा बनी रहती है। यह ईश्वर से संतुष्ट नहीं होती, उनके विश्वसनीय प्रेम से तृप्त नहीं होती है। मानव हृदय हमेशा ही विश्वासघात की ओर बढ़ने के झुकाव से खिंची रहती है।

संत पापा ने कहा कि यही प्रलोभन है। ईश्वर अपने उन लोगों से निराश हो जाते हैं जो धोखा देकर देवताओं की ओर चले जाते हैं।

जिसके कारण वे नबियों के द्वारा अपने लोगों को फटकारते हैं जो बिलकुल अस्थिर है और नहीं जानती कि किस तरह इंतजार करना है। वे दूसरे देवताओं की खोज में ईश्वर से दूर चले जाते हैं।

ईश्वर की निराशा उनके लोगों का विश्वासघात है, संत पापा ने कहा और हम उनकी प्रजा हैं। हम जानते हैं कि हमारा हृदय किस तरह है। हमें प्रतिदिन उन रास्तों से बचना है जो हमें देवमूर्तियों, कल्पनाओं, दुनियादारी तथा विश्वासघात की ओर ले जाते हैं। संत पापा ने ईश्वर की निराशा पर चिंतन करने एवं अपने आप से पूछने की सलाह दी कि क्या मेरे कारण प्रभु निराश हैं?

चालीसा काल में हम चिंतन करें कि क्या हमने अपने को प्रभु से दूर कर लिया है-

संत पापा ने कहा कि पिता ईश्वर का हृदय कोमल है। उन्होंने याद किया कि येसु येरूसालेम को देखकर रो पड़े थे। उन्होंने कहा हम अपने आप से पूछें कि क्या मेरे लिए भी ईश्वर रोते हैं? क्या वे मुझसे निराश हैं? मेरी कितनी देवमूर्तियाँ हैं जिन्हें मैं दूर नहीं कर पा रहा हूँ जो मुझे गुलाम बनायी हुई हैं? मेरे अंदर की मूर्तिपूजा के कारण ईश्वर रो रहे हैं।

संत पापा ने सभी विश्वासियों से आग्रह किया वे ईश्वर की निराशा पर चिंतन करें जिन्होंने उन्हें प्रेम के लिए बनाया जबकि वे प्रेम की खोज में भटक जाते हैं। उन्होंने प्रार्थना करने की सलाह दी, ″प्रभु मेरे लिए आपने कई स्वप्न संजोये हैं मैं जानता हूँ कि मैं दूर भटक गया हूँ, मुझे बता कि मैं कहाँ और कैसे वापस लौट आऊँ। उन्होंने कहा कि हमारे लिए विस्मय की बात ये है कि वे हमेशा हमारा इंतजार करते हैं, उड़ाव पुत्र के पिता की तरह जिसने उसे दूर से देख लिया था क्योंकि वह उसका इंतजार कर रहा था।


(Usha Tirkey)

डबलिन में परिवारों की नौवीं विश्व सभा के लिए संत पापा का पत्र

In Church on March 30, 2017 at 2:46 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 30 मार्च को परिवार के आगामी 9वें विश्व सभा को एक पत्र प्रेषित किया है जो 21 से 26 अगस्त 2018 तक डब्लिन में सम्पन्न होगी। सभा की विषयवस्तु है, ″परिवार का सुसमाचार: विश्व को आनन्द।″

लोकधर्मी, परिवार तथा जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल केविन फार्रेल्ल ने संत पापा के पत्र को वाटिकन प्रेस सम्मेलन में 30 मार्च को प्रस्तुत किया।

25 मार्च को निर्गत संदेश इस प्रकार है, ″परिवार पर 8वीं विश्व सभा जो फिलाडेलफिया में 2015 के सितम्बर माह में सम्पन्न हुई थी मैंने घोषणा की थी कि काथलिक परिवारों की अगली विश्व सभा डब्लिन में आयोजित की जाए। मैं अब चाहता हूँ कि इसकी तैयारी हो तथा मुझे जानकार खुशी हो रही है कि यह 21 से 26 अगस्त 2018 को ″परिवार का सुसमाचार: विश्व को आनन्द″ की विषयवस्तु पर सम्पन्न होगी।″ उन्होंने आशा जतायी है कि इसकी तैयारी के तहत प्रेरितिक उद्बोधन ‘अमोरिस लेतित्स्या’ पर गहन चिंतन की जाए।

संत पापा ने संदेश में प्रश्न किया है कि लोगों के मन में ये सवाल उठ सकते हैं, क्या सुसमाचार अब भी विश्व के लिए आनन्द का विषय है तथा क्या परिवार आज के विश्व के लिए शुभ समाचार बना हुआ है?

संत पापा ने कहा है कि उत्तर ‘हाँ’ होना चाहिए और ये ‘हाँ’ ईश्वर की योजना पर आधारित है। ईश्वर का प्रेम, सारी सृष्टि एवं उसके केंद्र में मानव के प्रति उनका ‘हाँ’ है। यह ईश्वर का हाँ ही तो है जो एक पुरूष एवं नारी को जोड़ता है जिसके द्वारा वे उदारता पूर्वक हर परिस्थिति में जीवन की सेवा हेतु समर्पित होते हैं। प्रेम के अभाव में घायल, शोषित एवं दुर्व्यवहार की शिकार मानवता के प्रति, वे प्रतिबद्ध होते हैं। इस प्रकार पारिवारिक प्रेम के रूप में ईश्वर की ‘हाँ’ है। प्रेम से शुरू करने के द्वारा ही परिवार विश्व में ईश्वर के प्रेम का साक्ष्य दे सकता है, उसका प्रचार एवं उसे पुनः उत्पन्न कर सकता है। प्रेम के बिना हम ईश्वर की संतान, एक दम्पति, माता-पिता और भाई बहन की तरह नहीं जी सकते।

संत पापा ने संदेश में कहा है कि परिवारों को प्रेम पर, प्रेम के लिए एवं प्रेम में जीना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसका अर्थ क्षमा करना, धीरज रखना एवं एक-दूसरे का सम्मान करना बतलाया। इसके लिए उन्होंने कृपया, धन्यवाद एवं क्षमा करें आदि शब्दों के अभ्यास को जारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हम मानवीय कमजोरी का अनुभव करते हैं अतः परिवार के सदस्यों एवं याजकों को विनम्रता को नवीकृत करना चाहिए जो हम में अपने आप के निर्माण, प्रशिक्षण, सहायता करने और मदद किये जाने, साथ देने, निर्णय करने एवं भली इच्छा रखने वाले सभी लोगों को शामिल करने की चाह उत्पन्न करेगी।

संत पापा ने कलीसिया से घेरा रहित होने की आशा की है तथा कहा है कि वह एक ऐसी कलीसिया न हो जो घायल को दूर से देखकर पार हो जाए किन्तु दयालु कलीसिया बने जो ईश्वर के प्रेम की प्रकाशना, उसकी करुणा में प्रकट होती है, उसकी घोषणा का केंद्र बने। यही करुणा हमें प्रेम में नया बना देता है।

संत पापा ने सभी कलीसियाओं से आग्रह किया है कि परिवार के आगामी विश्व सभा की तैयारी में इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने इसके लिए प्रेरितिक प्रबोधन आमोरिस लेतित्सिया का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने की सलाह दी है।

उन्होंने पत्र में डब्लिन के महाधर्माध्यक्ष एवं देश के सभी लोगों को शुभकामनाएं अर्पित की हैं ताकि वे इस महत्वपूर्ण अवसर पर मेजबानी में उदारता पूर्वक अपना योगदान दे सकें।

अंततः उन्होंने नाजरेथ के पवित्र परिवार से प्रार्थना की है कि वे उनके कार्यों को मार्गदर्शन, सहायता एवं आशीष प्रदान करें और साथ ही साथ उन सभी परिवारों को भी आशीष दें जो उस सभा में भाग लेने वाले हैं।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने सोमास्कन पुरोहितों से मुलाकात की

In Church on March 30, 2017 at 2:43 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2107 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 30 मार्च को वाटिकन स्थित सामान्य लोकसभा परिषद भवन में सोमास्कन पुरोहितों की सर्वोच्च आम सभा में भाग ले रहे 50 सदस्यों से मुलाकात की।

उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा कि वे सुसमाचार से प्रेरित होकर संस्थापक की विशिष्टता को कलीसिया एवं समाज में आज की परिस्थिति के अनुसार लागू करने के लिए बुलाये जा रहे हैं।

उन्होंने सोमास्कन धर्मसमाज के संस्थापक जिरोलामो एमिलियानी के विचारों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वे हमें इसलिए प्रभावित करते हैं क्योंकि उन्होंने उदार कार्यों द्वारा कलीसिया में सुधार को समर्थन दिया। उनकी पहली योजना थी कि सुसमाचार के प्रति निष्ठा में अपने आपका सुधार करना, फिर ख्रीस्तीय समुदाय का एवं समाज का, जिससे निम्न समझे जाने वाले तथा हाशिये पर जीवन यापन करने वाले लोगों की अनदेखी न हो बल्कि उन्हें बचाया जाए तथा उनके समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके।

संत पापा ने सभी सदस्यों से कहा, ″मैं प्रोत्साहन देता हूँ कि आप मूल प्रेरणा के प्रति विश्वस्त बने रहें तथा घायल मानवता एवं उपेक्षित लोगों की सेवा हेतु सुसमाचार के उन मनोभावों को धारण करें जो मानवता को ख्रीस्त की नज़रों से देखने के द्वारा उत्पन्न होता है।″ उन्होंने कहा कि सबसे बढ़कर उनकी बुलाहट की विशेषता है अंतिम समझे जाने वाले लोगों की सेवा करना। विशेषकर, अनाथ तथा परित्यक्त युवाओं की। इसके लिए उन्होंने संस्थापक की शिक्षा प्रणाली को अपनाने की सलाह दी जो व्यक्ति पर केंद्रित है, उसकी प्रतिष्ठा पर तथा उसके बौद्धिक और शारीरिक कौशल के विकास पर।

संत पापा ने सोमास्कन पुरोहितों की प्रेरिताई को सुसमाचार के अनुसार और लोगों की परिस्थितियों के अनुरूप करने के लिए उनके भौगोलिक और उनके अस्तित्व की विभिन्न प्रकार की सीमाओं पर ध्यान देने की बात कही। इसके लिए उन्होंने परिस्थिति के अनुसार पुरानी विचारधारा एवं संरचनाओं को नवीकृत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संरचनाएँ बहुधा गलत सुरक्षा प्रदान करती हैं तथा कारिज्म एवं ईश्वर के राज्य विस्तार में बाधक बनते है।

संत पापा ने बच्चों एवं युवाओं की प्रेरिताई हेतु सोमास्की के लोकधर्मी सदस्यों को अधिक से अधिक संलग्न करने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार, बाल-सुरक्षा, युवाओं के अधिकार, बाल श्रम से सुरक्षा, शोषण एवं तस्करी की समस्याओं का उन्मूलन जिसे सुसमाचार की मुक्तिदायी शक्ति द्वारा सामना किया जाना चाहिए, साथ ही साथ, आवश्यक क्षमताओं एवं उपकरणों का भी प्रयोग किया जाना चाहिए।

संत जिरोलामो की दूसरी विशेषता का स्मरण दिलाते हुए संत पापा ने कहा कि वे लूथर के समकालीन थे जिन्होंने चैरिटी कार्यों, धर्माध्यक्षों के प्रति आज्ञाकारिता, क्रूसित येसु पर चिंतन एवं धर्मशिक्षा के माध्यम से उनकी करुणा का प्रचार करते हुए, संस्कारों के प्रति निष्ठावान रहकर, पवित्र संस्कार की आराधना एवं माता मरियम के प्रति प्रेम द्वारा कलीसिया के सुधार को लगातार प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने शुभकामनाएँ दी कि वे उनके उदाहरणों पर चलकर एवं मध्यस्थ प्रार्थना द्वारा ख्रीस्त में मुक्ति के ठोस रूप को धारण करें तथा विभिन्न लोगों एवं राष्ट्रों के बीच जायेँ।


(Usha Tirkey)

‘अब्राहम हम सभी के पिता’- ईराकी अंतरधार्मिक समिति से संत पापा

In Church on March 30, 2017 at 2:40 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 29 मार्च को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में, वार्ता हेतु स्थायी समिति की बैठक में भाग ले रहे, अंतरधार्मिक वार्ता के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के सदस्यों एवं ईराकी पर्यवेक्षी बोर्ड के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

उन्होंने कहा, ″आपकी यात्रा एक सच्चे भाईचारे का उत्कर्ष है अतः यह हृदय, परिवार, देश और विश्व में शांति की ओर सभी के लिए एक रास्ता है।″

ईराकी पर्यवेक्षी बोर्ड का गठन शिया, सुन्नी, ख्रीस्तीय, यजीदास, सबाइंस/मंडेयंस तथा अंतरधार्मिक वार्ता की स्थायी समिति के सदस्यों से हुआ है।

संत पापा ने सदस्यों के साथ एक व्यक्तिगत मुलाकात में कहा कि वार्ता एवं एकात्मता की अभिव्यक्ति अत्यन्त स्वीकार्य है। ″हम सभी भाई-भाई हैं और जहाँ भाईचारा है वहाँ शांति हैं। हम सभी ईश्वर की संतान हैं।″

संत पापा ने अंतरधार्मिक संवाद हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल जाँ लुईस तौरान के शब्दों को दुहराते हुए कहा, ″पृथ्वी पर हम सभी के एक ही पिता हैं अब्राहम और अब्राहम की ओर जाने में हम सभी आज तक एक साथ हैं।″

उन्होंने कहा, ″हम सभी भाई हैं और भाइयों के रूप में हम अलग होते हुए भी एक हैं जैसे कि हाथ की अंगुलियाँ। एक हाथ में पाँच अंगुलियाँ होते हैं वे सभी अंगुलियाँ तो हैं किन्तु अलग-अलग। मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने हमें यहाँ एक साथ मिलने का अवसर प्रदान किया है।″

संत पापा ने अपने वक्तव्य के अंत में सभी को यह कहते हुए आशीर्वाद दिया, ″मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह आप लोगों को आशीष प्रदान करे और आप सभी से भी आग्रह करता हूँ कि आप मेरे लिए प्रार्थना करें।


(Usha Tirkey)

चालीसा जुलूस में सैकड़ों गैरकाथलिक युवा होंगे शामिल

In Church on March 30, 2017 at 2:38 pm

 

काठमाण्डु, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2017 (एशियान्यूज़): काठमाण्डु के ललितपुर जिले में 1अप्रील को चालीसे काल के अवसर पर आयोजित एक जुलूस में सैकड़ों गैर-काथलिक युवा भाग लेंगे। जुलूस की शुरूआत 8 बजे प्रातः लामिदाननंदा से होगी तथा इसका समापन लाकुर भानजयांग में ख्रीस्तयाग से किया जाएगा।

30 सालों से नेपाल में सेवारत जेस्विट फादर बिल रोबिनसन ने एशियान्यूज़ से कहा, ″कई लोगों ने गैरकाथलिक के रूप में अपना नाम दर्ज किया है किन्तु जब हम उनके घरों का दौरा करते हैं तो पाते हैं कि उन्होंने अपने घरों में येसु एवं माता मरियम की तस्वीर को सजाया है।″ उन्होंने कहा कि वे बाईबिल पढ़ते हैं और अपने गले में रोजरी पहनते हैं। यद्यपि वे काथलिक का जीवन जीते हैं किन्तु अपने को काथलिक घोषित नहीं करते, शायद हिन्दूधर्म के भय से जिसको देश के धर्मनिरपेक्ष घोषित किये जाने के पूर्व वे मानते थे।

दार्जलिंग के धर्माध्यक्ष स्तेफन लेपचा ने कहा, ″नेपाल एक सुन्दर देश है तथा कई पुरोहितों एवं धर्मबहनों को तैयार करती है जो पूरे विश्व में सुसमाचार का प्रचार करते हैं। यही कारण है कि नेपाल के काथलिक न केवल ईश्वर पर अपने विश्वास को नवीकृत करते, वरन् उन सभी लोगों को अवसर प्रदान करते हैं जो काथलिक बनना चाहते हैं।″

22 वर्षीय प्रकाश ने स्वर्गोदग्रहण महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग के बाद पत्रकारों को बतलाया कि उन्होंने अपने मित्रों को चालीसा जुलूस की जानकारी दी और वे इसमें भाग लेने हेतु तैयार हैं। उन्होंने कहा, ″ख्रीस्तयाग के कुछ अवसरों पर भाग लेने के बाद मुझे लगा कि येसु ही मेरे सच्चे रास्ते हैं। इस विचार को मैंने अपने मित्रों को बतलाया।″

कॉलेज की छात्रा 25 वर्षीय कल्पना भंदारी ने कहा, ″मैं काथलिक नहीं हूँ किन्तु मैं काथलिक मूल्यों को मानती हूँ तथा मुझे इससे सम्मान, सौहार्द और शांति प्राप्त होती है अतः मैं सोचती हूँ कि चालीसा जुलूस का एक खास महत्व है क्योंकि इसके साथ आध्यात्मिक आदान-प्रदान जुड़ा है।″

उनके लिए, पुरोहित का निर्देशन भी जीवन को अर्थ और मूल्य प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मैं कई सालों से इस जुलूस में भाग ले रही हूँ और इस वर्ष कुछ नये मित्र भी इसमें शामिल होंगे।


(Usha Tirkey)

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