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चालीसा येसु के पास्का में प्रवेश की तैयारी

In Church on March 1, 2017 at 4:14 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 01 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्राँगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

आज राख बुध के साथ हम कलीसिया की पूजन विधि चालीसा काल में प्रवेश करते हैं। अतः आज की धर्मशिक्षा माला के दौरान चालीसा की यात्रा को हम आशा की यात्रा के रुप में देखने का प्रयास करेंगे।

वास्तव में यह माता कलीसिया के द्वारा निर्धारित वह अवधि है जो हमें येसु के पास्का रहस्य में सहभागी होने हेतु तैयार करता है। पुनर्जीवित येसु हमें अंधकार से बाहर निकलने का निमंत्रण देते जहाँ हम अपने को उनकी ज्योति के मार्ग में व्यवस्थित करते हैं। चालीसा काल हमारे लिए उपवास और परहेज का समय है जो अपने में एक अंत नहीं वरन यह हमें अपने बपतिस्मा के द्वारा येसु में पिता के प्रेम से पुनः संयुक्त करता है। यही कारण है कि चालीसा अपनी प्रकृति में आशा का एक समय है।

इसे और अच्छी तरह से समझने हेतु हमें इस्रराएलियों के जीवन की उस मूल-भूत घटना को देखने की जरूरत है जिसका जिक्र धर्मग्रंथ बाईबल का निर्गमन ग्रंथ हमारे लिए करता है। इसकी शुरूआत मिस्र देश की गुलामी, अत्याचार और बलात कार्य से होती है। इस परिस्थिति में ईश्वर अपने लोगों और अपनी प्रतिज्ञा को नहीं भूलते हैं। वे नबी मूसा का चुनाव करते और अपने लोगों को मिस्र देश की गुलामी से मुक्त करने और उन्हें स्वतंत्र भूमि में ले चलने को भेजते हैं। दासता से स्वतंत्रता की इस यात्रा में याहवे इस्रराएलियों को अपने संहिता प्रदान करते हुए अपने को एकमात्र ईश्वर के रूप में और एक दूसरे को अपने भाई-बहनों के रुप में प्रेम करने की शिक्षा देते हैं। धर्मग्रंथ हमें निर्गमन ग्रंथ की थकान और कठिनाई की चर्चा करता जो संकेतित रुप में चालीस वर्षों, एक पीढ़ी के जीवन काल के रुप में व्यक्त किया गया है। चुनी हुई प्रजा अपने में विलाप करती और मिस्र देश लौटने की चाह रखती है। संत पापा ने कहा कि हम भी अपने जीवन में परीक्षाओं में पड़ जाते और पुराने जीवन में वापस लौटने की सोचते हैं। लेकिन याहवे अपने लोगों के प्रति निष्ठावान बने रहते और मूसा की अगवाई में उन्हें प्रतिज्ञात देश ले चलते हैं। इस तरह यात्रा आशा में पूरी की जाती है जहाँ चुनी हुई प्रजा गुलामी से प्रतिज्ञात देश में प्रवेश करती है। यह चालीस दिन हमारे जीवन में पापों की दासता, स्वतंत्रता और पुनर्जीवित येसु से मिलन की बात कहता है। हमारे हर कदम, हर प्रयास, परीक्षा और असफलता ईश्वर की योजना में अर्थपूर्ण होते हैं जो हमें मृत्यु से बचाते हुए जीवन की ओर, गम के बदले खुशी में ले चलना चाहते हैं।

येसु का पास्का उनका निर्गमन है जिसके द्वारा वे हमारे लिए अनंत जीवन और खुशी का द्वार खो दिया है। इस मार्ग को खोलने हेतु येसु को अपनी महिमा की तितांजलि देनी पड़ी और उन्होंने अपने को नम्र तथा क्रूस मरण तक आज्ञाकारी बना लिया। हमें अनंत जीवन प्रदान करने हेतु उन्हें अपने खून के आखिरी बूंद को भी बहना पड़ा। हम उनका धन्यवाद करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें पाप की गुलामी से बचा लिया है। संत पापा ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने हमारे लिए सब कुछ कर दिया और हमें स्वर्ग जाने हेतु कुछ करने की जरूरत नहीं है, ऐसा नहीं है। हमारी मुक्ति हमारे लिए उनका उपहार है जो एक प्रेम कहानी है जो हमारी ओर से प्रतिउत्तर “हाँ” की माँग करता है जिसके द्वारा हम माता मरियम और उनके बाद सभी संतों की भांति उस प्रेम के अंग बनते हैं।

चालीसा हमारे जीवन का आयाम है जहाँ हम येसु के निर्गमन में उनके साथ चलने हेतु बुलाये जाते हैं। उन्होंने हमारे लिए जीवन की सारी परीक्षाओं पर विजयी पाई अतः हमें अपने जीवन में परीक्षाओं पर विजय प्राप्त करनी है। उन्होंने हमारे लिए जीवन जल और पवित्र आत्मा प्रदान किया है और वे हम से चाहते हैं कि हम संस्कारों, प्रार्थना और पूजन विधि के द्वारा उस जीवन जल और पवित्र आत्मा से सदैव संयुक्त रहें। वे जीवन की ज्योति हैं जो अंधकार को हमसे दूर करते हैं। वे हमें अपनी ज्योति की छोटी चिंनगारी बनने को कहते हैं जिसे हमने अपने बप्तिस्मा संस्कार में पाया है।

संत पापा ने कहा कि इस संदर्भ में चालीसा काल “हमारे परिवर्तन की सांस्कारिक निशानी” है, जो चालीसा काल का अनुसरण करता वह सदैव अपने जीवन में परिवर्तन के मार्ग पर चलता है जो हमें पापों की गुलामी से मुक्ति दिलाती है। यह मार्ग हमारे लिए कठिन लगता है क्योंकि यह प्रेम का मार्ग है यद्यपि यह मार्ग आशा से भरा है। चालीसा का निर्गमन आशा से परिपूर्ण है जहाँ हमें जीवन के मरुस्थल से पाना होना है। माता मरिया जो अपने बेटे येसु ख्रीस्त के दुःखभोग और मृत्यु की अंधकार स्थिति में पुनरुत्थान और ईश्वर की विजय पर विश्वास और आशा में बनी रही हमें भी चालीसा काल में प्रवेश करने हेतु मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और चालीसा काल की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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बेघर लोगों द्वारा संचालित पत्रिका से सन्त पापा फ्राँसिस का बातचीत

In Church on March 1, 2017 at 4:13 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 मार्च 2017 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने बेघर लोगों द्वारा संचालित इताली पत्रिका “स्कार्प दे टेनिस” अर्थात् टेनिस शूज़ को दी एक भेंटवार्ता में बेघर, आप्रवासी एवं शरणार्थी लोगों की व्यथा पर अपने विचार प्रकट किये हैं। इस भेंटवार्ता की प्रकाशना 28 फरवरी को वाटिकन द्वारा की गई।

इताली पत्रिका “स्कार्प दे टेनिस” बेघर लोगों एवं स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जाती है जिसका लक्ष्य हर प्रकार के सामाजिक बहिष्कार का शिकार बने लोगों की व्यथाओं पर चेतना जाग्रत करना है।

भेंटवार्ता में सन्त पापा फ्राँसिस से शरणार्थियों के हित में की गई उनकी पहलों पर प्रश्न किया गया था जिसके उत्तर में उन्होंने बताया कि वाटिकन में शरणार्थियों को शरण प्रदान करने के बाद रोम की समस्त पल्लियों ने शरणार्थियों को आवास प्रदान करने का कार्य आरम्भ कर दिया है। उन्होंने कहा, “वाटिकन में दो पल्लियाँ हैं और ये दोनों पल्लियाँ सिरियाई शरणार्थियों को शरण प्रदान कर रही हैं। इसी प्रकार रोम की कई पल्लियों ने कठिनाइयों में पड़े इन लोगों के लिये अपने द्वार खोल दिये हैं तथा जिन पल्लियों में पुरोहित निवासों की व्यवस्था नहीं है उन पल्लियों ने एक पूरे वर्ष के लिये शरणार्थियों के आवास हेतु किराये का प्रबन्ध कर दिया है।”

भेंटवार्ता के दौरान सन्त पापा ने कहा कि हम सभी को अन्यों के कष्टों को महसूस करना चाहिये, उन्होंने कहा, “अन्यों के जूतों से चलना यानि अन्यों के दुखों को महसूस करना स्वतः के अहंकार को दूर करना है।” उन्होंने कहा, “अन्यों के जूतों में हम समझदारी की महान क्षमता को सीख पाते हैं तथा अन्यों की कठिन परिस्थितियों से वाकिफ़ होते हैं।”

सन्त पापा ने कहा, “शरणार्थियों एवं ज़रूरतमन्दों की मदद के लिये केवल शब्द काफ़ी नहीं हैं ज़रूरत है, अन्यों के जूतों में पैर रखकर चलने की। कितनी बार मैं किसी ऐसे लोकधर्मी, पुरोहित, धर्मबहन अथना किसी ऐसे धर्माध्यक्ष से मिला हूँ जिसने मुझसे कहा है कि उसने मेरी बातों को सुना किन्तु उन्हें समझा नहीं।”

शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की संख्या को सीमित करने के बारे में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “यह नहीं भुलाया जाना चाहिये कि जो हमारे द्वार खटखटाते हैं इनमें से अधिकांश लोग युद्ध एवं भुखमरी से पीड़ित होते हैं। उन्होंने कहा, “विश्व में व्याप्त युद्धों एवं निर्धनता के लिये हम सब किसी न किसी प्रकार ज़िम्मेदार हैं इसलिये इन समस्याओं का समाधान ढूँढ़ना भी हमारा दायित्व है।”


(Juliet Genevive Christopher)

“शाहबाज़ भट्टी, न्याय की आवाज़” शीर्षक से रचित पुस्तक प्रकाशित

In Church on March 1, 2017 at 3:59 pm

मिलानो, बुधवार, 1 मार्च 2017 (सेदोक): इटली के मिलान शहर स्थित सन्त पौल्स प्रेस ने 28 फरवरी को “शाहबाज़ भट्टी, न्याय की आवाज़” शीर्षक से रचित एक पुस्तक प्रकाशित की है।

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मंत्री, ख्रीस्तीय धर्मानुयायी, शाहबाज़ भट्टी की हत्या 02 मार्च सन् 2011 को एक इस्लामी चरमपंथी द्वारा उनके निवास के बाहर कर दी गई थी। शाहबाज़ भट्टी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा, विशेष रूप से, पाकिस्तान के ईश निन्दा कानून के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलन्द करते रहे थे।

ख्रीस्तीय मंत्री शाहबाज़ भट्टी की शहादत की छठवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में इटली के सन्त पौल्स प्रेस ने शाहबाज़ भट्टी के भाई, चिकित्सक एवं राजनीतिज्ञ, डॉ. पौल जैकब भट्टी द्वारा लिखे शहीद मंत्री के जीवन चरित को प्रकाशित किया है।

पुस्तक में लेखक ने शाहबाज़ भट्टी के बाल्याकाल एवं युवाकाल की कुछ रोचक घटनाओं का वर्णन किया है तथा साथ ही पाकिस्तान के राजनीतिज्ञ रूप में उनकी भूमिका को प्रकाशित किया है। उन्होंने इसमें पाकिस्तान के लोगों की विविध संस्कृतियों एवं धर्मों पर प्रकाश डालकर विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच सम्वाद को प्रोत्साहित करने का सराहनीय प्रयास किया है।

इस पुस्तक की प्रस्तावना इटली के राष्ट्रीय टेलेविज़न चैनल “राय” की अध्यक्षा श्रीमती मोनिका माज्जोनी द्वारा लिखी गई है जबकि इसका प्राक्कथन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने लिखा है।


(Juliet Genevive Christopher)

चालीसा का समय एक नई शुरुआत है, संत पापा

In Church on March 1, 2017 at 3:54 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 मार्च 2017 (सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने चालीसा काल के शुरु में ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी विश्वासियों को अपने आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने संदेश में लिखा, ″चालीसा का समय एक नई शुरुआत है एक मार्ग जो निश्चित लक्ष्य येसु के पुनरुथान की ओर ले जाती है। येसु ने मौत पर विजय पायी है।″

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस येसु मसीह के दुःखभोग के चालीसाकाल की शुरुआत आज संध्या साढ़े चार बजे रोम स्थित अवेंतीनो के संत अनसेलमो गिरजाघर से कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षों, धर्माध्यक्षों, संत अनसेल्मो के बेनेदिक्त मठवासियों, संत सबिना के पुरोहितों और कुछ लोकधर्मियों के साथ प्रायश्चित जुलूस करते हुए संत सबिना महागिरजाघर प्रस्थान करेंगे। जुलूस के अंत में शाम पाँच बजे संत पापा फ्राँसिस समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान राख की आशीष और विश्वासियों पर राख मलन की धर्मविधि का अनुष्ठान करेंगे।

 


(Margaret Sumita Minj)

ब्राजील में भाईचारे अभियान हेतु संत पापा का संदेश

In Church on March 1, 2017 at 3:52 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 मार्च 2017 (सेदोक) :  ब्राजील में आज राख बुधवार के दिन दक्षिण अमरीकी देश (सीएनबीबी) के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने ″ परंपरागत भाईचारे का अभियान 2017″ का आयोजन किया है। आस 54 वें सममेलन की विषय-वस्तु है,”भाईचारा : ब्राजील के पारिस्थितिक तंत्र और जीवन की रक्षा”, जो बाइबिल के उत्पत्ति ग्रंथ के अध्याय 2 पद संख्या 15 के संदर्भ से लिया गया है ″प्रभु-ईश्वर ने मनुष्य को अदन की वाटिका में रख दिया जिससे वह उसकी खेती बारी और देख-रेख करता रहे।″

इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने ब्राजील के धर्माध्यक्षों को अपना संदेश भेजकर उन्हें चालीसा काल की आशामय और फलदायी यात्रा की शुभकामनाएँ दी तथा ब्राजील के लोगों को अपारसिदा की माता मरियम के संरक्षण में रखते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Margaret Sumita Minj)

भारत के आदिवासी धर्माध्यक्षों द्वारा अपने लोगों को एकजुट करने का प्रयास

In Church on March 1, 2017 at 3:50 pm

राँची, बुधवार, 1 मार्च 2017 ( उकान): आदिवासी काथलिक धर्माध्यक्षों ने धर्म के आधार पर आदिवासियों को विभाजित कर राजनीति करने विरोध में सभी आदिवासियों को एकजुट करने का संकल्प किया है।

मध्य भारत में आदिवासी बहुल झारखंड राज्य की राजधानी रांची में 23 व 24 फरवरी को 11 आदिवासी धर्माध्यक्षों की बैठक हुई। भारत के पहले आदिवासी कार्डिनल महाधर्माध्यक्ष तेलेस्फोर पी टोप्पो ने कहा, “हमारे लोग बहुत ही मासूम और ईमानदार हैं। सांप्रदायिक ताकतें उन्हें शोषण करना जानती हैं।”

आदिवासियों के लिए बने भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय कार्यालय के सचिव फादर स्तानिस्लास तिर्की ने कहा कि भारत के 171 काथलिक धर्मप्रांतों में 26 आदिवासी बहुल धर्मप्रांत है और ये भारत के मध्य और उत्तरी-पूर्वी राज्यों में स्थित हैं।

मध्य भारत में आदिवासी लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने राजनीतिक लाभ के लिए आदिवासियों को हिंदू और गैर हिंदू में विभाजित कर रहे हैं। कार्डिनल टोप्पो ने धर्माध्यक्षों को आगाह किया कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो “चीजें हाथ से बाहर हो सकती हैं।”

कार्डिनल टोप्पो ने कहा कि हिंदू समर्थक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जो मध्य भारत के राज्यों की सरकार है, संकट पैदा करने के लिए आदिवासी ख्रीस्तीयों को दोषी मानती है। जैसे झारखंड राज्य ने नवंबर 2016 में दो कानून में संशोधन किया कि आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए बने थे। इस परिवर्तन द्वारा सरकार को छूट मिल गई कि वो आदिवासियों की जमीन को औद्योगिक और कल्याण परियोजनाओ के लिए प्रयोग में ला सकते हैं। और इस पर बड़े पैमाने में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। और झारखंड के मुख्यमंत्री रधुवर दास ने विरोध प्रदर्शनों को भड़काने के लिए ख्रीस्तीयों को दोषी ठहराया।

दुर्भाग्य से, भाजपा को गैर ख्रीस्तीय आदिवासी लोगों का बहुमत समर्थन प्राप्त है। यह दुःख की बात है कि उन्हें झूठे वादे देकर फंसाया गया है और स्थिति वहुत ही गंभीर हो गई है।

सिमडेगा के धर्माध्यक्ष विनसेंट बारवा आदिवासियों के लिए बने भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय कार्यालय के अध्यक्ष ने कहा कि सभी आदिवासी राज्यों में हमारे लोग पलायन और विस्थापन का सामना कर रहे हैं।

धर्माध्यक्षों ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक धर्मप्रांत में एक पुरोहित और एक लोकधर्मी की नियुक्ति की जाए जो जागरुकता दल से जुड़ कर पूरे समय आदिवासी मुद्दों पर सांख्यिकी और डेटा इकट्ठा करने और स्थानीय लोगों के साथ बातचीत और नेटवर्क के लिए काम करेंगे।

खुँटी के धर्माध्यक्ष ने कहा कि आदिवासियों को चुनाव में जीतने के लिए सभी ख्रीस्तीयों और गैर-ख्रीस्तीयों को एक जुट हो जाना है।” यदि हम सभी ईसाई संप्रदायों के बीच एक पुल का निर्माण कर सकते हैं तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता है। हम अपने लोगों की भलाई के लिए एकजुट होना चाहिए वरना हमारी स्थिति नहीं बदलेगी।


(Margaret Sumita Minj)

‘सच्चे ख्रीस्तीयों के चेहरे हंसमुख और आंखों में खुशियाँ झलकती हैं’, संत पापा

In Church on March 1, 2017 at 3:48 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 मार्च 2017 (सेदोक) : ″हम एक ही समय में ईश्वर और रुपये की सेवा नहीं कर सकते हैं। आइये हम ईश्वर और रुपये की महत्ता पर विचार करें।″ उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 28 फरवरी को अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था में प्रातःकलीन ख्रीस्तयाग के दौरान अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने संत मारकुस के सुसमाचार से धनी युवक के दृष्टांत पर चिंतन करते हुए प्रवचन में कहा कि धनी युवक येसु का अनुसरण करना चाहता था पर उसकी अपार संपति ने उसे अपनी ओर खींच लिया। येसु ने अपने चेलों से कहा ″सुई के नोक से होकर ऊँट का निकलना अधिक आसान है, किन्तु धनी का ईश्वर के राज्य में प्रवेश करना कठिन है।″ येसु की बातें चेलों को चिंता में डाल देती है। पेत्रुस ने येसु से कहा, देखिए, हम लोग अपना सबकुछ छोड़कर आपके अनुयायी बन गये हैं, हमारा क्या होगा?

संत पापा ने सुसमाचार के पदों को दुहराते हुए कहा कि धनी व्यक्ति तो भारी मन से चला गया पर येसु ने अपने चेलों से कहा, ″ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिए घर, भाई-बहनों, माता-पिता, बाल-बच्चों अथवा खेतों को छोड़ दिया हो और जो अब, इस लोक में सौ-गुणा न पाये – घर,  भाई-बहनें,  माताएँ,  बाल-बच्चे, खेत, साथ ही साथ आत्याचार और परलोक में अनंत जीवन।″

संत पापा ने कहा कि ईश्वर सबकुछ से कम देने के काबिल नहीं है। जब कभी वह देता हैं तो  अपने आपको पूरी तरह से दे देता है। वर्तमान समय में हमें सौ गुणा ज्यादा घर, भाई बहन और साथ में अत्याचार भी मिलता है। संत पापा ने कहा कि हमें अलग तरीके के सोच और अलग तरीके के व्यवहार को अपनाना है। येसु ने अपने आप को पूरी तरह से दे पाया क्योंकि क्रूस पर अपने आप को चढ़ा देना ही ईश्वर की परिपूर्णता थी।

ईश्वर की परिपूर्णता अपने आप को खाली करने में थी। संत पापा ने कहा कि हम ख्रीस्तीयों को भी यही मार्ग अपनाना है परिपूर्णता को पाने के लिए अपने आप को खाली करना है और यह आसान नहीं है।

संत पापा ने पहले पाठ पर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा, ” उदारता से प्रभु की स्तूति करते रहो। प्रथम फल के चढ़ावे में कमी मत करो। प्रसन्नमुख होकर दान चढाया करो और खुशी से दशमांश दो। जिसप्रकार सर्वोच ईश्वर ने तुम्हें दिया है उसी प्रकार तुम भी उसे सामर्थ्य के अनुसार उदारतापूर्वक दो।″ (प्रज्ञा 35,10-12)

संत पापा ने कहा कि हंसमुख चेहरे और आंखों में खुशी का झलकना यह दिखाता है कि हम ईश्वर के बताये मार्ग पर चल रहे हैं। धनी युवक के चेहरे में मायूसी थी क्योंकि वह ईश्वर की पूर्णता को स्वीकार न कर सका। संत पेत्रुस और अन्य संतों ने ईश्वर की परिपूर्णता को स्वीकार किया अतः हर प्रकार की कठिनाईयों और मुसीबतों में भी उनके चेहरे में खुशी और उनके हृदय में आनंद था।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने चीले के संत अलबेरतो के समान प्रभु से कठिनाईयों और मुसीबतों में भी खुश रहने की कृपा मांगने की प्रेरणा दी।


(Margaret Sumita Minj)

कार्डिनल ग्रेसियस प्रतिष्ठित अपोस्तोलिक अदालत के लिए नियुक्त

In Church on March 1, 2017 at 3:46 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 मार्च 2017 (उकान) :  भारतीय काथलिक धर्मध्यक्षीय सम्मेलन (सीसीबीआइ) के अध्यक्ष दूसरी बार के लिए नियुक्त होने के 15 दिन बाद मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस को अपोस्तोलिक अदालत (रोमन रोटा) के वकील का खिताब 15 फरवरी को दिया गया।

अपोस्तोलिक अदालत रोम में स्थापित सरकारी तंत्र का हिस्सा है जिसके द्वारा संत पापा काथलिक कलीसिया के परमाधिकारी के रुप में न्यायिक कार्यों का निर्वहन करते हैं।

मुम्बई महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर निगेल बार्रेट ने कहा, ″ यह अदालतों में से एक है जिसमें संत पापा कलीसियाई मामलों के न्यायिक प्रशासन में अपनी संप्रभु शक्ति का प्रयोग करते हैं।″

इस अदालत में 10 न्यायाधीश बराबर दर्जा के होते हैं और संत पापा खुद  एक न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं


(Margaret Sumita Minj)

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