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संत पापा, सच्चा उपवास लोगों की सेवा करना है

In Church on March 3, 2017 at 3:05 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रिवार, 03 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने संत मार्था के अपने निवास में शुक्रवार 03 मार्च को प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान कहा कि हमारा सच्चा उपवास अपने पडोसियों की सेवा करना है।

उन्होंने दैनिक पाठों पर चिंतन करते हुए कहा, “चालीसा काल हमें तपस्या के द्वारा येसु के निकट आने का आहृवान करता है। येसु पश्चातापी हृदय से खुश होते हैं जैसा कि स्तोत्र कहता है, “एक पापी हृदय अपने पापों का अनुभव करते हुए अपने को पापी स्वीकार करता है।” इसायस नबी के ग्रंथ से लिये गये प्रथम पाठ में ईश्वर धर्म का दिखावा करने वालों को फटकारते हैं जो उपवास करते और अपने व्यापार के लेन-देने में अपने क़र्जदारों को प्रताड़ित करते हैं। वे उनसे साथ न्याय नहीं करते हैं। इस तरह के उपवास को येसु आडम्बर की संज्ञा देते हैं क्योंकि यह उनके कार्यों का दिखावा मात्र है। ईश्वर हम सभों को सच्चा उपवास करने हेतु निमंत्रण देते हैं।

संत पापा ने येसु समाजियों के भूतपूर्व परमाधिकारी फादर पेद्रो अरूपे के जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जापान में एक धनी व्यापारी उन्हें प्रेरिताई कार्य हेतु दान दिया और यह छायाकार द्वार तस्वीर में उतारी गई लेकिन उस बंद लिफाफे में मात्रा दस डॉलर थे।

संत पापा ने कहा कि यदि हम लोगों को उनके अधिकार का उचित मूल्य नहीं देते तो यह उस दानी व्यक्ति के कार्य की तरह होता है। हम अपने जीवन में उपवास, प्रार्थना और दान-दक्षिणा करते लेकिन अपने पडोसियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करते तो यह हमारा ढ़ोगीपन है। येसु कहते हैं जब हम प्रार्थना करें तो एकांत में गुप्त रुप से करें, दान दें तो इसके ढिंढोरा न पिटवायें, उपवास करें तो अपना मुख मलिन न करें। संत पापा ने कहा, “जब आप कोई अच्छा कार्य करते हैं तो इसका श्रेय अपने को न दें, इसका श्रेय केवल जीवनदाता पिता को जाता है।”

ईश्वर हमें उपवास के बदले अन्याय, कर्ज के लदे और लोगों में किये जा रहे अत्याचार के भार को तोड़ने का निमंत्रण देते हैं। वे हमें अपनी रोटी भूखों, अपने घरों को आश्रयविहीनों और परित्यक्त नंगे पड़ोसियों की सुधि लेने को कहते हैं। जब हम प्रार्थना करते, दान देते और उपवास करते तो येसु के इन वचनों पर चिंतन करें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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संत पापा का रोम धर्माप्रान्त के पुरोहितों को संबोधन

In Church on March 3, 2017 at 3:03 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 03 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने गुरुवार को संत जोन लातेरन के महागिरजाघर में रोम धर्माप्रान्त के पुरोहितों को संबोधित करते हुए “विश्वास के विकास” पर अपना संदेश दिया।

उन्होंने पुरोहितों के जीवन में “विश्वास के विकास” की बात पर जोर देते हुए तीन विन्दुओं यादगारी, आशा और आत्म-निरीक्षण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारी यादें जैसे की धर्मशिक्षा हमें बतलाती है कलीसिया पर हमारे विश्वास की जड़ें हैं। आशा हमारे विश्वास को बनाये रखती और आत्म-निरीक्षण के द्वारा हम वर्तमान में अपने विश्वास को प्रेम पूर्ण कार्यों द्वारा व्यक्त करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि विश्वास का विकास, “व्यक्ति के जीवन निर्माण का मार्ग और विश्वास की परिपक्वता है।” विश्व प्रेरितिक पत्र “एवनजेलियुम गौदियुस” में निर्देशात्मक तथ्य को उद्धत करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे विश्वास में बढ़ोतरी जीवन जीने के क्रम में ईश्वर से मिलन द्वारा होती है। ईश्वर से हमारा मिलन हमारे व्यक्तिगत जीवन के मुक्ति इतिहास में एक कहानी स्वरूप यादगारी बनती जिसे हम सहेज कर रखते हैं।” उन्होंने बास्केटबॉल खेल का उदाहरण देते हुए कहा, “हमारे पैर जमीन पर टिके रहते, लेकिन हम येसु के क्रूस की धूरी पर परिक्रमा करते हैं।”

उन्होंने यादगारी के संबंध में कहा कि विश्वास अतीत की कृपाओं से पोषित होता है जिसे ईश्वर ने विधान की तरह हमारे पूर्वजों के साथ स्थापित किया है। हमारे ईश्वर परिवारों से जुड़े ईश्वर हैं जो हर नई चीजों के अनुसार हमारे साथ संबंध स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास “क्रांति के रुप में अपनी जड़ों” को पीछे की ओर भी मोड़ सकता है। “हमारी अतीत की यादें जितना स्पष्ट होती उतना ही स्पष्ट हमारा भविष्य होता है क्योंकि इसके द्वारा हम सही मार्ग को पहचानते है जो हमारे जीवन को अर्थ पूर्ण बनाता है।

उन्होंने आगे जोर देते हुए आशा के बारे में कहा,“आशा विश्वास को खोलती है जहाँ हम ईश्वर के आश्चर्य का अनुभव करते हैं।” आशा की आड़ में विश्वास विकासित और अपनी मजबूती को प्राप्त करता है। आशा हमारे जीवन को एक नया आयाम देती जिसके फलस्वरूप हम अपने अतीत से अच्छी चीजों को खोज निकालते हैं जो हमारे लिए एक निधि के समान होती जिसके द्वारा भविष्य में हमारी मुलाकात ईश्वर से होती है।

आत्मा-निरीक्षण के संदर्भ में संत पापा ने कहा, “यह हमारे विश्वास को मूर्त रूप देता है जिसके द्वारा हम जीवन में ठोस ईश्वरीय साक्ष्य देते हैं।” सही समय का प्रभेद यादों और आशा की आधार-शिला है हम इससे स्नेहमयी नज़रों से देखते जो हमारे जीवन को दिशा देती है। आत्म-निरीक्षण के बारे में उन्होंने दो बातों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें “एक कदम पीछे” जा कर अपने जीवन का अवलोकन करना है और दूसरा वर्तमान समय में “एक कदम आगे” बढ़ना जहाँ हम इस बात पर चिंतन करते हैं कि हमें अपने प्रेम को कैसे दूसरों की भलाई, अच्छाई और उचित रुप में जीने की जरूरत है।


(Dilip Sanjay Ekka)

वाटिकन आयोग विश्व में बच्चों की सुरक्षा को बढ़ावा देता रहेगा

In Church on March 3, 2017 at 3:02 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 3 मार्च 2017 (वीआर) याजकों यौवन द्वारा दुराचार की शिकार हुई मारिये कोलिन्स ने नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मपीठ आयोग की एक सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है।

बुधवार को वाटिकन रेडियो को दिये गये अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि संत पापा फ्राँसिस द्वारा सन् 2014 में गठित परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय द्वारा उन्हें उचित सहयोग नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि पद से इस्तीफा देने के बावजूद वह आयोग को अपनी सेवाएँ प्रदान करती रहेंगी।

आयोग के एक अन्य संस्थापक येसु समाजी पुरोहित हान्स जोलनेर ने गुरुवार को वाटिकन रेडियो से कहा कि उनकी इस्तीफा के बावजूद आयोग विश्वव्यापी कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा संस्कृति को प्रोत्साहित करना के इस विकट कार्य को जारी रखेगा।

रोम, ग्रेगोरियना विश्व विद्यालय के बाल सुरक्षा केन्द्र के अध्यक्ष फादर हान्स ने वाटिकन रेडियो को दिये गये अपने साक्षात्कार में अलेसान्द्रो गिसेत्ती को बतलाया कि वह मारिये के इस्तीफा का स्वागत करते हैं जो उनके संग पाँच वर्षों तक कार्य की। इस दौरान उन्होंने सन् 2012 में 120 धर्माध्यक्षों और विभिन्न धर्मसमाज के 35 परमाधिकारियों से समक्ष अपने अनुभवों को साक्षा किया। उन्होंने कहा कि उनकी बातों को नहीं सुना जाना और जरूरी कार्यों में आयोग का विलंब उनकी निराशा का कारण बना।

उन्होंने कहा कि उनका जाना जनता के बीच आयोग की प्रभावकारिता की बात को व्यक्त करेगा। उन्होंने इस बात पर भी बल देते हुए कहा कि यौवन शिकार लोगों की आवाज अब और भी प्रभावकारी ढंग से पेश की जायेगी।

इस गहन मुद्दे पर संत पापा के विचारों को रखते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने विचारधारा और व्यवहार में परिवर्तन लाने की जरूर है और यह समय लेगा। इस मुद्दे पर बहुत से परिवर्तन हुए हैं लेकिन अब भी हमें अपनी सोच और अपने हृदयों को परिवर्तन करना बाकी है।


(Dilip Sanjay Ekka)

चालीसा काल में कलीसिया द्वारा विधवाओं, अक्षम और गरीबों की सेवा

In Church on March 3, 2017 at 2:56 pm

पाकिस्तान, शुक्रवार, 3 अप्रैल 2017 (एशिया न्युज) चालीसा की पुण्य अवधि में पाकिस्तान की कलीसिया ने विधवाओं, गरीबों, बीमारों और अक्षम लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया है।

देश के धार्मिक और जन सामान्य स्थलों पर उग्रवादी हमलों, कठिनाइयों और तनाव की स्थिति के बावजूद ख्रीस्तीय ने गरीबों और कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया है। सिन्धु प्रान्त, हैदराबाद के धर्माध्यक्ष शुर्खदीन समसोन ने कहा,“हमने करीबन 70 विधवाओं और उनके बच्चों की सेवा हेतु राशि जमा की है। चालीसा हमें देश की विकट परिस्थिति के बावजूद ख्रीस्त के करुणामय चेहरे को अपने भले कामों के द्वारा लोगों के सामने लाने का एक अवसर प्रदान करता है।” इस संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान से ख्रीस्तीयों का आहृवान करते हुए कहा, “मैं पूरे पाकिस्तान के ख्रीस्तीयों से अनुरोध करता हूँ कि वे पाकिस्तान में शांति व्यवस्था हेतु प्रार्थना करते हुए शुक्रवार को उपवास करें।”

लाहौर महाधर्मप्रान्त के पवित्र हृदय महागिरजाघर ने चालीस के दौरान पुण्य कार्यों की कड़ी में एक बस का प्रबंध किया है जिसके द्वारा ख्रीस्तीय मनोरोगियों और शारीरिक रुप से कमजोर लोगों से मुलाकात करने जा सकते हैं, जबकि पाकिस्तान काथलिक दूरदर्शन ने पुरोहितों के चालीसा काल संदेश और चिंतन को प्रसारित करने का विचार किया है।

उधर देश के दक्षिण प्रान्त, कराँची महाधर्मप्रान्त के धर्म शिक्षा केन्द्र ने सप्ताह में दो दिन “अपने दिलों के द्वार खोलें” एक कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। संत पात्रिक महागिरजाघर के रेक्टर फादर मारियो रोड्रिगेव्ज ने कहा, “पल्ली वासियों ने प्रत्येक रविवार कुछ राशि जमा की है जिसके द्वारा वे शहर के ग़रीबों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि वे चालीसा काल में सभी लोगों को विभिन्न तरह के कार्यक्रमों में सम्मिलित करने की कोशिश कर रहे हैं। विद्यार्थी और पल्ली समुदाय के लोग बुजुर्ग और असहाय लोगों से मुलाकात करने जायेंगे जबकि छोटे बच्चों को पास्का की तैयारी और क्रूस रास्ता संचालन हेतु शामिल किया जा रहा है।


(Dilip Sanjay Ekka)

आकाल के कारण 31 हजार से अधिक दक्षिणी सूडानियों ने देश छोड़ा

In Church on March 3, 2017 at 2:54 pm

आफ्रीका सूडान, शुक्रवार, 3 मार्च 2017 (वी आर) संयुक्त राष्ट्र संघ प्रवासियों के प्रधान अधिकारी ने कहा कि अधिकारिक सूत्रों के अनुसार देश में आकाल और युद्ध की स्थिति के कारण करीबन 31 हजार दक्षिणी सूडानी शरणार्थी के रूप में देश छोड़ चुके हैं।

विदित हो कि 20 फरवरी को सूडान की सरकार और संयुक्त राष्ट्र के देशों ने दक्षिणी सूडान के कई प्रांतों को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार देश छोड़ने वालों में 80 प्रतिशत संख्या महिलाओं और बच्चों की है जिसमें बहुत से बच्चे अपने परिवारों से अलग हो गये हैं जिन्हें जीवन सुरक्षा सहायता की नितांत आवश्यकता है। इसमें से बहुत से लोगों को कई स्थानों पर हस्तांतरित कर दिया गया है जिससे उन्हें खाने-पीने और रहने की उचित सुविधा मुहैया कराई  जा सके।

सूडानी राष्ट्रीय उम्मा पार्टी के प्रतिनिधियों ने प्रवासियों हेतु खाना पकाने की बुनियादी सामग्री की व्यवस्था करते हुए सूडान प्रान्त के लोगों से निवेदन किया है कि वे प्रवासियों को अपने प्रान्त में पनाह लेने दें। सूडानी नागरिक समाज संगठनों ने सूडान के बहुचर्चित सेवा कार्य संगठनों से निवेदन किया है कि वे दक्षिणी सूडान को सहायता की वस्तुएं वितरित करें। यूएनएचसीआर के रिपोर्ट अनुसार दक्षिण सूडान में गृह युद्ध से उत्पन्न पानी और खाद्य सामग्री की कमी के कारण कुल 3 लाख 30 हजार लोग देश से पलायन कर चुके हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

उपवास का अर्थ

In Church on March 3, 2017 at 2:52 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 3 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने चालीसा की अवधि में उपवास और परहेज के संदर्भ में अपना ट्वीट संदेश प्रेषित करते हुए लिखा,

उपवास का अर्थ केवल खाद्य पदार्थों से परहेज करना नहीं बल्कि इसका अर्थ अपने भोजन को उनके साथ बाँटना है जो भूखे हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

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