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संत पापा का रोम धर्माप्रान्त के पुरोहितों को संबोधन

In Church on March 3, 2017 at 3:03 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 03 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने गुरुवार को संत जोन लातेरन के महागिरजाघर में रोम धर्माप्रान्त के पुरोहितों को संबोधित करते हुए “विश्वास के विकास” पर अपना संदेश दिया।

उन्होंने पुरोहितों के जीवन में “विश्वास के विकास” की बात पर जोर देते हुए तीन विन्दुओं यादगारी, आशा और आत्म-निरीक्षण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारी यादें जैसे की धर्मशिक्षा हमें बतलाती है कलीसिया पर हमारे विश्वास की जड़ें हैं। आशा हमारे विश्वास को बनाये रखती और आत्म-निरीक्षण के द्वारा हम वर्तमान में अपने विश्वास को प्रेम पूर्ण कार्यों द्वारा व्यक्त करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि विश्वास का विकास, “व्यक्ति के जीवन निर्माण का मार्ग और विश्वास की परिपक्वता है।” विश्व प्रेरितिक पत्र “एवनजेलियुम गौदियुस” में निर्देशात्मक तथ्य को उद्धत करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे विश्वास में बढ़ोतरी जीवन जीने के क्रम में ईश्वर से मिलन द्वारा होती है। ईश्वर से हमारा मिलन हमारे व्यक्तिगत जीवन के मुक्ति इतिहास में एक कहानी स्वरूप यादगारी बनती जिसे हम सहेज कर रखते हैं।” उन्होंने बास्केटबॉल खेल का उदाहरण देते हुए कहा, “हमारे पैर जमीन पर टिके रहते, लेकिन हम येसु के क्रूस की धूरी पर परिक्रमा करते हैं।”

उन्होंने यादगारी के संबंध में कहा कि विश्वास अतीत की कृपाओं से पोषित होता है जिसे ईश्वर ने विधान की तरह हमारे पूर्वजों के साथ स्थापित किया है। हमारे ईश्वर परिवारों से जुड़े ईश्वर हैं जो हर नई चीजों के अनुसार हमारे साथ संबंध स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास “क्रांति के रुप में अपनी जड़ों” को पीछे की ओर भी मोड़ सकता है। “हमारी अतीत की यादें जितना स्पष्ट होती उतना ही स्पष्ट हमारा भविष्य होता है क्योंकि इसके द्वारा हम सही मार्ग को पहचानते है जो हमारे जीवन को अर्थ पूर्ण बनाता है।

उन्होंने आगे जोर देते हुए आशा के बारे में कहा,“आशा विश्वास को खोलती है जहाँ हम ईश्वर के आश्चर्य का अनुभव करते हैं।” आशा की आड़ में विश्वास विकासित और अपनी मजबूती को प्राप्त करता है। आशा हमारे जीवन को एक नया आयाम देती जिसके फलस्वरूप हम अपने अतीत से अच्छी चीजों को खोज निकालते हैं जो हमारे लिए एक निधि के समान होती जिसके द्वारा भविष्य में हमारी मुलाकात ईश्वर से होती है।

आत्मा-निरीक्षण के संदर्भ में संत पापा ने कहा, “यह हमारे विश्वास को मूर्त रूप देता है जिसके द्वारा हम जीवन में ठोस ईश्वरीय साक्ष्य देते हैं।” सही समय का प्रभेद यादों और आशा की आधार-शिला है हम इससे स्नेहमयी नज़रों से देखते जो हमारे जीवन को दिशा देती है। आत्म-निरीक्षण के बारे में उन्होंने दो बातों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें “एक कदम पीछे” जा कर अपने जीवन का अवलोकन करना है और दूसरा वर्तमान समय में “एक कदम आगे” बढ़ना जहाँ हम इस बात पर चिंतन करते हैं कि हमें अपने प्रेम को कैसे दूसरों की भलाई, अच्छाई और उचित रुप में जीने की जरूरत है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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