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येसु ख्रीस्त प्रार्थना में निर्णय लेते थे उपदेशक ने स्मरण दिलाया

In Church on March 7, 2017 at 4:02 pm

आरिच्चया, इटली, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (सेदोक): इटली के आरिच्च्या नगर में सन्त पापा फ्राँसिस एवं परमधर्मपीठीय रोमी कार्यालय के कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों एवं की आध्यात्मिक साधना का नेतृत्व कर रहे फादर जूलियो मिखेलीनी ने स्मरण दिलाया कि प्रभु येसु ख्रीस्त प्रार्थना में निर्णय लिया करते थे।

रविवार 05 मार्च से शुक्रवार 07 मार्च तक जारी चालीसा कालीन आध्यात्मिक साधना के पहले दिन, सोमवार को, उपदेशक फादर मिखेलीन ने उपस्थित 74 धर्माध्यक्षों एवं कार्डिनलों का आह्वान किया कि वे प्रार्थना और मनन-चिन्तन के बाद ही किसी काम के लिये अपना फैसला दें। उन्होंने कहा, “येसु प्रार्थना में निर्णय लिया करते थे, स्वप्नों एवं जादू के द्वारा नहीं जैसा कि, प्लुतारको के अनुसार, एलेक्ज़ेन्डर महान किया करता था।”

उन्होंने कहा कि हमें अपने समक्ष कुछेक प्रश्न रखने होंगे जैसे, “किस मानदण्ड के आधार पर मैं प्रभेद कर रहा हूँ? क्या मैंने यह फैसला आवेग में आकर लिया है? क्या मैं अपनी आदत के अनुसार फैसला ले रहा हूँ और ईश राज्य के आगे अपने स्वार्थ को रख रहा हूँ?  या फिर मैं ईश्वर की आवाज़ को सुनकर विनम्र तरीके से बोल रहा हूँ?”

सन्त मत्ती रचित सुसमाचार में निहित सन्त पेत्रुस के मनपरिवर्तन एवं जैरूसालेम की ओर अग्रसर तीर्थयात्रा के वृतान्त पर चिन्तन करते हुए फादर मिखेलीनी ने कहा कि पेत्रुस इस बात को स्वीकार करते हैं कि येसु ख्रीस्त ही मसीह हैं और यह इस बात का प्रमाण है कि पिता ईश्वर ने केवल ईश पुत्र द्वारा ही नहीं अपितु पेत्रुस द्वारा भी हम पर सत्य को प्रकट किया।

फादर मिखेलीनी ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि प्रभु येसु ख्रीस्त शनैः शनैः हम पर अपना मिशन प्रकट करते हैं ताकि हम उस मिशन के अनुकूल विश्व में ईश राज्य की प्रकाशना कर सकें और इसके लिये अनिवार्य है, सतत् प्रार्थना। उन्होंने कहा कि नाज़रेथ के येसु के जीवन में साक्षात्कारों की विशिष्ट भूमिका रही है जिससे कि लोग यह जान सकें कि ईश्वर बहुत ही विनम्र तरीकों से मानव जाति से अनवरत बोलते रहे हैं जैसा कि कई बार हमने उन्हें नन्हें बच्चों एवं जनसमुदाय के मुख से सुना है।

उन्होंने परामर्श दिया, “येसु के मिशन में संलग्न समस्त लोगों को सभी पूर्वधारणाओं से मुक्त होकर, विनम्रतापूर्वक एक दूसरे की बात सुननी चाहिये तथा ध्यानपूर्वक उन्हीं बातों का स्वागत करना चाहिये जो ईश इच्छा के अनुकूल हैं।” उन्होंने स्मरण दिलाया कि अपने क्रूस मरण से पहले येसु ने भी एकान्त में सतत् प्रार्थना की थी, येसु के मिशन को पूरा करने का दावा करनेवाले को उनके ये शब्द याद रखने चाहिये, “जो मेरा अनुसरण करना चाहता है वह आत्मत्याग करे और क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले।”


(Juliet Genevive Christopher)

शांति निर्माण में महिलाओं की भूमिका को वाटिकन सम्मेलन करेगा प्रकाशित

In Church on March 7, 2017 at 4:01 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (सीएनआ): वाटिकन ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण विश्व से महिला प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया है जो एक सम्मेलन के दौरान युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अपने शांति निर्माण कार्यों की चर्चा ही नहीं करेंगी अपितु कलीसिया में अपने योगदान को अन्यों के साथ बाँटेंगी।सम्मेलन की सह-आयोजिका डॉ. शीला एलवर्थी ने काथलिक न्यूज समाचार से कहा, “महिलाएं  सहजता से तथा अपने अनुभवों के आधार पर यह जान जाती हैं कि अन्यों को उनकी ज़रूरत है।” उन्होंने कहा, यह सहजता ठोस रूप से बच्चों के साथ, अपने परिवार के सदस्यों के साथ तथा अपने समुदाय के लोगों के साथ महिलाओं के सम्बन्धों में देखी जा सकती है।” उन्होंने कहा कि उनकी यही क्षमता “उन्हें उत्तम शांति निर्माता बनाती है: दयापूर्वक अन्यों को सुनने की क्षमता तथा उनके दुखों को समझने की क्षमता।”

डॉ. शीला एलवर्थी ने कहा, “महिलाओं की उपस्थिति एक सजीव उपस्थिति होती है क्योंकि वे जो काम करती हैं उसे पूरे मन से करती हैं और यह महिलाओं के अनुभव ही नहीं अपितु उनके विवेक का परिणाम होता है।”

डॉ. एलवर्थी के अनुसार, “स्त्रीगत विवेक” दया से भरा विवेक है जिसमें सब कोई शामिल हैं, कोई भी छोड़ा नहीं गया है। वे सबकी चिन्ता करती तथा सबके लिये उत्कंठित रहा करती हैं। इस दिशा में पुरुष महिलाओं से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

आठ मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसी दिवस पर प्रतिवर्ष वाटिकन में “विश्वास की आवाज़” शीर्षक से महिला सम्मेलन आयोजित किया जाता रहा है। सन् 2014 में सन्त पापा फ्राँसिस की पहल पर पहला सम्मेलन आयोजित किया गया था।


(Juliet Genevive Christopher)

हिन्दू कट्टरपंथियों ने विवाह प्रार्थना सभा में बाधा पहुँचाई

In Church on March 7, 2017 at 3:59 pm

 

भोपाल, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (उकान): हिन्दू वाहिनी संगठन के कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश स्थित शिवपुरी के गिरजाघर में प्रवेशकर विवाह प्रार्थना सभा में बाधा पहुँचाई। उनका आरोप था कि एक ख्रीस्तीय लड़की के साथ विवाह के लिए एक हिन्दू लड़के का धर्म परिवर्तन किया जा रहा था।

लड़की के संबंधियों ने कार्यकर्ताओं को बताया कि उन्होंने सिर्फ प्रार्थना सभा का आयोजन किया है इसके बाद वे मिलकर रात्रि का भोजन करेंगे। लड़की के माता पिता ने उन्हें शांत करने के लिए शादी का कार्ड दिखाया जिसके अनुसार विवाह अगले 13 मार्च को उज्जैन के आर्य समाज मंदिर में सम्पन्न होगी।

टाउन इंस्पेक्टर संजय दीक्षित ने कहा कि घटना कुछ भ्रम की स्थिति का नतीजा था। “हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ता हमारे पास आए थे और आरोप लगाया कि एक हिंदू का जबरजस्ती से धर्मांतरण किया जा रहा था। पुलिस भी कार्यकर्ताओं के साथ गिरजाघर आई पर उन्होंने आरोप को गलत पाया।″

मध्य प्रदेश की धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अनुसार बलपूर्बक, लालच देकर और धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन निषेध है। अधिनियम के तहत अधिकारियों को सूचित किए बिना धर्म परिवर्तन करना भी दंडनीय है।

भोपाल के महाधर्माध्यक्ष लेओ कोरनेलियो और काथलिक लोकधर्मी मंच (सीएसएफ) ने पिछले साल आरोप लगाया था कि अक्सर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए इस अधिनियम का दुरुपयोग किया जाता है।


(Margaret Sumita Minj)

राष्ट्रपति कीर द्वारा आयोजित शांति प्रार्थना दिवस की आलोचना

In Church on March 7, 2017 at 3:58 pm

जूबा, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (सेदोक) : ″मैं क्यों उस स्थान पर प्रार्थना करने जाऊँगा जहाँ कोई पवित्रता नहीं, जहां कोई क्षमा नहीं है? यह एक मजाक है कि देश के राष्ट्रपति ने शांति हेतु प्रार्थना दिवस का आयोजन किया है जबकि फिलहाल, उसके ही सैनिक दक्षिण सूडान में अपने लोगों की दुर्दशा कर रहे हैं।” उक्त बातें दक्षिण सूडान की राजधानी जूबा के सहायक धर्माध्यक्ष सांतो लोकु पीयो डोग्गाले ने राष्ट्रपति साल्वा कीर द्वारा शांति हेतु प्रार्थना दिवस के निमंत्रण को अस्वीकार करते हुए कही। गृहयुद्ध से तबाह हो रहे देश में राष्ट्रपति कीर ने 10 मार्च को शांति हेतु प्रार्थना दिवस का आयोजन किया है।

द वोईस ऑफ अमेरिका के साथ साक्षात्कार में धर्माध्यक्ष डोग्गाले ने कहा, ″ मैं प्रतिदिन दक्षिण सूडान के लिए प्रार्थना करता हूँ। साल्वा कीर द्वारा प्रार्थना हेतु बुलावा मेरी समझ से बाहर है। मैं उस प्रार्थना में भाग नहीं लूँगा। यह राजनीतिक प्रार्थना है। यह एक मजाक है।″ धर्माध्यक्ष डोग्गाले ने सैनिकों के कार्यों को देखते हुए राष्ट्रपति के आमंत्रण को अस्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि सैनिकों के कारण इक्वेटोरिया क्षेत्र के लंगो, अचोली, मादी, काकू, कूकू और ऊपरी नील के शिलुक जनजाति अपने घरों से विस्थापित हो रहे हैं। लोग अपनी पैत्रिक जमीन से बेदखल किये जा रहे हैं। बहुत से लोगों के संसाधनों की चोरी हुई है।

दक्षिण सूडान गृह युद्ध और 2013 में शुरु हुए गंभीर अकाल के कारण हजारों लोगों की मौत हुई है। इस स्थिति से उबरने के लिए काथलिक धर्माध्यक्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मानवीय सहायता की अपील की है।


(Margaret Sumita Minj)

मुम्बई की नदियों को बचाने हेतु जुलूस

In Church on March 7, 2017 at 3:56 pm

 

मुम्बई, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (उकान) : मुम्बई में 5 मार्च को ‘नदी उत्सव’ त्योहार के अवसर पर शहर में नदियों की हालत के बारे में जागरूकता लाने के लिए 12,500 हजार से भी अधिक लोगों ने जुलूस में भाग लिया। नदियों में प्रदूषण की वजह से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है जो शहरवासियों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

नदियों के प्रदूषण को रोकने और इन्हें फिर से जीवंत करने की जरूरत जुलूस में उपस्थित नागरिकों की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। जुलूस में बड़ी संख्या में स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रगण, काथलिक सभा के सदस्य, बुरहानी फाउंडेशन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत का वाटर मैन राजेंद्र सिंह ने भी भाग लिया।

शहर के राजनीतिक नेताओं जैसे सांसद गोपाल शेट्ठी तथा मनीशा चौधरी, प्रवीण सुर्वे और योगेश सागर आदि विधायकों ने भी नदी मार्च में भाग लेकर अपना समर्थन प्रदान किया। हर किसी ने शहर की पांचों नदियों के जीर्णोद्धार के लिए अपील की।

नदी मार्च के आयोजकों में से एक गोपाल जावेरी ने कहा, ″हमने नदियों में बड़ी मात्रा में कचरा फेंका है जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। जबकि विकास के नाम पर सरकार नदी के दोनों किनारों को पक्का बना दे रही है। हम इस गतिविधि का विरोध करते हैं और हम चाहते हैं कि हमारी नदियाँ हमें वापस मिले। मुंबई के निवासियों द्वारा आयोजित यह तीसरा सफल नदी जुलूस था।″


(Margaret Sumita Minj)

डॉन बोस्को फिल्म समारोह में फिल्म ‘सावट’ को मिला प्रथम पुरस्कार

In Church on March 7, 2017 at 3:55 pm

मुम्बई, मंगलवार, 7 मार्च 2017 (उकान) : स्वप्निल राजाशेखर की फिल्म ‘सावट’ को डॉन बॉस्को युवा फिल्म समारोह (डीबीवायएफएफआई) 2017 का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला। सलेसियन प्राचार्य फादर ऐंजल फर्नानडीस आर्टिम ने 4 मार्च को चेन्नई में पुरस्कार प्रदान किया।

डॉन बॉस्को युवा फिल्म समारोह का आयोजन दक्षिण एशिया के सलेसियन प्रांतीय सम्मेलन के साथ दक्षिण एशिया के डॉन बॉस्को संचार ने की थी। इन लघु फिल्मों के माध्यम से एक अद्वितीय प्रयास के साथ उभरते फिल्म निर्माताओं ने युवाओं की आकांक्षाओं, चुनौतियों, संघर्षों उनके विचारों और चिंताओं को प्रदर्शित किया है।

19 राज्यों के 100 स्थानों में नेटवर्किंग द्वारा लाखों युवाओं तक पहुँचने की व्यवस्था की गई थी। फिल्म समारोह प्रतियोगिता में भारत के 24 राज्यों से 248 लधु फिल्मों ने भाग लिया, जिसमें से प्रारंभिक जूरी समिति ने स्क्रीनिंग के लिए 24 लघु फिल्मों का चयन किया। अंतिम जूरी पैनल ने सर्वश्रेष्ठ 3 फिल्मों का चयन किया, और विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत 10 छोटी फिल्मों को भी चुना।

फिल्म उत्सव के निदेशक फादर हरीश पाक्काम ने कहा कि इसे बहुत बड़ी सफलता मिली और इसके माध्यम पूरे देश के लगभग 5 लाख युवाओं तक पहुंच पाये। फिल्मों का उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन के लिए युवाओं को प्रेरित करना था।

फिल्म उत्सव की विषय वस्तु थी, ″सकारात्मक और प्रेरणात्मक रुप में युवाओं की भावनाओं का उत्सव,″ युवा लोगों की कहानियां जो चुनौतियों का सामना करते हैं और साहस के साथ जीवन में संघर्ष करते हैं।

प्रथम पुरस्कार प्राप्त फिल्म ‘सावट’ 24 मिनट की है जिसमें भारत की एक ग्रामीन बालिका के जोखिमों को दर्शाया गया है आज भी साक्षर बनने के लिए उसे अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसमें बलात्कार की घटनाओं से पीड़ितों के मानसिक प्रभाव को प्रदर्शित किया गया है।

दूसरा पुरस्कार फिल्म ‘पायवत’ के निर्देशक मिथुनचंद्र चौधरी को मिला। इस फिल्म में एक भूमिहीन मजदूर की आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी बेटी की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित की गई है।

तीसरा पुरस्कार करुणाकरण सी. के ‘बैकबोन’ को मिली। रामचंद्र गांवकर की फिल्म ‘सेल्फीज’ सर्वश्रेष्ठ कहानी का पुरस्कार जीता।


(Margaret Sumita Minj)

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