Vatican Radio HIndi

Archive for March 9th, 2017|Daily archive page

मिलान में संत पापा की आगामी प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम

In Church on March 9, 2017 at 4:07 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): वाटिकन ने आगामी 25 मार्च को मिलान में संत पापा की एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम प्रकाशित कर दिया है।

जानकारी अनुसार संत पापा मिलान में शरणार्थी परिवारों से मुलाकात करेंगे। पुरोहितों एवं समर्पित धर्मसमाजियों को सम्बोधित करने के पश्चात् वे सन वित्तोरिया जेल का दौरा कर कैदियों की भेंट करेंगे एवं उनके साथ दोपहर का भोजन करेंगे, तत्पश्चात् वे मोंज़ा पार्क में ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

अंत में वे मिलान के मियाज्ज़ा सन सिरो स्टेडियम में हाल में दृढ़ीकरण संस्कार प्राप्त युवाओं से मुलाकात करें।

मिलान प्रेरितिक यात्रा हेतु संत पापा का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है-

07:10               रोम फ्यूमिचिनो हवाई अड्डे से प्रस्थान

08:00               मिलान-लिनाते हवाई अड्डा पर आगमन

08:30               मिलान के फोरलाइनि क्वार्टर- वाईट हाऊस का दौरा जहाँ संत पापा दो परिवारों के

साथ उनके अपार्टमेंट में मुलाकात करेंगे तथा वाईट हाऊस के प्राँगण में रोम,

इस्लामिक तथा विस्थापित परिवारों एवं अन्य लोगों से मुलाकात करेंगे।

10:00               दूओमो में पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों से मुलाकात।

11:00               दूओमो में देवदूत प्रार्थना एवं आशीर्वाद।

11:30               संत वित्तोरिया जेल का दौरा।

12:30               संत वित्तोरिया जेल के कैदियों क साथ दोपहर का भोजन।

13:45               मोंज़ा पार्क हेतु प्रस्थान।

15:00              मोंजा पार्क में ख्रीस्तयाग।

16:30               मिलान के मियाज्ज़ा सन सिरो स्टेडियम हेतु प्रस्थान

17:30               मिलान के मियाज्ज़ा सन सिरो स्टेडियम हाल में दृढीकरण संस्कार प्राप्त युवाओं से

मुलाकात।

18:30               मिलान- लिनाते हवाई अड्डे से रोम हेतु प्रस्थान।

19:30               रोम फ्यूमिचिनो हवाई अड्डे पर वापसी।


(Usha Tirkey)

Advertisements

डाइट जियत से संत पापा: ‘मुझे भी खालीपन के क्षण का एहसास है’

In Church on March 9, 2017 at 4:05 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): ″मैंने भी खालीपन के समय का एहसास किया है ।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने अपने जीवन के आध्यात्मिक अंधेरे क्षणों पर चर्चा करते हुए जर्मन समाचार पत्र ‘डाइट जियत’ को दिए एक साक्षात्कार में कही।

उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति में उन्होंने प्रार्थना की थी कि प्रभु मैं इस परिस्थिति को नहीं समझ सकता हूँ।

यह पूछे जाने पर कि विश्वास में संकट की स्थिति से गुजर रहे लोगों की मदद विश्वासी किस तरह कर सकते हैं संत पापा ने कहा, ″संकट के बिना मानव जीवन में कोई भी नहीं बढ़ सकता, शारीरिक विकास में भी यही बात लागू होती है।″

डाइट जियत के सम्पादक जोवानी दी लोरेनसो के साथ हुए इस साक्षात्कार में सबसे मर्मभेदी पल था जब संत पापा ने खुद अपने संदेहों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ″विश्वास एक वरदान है।″ अतः इसे अपने आप में नहीं ढूँढना बल्कि ईश्वर से याचना करनी चाहिए। यह जल्द अथवा देर से प्राप्त हो सकती है और कई बार, संकट की स्थिति में इंतजार भी करना पड़ता है।″

साक्षात्कार में अनेक विषयों पर चर्चा हुई जिसमें गाँठ खोलने वाली माता मरियम की भक्ति के विस्तार, पुरोहितीय बुलाहट में कमी एवं क्या व्यक्ति आंतरिक रूप से अच्छा या बुरा हो सकता है आदि प्रमुख विषय थे।

संत पापा ने विश्व में संकट की स्थिति जिसे वे तृतीया विश्व युद्ध का नाम देते हैं के बारे कहा कि यह टुकड़ों में हो रहा है। उन्होंने अफ्रीका, एशिया, ईराक तथा अन्य स्थलों पर हो रहे संघर्षों की ओर ध्यान आकृष्ट किया।

साक्षात्कार के दौरान कलीसिया में हाल की घटनाओं पर भी प्रकाश डाला गया जिसमें अपनी आलोचनाओं के संबंध संत पापा ने कहा, ″इसके बारे मैं सच कहूँगा कि मैं जब संत पापा चुना गया उस समय से अब तक मैंने अपनी शांति नहीं खोयी है। मैं समझता हूँ कि मैं जिस तरह काम कर रहा हूँ एवं उन्हें न्याय संगत ठहरा रहा हूँ किसी-किसी को यह ठीक नहीं लगेगा। सोचने के कई तरीके होते हैं, यह जायज है मानवीय है और समृद्धि भी है।

“सुसंस्कृत” रोमन बोली में कुख्यात पोस्टर जिसमें संत पापा को दयालु नहीं होने का आरोप लगाया गया था उसपर टिप्पणी करते हुए संत पापा ने कहा, ″ये अच्छा है कि आप लोग इस तरह की चीजों में मजाक कर सकते हैं। मैं संत थोमस मोर की मध्यस्थता द्वारा प्रत्येक दिन प्रार्थना करता हूँ कि मुझे हास्य की भावना का ज्ञान मिले।

साक्षात्कार का समापन भविष्य में संभावित प्रेरितिक यात्रा के विषय में बातें करते हुए की गयी। संत पापा ने भारत, बंगलादेश, कोलोम्बिया और पुर्तगाल के फातिमा में अपनी यात्राओं की पुष्टि दी।


(Usha Tirkey)

विश्वास की आवाज़: भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मुकाबला

In Church on March 9, 2017 at 4:03 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 मार्च 2017 (वाटिकन रेडियो): विश्व महिला दिवस के अवसर पर, ‘विश्वास की आवाज’ का उद्देश्य था विश्व के विभिन्न हिस्सों से महिला प्रतिनिधियों को एक साथ वाटिकन में एकत्रित करना था।

इस वर्ष फिदेस गोज़ न्यास द्वारा स्थापित ‘वॉईस ऑफ फेत’ यानी ‘विश्वास की आवाज’ तथा जेस्विट शरणार्थी सेवा द्वारा महिलाओं के न्याय तथा विश्व के विभिन्न देशों में शांति निर्माण हेतु स्थापित संस्था ने विश्व महिला दिवस को एक साथ मनाया।

घरेलू हिंसा की शिकार तथा महिलाओं के अधिकार के लिए कार्य करने वाली फ्लाविया अग्नेस भी उन प्रतिनिधियों में से एक हैं। वे एक वकील हैं तथा मुम्बई में हाशिये पर जीवन यापन करने वाली महिलाओं एवं बच्चों के लिए स्थापित कानूनी संस्था मजलिस की सह-संस्थापक हैं। उन्होंने अथक प्रयास करते हुए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु देश में वैधानिक प्रणाली को अस्तित्व प्रदान दिया।

उन्होंने वाटिकन रेडियो की पत्रकार फिलिपा हेचेन को अपने केंद्र के बारे बतलाते हुए कहा कि यद्यपि महिलाएँ अदृश्य रूप से घरेलू हिंसा एवं यौन हिंसा से पीड़ित अब भी हैं किन्तु देश में अब राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

उन्होंने बतलाया कि केंद्र की स्थापना 25 सालों पहले हुई है जिसका मुख्य उद्देश्य है महिलाओं के लिए न्यायिक सहायता प्रदान करना। उनके अनुसार भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु कई कानून हैं किन्तु उनका लाभ उठा पाना कठिन है क्योंकि कई महिलाएँ वकीलों को पाना नहीं जानती हैं, बहुत पैसे खर्च करने पड़ते हैं और साथ ही, कानूनी प्रक्रिया बहुत जटिल है। कमजोर और हाशिये पर जीवन यापन करने वाली महिलाओं के लिए यह नामुमकिन है। अतः वे इसे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं खासकर, उन लोगों के लिए जो घरेलू एवं यौन हिंसा के शिकार होते हैं।

फ्लाविया का मानना है कि सफलता की सबसे प्रमुख कुँजी है दुनिया को महिलाओं के प्रति अपने नजरिये में बदलाव लाना चाहिए। उन्होंने कहा, ″समस्त दक्षिण एशियाई संस्कृति महिला विरोधी है। दुरुपयोग की संस्कृति रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गयी है।″

वाईस ऑफ फेत के प्रतिनिधियों से फ्लाविया ने कहा कि परिवर्तन लाना तथा स्थानीय मामलों में जागरूकता लाना जरूरी है ताकि कलीसिया प्रासंगिक हो सके।

उन्होंने कहा, ″न्याय हेतु आवाज उठाने के लिए कलीसिया की आवाज को अधिक तेज करने की आवश्यकता है, उन लोगों के लिए खासकर, जो हाशिये पर जीवन यापन करते हैं। हमारी कलीसिया को हमारे कार्यों में अधिक दृढ़ता एवं ऊंची आवाज में समर्थन देना चाहिए।″


(Usha Tirkey)

भारत की शीर्ष पत्रिका ने वार्षिक महिला पुरस्कार में काथलिक धर्मबहन को किया सम्मानित

In Church on March 9, 2017 at 4:00 pm

नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 9 मार्च 2017 (मैटर्स इंडिया): भारत की सर्वाधिक लोकप्रिय पत्रिका ‘वानिता’ (महिला) ने एक काथलिक धर्मबहन सि. सुधा वर्गीस को वर्ष के सबसे प्रतिष्ठित महिला पुरस्कार से सम्मानित किया।

हर दो सप्ताह में प्रकाशित भारत की विभिन्न भाषों में छपने वाली पत्रिका ने विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या 7 मार्च को, इसकी घोषणा की। मनोरमा समाचार पत्र के अनुसार पुरस्कार हेतु एक लाख की राशि प्रदान की गयी है।

68 वर्षीय धर्मबहन सि. सुधा वर्गीस पटना की नोटर डेम धर्मसमाज की सदस्य हैं। उन्होंने मुशाहार लोगों के बीच शिक्षा, खासकर, बालिकाओं की शिक्षा पर तीन दशकों तक सेवा प्रदान की और अब खासकर बिहार में दलित लोगों के बीच अपनी सराहनीय सेवा दे रही हैं।

उन्होंने मुशाहार लोगों की सामाजिक आर्थिक प्रगति हेतु पूर्ण रूप से समर्पित होने के लिए शिक्षा के अपने कार्य को त्याग दिया तथा जाति प्रथा से शोषित लोगों के साथ गुलाम जैसा जीवन व्यतीत करना स्वीकार किया है। उनके बीच प्रचलित बाल-विवाह को समाप्त करने एवं ऊँच समझी जाने वाली जातियों द्वारा निम्न जाति के लोगों से शोषित होने की जाँच करने में धर्मबहन ने अपना बड़ा सहयोग दिया है।

सि. सुधा ने 1987 में ‘नारी गुंजन’ (महिलाओं की आवाज) की स्थापना की है जिसके माध्यम से शिक्षा, वकालत और कल्याणकारी योजनाओं जैसी उसकी बहु-स्तरीय गतिविधियों का समन्वय करने हेतु सहायता मिल सके। उनका संगठन पटना और सारन जिला में महिला मूशाहार के 1,020 स्वयं सहायता समूह का संयोजन करता है। प्रत्येक दल में 10 से 15 सदस्य होते हैं जो अपने सदस्यों को उनके अधिकारों की शिक्षा देते तथा बचत करते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।

वानिता जो लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में पुरस्कृत करती है भारत के ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलंस के मुताबिक दिसम्बर 2013 में उसकी औसत 6,87,915 प्रतियों की बिक्री हुई थी।


(Usha Tirkey)

काथलिक कार्यकर्ता ने लगाया गुलाम महिलाओं की तस्करी का आरोप

In Church on March 9, 2017 at 3:57 pm

 

काठमाण्डू, बृहस्पतिवार, 9 मार्च 2017 (एशियान्यूज़): महिला अधिकार हेतु नेपाली काथलिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विश्व महिला दिवस को सचमुच सार्थक बनाने के लिए शोषण एवं महिलाओं की तस्करी को रोकना होगा।

उन्होंने गौर किया कि यौन गुलाम एवं मानव अंग तस्करी हेतु अधिक से अधिक नेपाली महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट अनुसार 2016 में कम से कम 16,000 महिलाएँ तस्करी से छुड़ायी गयी जबकि 13,000 महिलाएँ विभिन्न देशों में गुलाम है।

महिलाओं पर रिपोर्ट करने वाली एक पत्रकार चंद्रशेखर अधिकारी ने कहा, ″महिला तस्करी का रूप अब बदल चुका है। पहले महिलाएँ वैश्य के रूप में भारत और चीन में बेची जाती थीं किन्तु अब सैकड़ों नेपाली महिलाएँ इस्लामी आतंकवादियों द्वारा ‘आरामदायी महिलाओं’ या मानव ढाल के रूप में प्रयोग की जा रही हैं।″

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट अनुसार सीरिया में करीब 300 महिलाएँ यौन गुलाम के रूप में कार्य कर रही हैं। जिनमें अधिकतर तमांग, राई या ठाकूरी जैसे अल्पसंख्यक जाति की हैं। वे निशाने पर इसलिए हैं क्योंकि वे गोरी हैं तथा उनकी त्वचा सुन्दर है।

महिलाओं के लिए काथलिक कार्यकर्ता सुजाता राई ने नेपाल में महिलाओं की विभिन्न समस्याओं को बतलाते हुए कहा, ″कई अन्य समस्याएँ हैं, जिनमें घरेलू हिंसा, अंधविश्वासी पारंपरिक प्रथाएँ तथा बेरोजगारी भी शामिल हैं।″

उन्होंने कहा कि यह सहन के परे है, खासकर, उस समय जब हज़ारों लोग वेश्यावृत्ति में नारकीय जीवन जी रहे हैं, विश्व महिला दिवस मनाया जा रहा है। जब यह समस्या समाप्त हो जायेगी तभी यह दिन एक आनन्द का दिन होगा।

समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि सरकार इसे रोकने हेतु हर सम्भव प्रयास कर रही है किन्तु समस्या का समाधान करने में समय लगता है बल्कि व्यवस्थित अपराधों को सुलझाने में और भी अधिक समय लगता है। हम परिस्थिति को समझ रहे हैं। कुछ ही कुलीन महिलाएँ इस दिन को मना रही हैं। बाकी हज़ारों रो रही हैं एवं पीड़ित हैं। इस समस्या के समाधान हेतु एक साथ प्रयास करने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि नेपाल में महिला अधिकार के कई दलों ने विभिन्न आयोजनों के साथ महिला दिवस को मनाया क्योंकि नेपाल सरकार ने इसे सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: