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परमधर्माध्यक्ष के रूप में संत पापा फ्राँसिस के हुए चार साल

In Church on March 13, 2017 at 4:19 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 13 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): काथलिक कलीसिया के परमधर्माध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस ने आज 13 मार्च को, संत पापा के रूप में अपने कार्य काल के चार साल पूरे किये।

वाटिकन पर पैनी नजर रखने वाले अमरीकी पत्रकार डेविड गिबसोन ने कहा है कि संत पापा फ्राँसिस का परमधर्माध्यक्षीय काल पूरी कलीसिया में एक आध्यात्मिक संचालक द्वारा संत इग्नासियुस की एक लम्बी आध्यात्मिक साधना के समान है।

वाटिकन रेडियो की सुसी होजेस से बातें करते हुए अमरीका के काथलिक पत्रकार एवं लेखक डेविड गिबसोन ने इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस द्वारा आयोजित सिनॉड की सराहना की तथा उनके कार्यकाल में कलीसिया का संचालन धर्माध्यक्षीय पद्धति से किये जाने पर उसे परिवर्तन की कुँजी कहा।

संत पापा फ्राँसिस के परमाध्यक्ष चुने जाने की चौथी वर्षगाँठ पर गिबसोन ने कहा कि संत पापा की देन है, भेदभाव की उन प्रथाओं में सुधार करना जो व्यक्ति को अंतःकरण की जाँच करने हेतु प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा, ″वे कलीसिया के सभी रास्तों को नवीकृत करने का प्रयास कर रहे हैं। वे सचमुच द्वितीय वाटिकन महासभा की उन बातों पर पुनः ध्यान देने का प्रयत्न कर रहे हैं जो वर्षों के अंतराल में धूमिल सा प्रतीत हो रहा है।″

उनका कहना था कि वास्तव में धर्माध्यक्ष, पुरोहित तथा लोकधर्मी सच्चा परिणाम चाहते हैं और संत पापा उसी के अनुरूप कलीसिया के प्रबंधन को फिर से उन्मुख करने का प्रयास कर रहे हैं।

संत पापा की लोकप्रियता के बारे पूछे जाने पर गिबसोन ने कहा कि अमरीका में कुछ महीनों के अंदर उनकी लोकप्रियता एक सर्वेक्षण रिपोर्ट अनुसार 90 प्रतिशत बढ़ गयी है।

एक येसु समाजी के रूप में उन्हें देखते हुए उन्होंने कहा कि लोकधर्मी येसु समाजी पुरोहितों को पल्लियों में एक चरवाहे के रूप में देखते हैं और यही बात संत पापा में दिखाई पड़ती है जो उन्हें असाधारण रूप में प्रस्तुत करती है।

संत पापा फ्राँसिस की अगुवाई में कलीसिया किस ओर आगे बढ़ रही है के जवाब में डेविड ने कहा, ″मैं सोचता हूँ कि संत पापा चाहते हैं कि कलीसिया इतिहास में कहाँ खड़ी है उसकी जाँच करे तथा उसी के अनुसार आगे बढ़े।″


(Usha Tirkey)

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मन-परिवर्तन के सच्चे रास्ते पर चलने हेतु प्रार्थना

In Church on March 13, 2017 at 4:16 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 13 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): काथलिक कलीसिया में परमधर्माध्यक्ष के रूप में 4 साल पूरा करने पर 13 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र आत्मा से प्रार्थना की कि वे कलीसिया को मन-परिवर्तन के सच्चे रास्ते पर ले चलें।

उन्होंने सोमवार को एक ट्वीट संदेश प्रेषित कर लिखा, ″पवित्र आत्मा हमें मन-परिवर्तन के सच्चे रास्ते पर ले चले, ताकि हम ईश वचन के वरदान की खोज कर सकें।″

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें के आकस्मिक इस्तीफा देने के पश्चात्, संत पापा फ्राँसिस 13 मार्च 2013 को काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष चुने गये थे। वे लातिनी अमरीका के प्रथम संत पापा हैं। इन चार सालों में उन्होंने कलीसिया को कई चुनौतियाँ दी है तथा नवीनीकरण उसका आह्वान किया है।


(Usha Tirkey)

येसु का रूपांतरण, पास्का की ओर आगे बढ़ने का रास्ता

In Church on March 13, 2017 at 4:14 pm

रोम, सोमवार, 13 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 12 मार्च को रोम धर्मप्रांत के संत मगदलेना ऑफ कनोसा पल्ली का दौरा किया जहाँ उन्होंने युवा, बीमार एवं बुजुर्गों से मुलाकात की एवं पल्ली समुदाय के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

ख्रीस्तयाग प्रवचन में संत पापा ने येसु के दो चेहरों पर चिंतन किया, रूपांतरण में उनका सुन्दर चेहरा और मनुष्यों के पाप के कारण क्रूस पर उसकी बिगड़ी स्थिति।

येसु की सुन्दरता का ध्यान आकृष्ट करते हुए संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में येसु की सुन्दरता का जिक्र दो बार किया गया है। पहली बार जब उनका रूपांतरण हो गया था और दूसरी बार पुनरुत्थान के पश्चात्।

जब येसु का रूपांतरण हुआ चेले भी उनके साथ थे। उनका चेहरा सूर्य के समान चमक उठा तथा उनके वस्त्र श्वेत की तरह उज्ज्वल हो गये। येसु शिष्य को इसके बारे में चर्चा नहीं करने का आदेश देते हैं क्योंकि येसु के पुनरूत्थान के पूर्व उनका चेहरा कुरूप किया जाएगा तब उनमें कोई आकर्षण नहीं रह जाएगा। उन्हें अत्याचार, अपमान, कोड़ों की मार एवं काँटों के मुकूट की चुभन सहने पड़ेंगे। उनका पूरा शरीर बेकार की वस्तु के समान दिखाई पड़ेगा।

संत पापा ने कहा कि हमें क्रूस की ओर निहारना है जहाँ येसु टंगे हैं जिन के बारे में ईश्वर ने कहा था कि यह मेरा प्रिय पुत्र है। येसु ईश्वर के पुत्र हैं वे स्वयं ईश्वर हैं जिनसे पिता अत्यन्त प्रसन्न हैं किन्तु हमें बचाने के लिए उन्होंने अपना सबकुछ विघटित कर दिया।

संत पापा ने पाप की नीचता एवं कुरूपता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ईश्वर के विरूद्ध है, उनकी उपेक्षा करता है। उसी कुरूप पाप से हमें बचाने के लिए येसु को कुरूप होना पड़ा और उस बिगड़े चेहरे को देखकर नहीं घबराने के लिए उन्होंने अपने रूपांतरण द्वारा चलों को तैयार किया।

संत पापा ने चालीसा काल की याद दिलाते हुए कहा कि हम पास्का की ओर यात्रा कर रहे हैं जहाँ येसु के पुनरुत्थान के समय उनका चेहरा पुनः चमक उठा और वे पुनः सुन्दर बन गये। संत पापा ने विश्वासियों से येसु के अगाध प्रेम एवं उनकी सुन्दरता पर चिंतन करने का आग्रह किया। येसु के दो चेहरों पर चिंतन करने की सलाह दी जिसे रूपांतरण के समय चेलों ने देखा और दूसरा क्रूस पर पाप के कारण वह कुरूप बनाया गया। यह हमें जीवन के रास्ते पर आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहन देता है। संत पापा ने विश्वासियों को क्षमा की याचना करने एवं पापों से बचने की  सलाह दी।


(Usha Tirkey)

‘कॉम्पाशन’ प्रायोजकों का भारत में बच्चों के साथ संपर्क टूटा

In Church on March 13, 2017 at 4:13 pm

भारत, सोमवार, 13 मार्च 2017 (मैडर्स इंडिया): भारत के हज़ारों बच्चों को मदद करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘अनुकम्पा’ (कॉम्पाशन) का संम्पर्क टूट जाने के कारण प्रायोजक परेशान हैं तथा इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें देश से बाहर भेज दिये जाने पर उन बच्चों का क्या होगा।

फेसबुक पर एक प्रायोजक ने लिखा, ″क्या हम भारत की बच्ची के लिए अनुदान कर सकते हैं?  मैं उसे कृपा के सिंहासन के पास प्रतिदिन लाता हूँ तथा स्वर्गीय पिता से भरोसे के साथ प्रार्थना करता हूँ कि वे उस पर नजर रखें तथा बाहरी सहायता के बिना भी उसे आशीष प्रदान करें।″

एक अन्य प्रायोजक ने बच्चे की याद करते हुए लिखा, ″मैं उसे लिखना पसंद करता हूँ तथा उसके द्वारा सुनना चाहता हूँ। मेरा हृदय टूट गया है कि मैं अपना संबंध उसके साथ जारी नहीं रख सकता।″

मैटर्स इंडिया के अनुसार अब तक संस्था (कॉम्पाशन) ने भारत के कुल 1,47,000 बच्चों की मदद की है। इस संस्था ने बच्चों को स्वास्थ्य सेवा, भोजन, शिक्षा, किताब, कपड़े तथा उनके लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान की है।

अनुकम्पा के प्रवक्ता बेक्का के धर्माध्यक्ष ने सीबीएन समाचार से कहा, ″हमें पता नहीं है कि इन बच्चों का क्या होगा। फिर भी अनुकम्पा कलीसिया के साथ मिलकर काम करती है तथा भारत के अपने सहयोगियों को प्रोत्साहन देती है कि जिस किसी तरह से भी सम्भव हो वे बच्चों के साथ काम करना जारी रखें।″

अनुकम्पा आधिकारिक रूप से 15 मार्च को भारत छोड़ देगी अतः अनुदान करने वालों से कहा है कि वे उनके पत्रों को अब उन बच्चों तक नहीं पहुँचा पायेंगे। प्रभावी रूप से, अब बच्चों के लिए उनका प्रायोजन समाप्त हो जाएगा क्योंकि सहायता संगठन अब बच्चों की सेवा नहीं कर सकता है। अनुदान करने वालों के लिए बच्चों के साथ सम्पर्क करने हेतु मात्र एक ही अवसर है। उन्होंने कहा, ″हम अनुदान करने वालों के पत्रों को बच्चों तक पहुँचाने की एक कोशिश जरूर करेंगे। हम यह गारंटी नहीं दे सकते हैं कि वे इसे प्राप्त कर पायेंगे किन्तु कलीसिया के सहयोगी यदि अब भी बच्चों के सम्पर्क में होंगे तो वे उन्हें प्राप्त कर लेंगे।″

अनुकम्पा ने अनुदान करने वालों को बच्चों के साथ सीधा सम्पर्क नहीं करने की सलाह दी है।


(Usha Tirkey)

मिशन स्कूलों पर कर के प्रस्ताव का धर्माध्यक्षों ने किया विरोध

In Church on March 13, 2017 at 4:11 pm

मनिला, सोमवार, 13 मार्च 2017 (एशियान्यूज़): फिलीपींस के काथलिक धर्माध्यक्षों ने दुतेरते प्रशासन के उस घोषणा का विरोध किया है जिसके अनुसार सरकार मिशन स्कूलों से कर वसूल करेगी।

प्रतिनिधि मंडल के प्रवक्ता पंतलियन अल्वरेज़  ने रविवार को कहा था कि कलीसिया द्वारा संचालित स्कूलों को सरकार की आमदनी बढ़ाने हेतु कर देना होगा।

दुतेरते प्रशासन द्वारा टैक्स संशोधन बिल की बात करते हुए उन्होंने सरकार के आयकर पद्धति की जाँच की मांग की है, यह दावा करते हुए कि कुछ विद्यालय उच्च आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को ही भर्ती करते हैं तथा ट्यूशन में वृद्धि करते हैं।

अल्वरेज़ के दावे का जवाब देते हुए धर्माध्यक्ष पाब्लो डेविड ने कहा कि कलीसिया स्कूल नहीं चलाती यदि सरकार पर्याप्त रूप से गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करती, खासकर, प्राथमिक एवं उच्च स्तर की शिक्षा के लिए।

धर्माध्यक्ष ने कहा कि वास्तव में हमारा हमेशा यह विचार रहता है कि हम कलीसिया के सदस्य, गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने के द्वारा सरकार की सहायता कर रहे हैं जबकि राज्य ऐसा करने में असमर्थ है।

उन्होंने गौर किया कि ये असफलता तंग पब्लिक स्कूलों, कक्षा के निर्माण और शिक्षक की कमी में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उनके अनुसार सरकारी संसाधन अभी भी पर्याप्त नहीं हैं कि वह विद्यार्थियों को समुचित शिक्षा दे सके।

हम अपने स्कूलों के संचालन में सार्वजनिक फंड पर भी निर्भर नहीं रहते हैं तो क्या उन्हें हमें प्रतिद्वंद्वियों के रूप में देखने के बजाय अपने सहयोगियों के रूप में नहीं देखना चाहिए?

विभिन्न राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर योजना अधिकारियों का धर्माध्यक्षों के खिलाफ प्रतिकार है।

कलीसिया ने नशीली पदार्थों को लेकर सरकार के युद्ध, अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं एवं मौत की सज़ा का कड़ा विरोध किया था।


(Usha Tirkey)

दक्षिणी सूडान में शांति हेतु कलीसिया की भूमिका

In Church on March 13, 2017 at 4:09 pm

दक्षिणी सुडान, सोमवार, 13 मार्च 2017 (वाटिकन रेडियो): दक्षिणी सुडान ने शांति एवं क्षमा हेतु 10 मार्च को राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस मनाया।

सरकारी सैन्य बल एवं विपक्ष दल के बीत राजनीति तनाव तथा हिंसा भड़क उठने के कारण हज़ारों बेसहारे लोग अपना देश एवं घर छोड़ने के लिए मजबूर हैं। देश में आकाल की स्थिति की घोषणा हो चुकी है तथा करीब 7.5 मीलियन लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

इस दौरान संत पापा ने कहा था कि वे दक्षिणी सूडान में अंगलिकन महाधर्माध्यक्ष जस्टिन वेलबे के साथ यात्रा कर सकते हैं जिसकी संभावना पर अध्ययन किया जा रहा है।

दक्षिणी सूडान में जहाँ कई ख्रीस्तीय समुदाय हैं, काथलिक तथा अंगलिकन ख्रीस्तीयों की संख्या अधिक है जो विविधताओं को दूर कर, राष्ट्र के निर्माण में एक साथ आने हेतु लोगों को निमंत्रण दे रहे हैं।

फ्रायर माईनर धर्मसमाज के मिनिस्टर जेनेरल फा. मिखाएल पेररी जो दक्षिणी सूडान से हाल में रोम लौटे हैं वाटिकन रेडियो की पत्रकार लिंडा बोरडोनी से कहा, ″मैं सोचता हूँ कि हम इस समय जहाँ पर हैं लोग निश्चय ही जीवन और मृत्यु से जूझ रहे हैं। वे आशा और निराशा के बीच संघर्ष कर रहे हैं।″

उन्होंने दक्षिण सूडान में विभिन्न धर्मावलम्बियों के बीच संबंध को लचीला कहा जो गंभीर रूप से परीक्षण हेतु डाल दिये गये हैं, किन्तु वे अब भी आशा बनाये हुए हैं वे सूडान में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा हेतु प्रार्थना कर रहे हैं।


(Usha Tirkey)

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