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Archive for March 15th, 2017|Daily archive page

अंतराष्ट्रीय उदार संगठन के सदस्यों के लिए संत पापा का संदेश

In Church on March 15, 2017 at 3:59 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 15 मार्च 2017(सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने अंतराष्ट्रीय उदार संगठन की स्थापना के 400 वी वर्षगाठ के अवसर पर फ्राँस स्थित चाटिलोन-सुर-चालार्न में एकत्रित अंतर्राष्ट्रीय सभा के प्रतिनिधियों के लिए अपना संदेश भेजा।

संत पापा फ्राँसिस ने उदार संगठन के सदस्यों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, ″मैं आध्यात्मिक रुप से आपकी खुशी में शामिल हूँ। मैं आशा करता हूँ कि गरीबों के बीच ईश्वर की दया का साक्ष्य देने का यह सुन्दर मिशन आगे भी जारी रहेगा। इस सालगिरह के अवसर पर ईश्वर द्वारा प्राप्त कृपादानों के लिए धन्यवाद देते हुए वर्तमान में पवित्र आत्मा की पुकार को सुनते सुनें और दया के कार्यों को करने हेतु नये मार्ग में आगे बढ़ें।

संत विंसेंट के हृदय में गरीबों, असहाय और परित्यक्त लोगों के प्रति दया और करुणा की भावना जगी और उन्होंने उदार कार्यों की शुरुआत की। वे गरीबों के बीच कार्य करके, अपने लोगों के लिए ईश्वर की अच्छाई को प्रतिबिम्बित करना चाहते थे। उन्होंने दुःख सहते हुए येसु मसीह के प्रतिनिधि के रुप में गरीबों को देखा। वे समझ गये थे कि गरीब भी कलीसिया के निर्माण हेतु बुलाये गये हैं। उनकी उपस्थिति से हमारा मनपरिवर्तन होता है। संत विंसेंट ने गरीबों की देखभाल करने का भार लोकधर्मियों विशेषकर महिलाओं को सौंपा।

संत पापा ने कहा कि येसु ख्रीस्त के प्रेम को अपने व्यक्तिगत जीवन में अनुभव करते हुए उसी प्रेम से प्रेरित होकर गरीबों की सेवा करें। तथा ″दया का संस्कृति″ को समाज में लाने हेतु अपना योगदान दें।

गौरतलब है कि संत विंसेंट डी पॉल दवारा स्थापित पहले उदार संगठन में आज 150,000 लोकधर्मी 53 देशों में कार्यरत हैं। 12 से 15 मार्च तक आयोजित सभा की विषय-वस्तु है, ″ संत विन्सेंट के साथ 400 वर्ष, आम घर की ओर हमारी यात्रा।″


(Margaret Sumita Minj)

हमारा प्रेम निष्कपट हो

In Church on March 15, 2017 at 3:57 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार,15 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

हम येसु के द्वारा दिये गये संहिता के सबसे बड़े नियम से वाकिफ हैं जो हमें अपने ईश्वर को अपने सारे हृदय अपनी सारी आत्मा और अपनी सारी बुद्धि से प्रेम करने को कहता और अपने पड़ोसी को भी अपने समान प्रेम करने की आज्ञा देता है। (मत्ती.22.37-39) हम अपने जीवन में प्रेम और सेवा के कार्य हेतु बुलाये गये हैं। यह हमारे जीवन का सार है जो ख्रीस्तीय आशा की खुशी से जुड़ी हुई है।

संत पौलुस रोमियों को लिखे अपने पत्र में विश्वासी समुदाय से आगाह करते हुए कहते हैं कि हमारा प्रेम निष्कपट हो। हम अपने आप से पूछ सकते हैं कि ऐसा कब होता है? हम निश्चित तौर से कब यह कह सकते हैं कि हमारा प्रेम निष्ठा पूर्ण है, हमारे कार्य कब सच्चे हैं?

संत पापा ने कहा कि कपट हमारे जीवन के किसी भी क्षण में प्रवेश कर सकता है यहाँ तक कि हमारे प्रेम पूर्ण जीवन में भी। ऐसा तब होता है जब हमारा प्रेम व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित होकर रह जाता है। जब हम अपनी सेवा पूर्ण कार्य को अपनी संतुष्टि और स्वार्थसिद्धि हेतु करते हैं। जब हम अपने कार्यों के द्वारा अपनी बुद्धिमत्ता और अपनी क्षमताओं की नुमाइश करते हैं। संत पापा ने कहा इन सारी चीजों में हम एक वहम को पाते हैं जो यह घोषित करने की चेष्टा करता है कि हम अच्छे हैं, हमारे कार्य हमारे द्वारा संपादित किये जाते हों, मानो ये हमारे हृदय की उपज है। हमारा प्रेम पूर्ण कार्य हमारे लिए ईश्वर की कृपा है जो हमारे व्यक्तित्व को उजागर नहीं करता वरन यह ईश्वर से मिलने वाला एक दान है जिसके द्वारा हम अन्यों का अपने जीवन में स्वागत करते हैं। इसकी अभिव्यक्ति तब तक नहीं होती जब तक हम अपने जीवन में ईश्वर के कोमल और करुणामय चेहरे का अनुभव नहीं करते हैं।

संत पौलुस हमें अपने आप को एक पापी के रुप में देखने का निमंत्रण देते हैं क्योंकि हमारा प्रेम हमारे पापों से प्रभावित होता है। फिर इसके द्वारा आशा की घोषणा की जाती है क्योंकि येसु हमारे लिए मुक्ति का एक मार्ग खोलते हैं। यह हमारे लिए ईश्वर के नियम को अपने जीवन में अनुभव करने, उनके प्रेम का माध्यम बनने का अवसर प्रदान करता है। इसके द्वारा हम अपने हृदय को येसु के पुनरुत्थान से चंगा और नवीन होने देते हैं। पुनर्जीवित येसु जो हमारे बीच में निवास करते हमें हृदयों को चंगाई प्रदान करते हैं। वे हमारे हृदय कि निर्धनता के बावजूद हमारे साथ ऐसा करते हैं जिससे हम अपने जीवन में पिता के प्रेम और आश्चर्य का अनुभव कर सकें। संत पापा ने कहा कि यह ईश्वर हैं जो हमारे जीवन और हृदय में निवास करते हैं जिनके सहायता से हम अपने रोज दिन के जीवन में जरूरतमंद लोगों की सेवा कर पाते हैं।

संत पौलुस हममें आशा का संचार करते हुए संहिता की सबसे बड़ी आज्ञा को जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह हमारे लिए ईश्वर की कृपा है क्योंकि यह हमें इस बात की अनुभूति प्रदान करती है कि हम अपने आप में सच्चा प्रेम नहीं दिखा सकते हैं, हमें सदैव ईश्वर के साहचर्य की जरूरत है जिसके द्वारा वे हमारे हृदयों को अपनी असीम करुणा से नवीकृत करते हैं। इस तरह हम ईश्वर के कृपादानों से प्रेरित हो कर अन्यों का, छोटी चीजों का महत्व समझते और उनका सम्मान करते हैं। यह हमें ईश्वर में आनन्द और खुशी प्रदान करती है।
संत पापा ने कहा कि संत पौलुस हमें आशा में खुशी मनाने का आहृवान करते हैं क्योंकि हम यह जानते और अपने जीवन में अनुभव करते हैं कि सभी परिस्थितियों में यहाँ तक कि हमारे दुःख-दर्द, असफलताओं में भी ईश्वर का प्रेम हमें असफल होने नहीं देता है।
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें चालीसा काल की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 


(Dilip Sanjay Ekka)

जीवन को स्वीकार करने में ईश्वर का वचन मददगार, संत पापा फ्राँसिस

In Church on March 15, 2017 at 3:56 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 15 मार्च 2017 ( सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर पूरे विश्व के विश्वासियों को ईश्वर के वचनों को पढ़ने, आत्मचिंतन करने और उसे अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने संदेश में लिखा, ″ईश्वर के वचन हमें जीवन को स्वीकार करने और प्यार करने में हमारी मदद करता है विशेषकर कमजोरी और लाचारी के समय।″


(Margaret Sumita Minj)

श्रीलंकाई भिक्षुओं और धर्माध्यक्षों द्वारा धार्मिक परिषदों का प्रस्ताव

In Church on March 15, 2017 at 3:54 pm

कोलोम्बो, बुधवार, 15 मार्च 2017 ( वीआर सेदोक) : श्रीलंका के शीर्ष धार्मिक नेताओं ने राष्ट्रीय एकता और सुलह को बेहतर बनाने के लिए ‘धार्मिक परिषद’ की स्थापना के सुझाव नये संविधान को प्रस्तावित किया है।

बहुसंख्यक सिंहलियों और अल्पसंख्यक तमिलों के बीच का 30 वर्षीय गृह युद्ध सन् 2009 में समाप्त हुआ। राष्ट्रीय सह-अस्तित्व और राष्ट्रीय भाषाओं के मंत्री मानो गनेशान ने धार्मिक परिषद बनाने हेतु पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वे कैबिनेट में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करेंगे। सरकार इस साल नये संविधान को संसद के सामने पेश करेगी। मंत्री ने कहा कि वे संविधान का प्रारुप तैयार कर रहे हैं और अभी तक समाप्त नहीं हो पाई है।

एक बौद्ध भिक्षु बेलनविला विमलरथाना नायक थिरो ने कहा कि वे राष्ट्रीय एकता और सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए विभागीय, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक परिषदों की स्थापना का प्रस्ताव देते हैं।

कोलोम्बो के कार्डिनल मालकम रंजीत ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा, ″धार्मिक नेताओं को तमिल-प्रधान उत्तर और पूर्व में लोगों की मदद करने पर ध्यान देना चाहिए, जिन्होंने बहुत दुःख सहा है।″

सेवानिवृत एंग्लिकन धर्माध्यक्ष डुलिप डी चिरेरा ने कहा कि एक बेहतर अपराधिक न्याय प्रणाली भी देश में  शांति को बढ़ायेगी।


(Margaret Sumita Minj)

सोमालिया के संकट पर धर्माध्यक्ष बर्टिन

In Church on March 15, 2017 at 3:53 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार, 15 मार्च 2017 (वीआर सेदोक) : दो महीनों के अंतराल में कुपोषण से संबंधित बीमारियों ने दर्जनों बच्चों को मार दिया है। सोमालिया की राजधानी मोगाडीशु में केवल एक सरकारी अस्पताल है। भयानक सूखे ने सोमालिया को अकाल के कगार पर लाया है। वर्तमान में सोमालिया की आधी आबादी यानि 6.2 मिलियन लोगों को खद्यान सहायता की आवश्यकता है।

वाटिकन रेडियो के लीदिया ओकाने के साथ साक्षात्कार में मोगादिशू के प्रेरितिक प्रशासक धर्माध्यक्ष जोर्जो बेरटिन ने बताया कि सूखा और असुरक्षा के परिणामस्वरूप देश में लोगों को निराशाजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

विगत दो वर्षों से देश के कई भागों में बारिश नहीं हुई जिसकी वजह से कोई फसल नहीं हुई। लेकिन सोमालिया का गंभीर संकट सूखे की समस्या के साथ साथ असुरक्षा भी है।

उन्होंने कहा,″हालांकि देश में एक मान्यता प्राप्त सरकार है यह मोगादिशू का केवल एक हिस्सा और कुछ अन्य क्षेत्रों को नियंत्रित करता है इसलिए “वास्तविक संस्थानों की कमी इस भयानक स्थिति का दूसरा कारण है।”

वर्तमान संकट के प्रति कलीसिया की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर धर्माध्यक्ष बर्टिन ने कहा कि ‘करितास सोमालिया’ और इसके सहयोगी ‘सीआरएस’ और ट्रोकैयर तथा अन्य काथलिक उदार संगठन और कोनसोलाता धर्मबहनें लोगों की सेवा में कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि सोमालिया के लोग पशुपालन और उनका व्यापार करते हैं खेतों में भेड़, बकरियों और ऊटों को मरते देख जीवन से निराश हो गये हैं। उन्हें लगता है कि इसी तरह उन्हें भी मरना पड़ेगा।


(Margaret Sumita Minj)

सीरिया के बच्चों का निम्नतम जीवन स्तर, यूनीसेफ

In Church on March 15, 2017 at 3:51 pm

 

वाटिकन रेडियो, बुधवार, 15 मार्च 2017 ( वीआर सेदोक) : संयुक्त राष्ट्र बाल कोष  (यूनीसेफ) ने 13 मार्च को सीरिया में बच्चों के खिलाफ “गंभीर उल्लंघन” पर एक नया आकलन जारी किया। सीरिया में संघर्ष का यह छठा वर्ष है।

यूनिसेफ के ″निम्न स्तर को प्रहार″ नामक रिपोर्ट में सीरिया के बच्चों के खिलाफ हिंसा में आकस्मिक वृद्धि का उल्लेख किया गया है साथ ही उन्हें बाल सैनिकों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट में इन स्थितियों में बच्चों तक पहुंचने की कोशिश में सहायता एजेंसियों के सामने आने वाली कई समस्याओं का विवरण दिया गया है साथ ही नए आँकड़े भी दिये गये है जैसे कि सीरिया के 6 मिलियन से अधिक बच्चे अब जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता पर निर्भर हैं। 280,000 बच्चे भी स्थायी रूप से घेराबंदी में रह रहे हैं।

रिपोर्ट के समापन पर यूनिसेफ ने सीरिया के संघर्ष के लिए एक राजनीतिक समाधान, साथ ही बच्चों के खिलाफ हो रहे हिंसा के समापन, बाल शरणार्थियों और उनके परिवारों के शरण और आवास देने वाले मेजबानी सरकारों को सहायता मिलने की अपनी मांग का नवीकरण किया है।


(Margaret Sumita Minj)

काथलिकों द्वारा परमाणु खतरों से मुक्त भविष्य की योजना

In Church on March 15, 2017 at 3:49 pm

 

कोरिया, बुधवार, 15 मार्च 2017 (उकान) : कोरिया में परमाणु विरोधी समूह एक गैर-परमाणु कार्य सूची के प्रारुप को आने वाले चुनावों से आगे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए भेजा।

परमाणु ऊर्जा के खिलाफ तथा ऊर्जा की न्यायिक कार्रवाई हेतु काथलिकों और नागर पर्यावरण समूह ने मिलकर “परमाणु ऊर्जा मुक्त कोरिया” के योजना की घोषणा की।

उन्होंने अगली सरकार को 10 अल्पावधि कार्यों का प्रस्ताव दिया। जिसके तहत एक राष्ट्रीय ऊर्जा आयोग की स्थापना हो, कोई नया परमाणु ऊर्जा संयंत्र नहीं हो, पुराने परमाणु संयंत्रों का निलंबन हो और वर्तमान संयंत्र उर्जा को पुन: प्रयोज्य ऊर्जा में परिवर्तित किया जाये।

उन्होंने परमाणु कचरे के लिए नए प्रबंधन दिशानिर्देशों, परमाणु ऊर्जा के निर्यात को रोकने और परमाणु हथियारों के खिलाफ सिद्धांतों की पुष्टि सहित पांच मध्य और दीर्घकालिक कार्यों को भी चुना।

ये दोनों दल विशेषज्ञों के साथ बैठकर कार्य सूची के प्रारुप पर स्पष्टीकरण और सार्वजनिक सर्वेक्षण के बाद ही अंतिम रूप देंगे।


(Margaret Sumita Minj)

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