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कश्मीरी काथलिकों द्वारा ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के अंत हेतु प्रार्थना

In Church on March 16, 2017 at 3:39 pm

श्रीनगर, बृहस्पतिवार, 16 मार्च 2017 (ऊकान): काथलिकों ने भारत के तनाव ग्रस्त राज्य जम्मू एवं काश्मीर में विश्वास हेतु अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीयों के लिए एवं विश्व में हिंसा के अंत हेतु प्रार्थना सभा का आयोजन किया।

प्रार्थना सभा, मार्च महीने में संत पापा द्वारा मासिक प्रार्थना मनोरथ में किये गये उस आह्वान से प्रेरित होकर आयोजित की गयी थी जिसमें वे प्रार्थना द्वारा अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीयों के समर्थन की अपील करते हैं।

ऊका समाचार के अनुसार राज्य के 129 वर्षों पुरानी काथलिक कलीसिया के कुल 300 सदस्यों ने श्रीनगर में 12 मार्च को शांति हेतु प्रार्थना की।

मार्च महीने की मासिक प्रार्थना मनोरथ में संत पापा ने कहा है, ″प्रताड़ना के शिकार बने ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को सम्पूर्ण कलीसिया की प्रार्थना एवं भौतिक सहायता द्वारा समर्थन और शक्ति प्राप्त हो।″

प्रेम कुमार नामक एक स्थानीय काथलिक ने कहा, ″हम पढ़ते हैं कि सोमालिया, अफगानिस्तान तथा उत्तरी कोरिया में ख्रीस्तीय धर्मानुयायी किस तरह सताये जा रहे हैं। हमने देखा है कि कितने लोगों के सिर धड़ से अलग कर दिये जाते एवं उनके घर ध्वस्त कर दिये जाते हैं। किसी भी तरह से अतिवाद खतरनाक है।″

गैर-लाभ मंत्रालय खुले द्वार हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि वर्ष 2016 में विश्व भर में करीब 90,000 ख्रीस्तीय अपने विश्वास के कारण मार डाले गये हैं जबकि 200,000 से अधिक लोगों ने धार्मिक रूप से प्रेरित हिंसा या उत्पीड़न का अनुभव किया है।

लेखक मास्सिमो इंट्राविग्ने ने ईसाइयों को “दुनिया में सबसे अधिक सताए हुए धार्मिक समूह” कहा है।

श्रीनगर की प्रार्थना सभा में भाग लेने वाली लीला रिचार्ड ने कहा कि कश्मीर के ख्रीस्तीय हमेशा असहिष्णुता के बढ़ने के बारे में चिंतित रहते हैं। हमने देखा है कि ख्रीस्तीय और मुसलमान दोनों ही अपने विश्वासों को लेकर सताये जाते हैं। हमने इस तबाही के समाप्त होने के लिए प्रार्थना की है।

हॉली फैमिली गिरजाघर के पल्ली पुरोहित रोय मैंथ्यू ने ऊका समाचार से कहा कि उन्होंने न केवल ख्रीस्तीयों के लिए बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए प्रार्थना की है जो अपने विश्वास के कारण निशाना बनाये जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह देखना बेहद दुखद है कि निर्दोष, मौत के घाट उतारे जाते, सताये जाते तथा अपने धर्म के कारण बलत्कार के शिकार होते हैं।

जम्मू तथा काश्मीर में विगत 30 सालों में बहुत अधिक हिंसा हुई है जिसमें लगभग 100,000 लोगों की मौत हुई है। विभिन्न दलों द्वारा भारतीय शासन से स्वतंत्रता के लिए एक सशस्त्र संघर्ष में अनेक आम नागरिकों, आतंकवादियों और सेनाओं की मृत्यु हुई है।

राज्य के कुल 12.5 मिलियन लोगों में 60 प्रतिशत मुसलमानों की है जबकि 30 हिन्दुओं की, ख्रीस्तीयों की संख्या लगभग 35,000 है जिसमें से आधे काथलिक हैं।

 


(Usha Tirkey)

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