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गरीबों के प्रति उदासीनता भ्रष्टाचार, संत पापा

In Church on March 16, 2017 at 3:47 pm

 

संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा

16/03/2017 16:20

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 17 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): हम पाप के उस रास्ते पर नहीं चलने के लिए सजग रहें जो भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है। यह चेतावनी संत पापा ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में दी।

संत पापा ने प्रवचन में संत लूकस रचित सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु धनी आदमी एवं गरीब लाजरूस का दृष्टांत सुनाते है।

अपने शहरों एवं आसपास के गरीबों तथा आवासहीनों की उपेक्षा करने से बचने हेतु संत पापा ने ईश्वर से प्रार्थना की, ″हे प्रभु तू मेरे हृदय की थाह ले तथा मुझ पर दृष्टि डाल ताकि मैं बुराई के पथ पर न चलूँ, मुझे अनन्त जीवन के मार्ग पर ले चल।″

उन्होंने बाईबिल के प्रथम भजन पर ध्यान आकृष्ट करते हुए स्मरण दिलाया कि जो व्यक्ति,  भौतिक चीजों, मानवीय ताकतों और अपनी शक्ति पर भरोसा रखता है, घमंड, अभिमान एवं धन पर विश्वास करता है वह ईश्वर से दूर चला जाता है। उन्होंने कहा कि जो प्रभु पर भरोसा रखता है वह हरे-भरे खेल की तरह है जबकि अपनी शक्ति और धन पर भरोसा रखने वाला जोखिम के रास्ते पर आगे बढ़ता है।

संत पापा ने कहा, ″जब एक व्यक्ति अपने बंद परिवेश में जीता है, अपनी संम्पति की गंध को ही सांस लेता है, अपने घमंड से संतुष्ट रहता है, अपने आप में भी भरोसा और सुरक्षा महसूस करता है तब वह अपनी दिशा खो चुका है वह नहीं जानता है कि सीमाएँ कहाँ हैं। यही सुसमाचार पाठ के दृष्टांत में निहित धनी व्यक्ति के साथ हुआ। उसने भोजों में समय व्यतीत किया किन्तु अपने द्वार पर पड़े गरीब की कोई परवाह नहीं की।

संत पापा ने कहा कि वह उस गरीब को पहचानता था किन्तु उसकी कोई परवाह नहीं की, अतः वह एक पापी आदमी था। उन्होंने कहा किन्तु पापी भी वापस सही रास्ते पर आ सकता है जिसके लिए उसे प्रभु से क्षमा मांगना होगा। यहाँ धनी व्यक्ति मृत्यु तक पश्चाताप नहीं किया, फल यह हुआ कि वह वहाँ से कभी वापस नहीं लौट सका। संत पापा ने कहा कि एक विराम है, एक सीमा है जिसको पार करने के बाद व्यक्ति को वापस लौटने में कठिनाई होती है और वह सीमा है भ्रष्टाचार। वह धनी व्यक्ति पापी नहीं किन्तु भ्रष्टाचारी था क्योंकि उसने लाजरूस की अत्यन्त दयनीय दशा देखकर भी खुश था और उस पर जरा भी रहम नहीं किया।

हम क्या अनुभव करते हैं जब रास्ते पर एक बेघर व्यक्ति को देखते हैं? बच्चों को भीख मांगते पाते हैं? उन्होंने कहा कि वे बेघर, गरीब, उपेक्षित हैं क्योंकि उनके पास घर का किराया चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं, वे बेरोजगार हैं? किन्तु वे भी शहर के ही निवासी हैं। संत पापा ने कहा कि यदि हम उन्हें देखकर यूँ ही पार हो जाते हैं तो हम अच्छे रास्ते पर नहीं चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमें सजग रहना चाहिए ताकि हम पाप से भ्रष्टाचार के रास्ते पर न फिसल जाएँ। जब अस्पताल में बम गिराया जाता है और कई लोग मर जाते एवं घायल होते हैं तो हम उनके लिए छोटी प्रार्थना करते हुए, फिर बाद में सामान्य व्यवहार करने लगते हैं मानो की कुछ भी नहीं हुआ है तब हमारा हृदय उसी धनी व्यक्ति के समान हो जाता है जिसने लाजरूस को देखकर उसकी मदद नहीं की।

संत पापा ने विश्वासियों को प्रार्थना करने की सलाह दी ताकि हम अपने हृदय पर निगरानी रख सकें एवं गलत रास्ते पर आगे बढ़ने से बचें।


(Usha Tirkey)

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