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संघर्ष का अंत एवं मानव तस्करी पर रोक लगाना आवश्यक, परमधर्मपीठ

In Church on March 16, 2017 at 3:44 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 17 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): परमधर्मपीठ ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह मानव तस्करी के संकट के खिलाफ संघर्ष में अपनी बड़ी भूमिका निभाये।

अमरीका में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नादितो औज़ा, न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में सुरक्षा परिषद के खुले वाद- विवाद में अपना वक्तव्य पेश कर रहे थे जिसकी विषयवस्तु थी, ″संघर्षपूर्ण स्थितियों में व्यक्तियों की तस्करी- बंधुआ मजदूरी, गुलामी और अन्य कुप्रथाएँ।″

संयुक्त राष्ट्र के नौंवे महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने विवाद का शुभारंभ किया तथा मानव तस्करी को एक वैश्विक और बड़े पैमाने का मुद्दा कहा।

उन्होंने कहा, ″तस्करी वैश्विक स्तर पर फैल चुका है″ तथा बतलाया कि इसके शिकार विश्व के 106 देशों में पाये जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट अनुसार विश्व के 21 मीलियन लोग बंधुआ मजदूरी के शिकार हैं तथा बुरी तरह से शोषण के पंजे में हैं।

गुटेरेस ने कहा कि इन आँकड़ों के अलावा मानव के रास्ते पर जीवन को संकीर्ण किया जाता है, परिवार एवं समाज विभाजित होकर बिखर रहे हैं। मानव अधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि महिलाएँ एवं बालिकाएँ खास रूप से इसकी शिकार हो रही हैं। मानव तस्करी के अनेक रूप मजबूर वेश्यावृत्ति, मजबूर विवाह और यौन गुलामी जैसे घिनौने यौन शोषण को हम देख सकते हैं।

महाधर्माध्यक्ष बेर्नादीतो औज़ा ने 15 मार्च को विवाद में कहा कि सुरक्षा परिषद को मानव तस्करी दूर करने हेतु मुख्य भूमिका निभानी चाहिए, विशेषकर, तस्करी एवं सशस्त्र संघर्षों की कठोरता के बीच गहरे संबंध को पहचानते हुए।

औज़ा ने कहा, ″व्यक्तियों की तस्करी की चुनौती ने विकराल रूप ले लिया है और एक उचित प्रतिक्रिया की मांग कर रहा है जबकि चुनौती के अनुपात में प्रत्युत्तर आज भी बहुत दूर है।″ उन्होंने कहा कि इसके लिए लोगों में जागृति तथा प्रभाव बढ़ाने हेतु सरकारों, न्यायपालिका, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लाखों बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को बचाने के प्रयासों का एक बेहतर समन्वय, जो अभी भी स्वतंत्रता से वंचित हैं और दास जैसी स्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं, बहुत कुछ किया जाना बाकी है।


(Usha Tirkey)

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