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संत पापा करेंगे मिस्र की प्रेरितिक यात्रा

In Church on March 18, 2017 at 4:40 pm

 

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस 28 से 29 अप्रैल 2017 को मिस्र की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक एवं वाटिकन प्रवक्ता ग्रेग बर्क ने 18 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, ″मिस्र के राष्ट्रपति, काथलिक धर्माध्यक्षों, कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय तथा ग्रांड ईमाम अल अजहर शेख अहमद मुहम्मद एल तायिब के  निमंत्रण को स्वीकारते हुए, संत पापा फ्राँसिस अरब गणराज्य के मिस्र में 28 से 29 अप्रैल 2017 को प्रेरितिक यात्रा करेंगे। वे वहाँ काईरो का भी दौरा करेंगे। यात्रा का कार्यक्रम थोड़े समय में प्रकाशित किया जाएगा।″

मिस्र की यह प्रेरितिक यात्रा, इटली के बाहर संत पापा की 18वीं प्रेरितिक यात्रा होगी।


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने पश्चाताप की धर्मविधि का नेतृत्व किया

In Church on March 18, 2017 at 4:37 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 18 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 17 मार्च को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चाताप की धर्मविधि का अनुष्ठान किया जिसमें उन्होंने खुद पाप- स्वीकार किया तथा करीब 50 मिनट तक अन्य विश्वासियों के पापस्वीकार सुने।

धर्मविधि के दौरान संत पापा ने 7 विश्वासियों के पाप स्वीकार सुने, जिनमें तीन पुरूष थे और चार महिलाएँ। वे सभी लोकधर्मी थे।

वाटिकन सूत्रों के अनुसार नवीन सुसमाचार प्रचार हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति ने विश्वभर के  गिरजाघरों से ″प्रभु के लिए 24 घंटे″ का आह्वान किया है जिसका प्रत्युत्तर विभिन्न धर्मप्रांत 24 एवं 25 मार्च को देंगे।

पश्चाताप की धर्मविधि जिसे ″प्रभु के लिए 24 घंटे″ भी कहा जाता है चालीसा काल में संत पापा के नेतृत्व में की जाने वाली वह धर्मविधि है जिसमें ख्रीस्तीय विश्वासी सामूहिक रूप अपने पापों के लिए क्षमा की याचना करते तथा मेल- मिलाप संस्कार में भाग लेते हैं जो पास्का की तैयारी हेतु एक महत्वपूर्ण धर्मविधि है।

पश्चाताप की धर्मविधि का नेतृत्व करते हुए संत पापा ने उपदेश के बजाय मौन प्रार्थना में व्यतीत किया।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने सेमारंग महाधर्मप्रांत हेतु नये महाधर्माध्यक्ष की नियुक्ति की

In Church on March 18, 2017 at 4:35 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने माननीय फा. रोबेरतुस रूबीयातमोको को इंडोनेशिया के सेमारंग महाधर्मप्रांत हेतु नया महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया।

सेमारंग महाधर्मप्रांत हेतु नये महाधर्माध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा शनिवार 18 मार्च को संत पापा फ्राँसिस ने की।

नवनियुक्त महाधर्माध्यक्ष रोबेरतुस का जन्म 10 अक्तूबर 1963 ई. में सेमारंग में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 12 अगस्त 1992 में हुआ। उन्होंने 1993 से 1997 तक रोम के परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय से कलीसिया के कानून की पढ़ाई पूरी की है।

उन्होंने कई प्रेरितिक क्षेत्रों में अपनी सेवा प्रदान की है, वे सन् 1992 से 1993 ई. तक पाकेम के संत मरिया असुनता गिरजाघर के सहायक पल्ली पुरोहित रहे।

सन् 1998 ई. से वे योग्याकार्टा के ईशशास्त्र विभाग में शिक्षक तथा संत पॉल मेजर सेमिनरी में आध्यात्मिक संचालक का कार्यभार सँभाला। वे 2011 में सेमारंग महाधर्मप्रांत में न्यायिक विकर के रूप में चुने गये थे।

सेमारंग महाधर्मप्रांत का क्षेत्रफल 21,196 वर्ग किलोमीटर है तथा वहाँ की कुल आबादी 2,28,37,382 है जिसमें काथलिकों की कुल संख्या 4,04,269 है। महाधर्मप्रांत में कुल 98 पल्लियाँ हैं। वहाँ 399 पुरोहित, 221 धर्मसमाजी, 1162 धर्मबहनें तथा 60 गुरूकुल छात्र हैं।

सेमारंग महाधर्मप्रांत 10 नवम्बर 2015 को महाधर्माध्यक्ष जोन्नास मरिया के इस्तिफा देने के बाद से ही रिक्त था।


(Usha Tirkey)

इंस्टाग्राम में संत पापा की उपस्थिति के 1 वर्ष

In Church on March 18, 2017 at 4:33 pm

 

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 मार्च 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा के इंस्टाग्राम में जुड़ने का 17 मार्च को एक साल पूरा हुआ। वाटिकन संचार सचिवालय के सचिव मोनसिन्योर लुचियो अद्रियन रूइज ने वाटिकन रेडियो से बातें करते हुए “डिजिटल महाद्वीप” में सुसमाचार प्रचार हेतु संत पिता के विचार की उत्पत्ति की याद की।

उन्होंने कहा, ″इसकी उत्पति का विचार उस समय आया जब केविन (इंस्टेग्राम के उप-संस्थापक) ने संत पाप से मुलाकात की, जिनका मुख्य उद्देश्य था एक तस्वीर के माध्यम से संदेश भेजना।″ रूईज ने कहा कि संत पापा ने इस तथ्य का उत्तर दिया है कि कलीसिया ने तस्वीरों के माध्यम से लोगों के करीब होने का एहसास किया है और साथ ही, वह धर्मशिक्षा के लिए भी तस्वीरों का प्रयोग करती है। संत पापा ने कलीसिया की चित्रकारी (पेंटिंग) के बारे कहा कि यह एक महत्वपूर्ण अनुभूति है।″

वाटिकन सचिवालय के सचिव ने कहा कि संत पापा के लिए तस्वीर बहुत महत्वपूर्ण है विशेषकर, बच्चों से मुलाकात करते समय जब बच्चे शर्माते हैं तब संत पापा तस्वीर दिखाकर उनसे बातें करते हैं जिसको बच्चे ध्यान से सुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि संत पापा तस्वीर को, संवाद के लिए एक पहुँच बिंदु के रूप में देखते हैं।

संचारक खासकर, काथलिक संचारक संत पापा के संचार के तरीके से क्या सीख सकते हैं, इसके  जवाब में मोन्सिन्योर ने कहा, ″हम डीजिटल संस्कृति में जी रहे हैं। संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें के शब्दों में, एक डीजिटल महादेश है, एक सच्चाई है, जिसमें हमें प्रवेश करना एवं जीना है क्योंकि मनुष्य यदि वहाँ है कलीसिया वहाँ पहुँचने से नहीं चूक सकती। उसे उसी गतिशीलता से आगे बढ़ना चाहिए जिस गतिशीलता से मिशनरियों ने दूसरे महादेशों एवं अन्य वास्तविकताओं की खोज की।


(Usha Tirkey)

कलीसिया द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस की स्थापना

In Church on March 18, 2017 at 4:32 pm

 

बैंगलोर, शनिवार, 18 मार्च 2017 (फिदेस): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के युवा आयोग ने राष्ट्रीय युवा दिवस की स्थापना की, जिसके तहत प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के प्रथम रविवार को राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन किया जाएगा जो भारत के सभी काथलिक युवाओं को एक साथ लायेगा तथा सुसमाचार का साक्ष्य देने हेतु अवसर प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य यह भी है कि इस के माध्यम से विभिन्न धर्मप्रांतों के युवाओं को आध्यात्मिक रूप से बढ़ने में मदद दिया जा सके।

फिदेस को मिली जानकारी के अनुसार आयोग ने धर्मप्रांत के युवा प्रेरिताई हेतु एनिमेटरों के लिए वाद-विवाद एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसे 2017 एवं 2018 में भी जारी रखा जायेगा।

जलांधर के धर्माध्यक्ष फ्रांको मुलाक्कल जो काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के राष्ट्रीय युवा आयोग के अध्यक्ष हैं उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि मार्च महीने के आरम्भ में आयोग ने युवाओं के लिए कार्यक्रम तैयार किया गया जिनमें राष्ट्रीय युवा दिवस भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि हर धर्मप्रांत में काथलिक युवाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे जिसका भार धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष एवं काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के युवा आयोग को है।

युवाओं के लिए अन्य कार्यक्रम है, सातवें एशियाई युवा दिवस में भाग लेना जो इंडोनेशिया में 30 जुलाई से 9 अगस्त 2017 तक आयोजित किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इस अवसर पर 29 देशों के करीब 3,000 प्रतिभागी एकत्रित होंगे।

सातवें एशियाई युवा दिवस की विषय वस्तु होगी, ″प्रफुलित एशियाई युवा : बहुसांस्कृतिक एशिया में सुसमाचार को जीते हुए।″

इसका मुख्य उद्देश्य है एशिया के युवाओं को एकात्मता की संस्कृति में जीने हेतु प्रोत्साहन एवं साथ देना तथा उन्हें एशिया के बहुसांस्कृतिक और बहुसंख्यक समाजों में एक-दूसरे के साथ मुलाकात करने हेतु प्रेरित करना।


(Usha Tirkey)

ऑनलाइन पद्धति द्वारा प्रवासियों की मदद हेतु कलीसिया का प्रयास

In Church on March 18, 2017 at 4:30 pm

 

नई दिल्ली, शनिवार, 18 मार्च 2017 (ऊकान): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के श्रमिकों की मदद करने वाले विभाग ने प्रवासियों की सुरक्षा एवं संकटकालीन स्थिति में उनकी मदद करने हेतु ऑनलाईन पद्धति की व्यवस्था की है।
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल बेसलियोस क्लेमिस ने 15 मार्च को नई दिल्ली में वेब आधारित, प्रवासी आँकड़ा प्रबंधन प्रणाली जारी करते हुए कहा, ″यह उन प्रवासियों की रक्षा करने का मार्ग प्रशस्त करेगा जो नौकरी खोजने के लिए गाँवों को छोड़ शहर की ओर आते हैं। यह गाँवों और शहरों के बीच सम्पर्क को बढ़ाने में मदद करेगा जो प्रवासी श्रमिकों का आधार है। यह उन्हें सरकार और कलीसिया से भी जानकारी प्रदान करेगा। “
श्रमिक देशभर के विभिन्न काथलिक धर्मप्रांतों के 78 केंद्रों में अपना नामांकन करा सकते हैं, जहाँ उन्हें अपना पता, जन्म स्थान तथा कार्य स्थल का पता दर्ज करना होगा।
कार्डिनल ने जानकारी दी कि नामांकन के अलावा, इसके द्वारा प्रवासियों को प्रेरितिक सहायता, कल्याण सेवाएँ तथा परामर्श भी मुहैया करायी जायेंगी।
राष्ट्रीय सर्वेक्षण कार्यालय के मुताबिक, भारत में आंतरिक प्रवासियों की संख्या 309 मिलियन है, जिनमें से अधिकतर आर्थिक कारणों से घर से दूर रहते हैं।
छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, बिहार, राजस्थान तथा उत्तरप्रदेश देश के प्रमुख राज्य हैं जहाँ से लोग बड़े शहरों की ओर काम की खोज में जाते हैं और जो मुख्यतः निर्माण कार्यों, घरेलू कार्यों, वस्त्र कारखानों, ईंट भट्टों, परिवहन और कृषि कार्य में लगाये जाते हैं।
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के श्रमिक भाग के सचिव जेइसन वडासेरी ने कहा, ″उन्हें अक्सर भोजन, आवास, पेयजल, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और बैंकिंग सेवा आदि तक पहुंचने सहित, मूलभूत अधिकारों से वंचित होना पड़ता है। वे बहुधा सामाजिक सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा से रहित खराब स्थितियों में काम करते हैं।″
उन्होंने कहा कि हालांकि भारत में लाखों प्रवासी हैं, लेकिन उनके आंदोलनों और संपर्क विवरणों को प्रलेख करने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। जब लोग विस्थापन करते हैं, तब उन्हें कुछ नियम और प्रलेखन की आवश्यकता होती है। प्रवास अच्छा है, यदि यह संरचित और सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि नई प्रणाली इन श्रमिकों के लिए यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि वे तस्करी या शोषण के शिकार न हों। इसके अलावा किसी भी कठिनाई के मामले में, वे सुविधा केंद्रों पर रिपोर्ट कर सकें।


(Usha Tirkey)

एक अच्छा दण्डमोचक होने हेतु प्रार्थना अति आवश्यक है, संत पापा फ्रांसिस

In Church on March 18, 2017 at 12:41 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 17 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने मेल-मिलाप की प्रेरिताई द्वारा आयोजित कार्यशाला में सहभागी हुए याजकों को संबोधित करते हुए “एक अच्छा दण्डमोचक”  बनने हेतु तीन बातों पर बल दिया।

संत पापा ने प्रतिभागियों को अपने संबोधन में कहा कि मैं मेल-मिलाप की ऐसी सभा को पसंद करता हूँ क्योंकि यह करुणा का दरबार है जो दिव्य करुण में हमारी आत्मा को एक अपरिहार्य औषधि प्रदान करता है। आप की यह संगोष्ठी वर्तमान समय में अति उपयोगी और आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सहभागी होते हुए कोई अच्छा पापस्वीकार सुनने वाला नहीं बन सकता है वरन इसे हम जीवन भर सीखते हैं।

इस विषय पर उन्होंने तीन बातों पर बल देते हुए कहा कि ईश्वर का दण्डमोचक सर्वप्रथम भला गरेडिया येसु का एक अच्छा मित्र होता है। उसकी मित्रता के बिना वह अपने जीवन में पितातुल्य स्वभाव का विकास नहीं कर सकता जो मेल-मिलाप की धर्म विधि हेतु आवश्यक है। येसु के संग मित्रता में प्रवेश करते का अर्थ अपने प्रार्थनामय जीवन के प्रति निष्ठावान बने रहना है। अपने व्यक्तिगत प्रार्थना के द्वारा हम उनसे प्रेरिताई उदारता की कृपा माँग करें जिसके द्वारा हम दण्मोचन की याचना करने वालों को ईश्वरीय करुणा का एहसास दिला सकें।

मेल-मिलाप के प्रेरितिक कार्य में प्रार्थना हम नासमझी से ऊपर उठते हुए दूसरों के लिए ईश्वर की करुणा का स्रोत बनते हैं। पुरोहित जो प्रार्थनामय जीवन व्यतीत करता सर्वप्रथम अपने को पापी और ईश्वरीय क्षमा का पात्र समझता है। यह हमारे जीवन से कठोरता को दूर करती जो पापों को नहीं वरन पापी को रोके रखती है।

उन्होंने कहा कि प्रार्थना में हमें एक घायल हृदय को समझने की कृपा मांगने की जरूरत है जिससे  हम उसके प्रति करुणावान बन सकें और उसे क्षमा प्रदान कर सके जैसे कि भले समारी ने घायल व्यक्ति के घावों पर करुणा का तेल उड़ेला था। (लूका. 10.34)

प्रार्थना में हमें नम्रता रूपी बहुमूल्य गुण हेतु विनय करने की जरूरत है क्योंकि इसके द्वारा क्षमा का एक ईश्वरीय दिव्य उपहार हमारे द्वारा अन्यों के जीवन में प्रवाहित होता है जिसके फलस्वरूप येसु प्रसन्नचित्त होते हैं।

प्रार्थना में हमें पवित्र आत्मा का आहृवान करने की जरूरत है जिसके द्वार हम आत्माओं की पहचान करते हुए करुणावान बनते हैं। पवित्र आत्मा हमें एक पश्चातापी दुःखी हृदय के प्रति सहानुभूति के भाव रखते हुए उसके संग विवेकपूर्ण ढंग से पेश आने को मदद करता है जो पापों के कारण अपने को दबा हुआ पाता है।

दूसरा एक अच्छा दण्डमोचक आत्माओं की पहचान करने वाला होता है। इसके द्वारा हम अपनी योजना को पूरा नहीं करते और न ही अपनी शिक्षा को लोगों के साथ साझा करते हैं। एक पुरोहित के रुप में हम कलीसिया रूपी समुदाय में केवल ईश्वर की योजना को पूरा करने हेतु एक सेवक के रुप में बुलाये गये हैं।

आत्माओं की परख हमारी आंखों और हृदय को खोलती है जिसके द्वारा हम उन्हें मदद करते हैं जो अपनी अंतःकरण को ईश्वरीय ज्योति, शांति और करुणा हेतु खोलते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए आवश्यक है क्योंकि जो दण्डमोचन हेतु आते वे विभिन्न तरह की परिस्थितियों के शिकार होते हैं जिन्हें हमें परखने की जरूरत है।

और तीसरा दण्डमोचन स्थल सच्चे रुप में सुसमाचार प्रचार का स्थल है क्योंकि यहाँ लोगों का मिलन ईश्वर और उनकी करुणा से होता है। वे पापों की क्षमा द्वारा ईश्वर के चेहरे को शांति, दिलासा और खुशी के रुप में देखते हैं।

इस तरह अपने संबोधन के अंत में संत पापा ने कहा कि एक अच्छा दण्डमोचक बनने हेतु हमें येसु के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की जरूरत है जिससे हम लोगों में आत्माओं के प्रभाव को जान सकें और उनके लिए प्रार्थना करते हुए उनका मेल ईश्वर से करा सकें।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा फ्रांसिस द्वारा “चौबीस घंटे येसु के लिए” पश्चाताप धर्म विधि की अगवाई

In Church on March 18, 2017 at 12:39 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 17 मार्च 2017 (वी आर) संत पापा फ्राँसिस वाटिकन में “24 घंटे येसु हेतु” पश्चाताप की धर्म विधि की अगवाई करेंगे।

धर्म विधि का अनुष्ठान शुक्रवार 17 मार्च को समापन होगा जिसके अंतर्गत नवीन सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय ने विश्व के सभी कलीसियाओं को पापस्वीकार संस्कार का संचालन करने हेतु निवेदन किया है। विदित हो कि इस वर्ष की विषयवस्तु संत मत्ती रचित सुसमाचार पर आधारित “मैं दया चाहता हूँ” है।  (मत्ती.9.13)

24 मार्च शुक्रवार को संत मरिया तस्ततेवेर और संत फ्राँसीस का संटीगमाटा गिरजाघर को शाम के 8 बजे से पापस्वीकार और पवित्र यूख्रारीस्त की आराधना हेतु खोला जायेगा। 25 मार्च को सासिया के पवित्र गिरजाघर में संध्या 5 बजे धन्यवाद की आराधना विधि समापन की जायेगी। नवीन सुसमाचार के प्रचार हेतु गठित परमधर्मापीठीय समिति के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष रीनो फिसीकेला चालीसा काल के चौथे रविवार का मिस्सा बलिदान समापन करेंगे। इस दौरान विश्व के तमाम लोगों से आग्रह किया गया है कि वे “24 घंटे येसु के लिए” हैशचैग का उपयोग करते हुए इस पहल को सफल बनाये।


(Dilip Sanjay Ekka)

पुरोहितों का प्रशिक्षण एक साझा उत्तरदायित्व है, अक्करा के धर्माध्यक्ष

In Church on March 18, 2017 at 12:37 pm

घाना, शुक्रवार, 17 मार्च 2017 (वीआर) पुरोहितों का उचित और समुच्चित प्रशिक्षण अभिभावकों, स्वयं धर्मबंधुओं और कलीसिया का एक साझा उत्तरदायित्व है उक्त बातें अक्करा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स गब्रियेल पामर-बकले ने घाना के केप कोस्ट, संत पेत्रुस काथलिक गुरूकुल में “घाना की कलीसिया में पुरोहिताई की 60वीं वर्षगाँठ और अन्तराष्ट्रीय कलीसिया में उनकी जिम्मेदारी”  विषयवस्तु पर अपने संदेश के दौरान कही।

घाना के 60वीं स्वतंत्रता वर्षगाँठ के अवसर पर उन्होंने पुरोहिताई उम्मीदवार और लोकधर्मियों के समुदाय को अपने संदेश के दौरान कहा कि यह माता-पिता का प्रमुख उत्तरदायित्व है कि वे धर्मबंधुओं को अच्छी शिक्षा प्रदान करें, इसके साथ ही यह पुरोहिताई के उम्मीदवार का एक उत्तरदायित्व है कि वह अपने समुचित प्रशिक्षण का ध्यान रखते हुए अपने में समर्पित रहे जिससे वह सही अर्थ में ईश्वर के कार्यों का सच्चा प्रतिनिधि बन सके।

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि ये माता-पिता हैं जो अपने बच्चों को सर्वप्रथम शिक्षा देते हैं जिन्हें समाज, राज्य और कलीसिया आगे चलकर निखारती है और अगवाई हेतु तैयार करती है। उन्होंने कहा कि हम पवित्र आत्मा के द्वारा संचालित किये जाते और पुरोहिताई, धर्मसमाजी या वैवाहिक जीवन जीने का चुनाव करते हैं। “एक साझा उत्तरदायित्व के रुप में यह फसल के स्वामी, ईश्वर से प्रार्थना के द्वारा शुरू होती है जो अपने मजदूरों को अपनी दाखबारी में कार्य करने हेतु भेजते हैं।”


(Dilip Sanjay Ekka)

विश्व के नेताओं से सीरिया में युद्ध विराम का आहृवान

In Church on March 18, 2017 at 12:35 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 17 मार्च 2017 (वी आर) छः वर्षों से चली आ रही सीरिया में युद्ध की क्रूर स्थिति ने देश को निगल लिया है। सीरिया में ख्रीस्तीय सहायता सेवा की सलाहकार अधिकारिणी मैरेड कोलिन्स बतलाया कि विश्व ने नेताओं से आग्रह किया गया है कि वे सीरिया में युद्ध विराम हेतु पहल करें।

वाटिकन रेडियो की संवाददाता लीदिया ओकाने को दिये गये साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि देश में युद्ध की स्थिति के कारण लोगों का जन जीवन तार-तार हो गया है वे राजनीति स्थिति में सुधार के बदले अपने वर्तमान जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ने हेतु चिंतित दिखते हैं। उन्होंने कहा, “देश में मानवीय जीवन निर्वाह की समस्याएँ निरंतर बनी हुई हैं जिन्हें युद्ध की स्थिति के कारण  नजरअंदाज किया जा रहा है।”

कोलिन्स ने कहा की आगामी महीना बूसेल्स में सीरिया और उनके प्रान्तों की सहायता पर एक सम्मेलन आयोजित किया जायेगा जिसके द्वारा हम आशा करते हैं कि काथलिक सहायता समूह युद्ध प्रभावित लोगों की सहायता हेतु और कुछ ठोस कदम उठा पायेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि देश में कई दल हैं जो कई अन्तराष्ट्रीय समर्थकों के विरुद्ध लड़ाई में संलग्न हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी देश के लोगों में आशा बनी हुई है और बुसेल्स का सम्मेलन उनकी आशों में खरा उतरने की कोशिश करेगा।

विदित हो की संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों के अनुसार 13.5 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है जबकि 4.6 मिलियन लोग युद्ध की जटिल स्थित में अब तक पड़े हैं जिनके बीच नहीं पहुँचा जा सका है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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