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संत पापा ने सोमास्कन पुरोहितों से मुलाकात की

In Church on March 30, 2017 at 2:43 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 मार्च 2107 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 30 मार्च को वाटिकन स्थित सामान्य लोकसभा परिषद भवन में सोमास्कन पुरोहितों की सर्वोच्च आम सभा में भाग ले रहे 50 सदस्यों से मुलाकात की।

उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा कि वे सुसमाचार से प्रेरित होकर संस्थापक की विशिष्टता को कलीसिया एवं समाज में आज की परिस्थिति के अनुसार लागू करने के लिए बुलाये जा रहे हैं।

उन्होंने सोमास्कन धर्मसमाज के संस्थापक जिरोलामो एमिलियानी के विचारों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वे हमें इसलिए प्रभावित करते हैं क्योंकि उन्होंने उदार कार्यों द्वारा कलीसिया में सुधार को समर्थन दिया। उनकी पहली योजना थी कि सुसमाचार के प्रति निष्ठा में अपने आपका सुधार करना, फिर ख्रीस्तीय समुदाय का एवं समाज का, जिससे निम्न समझे जाने वाले तथा हाशिये पर जीवन यापन करने वाले लोगों की अनदेखी न हो बल्कि उन्हें बचाया जाए तथा उनके समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके।

संत पापा ने सभी सदस्यों से कहा, ″मैं प्रोत्साहन देता हूँ कि आप मूल प्रेरणा के प्रति विश्वस्त बने रहें तथा घायल मानवता एवं उपेक्षित लोगों की सेवा हेतु सुसमाचार के उन मनोभावों को धारण करें जो मानवता को ख्रीस्त की नज़रों से देखने के द्वारा उत्पन्न होता है।″ उन्होंने कहा कि सबसे बढ़कर उनकी बुलाहट की विशेषता है अंतिम समझे जाने वाले लोगों की सेवा करना। विशेषकर, अनाथ तथा परित्यक्त युवाओं की। इसके लिए उन्होंने संस्थापक की शिक्षा प्रणाली को अपनाने की सलाह दी जो व्यक्ति पर केंद्रित है, उसकी प्रतिष्ठा पर तथा उसके बौद्धिक और शारीरिक कौशल के विकास पर।

संत पापा ने सोमास्कन पुरोहितों की प्रेरिताई को सुसमाचार के अनुसार और लोगों की परिस्थितियों के अनुरूप करने के लिए उनके भौगोलिक और उनके अस्तित्व की विभिन्न प्रकार की सीमाओं पर ध्यान देने की बात कही। इसके लिए उन्होंने परिस्थिति के अनुसार पुरानी विचारधारा एवं संरचनाओं को नवीकृत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संरचनाएँ बहुधा गलत सुरक्षा प्रदान करती हैं तथा कारिज्म एवं ईश्वर के राज्य विस्तार में बाधक बनते है।

संत पापा ने बच्चों एवं युवाओं की प्रेरिताई हेतु सोमास्की के लोकधर्मी सदस्यों को अधिक से अधिक संलग्न करने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार, बाल-सुरक्षा, युवाओं के अधिकार, बाल श्रम से सुरक्षा, शोषण एवं तस्करी की समस्याओं का उन्मूलन जिसे सुसमाचार की मुक्तिदायी शक्ति द्वारा सामना किया जाना चाहिए, साथ ही साथ, आवश्यक क्षमताओं एवं उपकरणों का भी प्रयोग किया जाना चाहिए।

संत जिरोलामो की दूसरी विशेषता का स्मरण दिलाते हुए संत पापा ने कहा कि वे लूथर के समकालीन थे जिन्होंने चैरिटी कार्यों, धर्माध्यक्षों के प्रति आज्ञाकारिता, क्रूसित येसु पर चिंतन एवं धर्मशिक्षा के माध्यम से उनकी करुणा का प्रचार करते हुए, संस्कारों के प्रति निष्ठावान रहकर, पवित्र संस्कार की आराधना एवं माता मरियम के प्रति प्रेम द्वारा कलीसिया के सुधार को लगातार प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने शुभकामनाएँ दी कि वे उनके उदाहरणों पर चलकर एवं मध्यस्थ प्रार्थना द्वारा ख्रीस्त में मुक्ति के ठोस रूप को धारण करें तथा विभिन्न लोगों एवं राष्ट्रों के बीच जायेँ।


(Usha Tirkey)

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