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पुनरुत्थान के रहस्य पर आलोकित किया फादर कानतालामेस्सा ने

In Church on March 31, 2017 at 2:58 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 मार्च 2017 (सेदोक): वाटिकन में परमधर्मपीठीय कार्यालयों के धर्माधिकारियों के समक्ष चालीसाकालीन प्रवचनों की श्रंखला में अपने चौथे प्रवचन में उपदेशक फादर कान्तालामेस्सा ने ख्रीस्त के पुनरुत्थान के रहस्य पर प्रकाश डाला।

प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनरुत्थान को एक ऐतिहासिक तथ्य निरूपित कर फादर कान्तालामेस्सा ने कहा, “पुनरुत्थान, विशेष रूप से, एक ऐतिहासिक घटना है। यह इतिहास की सीमा पर है, यह उस रेखा के सदृश है जो समुद्र को ज़मीन से विभाजित करती है। यह, एक ही समय में, इतिहास के भीतर और बाहर भी है। यह इतिहास से परे है जो युगान्तविषयक है।”

फादर कान्तालामेस्सा ने कहा कि इतिहासकार पुनरुत्थान पर मौन इसलिये रहे हैं क्योंकि किसी ने भी प्रभु येसु ख्रीस्त को कब्र में से पुनः जी उठते नहीं देखा था। पुनर्जीवित हो जाने के बाद ही मग्दला की मरिया तथा एम्माऊस के रास्ते में मिले शिष्यों ने उनके दर्शन किये तथा उनके विषय में साक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि इतिहासकार ताचितुस ने पोन्तुस पिलातुस के काल में मारे गये किसी “क्रिस्तुत” के बारे में लिखा है किन्तु पुनरुत्थान के बारे में वे मौन ही रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पुनरुत्थान के बिना प्रभु येसु ख्रीस्त के मरण की घटना का ख्रीस्तीयों को लिये कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, “पुनरुत्थान की घटना शिष्यों के अबोधगम्य विश्वास के कारण ऐतिहासिक घटना बन गई, ऐसे विश्वास के कारण जो शहादत की कठोर कसौटी पर भी ख़रा उतरा।”

फादर कान्तालामेस्सा ने कहा, “इस बात का सही अवलोकन किया गया है कि यदि पुनरुत्थान की ऐतिहासिक और यथार्थ प्रकृति से इनकार कर दिया जाये, तो विश्वास का उद्गम एवं कलीसिया का उद्भव एक रहस्य ही रह जायेगा जो पुनरुत्थान से भी अधिक गूढ़ होगा।” उन्होंने कहा कि इतिहास का काम तथ्यों की पुष्टि करना है और पुनरुत्थान के सन्दर्भ में इतिहास केवल साक्ष्यों को सुनने के बाद खाली कब्र के तथ्य तक पहुँच सकती है, तथापि, उन्होंने कहा, “हम विश्वासियों के लिये पुनर्जीवित के दर्शन आवश्यक हैं जो केवल विश्वास की आँखों से किये जा सकते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

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