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पेरू के काथलिक विश्वविद्यालय को संत पापा का संदेश

In Church on April 1, 2017 at 2:55 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 1 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने पेरू के परमधर्मपीठीय काथलिक विश्व विद्यालय को उसकी शतवर्षीय जयन्ती के अवसर पर एक संदेश प्रेषित कर शुभकामनाएँ अर्पित की।

पेरू के परमधर्मपीठीय काथलिक विश्वविद्यालय के कुलपति कार्डिनल जोसेप्पे वारसाल्दी के नाम एक पत्र प्रेषित कर संत पापा ने कहा, ″मैं आपके साथ प्रभु को उनकी असीम भलाई से प्राप्त वरदानों के लिए धन्यवाद देने हेतु शरीक हूँ। इन सालों में प्यारे देश की कलीसिया और समाज की सेवा में यह समर्पित रहा।″

संत पापा ने कहा कि यह अवसर हमें इस विश्व विद्यालय की प्रकृति एवं उद्देश्य पर चिंतन करने का मौका दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को एक समुदाय मानते हुए कहा कि यह मुख्य रूप से एक समुदाय है अर्थात् यह अपने समुदाय के सदस्यों को पहचानता है जिनका एक ही इतिहास है। समुदाय गठित और समेकित तब होता है जब यह एक साथ चलता एवं एकजुट रहता है, नियमों को मूल्य देता, उनकी रक्षा करता और साथ ही, वर्तमान में उन्हें जीता एवं भावी पीढ़ी के लिए हस्तांतरित करता है।

यह समुदाय शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से बना है। इन सभी की भूमिकाएँ अलग-अलग हैं किन्तु वे विश्वस्त रूप से कार्य करने हेतु एक-दूसरे को मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि एक ही गुरु हैं येसु, अतः शिक्षक जो शिक्षा देने के लिए बुलाये गये हैं उन्हें येसु का अनुसरण करना चाहिए जो सभी को स्वयं अपनी शिक्षा देना चाहते थे एवं उनके साथ धीरज तथा विनम्रता से पेश आते थे। बेहतर प्रदर्शन हेतु आंतरिक तनाव हमें विनम्र बनाता तथा ईश्वर की कृपा की आवश्यकता महसूस कराता है।

संत पापा ने कहा कि शिक्षा देना और शिक्षा ग्रहण करना एक धीमी और सावधानीपूर्ण प्रक्रिया है जिसके लिए ध्यान एवं निरंतर प्रेम की आवश्यकता होती है क्योंकि यह सृष्टिकर्ता के साथ सहयोग का कार्य है जो अपनी बनायी हुई वस्तुओं को अपने ही हाथों आकार प्रदान करते हैं। इस पवित्र कार्य द्वारा ईश्वर जो पूर्ण हैं तथा अपनी हर रचना से प्रेम करते हैं उनकी प्रज्ञा एवं अच्छाई प्रकट होती है। अतः शिक्षक, विद्यार्थी एवं अभिभावक सभी का योगदान आवश्यक है।

संत पापा ने काथलिक विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण उद्देश्य की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि सुसमाचार प्रचार करने हेतु इसे पहले खुद को सुसमाचार प्रचार होगा। उन्होंने साक्ष्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि चूँकि ख्रीस्त के द्वारा प्रत्येक ख्रीस्तीय जीत लिये गये हैं यही साक्ष्य है। अतः ज्ञान हासिल करना मात्र काफी नहीं है बल्कि उसे जीवन में अमल करना है। उन्होंने कहा कि चूँकि हम मिशनरी शिष्य हैं अतः हमें दुनिया के लिए जीवित सुसमाचार बनना है। हमारे जीवन के उदाहरणों एवं भले कार्यों द्वारा ख्रीस्त को प्रकट करना है ताकि मनुष्य का जीवन बदल कर नवीन हो सके।

संत पापा ने कहा कि विश्वविद्यालय, जो अपनी उत्पत्ति, इतिहास और मिशन के द्वारा, संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के साथ एक विशेष संबंध बनाये हुए है, वह अपने उद्देश्यों को तभी हासिल कर सकता है जब वह संत पापा एवं विश्व कलीसिया के साथ मिलकर, सामाजिक संरचना को व्यावसायिकता और मानवता के साथ ला सके और उत्साह के साथ विश्वास और तर्क को जोड़ सके।


(Usha Tirkey)

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