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संत पापा फ्राँसिस की मिस्र की प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम

In Church on April 3, 2017 at 3:25 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक):  वाटिकन ने संत पापा फ्राँसिस की दो दिवसीय  मिस्र की प्रेरितिक यात्रा के कार्यक्रम को प्रकाशित किया है। जो निम्नलिखित है

शुक्रवार 28 अप्रैल 2017

10:45  रोम के फ्यूमिचीनो हवाईअड्डे से काहिरा के लिए रवाना

14:00  काहिरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे में आगमन

औपचारिक स्वागत समारोह

हिओपोलिस के राष्ट्रपति भवन में संत पापा का स्वागत समारोह

ग्रेट इमाम अल अजहर की संत पापा से औपचारिक मुलाकात

शांति पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को संत पापा का संबोधन

16:40   संत पापा का अधिकारियों के साथ बैठक एवं संबोधन

राष्ट्रपति का संबोधन

संत पापा का कॉप्टिक ऑरथोडोक्स के परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के साथ मुलाकात और संबोधन

 

शनिवार 29 अप्रैल 2017

10:00  समारोही ख्रीस्तयाग,  संत पापा का प्रवचन

12:15  मिस्र के धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा दोपहर का भोजन करेंगे।

15:15   संत पापा का पुरोहितों, धर्मसंघियों और गुरुकुल को छात्रों के साथ प्रार्थना सभा और संत पापा का संदेश

  विदाई समारोह

17:00  काहिरा हवाईअड्डे से रोम के लिए प्रस्थान

20:30  रोम के चंपीनो हवाईअड्डे में आगमन


(Margaret Sumita Minj)

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दया और क्षमा के साथ येसु सहिंता की पूर्णता हैं, संत पापा

In Church on April 3, 2017 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक):  ″ येसु दया के साथ न्याय करते हैं। वे सहिंता की पूर्णता हैं। वे दूसरों का न्याय करने नहीं पर माफ करने के लिए आमंत्रित करते हैं।″  उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग समारोह के दौरान प्रवचन में कही।

संत पापा ने संत योहन के सुसमाचार से लिए गये दैनिक पाठ व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री पर चिंतन करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि येसु ने व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री पर आरोप लगाने वालों से कहा, ″  जिसने पाप न किया हो वह इनपर पत्थर मारे। नबी दानिएल के ग्रंथ से लिए गये आज के प्रथम पाठ में भी दो न्यायधीशों ने सुसाना पर व्यभिचार का झूठा आरोप लगाया था। उन्हें ईश्वर एवं सहिंता के प्रति निष्ठा और अपने जीवन की रक्षा के बीच चुनाव करने के लिए बाध्य किया गया था।  हालंकि उसने छोटे मोटे पाप किये थे पर वह अपने पति के प्रति वफादार थी।

इन दोनों घटनाओं में “मासूमियत, पाप, भ्रष्टाचार और कानून” की चर्चा है और “दोनों ही मामलों में न्यायाधीश भ्रष्ट और पापी हैं।”

संत पापा ने कहा कि आज भी हमें दुनिया में अन्याय और भ्रष्टाचार देखने को मिलता है। लोग भ्रष्ट क्यों है?  क्योंकि वे ईश्वर के प्रति अविश्वासी हैं। सुसाना को दंड दिलाने वालों ने झूठी गवाही दी थी। संत पापा ने याद दिलाया कि येसु को भी झूठी गवाही के आधार पर मौत की सजा दी गई। यह अनुग्रह के खिलाफ कानूनी भ्रष्टाचार था।

येसु ने न्याय के लिए लाई गई स्त्री के सामने लोगों से थोड़ी सी बात की। उन्होंने कहा जिसने पापा नहीं किया है वह सबसे पहले पत्थर मारे और स्त्री से कहा, मैं भी तुम्हें दंड नहीं दूँगा अब से पापा मत करना। येसु सहिंता की पूर्णता हैं वे दया के साथ न्याय करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

येसु द्वारा लाजरूस को जीवन दान पर संत पापा का चिंतन

In Church on April 3, 2017 at 3:22 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 2 अप्रैल को एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर इटली के कारपी शहर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने ‘शहीद प्रांगण’ में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

प्रवचन में उन्होंने कहा, ″आज के पाठ जीवन के ईश्वर के बारे बतलाते हैं जो मृत्यु पर विजयी हैं। आइये, हम खासकर, पास्का के पूर्व येसु द्वारा किये गये उस अंतिम चमत्कारिक चिन्ह पर चिंतन करें, जिसको उन्होंने अपने प्रिय मित्र लाजरूस की कब्र में किया था।″

वहाँ ऐसा प्रतीत हुआ कि सब कुछ समाप्त हो चुका है। कब्र एक विशाल पत्थर से बंद कर दिया गया था। उसके आसपास केवल रूदन एवं खामोशी थी। यहाँ तक कि येसु भी अपने प्रिय मित्र के रहस्यात्मक रूप से खोने पर विचलित हो गये। वे अत्यन्त द्रवित एवं परेशान होकर रो पड़े। वे कब्र के पास आये, सुसमाचार कहता है कि कब्र के पास पहुँचने पर ईसा फिर व्याकुल हो उठे। (यो.11:  38).

संत पापा ने कहा कि यही ईश्वर का हृदय है, जो पाप से दूर किन्तु पीड़ितों के अत्यन्त करीब है। वे दुःख को जादू मंत्र से दूर नहीं करते किन्तु धीरज पूर्वक अपने लिए स्वीकार करते तथा उसे बदल देते हैं।

संत पापा ने इस बात पर गौर किया कि लाजरूस की मृत्यु के कारण मायूसी के बीच भी येसु चिंता से तंग नहीं हुए किन्तु खुद दुःख का एहसास किया। उन्होंने अपने पर दृढ़ विश्वास करने का निमंत्रण दिया। वे आँसू बहाते नहीं रह गये किन्तु आगे बढ़े और कब्र की ओर गये। उस माहौल में वे बंद नहीं रहे जो वहाँ बनी हुई थी बल्कि दृढ़तापूर्वक प्रार्थना करते हुए कहा, ″पिता मैं तुझे धन्यवाद देता हूँ।″ इस प्रकार दुःख के इस रहस्य में वे चिंता के शीशे में बंद तितली के समान नहीं हुए। इसके द्वारा येसु हमें एक उदाहरण देते हैं कि हमें किस तरह व्यवहार करना चाहिए, हमें दुःख से भागना नहीं है जो इस जीवन का एक भाग है और न ही निराशा के पिंजड़े में बंद हो जाना है।

संत पापा ने कहा कि कब्र के आसपास एक बड़ा संघर्ष चल रहा था। एक तरफ घोर निराशा और हमारे भौतिक जीवन की अनिश्चितता, जो दुःख से पार होकर मृत्यु तक पहुँच चुकी थी जो हार के समान प्रतीत हो रहा था। आंतरिक अँधेरेपन में यह एक हार ही था जबकि दूसरी ओर अनन्त अच्छाई के लिए प्यासी हमारी आत्मा, जीवन, पीड़ा एवं उसे अनुभव करने के लिए ही सृष्ट की गयी है जिसे बुराई के अंधकार ने अपने कब्जे में कर लिया है।

एक ओर कब्र की हार है और दूसरी ओर है आशा जो मृत्यु और बुराई पर विजय पाती है जिसका एक नाम है येसु। वे जीवन दान द्वारा उसे बढ़ाते हैं और घोषणा करते हैं, ″पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझ में विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा।”(पद. 25).

वे दृढ़ता पूर्वकआदेश देते हैं, पत्थर हटा दो” (पद. 39) तथा लाजरूस को ऊँचे स्वर से पुकारते हैं, ″लाजरूस बाहर निकल आओ।” (पद. 43).

संत पापा ने कारपी के सभी विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″प्रिय भाइयो एवं बहनो, हम भी यह निश्चय करने के लिए बुलाये गये हैं कि हम किस भाग को चुनें। आप कब्र अथवा येसु दोनों में से एक को चुन सकते हैं। कुछ लोग उदासी में बंद होकर जीते हैं और कुछ आशा के लिए खुले होते हैं। कुछ लोग जीवन के उलझनों में फंसे होते हैं किन्तु कुछ लोग आप लोगों के समान ईश्वर की सहायता से उलझनों से ऊपर उठकर आशा एवं धीरज के साथ पुनः निर्माण करते हैं।

संत पापा ने कहा कि जीवन में ‘क्यों’ के बड़े प्रश्न चिन्ह के सामने दो रास्ते हैं, एक उदास होकर कल और आज की कब्र में बैठ जाने का अथवा दूसरा येसु को अपने कब्र में लेकर आने का। जी हाँ, क्योंकि हम प्रत्येक की छोटी-छोटी कब्रे हैं। अपने हृदय के अंदर हम अधमरे हो गये हैं, घायल और पीड़ित हैं, हममें एक कड़वाहट है जो आराम करने नहीं देती जो लगातार हमारा पीछा करती है एक पछतावे की भावना जो हमें बाहर निकलने से रोकती है। इन्हें हम अपनी कब्रों के समान देखें तथा वहाँ येसु को निमंत्रण दें। संत पापा ने कहा कि यह अजीब है कि हम येसु को बुलाने के बदले बहुधा इस अंधेरी गुफा में अकेले रहना पसंद करते है। येसु को निमंत्रण देने के बदले, जो हमें कहते हैं ″थके-मांदे और बोझ से दबे हुए लोगों तुम सब के सब मेरे पास आओ″, हम अपनी पीड़ा और घावों में डूबे रहने के प्रलोभन में पड़ते है।

संत पापा ने निराशा में बंद नहीं होने की सलाह देते हुए कहा, ″हम अकेले महसूस करने एवं बीती बातों के लिए दुःखी होकर निरुत्साहित होने के प्रलोभन में न पड़ें। व्यर्थ और अनिर्णायक भय की भावना को बढ़ने न दें तथा सबकुछ बेकार है एवं कुछ भी प्रयोग के योग्य नहीं है की भावना को मन में आने न दें। यह कब्र की जैसी स्थिति है जबकि ईश्वर जीवन के रास्ते को खोल देना चाहते हैं। उनसे मुलाकात करने एवं उन पर विश्वास करने के द्वारा हृदय का पुनरुत्थान होता है। उठने एवं बाहर आने के रास्ते के लिए हम प्रभु से प्रार्थना करें और हम पायेंगे कि वे इसे पूरा करने के लिए हमारे बिलकुल करीब हैं।

संत पापा ने कहा कि येसु ने जो शब्द लाजरूस से कही थी आज वही शब्द वे हमारे लिए कहते हैं, ″बाहर आओ। आशा रहित उदासी से बाहर आओ। भय की पट्टियों को खोलों जो राह में बाधा पहुँचाते हैं, खामियों और अभाव की चिंता जो हमें रोकता है, येसु गाँठों को ढीला करते हैं। येसु का अनुसरण करते हुए हम जीवन की समस्याओं जो गड़बड़ियाँ उत्पन्न करती हैं हम उनसे बाहर निकलना सीखें। समस्याएँ हमेशा रहेंगी, जब आप एक समस्या का समाधान करेंगे दूसरी समस्या आ जायेगी तब भी हम मजबूती का अनुभव कर सकते हैं और वह मजबूती हैं येसु, जो पुनरूत्थान एवं जीवन हैं। उनके साथ हृदय में आनन्द विराजता है, आशा पुनः उत्पन्न होता, पीड़ा शांति में तथा परीक्षा प्रेम में बदल जाता है। यद्यपि समस्याओं के भार बने रहेंगे तथापि उनके हाथ हमें सदा ऊपर उठायेंगे। उनके वचन प्रोत्साहन प्रदान करेंगे तथा हम सभी से कहेंगे, बाहर आओ, मेरे पास आओ, डरो मत। जिस तरह उन्होंने लाजरूस के लिए कहा था वे हमसे कहेंगे पत्थर हटा दो। बीता जीवन कितना भारी है पाप और लज्जा से भरा है किन्तु प्रभु को आने से कभी न रोकें। हम उस पत्थर को हटा दें जो उन्हें हमारे पास आने से रोकता है। यह उपयुक्त समय है कि हम अपने पापों को दूर करें, दुनियावी अभिमान के प्रति हमारी  आसक्ति को जो हमारी आत्मा के लिए बाधक है। हमारे बीच और हमारे परिवारों में जो बैर की भावना है यही सही समय है कि हम इन सभी अवरोधों को उखाड़ फेंके। येसु द्वारा मुलाकात एवं मुक्त किये जाने के द्वारा हम इस प्यारी दुनिया में जीवन का साक्ष्य प्रस्तुत करने की कृपा हेतु याचना करें। साक्ष्य जो जगाता एवं जो बोझिल, चिंतित एवं उदास हृदय में ईश्वर की आशा प्रदान करता है। हमारी घोषणा है जीवित ईश्वर का आनन्द जो अब भी कहते हैं, ″मैं तुम्हारी कब्र खोल दूँगा। मेरी प्रजा, मैं तुम्हें तुम्हारी कब्रों से निकालूँगा।” (Ez 37,12).


(Usha Tirkey)

संत पापा द्वारा कोलंबिया, कांगो, वेनेजुएला और पराग्वे के लिए प्रार्थना की अपील

In Church on April 3, 2017 at 3:20 pm

 

कापरी, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 ( वीआर सेदोक) :  संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 2 अप्रैल को उत्तरी इटली के कापरी शहर की एक दिवसीय यात्रा के दौरान मीरानदोला शहीद प्रांगण में यूखारिस्त समारोह के उपरांत देवदूत की प्रार्थना का पाठ किया। इसके उपरांत संत पापा ने कोलंबिया, डीआरसी, वेनेजुएला और पराग्वे के लिए प्रार्थना अपील की।

संत पापा ने कोलंबिया के मोकोआ शहर में हुए एक विशाल भूस्खलन की त्रासदी के शिकार 254 लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। संत पापा पीड़ितों के लिए प्रार्थना और इस दुःख का घड़ी में पीड़ितों के प्रियजनों के प्रति आध्यात्मिक सामीप्य का आश्वासन दिया।

संत पापा ने राहत कार्य में संलग्न और पीड़ितों की सहायता में लगे सभी लोगों के धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कांगो गणराज्य के कसाई क्षेत्र के संघर्ष में फंसे लोगों को भी याद किया जहाँ सशस्त्र संघर्ष से बहुतों की मौत हो गई और अनेक लोगों को विस्थापित होना पड़ रहा है।

संत पापा ने देश में शांति हेतु प्रार्थना की अपील की। विश्वासियों को प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, ″आइये हम इन अपराधों के जिम्मेदार लोगों के लिए प्रार्थना करें जिससे कि वे घृणा और हिंसा की गुलामी से मुक्त हो सकें। क्योंकि घृणा और हिंसा हमेशा विनाशकारी होते हैं।”

संत पापा ने कहा कि कांगो गणराज्य की हिंसा ने कलीसिया के सदस्यों और कलीसिया  द्वारा संचालित संस्थानों जैसे अस्पतालों और स्कूलों को भी प्रभावित किया है।

अंत में संत पापा ने वेनेजुएला और पराग्वे में सामाजिक-राजनीतिक उथलपुथल से उत्पन्न संकट की ओर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा, “मैं वेनेजुएला और पराग्वे के लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ वे मेरे लिए बहुत प्रिय हैं।″  संत पापा ने सभी को हर तरह की हिंसा से बचने तथा राजनीतिक समाधान की खोज में धैर्य वने रहने के लिए आमंत्रित किया।

 


(Margaret Sumita Minj)

मिरानदोला में भुकंप प्रभावित लोगों को संत पापा का संदेश

In Church on April 3, 2017 at 3:18 pm

कारपी, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 ( वीआर सेदोक) :  संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 2 अप्रैल को उत्तरी इटली के कापरी शहर की एक दिवसीय यात्रा के दौरान अपराहन में मीरानदोला के महागिरजाधर का दर्शन करने गये जहाँ शहर के मेयर डॉक्टर माइनो बेनात्ती और पल्ली पुरोहित डॉन फ्लावियो सेगालिना ने संत पापा का स्वागत किया। संत पापा ने सन् 2012 में आए भूकंप की वजह से धराशायी महागिरजाघर के प्रांगण में भूकंप से प्रभावित लोगों को संबोधित किया।

संत पापा ने कहा, ″ आपका यह शहर जो मई 2012 के भूकंप के विनाश का चिन्ह अभी भी धारण किये हुए है, मैं आपको और अन्य स्थानों के निवासियों का आलिंगन करना चाहता हूँ जो भूकंप के शिकार और इससे प्रभावित हुए हैं। सन् 2012 में भूकंप के कुछ दिनों बाद पूर्वाधिकारी संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें पूरी कलीसिया की ओर से आप लोगों के दुःखों को बांटने और सांत्वाना देने यहाँ आये थे। आज मैं आपके बीच पूरी कलीसिया की ओर से स्नेह को मजबूत करने आया हूँ। मैं आप सबको अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रकट करता हूँ तथा भूकंप से धराशायी गिरजाघर के पुनरनिर्माण हेतु प्रोत्साहन देता हूँ।″

संत पापा ने धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष फ्राँचेस्को कवीना, पल्ली पुरोहित, अन्य पुरोहितों, शहर के महापौर और अन्य अधिकारियों को सौहार्दपूर्ण अभिवादन किया और भूकंप पीड़ित क्षेत्र के सामुदायिक जीवन के पुनरुद्धार हेतु कार्यरत सिविल सुरक्षाकर्मियों, स्वयंसेवकों के गतिविधियों की पुनः एकबार सराहना की।

संत पापा ने कहा , ″मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि भूकंप ने इस भूमि की मानवीय और संस्कृतिक विरासत को प्रभावित किया है। आपको अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ा है। आपके मकान, गिरजाधर और अन्य स्मारकों को भूकंप ने ध्वस्त कर दिया है। आप लोगों को अभी भी अपने परिजनों को खोने का दुःख है।

भूकंप के बाद के दिनों में परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए आपने बड़ी कुशलता और धीरज की गवाही का प्रदर्शन किया है। दर्दनाक घटनाओं और सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आपने पिता ईश्वर की रहस्यमय उपस्थिति को स्वीकार किया और उनके प्रेम को पहचाना है।

संत पापा ने कहा, ″ आप आशा और धैर्य के साथ पुनरनिर्माण कार्यों में लगे रहें। एतिहासिक केन्द्र और ऐतिहासिक स्मृति के स्थानों का पुनरनिर्माण सामाजिक और कलीसियाई जीवन के लिए आवश्यक है मैं यकीन करता हूँ कि सबकी भलाई के लिए इन सब कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में आप सबका सहयोग रहेगा।″

संत पापा ने कहा, ″ आपके सामने विश्वास और परंपरा का स्थान यह गिरजाघर भूकंप के कारण पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। आपके साथ भूकंप पीड़ितों तथा उनके परिजनों और जो लोग अभी भी अनिश्चित स्थितियों में रहते हैं, सभी के लिए प्रार्थना करता हूँ कि प्रभु आप सभी को अपना सहारा प्रदान करें।″

दो सप्ताह बाद हम पास्का पर्व मनाएंगे। जी उठे प्रभु येसु पुनरनिर्माण कार्यों को पूरा करने में आपका सहारा बनें। आपको आशावान बनाये। माता मरिया और आपके रक्षक संतों की मध्यस्ता से आप सुरक्षित अपने कामों को पूरा कर सकें।


(Margaret Sumita Minj)

कोलम्बिया के भूस्खलन त्रासदी में 300 से अधिक लोगों के मरने की संभावना

In Church on April 3, 2017 at 3:16 pm

 

मोकोआ, सोमवार, 3 अप्रैल 2017 ( वीआर सेदोक) :  संत पापा फ्राँसिस कोलंबिया के भूस्खलन त्रासदी से पीड़ित लोगों, उनके दुःखी रिश्तेदारों और बचाव अभियान में शामिल लोगों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

जेम्स ब्लेर्स द्वारा वाटिकन रेडियो को दिये रिपोर्ट अनुसार कोलम्बिया के दक्षिण पश्चिमी पुट्टूमो क्षेत्र के मोकोआ शहर में मूसलाधार बारिश की वजह से हुई भारी भू-स्खलन से घर, पुल, वाहन और पेड़ों के बह जाने के बाद मिट्टी एवं पत्थरों के मलबे भर गये हैं। सुरक्षा बलों द्वारा 200 से अधिक लापता लोगों की तलाश जारी है मरने वालों की संख्या 300 से अधिक होने की संभावना है और 400 से अधिक घायल हो गये हैं।

कोलंबिया के रेड क्रॉस, सशस्त्र बलों और अन्य विशेषज्ञ सेवाएं, शनिवार से ही आपदा में फंसे लोगों के बीच राहत कार्य में लगे हुए हैं।

कोलंबिया के राष्ट्रपति हुआन मानुएल सांतोस ने शनिवार को मोकोआ का दौरा कर घने वन क्षेत्र में चल रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया और उन्होंने इस क्षेत्र को आपातकालीन घोषित कर दिया है।

जैसे कि बिजली और पानी ठप पड़ गई है, हवाई सेवा जारी है । वहाँ के लोगों की जान बचाने के लिए भोजन, पानी, कपड़े, दवाइयों और आश्रय की तत्काल आवश्यकता है। विशेषकर उन सभी लोगों के लिए जो अपने प्रिय जनों, बच्चों और सबकुछ खो दिया है।


(Margaret Sumita Minj)

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