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पुण्य बृहस्पतिवार को संत पापा धोयेंगे कैदियों के पैर

In Church on April 6, 2017 at 3:26 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस पुण्य बृहस्पतिवार के दिन रोम के पालियानो कैदखाना जाकर कैदियों के पाद प्रक्षालण करेंगे।

बृहस्पतिवार को वाटिकन से प्रकाशित जानकारी अनुसार संत पापा 13 अप्रैल को पालियानो कैदखाना का दौरा करेंगे तथा कैदियों से मुलाकात करते हुए पुण्य बृहस्पतिवार की धर्मविधि सम्पन्न करेंगे जिसमें वे येसु ख्रीस्त के क्रूसित किये जाने के पूर्व उनके द्वारा अपने शिष्यों को दिये गये प्रेम की शिक्षा की यादगारी मनायेंगे।

संत पापा फ्राँसिस ने पुण्य बृहस्पतिवार के दिन कैदखानों का दौरा करने की परम्परा की शुरूआत, संत पापा चुने जाने के कुछ ही दिनों बाद मार्च 2013 में की थी। इस अवसर पर वे रोम के युवा कैदी केंद्र कसेल देल मारमो का भी दौरा कर महिला एवं मुसलमान कैदियों से मुलाकात कर उनके पैर धोये थे।

संत पापा ने पिछले साल रोम स्थित अपंग लोगों के लिए बने केंद्र डॉन नोक्की का भी दौरा किया था जहाँ उन्होंने येसु की विनम्रता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कुछ महिलाओं के पाँव धोये थे।

2015 में संत पापा ने रोम के रेबिब्बिया स्थित जेल का दौरा किया था जबकि उन्होंने गत साल मुसलमान, हिन्दू तथा कोप्टिक शरणार्थियों के पैर धोये थे।


(Usha Tirkey)

ईश्वर के प्रेम को अपने जीवन में देखने हेतु कुछ क्षण मौन रहें, संत पापा

In Church on April 6, 2017 at 3:24 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): ईश्वर अब्राहम के साथ व्यवस्थान तथा येसु में अपने लोगों की मुक्ति की प्रतिज्ञा के प्रति हमेशा विश्वस्त हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में 6 अप्रैल को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने विश्वासियों को कुछ क्षण मौन रहकर अपने जीवन पर गौर करने का निमंत्रण दिया ताकि वे ईश्वर के प्रेम की सुन्दरता को देख सकें, उस समय भी जब परिस्थिति प्रतिकूल हो।

संत पापा ने अब्राहम के जीवन पर अपना प्रवचन केंद्रित करते हुए कहा, ″वे विश्वास एवं आशा के व्यक्ति थे जिन्होंने 100 साल की उम्र में यह विश्वास किया कि उसकी बांझ पत्नी पुत्र प्रसव करने वाली है।″ संत पापा ने कहा कि यह ‘आशा के विपरीत विश्वास’ है।

प्रथम पाठ में ईश्वर का अब्राहम के साथ व्यवस्थान की घटना का जिक्र किया गया है। येसु अब्राहम को पिता कहकर पुकारते हैं क्योंकि उन्होंने इस्राइली प्रजा की शुरूआत की जो आज कलीसिया के रूप में जानी जाती है। अब्राहम को जब एक अंजान देश में जाकर बसने का आदेश दिया गया उन्होंने उस पर विश्वास किया तथा आज्ञा पालन करते हुए वे वहाँ गये।

संत पापा ने कहा, ″यदि कोई अब्राहम के जीवन पर गौर करना चाहे तो वह कहेगा कि वे एक स्वप्न द्रष्टा थे। वे स्वप्न देखते थे बल्कि आशा का स्वप्न, वे कोई मूर्ख व्यक्ति नहीं थे।″

संत पापा ने अब्राहम के जीवन में विश्वास की परीक्षा पर ध्यान आकृष्ट किया जिसमें उन्होंने ईश्वर की आज्ञा का पालन करने हेतु अपने एकलौते पुत्र के बलिदान को भी इनकार नहीं किया था तथा आशा के विपरीत गये थे। संत पापा ने कहा कि ये ही हमारे पिता अब्राहम हैं जो आगे ही बढ़ते जाते हैं। जब येसु कहते हैं कि अब्राहम ने उन्हें देखा था इसका अर्थ है कि वे आनन्द से पूर्ण थे अर्थात् उन्होंने प्रतिज्ञा को पूर्ण होते देखा था। उन्होंने ईश्वर द्वारा धोखा नहीं दिये जाने के आनन्द का अनुभव किया था।

ईश्वर ने अब्राहम से प्रतिज्ञा की थी कि वे राष्ट्रों के पिता बनेंगे तथा उनकी संतति आकाश के तारों एवं समुद्र के बालू के समान असंख्य होंगे जिसपर उन्होंने विश्वास किया। आज हम कह सकते हैं कि हम उन में से एक हैं।

संत पापा ने कहा कि अब्राहम और हमारे बीच एक दूसरी कहानी है, स्वर्गिक पिता एवं येसु की कहानी। येसु फरीसियों से कहते हैं कि अब्राहम उन्हें देख कर आनंदित थे। संत पापा ने कहा कि यह एक महान शिक्षा है तथा कलीसिया आज हमें रूककर अपने मूल पर चिंतन करने का निमंत्रण देती है, हमारे पिता जिन्होंने हमें ईश प्रजा बनाया। जब हम इतिहास पर गौर करेंगे तो हम पायेंगे कि हम अकेले नहीं हैं, हम एक समुदाय हैं, हम एक साथ चलते हैं। कलीसिया एक समुदाय है एक ऐसा समुदाय जिसे ईश्वर पसंद करते हैं। एक ऐसी जनता जिसको ईश्वर ने पृथ्वी पर एक पिता प्रदान किया था। हमारे एक भाई हैं जिन्होंने हमारे लिए अपना प्राण अर्पित कर दिया है। हम अब्राहम एवं येसु की ओर देखकर उन्हें धन्यवाद दें जो हमारी यात्रा के भागीदार हैं। वे प्रतिकूल परिस्थिति में भी ईश्वर के प्रेम एवं उनकी सुन्दरता को देखने हेतु रूके।

संत पापा ने सभी विश्वासियों को निमंत्रण दिया कि वे कुछ समय एकांत में बिताते हुए अपने जीवन के इतिहास पर गौर करें। उन्होंने कहा, ″मैं निमंत्रण देता हूँ कि आज पाँच मिनट अथवा दस मिनट बिना रेडियो अथवा टेलीविज़न के बैंठें तथा अपने जीवन पर चिंतन करें। आशीर्वादों एवं कठिनाईयों, कृपाओं एवं पापों को देखें जहाँ हम ईश्वर की निष्ठा को पायेंगे। जो अपनी प्रतिज्ञाओं के लिए सदा वफादार रहे। उन्होंने मुक्ति की अपनी प्रतिज्ञा पर विश्वस्त रहते हुए अपने पुत्र येसु को हमारे लिए भेजा। संत पापा ने कहा कि यद्यपि हमारे जीवन में पाप भरा हो किन्तु हम चिंतन करने के द्वारा ईश्वर के प्रेम, करुणा तथा आशा की सुन्दरता को देख पायेंगे और निश्चय ही, हम सभी आनन्द से भर जायेंगे।


(Usha Tirkey)

हिंसा को रोकने हेतु शांति ही एकमात्र सच्चा रास्ता, संत पापा

In Church on April 6, 2017 at 3:23 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): ″मैं जानता हूँ कि बहुत सारे परिवारों ने हिंसा में अपने प्रियजनों को खो दिया है मैं उनके करीब हूँ मैं उनके दुःख में सहभागी हूँ तथा प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर की कृपा से वे चंगाई एवं मेल-मिलाप का अनुभव कर सकें।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने शिकागो के विश्वासियों को प्रेषित अपने एक पत्र में कही।

शिकागो में अहिंसा के आंदोलन को प्रोत्साहन देने हेतु महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ब्लेज जे. कुपिक के नाम संत पापा फ्राँसिस ने 4 अप्रैल को एक पत्र प्रेषित किया।

पत्र में लिखा था, ″कृपया, शिकागो के लोगों को बतलायें कि मैं उन्हें याद कर रहा हूँ एवं उनके लिए प्रार्थना कर रहा हूँ।″ मैं उन्हें इस प्रतिबद्धता के लिए अपने समर्थन का आश्वासन देता हूँ। कई अन्य स्थानीय नेता भी अहिंसा के इस आंदोलन को शिकागो में जीवन एवं शांति के मार्ग के रूप में अपना समर्थन दे रहे हैं।

संत पापा ने कार्डिनल से कहा कि जब वे भली इच्छा रखने वाले लोगों को पुण्य शुक्रवार के दिन शांति जुलूस में भाग लेने हेतु निमंत्रण दे रहे हैं, रोम में क्रूस रास्ता की प्रार्थना में वे उन्हें जरूर याद करेंगे।

संत पापा ने शिकागो की दुःखद परिस्थिति की याद करते हुए कहा कि विभिन्न जाति, आर्थिक परिस्थिति तथा सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग आज भेदभाव, उदासीनता, अन्याय तथा हिंसा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ″हमें इस बहिष्कार एवं अलगाव की भावना को दूर करना होगा तथा किसी भी दल को ‘दूसरे’ के रूप में नहीं बल्कि अपने ही भाई-बहन के रूप में देखना होगा। परिवार एवं स्कूलों में मन और हृदय को खुला रखने के लिए शिक्षा देना एवं उसे पोषित करना होगा।

शांति के रास्ते पर चलना हमेशा आसान नहीं होता किन्तु हिंसा को रोकने हेतु यही एकमात्र सच्चा रास्ता है। जैसा कि मार्टिन लूथर किंग ने कहा है ″मानवता को सभी मानव संघर्षों के लिए एक प्रणाली विकसित करना चाहिए जो बदला, आक्रामकता और प्रतिशोध का बहिष्कार करता है। इस प्रणाली का आधार है प्रेम।″

संत पापा ने पत्र में सभी लोगों से, खासकर, युवाओं से अपील की है कि वे मार्टिन लूथर किंग के शब्दों पर गौर करें तथा जानें कि अहिंसा की संस्कृति एक अप्राप्य सपना नहीं है किन्तु एक रास्ता है जिसने निर्णायक परिणामों को उत्पन्न किया है। अहिंसा के लगातार अभ्यास ने सीमाओं को तोड़ दिया है, घांवों पर पट्टी बांधी है तथा राष्ट्रों को चंगाई प्रदान किया है और इस तरह यह शिकागो को भी चंगा कर सकता है। संत पापा ने प्रार्थना की कि लोग आशा न खोंयें तथा शांति के निर्माण तथा भावी पीढ़ी को प्रेम की सच्ची शक्ति को दिखाने हेतु एकजुट होकर कार्य करें।

कार्डिनल कुपिक ने अपने प्रेरिताई के आरम्भ से ही शिकागो में गिरोह और मादक तस्करी के कारण हो रहे हिंसा पर आवाज उठाई है।

शिकागो की न्यायाधिकरण की रिपोर्ट अनुसार गत साल 783 हत्याएँ हुई हैं जो 1996 के बाद हत्याओं की सबसे बड़ी संख्या है।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शिकागो में इन हत्याओं को शहर में नियंत्रण से बाहर हिंसा का प्रतीक कहा है तथा शहर के अधिकारियों को अपराधों पर नरमी बरतने का आरोप भी लगाया है।


(Usha Tirkey)

मूसलाधार बारिश से प्रभावित अर्जेंटीना के लोगों के प्रति संत पापा की सहानुभूति

In Church on April 6, 2017 at 3:19 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मूसलाधार बारिश से बुरी तरह प्रभावित अर्जेंटीना के लोगों के प्रति सहानुभूति प्रकट की है।

अर्जेंटीना के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष जोश मरिया अरानचेदो को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा, ″मैंने बड़े दुःख के साथ विगत दिनों मूसलाधार बारिश के कारण हुई क्षति की खबर सुनी है।″ उन्होंने धर्माध्यक्षों से अपील करते हुए कहा कि वे उन हज़ारों लोगों को आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करें, जिन्हें घर छोड़ना पड़ा है। कितनों ने घर, सम्पति, परिवार तथा कई वर्षों के परिश्रम एवं त्याग से अर्जित धन के साथ सब कुछ खो दिया है।

संत पापा ने सभी धर्माध्यक्षों, पुरोहितों एवं विभिन्न पल्लियों के विश्वासियों से अपील की है कि वे लोगों की आवश्यकताओं में उनके करीब रहें। उन्होंने अधिकारियों, संस्थाओं एवं स्वयंसेवकों से भी आग्रह किया है कि वे एक-दूसरे के साथ सहयोग करें।

संत पापा ने उम्मीद जतायी है कि एकता की भावना द्वारा वे सभी पीड़ित लोगों के प्रति एकात्मता का भाईचारा पूर्ण साक्ष्य दे पायेंगे। उन्होंने सदा सहायिका माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा सभी के लिए प्रार्थना करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया है।

‘द टेलीग्राम’ समाचार के अनुसार बोयनोस आयरेस के ला प्लाता क्षेत्र में 3 अप्रैल को हुई भारी बारिश के कारण कम से कम 56 लोगों की जाने जा चुकी हैं तथा हज़ारों लोगों को घर छोड़ अन्यत्र शरण लेना पड़ा है। बाढ़ का पानी कुछ क्षेत्रों में दो मीटर तक ऊपर उठ गया है जिसके कारण बहुत सारे लोग पेड़ पर अथवा घर की छत पर चढ़कर अपनी जान बचा रहे हैं।

अर्जेंटीना की सरकार ने तीन दिनों के लिए राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है।


(Usha Tirkey)

मिलान की सफल यात्रा पर संत पापा का आभार

In Church on April 6, 2017 at 3:17 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मिलान के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल अंजेलो स्कोला को एक पत्र प्रेषित कर मिलान में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान एम्ब्रोसियाई विश्वासियों द्वारा उनके सहर्ष स्वागत हेतु धन्यवाद दिया।

31 मार्च को निर्गत पत्र में उन्होंने लिखा, ″मैं आपको, सभी पुरोहितों, धर्मसमाजियों तथा समस्त धर्मप्रांतीय समुदाय को अपनी सौहार्दपूर्ण सराहना व्यक्त करता हूँ।″

उन्होंने कहा, ″मैं उस भावना के लिए कृतज्ञता अर्पित करता हूँ जिनको मैंने विभिन्न मुलाक़ातों में अनुभव किया, साथ ही साथ, इस आयोजन के लिए धन्यवादी हूँ जिसने सभी के लिए, खासकर, युवा और किशोर लोगों को अपने आनन्द एवं सजीवता को प्रकट करने का अवसर प्रदान दिया।

संत पापा ने उन सभी लोगों को भी विशेष धन्यवाद दिया जिन्होंने प्रार्थना के अविस्मरणीय दिवस, संवाद एवं समारोह को सफल बनाने हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने मिलान की विभिन्न कलीसियाई समुदायों द्वारा संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें सम्मान दिये जाने को कलीसिया के प्रति प्रेम का चिन्ह कहा।

पत्र में संत पापा ने मिलान के काथलिक समुदाय को प्रोत्साहन दिया कि वे इस यात्रा में लगातार सभी परिस्थितियों में सुसमाचार के आनन्द का साक्ष्य देते हुए आगे बढ़ते रहें तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने रूस में हिंसक आक्रमण के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना की

In Church on April 6, 2017 at 3:11 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने रूस में बम द्वारा हिंसक आक्रमण के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना अर्पित की।

बुधवार को साप्ताहिक आमदर्शन समारोह के अवसर पर तीर्थयात्रियों एवं पयर्टकों को सम्बोधित करते हुए सेंट पीटर्सबर्ग में बीते दिनों हुए हमले की याद की तथा कहा कि आक्रमण रूसी जनता के लिए पीड़ा, क्षति और संदेह की भावना का कारण बन गया है।

सेंट पीटर्सबर्ग में सोमवार को एक मेट्रो में हुए बम विस्फोट में 14 लोगों के मारे जाने की खबर है जबकि 50 लोग घायल बताये जा रहे हैं।

संत पापा ने कहा, ″मैं त्रासदी के शिकार सभी लोगों को करुणावान ईश्वर के हाथों सौंप देता हैं तथा उन सभी लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त करता हूँ जो इस घटना के कारण पीड़ित हैं।″

रूसी जांच अधिकारियों के अनुसार रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए बम हमले के पीछे उस व्यक्ति का हाथ हो सकता है जिसके शरीर के टुकड़े ट्रेन की बोगी से मिले हैं।

किर्गिस्तान की सुरक्षा सेवा के अनुसार संदिग्ध का नाम अकबरज़न जलिलोव है, जो किर्गिज़ शहर ओश में 1995 में पैदा हुए थे और उन्होंने रूसी नागरिकता ले ली थी।

बाद में रूसी जांच एजेंसी ने उनके नाम की पुष्टी की और कहा कि अकबरज़न ने ही दूसरा बम भी रखा था जिसमें विस्फोट नहीं हुआ। हमले की ज़िम्मेदारी किसी भी गुट ने नहीं ली है।


(Usha Tirkey)

भातृप्रेम पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on April 6, 2017 at 7:53 am

वाटिकन सिटी, बुधवार, 05 अप्रैल 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संत पेत्रुस के पहले पत्र पर आधारित “भ्रातृप्रेम” पर अपनी धर्मशिक्षा माला देते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

संत पेत्रुस के पहले पत्र (1 पे.3.8-17) में हमारे लिए एक अतिविशिष्ट संदेश है। यह हममें सांत्वना और शांति प्रसारित करते हुए हमें इस बात की अनुभूति प्रदान करता है कि ईश्वर सदैव हमारे साथ हैं और वे हमारा परित्याग कभी नहीं करते हैं विशेष कर हमारे जीवन के अतिसंवेदनशील क्षणों और जब हम मुसीबतों के दौर से होकर गुजर रहे होते हैं। लेकिन इस पत्र का रहस्य हमारे लिए क्या है, यह हमें क्या विशेष संदेश देता है? संत पापा ने कहा कि मैं आशा करता हूँ कि अब आप धर्मग्रंथ के नये विधान का अध्ययन ध्यानपूर्वक करते हुए इसमें निहित रहस्य को जानने का प्रयास करेंगे।

इस पत्र का रहस्य इस बात पर आधारित है कि हम सभी येसु की मृत्यु और पुनरुत्थान में सीधे तौर से जुड़े हुए हैं जो हमारे जीवन के केन्द्र-विन्दु हैं जिसके द्वारा हम अपने जीवन में आनन्द और खुशी का अनुभव करते हैं। येसु ख्रीस्त सचमुच में जीव उठे हैं इसे हम पास्का पर्व मनाते हुए एक दूसरे का अभिवादन करते हुए घोषित करते हैं, “ख्रीस्त जी उठे हैं, ख्रीस्त जी उठे हैं।” जीवित प्रभु हम सभों के जीवन में, हमारे साथ रहते हैं। इसी कारण संत पेत्रुस हमें बल पूर्वक यह निमंत्रण देते हुए कहते हैं कि हम अपने हृदय में उनकी महिमा करें। ईश्वर बपतिस्मा के द्वारा हमारे जीवन में निवास करते और पवित्र आत्मा के द्वारा अपने प्रेम से सदैव हमारे जीवन को नवीन बनाते हैं। इसी कारण प्रेरित हमें अपनी आशा में बने रहने का आहृवान करते हैं। हमारी आशा कोई अनुभव नहीं वरन यह स्वयं व्यक्ति के रुप में येसु ख्रीस्त हैं जो हमारे जीवन और हमारे भाई-बहनों के जीवन में निवास करते हैं।

संत पापा ने कहा कि अतः हमें इस आशा को अपने जीवन के द्वारा अपने समुदाय और अपने समुदाय के बाहर साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत करना है। यदि ख्रीस्त जीवित हैं और हमारे जीवन में निवास करते हैं तो हमें उन्हें छिपाने के बजाय अपने जीवन के कार्यों द्वारा व्यक्त करने की जरूरत है। इस अर्थ हमारे लिए यही है कि येसु हमारे जीवन में एक विशेष आदर्श बनते और हम उनकी तरह ही व्यवहार करने तथा अपने जीवन को जीने हेतु बुलाये जाते हैं। येसु ने जैसा किया है हम भी वैसा ही करने हेतु बलाये जाते हैं। इस तरह आशा जो हमारे हृदय की गहराई में निवास करती है वह छिपी नहीं रह सकती है यदि ऐसा होता है तो हमारी यह आशा सुषुप्त आशा है जिसमें अपने को व्यक्त करने का साहस नहीं है। हमारी आशा को नम्र, सम्मानजनक और अन्यों के प्रति भ्रातृप्रेम से पूर्ण होने की जरूरत है जो अपने अपराधियों को जहाँ तक बन पड़े क्षमा प्रदान करती है। व्यक्ति जिसमें आशा की कमी है वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता, वह दूसरों को सांत्वना प्रदान नहीं कर सकता और न ही अपने में सांत्वना का अनुभव करता है, ऐसा इसलिए क्योंकि यह येसु ख्रीस्त के द्वारा होता है जिसे हम अपने हृदय में एक जगह देते हैं। बुराई के द्वारा बुराई पर विजय प्राप्त नहीं की जा सकती है वरन बुराई पर नम्रता, करुणा और दीनता के द्वारा ही जीत हासिल की जाती सकती है। हुड़दंगी अपने में सोचते हैं कि वे बुराई के द्वारा बुराई पर विजय हासिल करेंगे अतः वे बदला लेते और बहुत सारी चीजों को करते हैं जिन से हम वाकिफ हैं। वे करुणा, नम्रता और दीनता को नहीं जानते क्योंकि उनमें आशा की कमी है।

संत पेत्रुस कहते हैं, “बुराई करने की अपेक्षा भलाई करने के कारण दुःख भोगना कहीं अच्छा है।” इस अर्थ हमारे लिए यही है कि हम अपनी भलाई के कारण दुःख उठाते तो हम येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त होते हैं जो हमारी मुक्ति हेतु दुःख भोगे और क्रूस पर मारे गये। जब हम अपने जीवन में छोटे-बड़े दुखों को स्वीकार करते तो हम येसु के पुनरुत्थान का अंग बनते हैं। हम अंधेरे में ज्योतिपुंज बनते हैं। अतः प्रेरित संत पेत्रुस हमें बुराई के बदले अच्छाई करने को कहते हैं जो हमारे लिए एक वरदान बनता जिसे हम अन्यों के साथ साझा करते हैं। इस तरह हम ईश्वर और उनके अनंत प्रेम की घोषणा करते हैं जो कभी असफल और खत्म नहीं होता जिसमें हमारी आशा सदैव बनी रहती है।

संत पापा ने कहा, “प्रिय मित्रों अब हम समझते हैं कि क्यों संत पेत्रुस हमें “धन्य” कहते हैं।” यह हमारी नैतिकता या तप मात्र नहीं लेकिन जब-जब हम बुराई का बदला बुराई ने नहीं लेते वरन बदले की भावना से ऊपर उठ कर क्षमा करते हैं तो हम दीपक की तरह जगमगाते और ईश्वरीय  हृदय के अनुसार अन्यों के लिए सांत्वना और शांति का कारण बनते हैं। अतः हम दीनता और नम्रता में उनके लिए भलाई करें जो हमें हानि पहुँचाते हैं।
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और सबों को चालीसा काल की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा ने सीरिया के आतंकी हमलों की निंदा की

In Church on April 6, 2017 at 7:50 am


वाटिकन सिटी, बुधवार, 5 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : ″मैं दृढ़ता से कल इदलिब शहर में हुए अस्वीकार्य नरसंहार की निंदा करता हूँ और बच्चों सहित कई असहाय लोगों की मौत पर खेद प्रकट करता हूँ।” उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर को प्रांगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान कही।

मंगलवार को सीरिया में विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इदलिब शहर में संदिग्ध रासायनिक गैस हमला हुआ जिसमें 20 बच्चों सहित 72 लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हो गये हैं।

संत पापा ने सीरिया त्रासदी को समाप्त करने हेतु स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं से अपील की।

संत पापा ने कहा कि वे पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहे है। उन्होंने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार राजनीतिक नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे इस त्रासदी को रोकें और वहाँ के लोगों के लिए राहत लायें जो बहुत लंबे समय से जारी युद्ध में फँसे हुए हैं।

संत पापा ने उन्हें भी प्रोत्साहन दिया जो असुरक्षा के होते हुए भी उस क्षेत्र के निवासियों की मदद जारी रखा है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने ब्रिटेन के काथलिक और मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की

In Church on April 6, 2017 at 7:46 am


वाटिकन सिटी, बुधवार, 5 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : वाटिकन के संत पापा पौल छठे सभागार में संत पापा फ्राँसिस ने ग्रेट ब्रिटेन स्थित वेस्टमिंस्टर के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल विन्सेंट निकोलास और मुस्लिम नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जो ग्रेट ब्रिटेन के विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच आपसी गहरे संबंधों को उजागर करने के लिए आये हैं।

संत पापा ने उनका स्वागत करते हुए कहा, ″ मुझे यह कहते खुशी होती है कि मानवता के बीच हमारा महत्वपूर्ण काम है उन्हें सुनना। उन्हें उत्तर देने में जल्दबाजी न करना, पर धीरज के साथ सुनना। भाई या बहन की बातों को स्वीकार करना, उसपर विचार करने के बाद ही अपने विचारों को प्रकट करना। सुनने की क्षमता रखना आज बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। यह बड़ी दिलचस्प बात है कि सुनने में सक्षम व्यक्ति जोर से या दूसरों पर झल्लाकर बात नहीं करते परंतु कम आवाज में शांत होकर बातें करते हैं और सभी उनकी बातों को सुनते हैं। भाइयों के बीच,  हम सब को बात करने और सुनने की जरूरत है। पहले सुनें तब बातें करें। जब हम शांति से और धीरे-धीरे बात करते हैं तो एक साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।″

अंत में संत पापा ने धन्यवाद देते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स और कमिला से मुलाकात की

In Church on April 6, 2017 at 7:44 am

वाटिकन सिटी, बुधवार, 5 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) :  संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 4 अप्रैल को ब्रिटिश सिंहासन के उत्तराधिकारी राजकुमार चार्ल्स और उनकी पत्नी कमिला के साथ मुलाकात की।

परमधर्मपीठ के लिए ब्रिटिश दूतावास के एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वाटिकन के संत पापा पौल छठे सभागार में संत पापा फ्राँसिस ने राजकुमार चार्ल्स और उनकी पत्नी कमिला से मुलाकात की।  आधे घंटे की निजी बैठक कथित तौर पर सुगम और अनौपचारिक थी। उन्होंने उपहारों का आदान-प्रदान भी किया। संत पापा ने शाही दंपति को कांस्य की एक जैतून शाखा तथा अपनी तीन प्रमुख दस्तावेजों ‘लौदातो सी’ ‘एवांजली गौदियुम’ और ‘अमोरिस लेतित्सिया’ की प्रतियां दी।

प्रिंस चार्ल्स ने संत पापा फ्रँसिस को गरीब और बेघर लोगों के बीच बांटने के लिए हाइग्राव के शाही खाद्यान की टोकरियाँ उपहार में दी। प्रिंस चार्ल्स के लिए यह चौथी वाटिकन यात्रा है पर संत पापा फ्राँसिस के साथ उनकी यह पहली मुलाकात है।

प्रिंस चार्ल्स ने राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलीन से मुलाकात की। शाही दम्पति को वाटिकन पुस्तकालय और गुप्त अभिलेखागार में संरक्षित कुछ अनमोल ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखने का अवसर मिला। इन में सन् 1587 में स्कॉट्स की रानी मेरी का देशद्रोह के लिए निष्कासन से पहले लिखा हुआ अंतिम पत्र, संत पापा पॉल चतुर्थ का अंग्रेजी सुधारक नेताओं में से एक महाधर्माध्यक्ष थोमस क्रानमैर को लिखित दंडादेश, रोम में अपने राजदूत की नियुक्ति को मंजूरी देते हुए राजा चार्ल्स प्रथम के पत्र भी शामिल हैं।


(Margaret Sumita Minj)

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