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ईश्वर के प्रेम को अपने जीवन में देखने हेतु कुछ क्षण मौन रहें, संत पापा

In Church on April 6, 2017 at 3:24 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): ईश्वर अब्राहम के साथ व्यवस्थान तथा येसु में अपने लोगों की मुक्ति की प्रतिज्ञा के प्रति हमेशा विश्वस्त हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में 6 अप्रैल को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने विश्वासियों को कुछ क्षण मौन रहकर अपने जीवन पर गौर करने का निमंत्रण दिया ताकि वे ईश्वर के प्रेम की सुन्दरता को देख सकें, उस समय भी जब परिस्थिति प्रतिकूल हो।

संत पापा ने अब्राहम के जीवन पर अपना प्रवचन केंद्रित करते हुए कहा, ″वे विश्वास एवं आशा के व्यक्ति थे जिन्होंने 100 साल की उम्र में यह विश्वास किया कि उसकी बांझ पत्नी पुत्र प्रसव करने वाली है।″ संत पापा ने कहा कि यह ‘आशा के विपरीत विश्वास’ है।

प्रथम पाठ में ईश्वर का अब्राहम के साथ व्यवस्थान की घटना का जिक्र किया गया है। येसु अब्राहम को पिता कहकर पुकारते हैं क्योंकि उन्होंने इस्राइली प्रजा की शुरूआत की जो आज कलीसिया के रूप में जानी जाती है। अब्राहम को जब एक अंजान देश में जाकर बसने का आदेश दिया गया उन्होंने उस पर विश्वास किया तथा आज्ञा पालन करते हुए वे वहाँ गये।

संत पापा ने कहा, ″यदि कोई अब्राहम के जीवन पर गौर करना चाहे तो वह कहेगा कि वे एक स्वप्न द्रष्टा थे। वे स्वप्न देखते थे बल्कि आशा का स्वप्न, वे कोई मूर्ख व्यक्ति नहीं थे।″

संत पापा ने अब्राहम के जीवन में विश्वास की परीक्षा पर ध्यान आकृष्ट किया जिसमें उन्होंने ईश्वर की आज्ञा का पालन करने हेतु अपने एकलौते पुत्र के बलिदान को भी इनकार नहीं किया था तथा आशा के विपरीत गये थे। संत पापा ने कहा कि ये ही हमारे पिता अब्राहम हैं जो आगे ही बढ़ते जाते हैं। जब येसु कहते हैं कि अब्राहम ने उन्हें देखा था इसका अर्थ है कि वे आनन्द से पूर्ण थे अर्थात् उन्होंने प्रतिज्ञा को पूर्ण होते देखा था। उन्होंने ईश्वर द्वारा धोखा नहीं दिये जाने के आनन्द का अनुभव किया था।

ईश्वर ने अब्राहम से प्रतिज्ञा की थी कि वे राष्ट्रों के पिता बनेंगे तथा उनकी संतति आकाश के तारों एवं समुद्र के बालू के समान असंख्य होंगे जिसपर उन्होंने विश्वास किया। आज हम कह सकते हैं कि हम उन में से एक हैं।

संत पापा ने कहा कि अब्राहम और हमारे बीच एक दूसरी कहानी है, स्वर्गिक पिता एवं येसु की कहानी। येसु फरीसियों से कहते हैं कि अब्राहम उन्हें देख कर आनंदित थे। संत पापा ने कहा कि यह एक महान शिक्षा है तथा कलीसिया आज हमें रूककर अपने मूल पर चिंतन करने का निमंत्रण देती है, हमारे पिता जिन्होंने हमें ईश प्रजा बनाया। जब हम इतिहास पर गौर करेंगे तो हम पायेंगे कि हम अकेले नहीं हैं, हम एक समुदाय हैं, हम एक साथ चलते हैं। कलीसिया एक समुदाय है एक ऐसा समुदाय जिसे ईश्वर पसंद करते हैं। एक ऐसी जनता जिसको ईश्वर ने पृथ्वी पर एक पिता प्रदान किया था। हमारे एक भाई हैं जिन्होंने हमारे लिए अपना प्राण अर्पित कर दिया है। हम अब्राहम एवं येसु की ओर देखकर उन्हें धन्यवाद दें जो हमारी यात्रा के भागीदार हैं। वे प्रतिकूल परिस्थिति में भी ईश्वर के प्रेम एवं उनकी सुन्दरता को देखने हेतु रूके।

संत पापा ने सभी विश्वासियों को निमंत्रण दिया कि वे कुछ समय एकांत में बिताते हुए अपने जीवन के इतिहास पर गौर करें। उन्होंने कहा, ″मैं निमंत्रण देता हूँ कि आज पाँच मिनट अथवा दस मिनट बिना रेडियो अथवा टेलीविज़न के बैंठें तथा अपने जीवन पर चिंतन करें। आशीर्वादों एवं कठिनाईयों, कृपाओं एवं पापों को देखें जहाँ हम ईश्वर की निष्ठा को पायेंगे। जो अपनी प्रतिज्ञाओं के लिए सदा वफादार रहे। उन्होंने मुक्ति की अपनी प्रतिज्ञा पर विश्वस्त रहते हुए अपने पुत्र येसु को हमारे लिए भेजा। संत पापा ने कहा कि यद्यपि हमारे जीवन में पाप भरा हो किन्तु हम चिंतन करने के द्वारा ईश्वर के प्रेम, करुणा तथा आशा की सुन्दरता को देख पायेंगे और निश्चय ही, हम सभी आनन्द से भर जायेंगे।


(Usha Tirkey)

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