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प्रेम आशा का इंजन है

In Church on April 12, 2017 at 3:32 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को आशा पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

पिछले सप्ताह हमने येसु के येरुसलेम शहर में प्रवेश की यादगारी मनाई जहां शिष्यों और एक बड़ी भीड़ ने उनका जयजयकार किया। इन लोगों ने येसु पर अपनी आशा रखी और उनके चमत्कारों और बड़े चिन्हों के प्रति आश्वस्त बने रहते हुए इस बात की आशा करते हैं यह उन्हें उन शत्रुओं से बचायेगा जिन्होंने येरूसलेम पर कब्जा कर रखा है। उनमें से कितनों ने इस बात की कल्पना की कि येसु पर इतना घोर अत्याचार किया जायेगा और उन्हें क्रूस मरण सहना पड़ेगा। लोगों की सोच और आशाएं क्रूस के सामने मिट्टी में मिल जाती हैं। लेकिन हम विश्वास करते हैं कि क्रूसित येसु में हमारी आशा पुनर्जीवित होती है। यह दुनिया की आशा के विपरीत एक दूसरी आशा है।

संत पापा ने कहा कि क्या हम इस बात को समझ सकते हैं कि येसु ने येरुसलेम प्रवेश के साथ इन वचनों को क्यों कहा, “जब तक गेहूँ का दाना मिट्टी में गिर कर नहीं मर जाता अकेला ही रहता है, परन्तु यदि वह मर जाता है, तो बहुत फल देता है।” (यो.12. 24) हम एक छोटे बीज के बारे में सोचे जो मिट्टी में गिरता है, यदि वह अपने में बंद रहता तो उसमें कुछ नहीं होता है लेकिन यदि वह अपने को तोड़ता और खोलता है तो उसमें नये जीवन का विकास होता है और वह बहुत फल उत्पन्न करता है।

उन्होंने कहा कि येसु दुनिया में एक नई आशा लेकर आते हैं जो एक बीज, गेहूँ के दाने के समान है। उन्होंने अपने पिता के घर स्वर्गराज्य का परित्याग किया जिससे वे हमारे बीच रह सकें और इस तरह वे “भूमि पर दफनाये गये”, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। फल उत्पन्न करने हेतु येसु ने अपने को एक बीज की भाँति मृत्यु द्वारा तोड़ा और जमीन पर दफनाये गये। इस तरह उन्होंने प्रेम को अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक जीया। उन्होंने अपने को इतना नम्र बना लिया कि प्रेम सर्वोच्च ऊँचाई बन गई, जहाँ से हमारे लिए आशा प्रस्फुटित होती है। यह प्रेम की शक्ति है जो अपने में सब कुछ ढंक देता और सब कुछ सह लेता है। (1 कुरि.13.7) प्रेम ईश्वर का जीवन है जो अपने में सारी चीजों को नवीन बन देता है। अतः पास्का में येसु ख्रीस्त परिवर्तित होते हैं वे हमारे पापों को अपने ऊपर लेते और हमें क्षमा प्रदान करते हैं। वे हमें मृत्यु से जीवन की ओर और भय से विश्वास की ओर ले चलते हैं। यही कारण है कि क्रूस में हमारी आशा सदैव जीवित होती और बनी रहती है। येसु में हमारा अंधकारमय जीवन ज्योति के रुप में परिवर्तित होता है और हार विजय में तथा कोई भी निराशा आशा में बदल जाती है।

जब हम येसु की आशा का चुनाव करते हैं तो हमें धीरे-धीरे प्रेम की नम्रता द्वारा जीवन में विजयी होते हैं। दुनिया में बुराई पर विजय प्राप्त करने हेतु आशा के सिवाय और कोई दूसरा मार्ग नहीं है। संत पापा ने कहा कि आप मुझ से कहेंगे कि यह हार का तर्क है क्योंकि अपनी ताकत का परित्याग करना हमें जीवन की चीजों से वंचित करता है। लेकिन वास्तव में तर्क का बीज जब अपनी नम्रता में मर जाता, जो ईश्वर के कार्य करने का तरीका है यह केवल तब ही फलप्रद होता है। उन्होंने कहा कि हम अपने जीवन में इस बात का अनुभव करते हैं कि हम सदैव किसी न किसी चीज की कामना करते हैं जो हमारी इच्छाओं को बढ़ाती जाती है और हम कभी संतुष्ट नहीं होते हैं। जो लोभी हैं वे कभी संतुष्ट नहीं होते। येसु हमें स्पष्ट शब्दों में कहते हैं, “जो अपने जीवन को प्यार करता है वह उसे खो देगा।” (यो.12.25) अर्थात जो अपने जीवन से प्रेम करते हैं और अपनी ही स्वार्थ तक सीमित हैं वे अपने को खो देते हैं। जो येसु के वचनों को स्वीकराते और उनके अनुसार जीते तो वे अपने जीवन को सुरक्षित रखते तथा दुनिया और अन्यों के लिए आशा रूपी बीज बन जाते हैं।

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि सच्चा प्रेम क्रूस, त्याग के द्वारा ही आता है जैसे कि येसु हमें बतलाते हैं। क्रूस हमारे लिए जरूरी है लेकिन यह हमारा केन्द्रविन्दु नहीं वरन हमारा केन्द्रविन्दु महिमा है जो हमें पास्का के रुप में प्रदर्शित किया जाता है। यहाँ हम येसु के द्वारा अंतिम व्यारी में शिष्यों को कहे गये सांत्वना के शब्दों को सुनते हैं, “प्रसव निकट आने पर स्त्री को दुःख होता है क्योंकि उसका समय आ गया है, किन्तु बालक को जन्म देने के बाद वह अपनी वेदना भूल जाती है, क्योंकि उसे आनन्द होता है कि संसार में एक मनुष्य का जन्म हुआ है।”(यो. 16. 21) यहाँ हम प्रेम का दीदार करते हैं जो जीवन को जन्म देती और दुःख को भी एक अर्थ प्रदान करती है। प्रेम वह इंजन है जो हमारी आशा को आगे बढ़ाती है। संत पापा ने कहा, “हम प्रत्येक जन अपने आप से पूछ सकते हैं, क्या मैं प्रेम करता हूँ? क्या मैंने प्रेम करना सीखा है? क्या मैं प्रति दिन इसे सीखता हूँ? क्योंकि यह प्रेम है जो हमारे जीवन में आशा को संचालित करती है।”

प्रिय भाई एवं बहनों संत पापा ने कहा कि इस दिनों हम अपने को ईश्वर के रहस्य से आलिंगन होने दें जो गेहूँ के एक बीज समान मर कर हमें जीवन प्रदान करते हैं। वे हमारे लिए आशा के बीज हैं। हम क्रूसित येसु के जीवन पर चिंतन करें जो हमारे लिए आशा के उद्गम स्थल हैं। हम आशा में बन रहते हुए यह देखने की कोशिश करें कि बीज में वृक्ष है, क्रूस में पुनरुत्थान और मृत्यु में जीवन। संत पापा ने कहा कि आप अपने घरों में थोड़ी देर रुक कर क्रूस की ओर देखें और कहें, “हम आप में कुछ भी नहीं खोते हैं। आप में मेरी आशा सदैव बनी रहती है। आप मेरी आशा हैं।” उन्होंने विश्वासी और तीर्थयात्रियों का आहृवान करते हुए कहा कि हम सब अपने सामने क्रूस की कल्पना करते हुए एक साथ कहें, “आप मेरी आशा हैं।”

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों क अभिवादन किया और सबों को पुण्य सप्ताह की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा की अध्यक्षता में आयोजित समारोहों का कार्यक्रम

In Church on April 12, 2017 at 3:29 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस की अध्यक्षता में धर्मविधि समारोहों के व्यवस्था करने वाली समिति के संचालक मोन्सिन्योर ग्वीदो मरीनी ने संत पापा के 20 अप्रैल से 31 मई 2017 के कार्यक्रमों को प्रकाशित किया है जो इस प्रकार हैः

बृहस्तपतिवार 20 अप्रैल 2017 को 10 बजे संत पापा कार्डिनल भवन मंडल में संत घोषणा हेतु प्रस्तावित आज्ञप्तियों पर कार्डिनलों के मतदान हेतु सामान्य लोक सभा परिषद की बैठक का नेतृत्व करेंगे।

28 से 29 अप्रैल तक संत पापा मिस्र देश की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

7 मई पास्का का चौथा रविवार, संत पापा संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रातः सवा नौ बजे पुरोहिताभिषेक ख्रीस्तयाग समारोह का अनुष्ठान करेंगे।

12 और 13 मई को संत पापा पुर्तगाल स्थित फातिमा की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

शनिवार 27 मई को संत पापा फ्राँसिस इटली के जेनोआ का प्रेरितिक दौरा करेंगे।

 


(Margaret Sumita Minj)

संत घोषणा की स्वीकृति हेतु सामान्य लोक सभा परिषद की बैठक

In Church on April 12, 2017 at 3:25 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार,12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) :संत पापा फ्राँसिस पास्का सप्ताह के बृहस्तपतिवार, 20 अप्रैल 2017 को संत घोषणा हेतु प्रस्तावित आज्ञप्तियों पर कार्डिनलों के मतदान हेतु सामान्य लोक सभा परिषद की बैठक का नेतृत्व करेंगे।

संत घोषणा हेतु पाँच प्रस्तावित आज्ञप्तियों को कार्डिनलों द्वारा अनुमोदन के लिए चुना गया है इनके नाम इस प्रकार हैः

ब्राजील स्थित नाताल के शहीदःधर्मप्रांतीय पुरोहित धन्य अंद्रेया दी सोभेराल और धन्य अंब्रोजो फ्रांचेस्को फेर्रो, लोकधर्मी  धन्य मत्तेयो मोरेइया और 27 साथी।

मेक्सिको के युवा शहीद धन्य क्रिस्टोबाल,  धन्य अंतोनियो और धन्य जोन।

धन्य फादर फाउस्तीनो मिग्वेज स्पेन के पल्ली पुरोहित और कलासाजियन इंस्टीट्यूट ओफ द डोटर्स ओफ डिवाइन शेपर्डडेस के संस्थापक।

इटली के फ्रांसिसकन फ्रायर्स माइनर समाज के धन्य फादर अन्जेलो दा अक्री कपुचिन,  पहले का नाम लूका अन्तोनियो फालकोन है।

फातिमा में माता मरिया का दर्शन करने वाले बच्चे धन्य फ्राँचेस्को मारतो और धन्य जचिंतो मारतो।

संत पापा फ्राँसिस द्वारा संत प्रकरण हेतु अनुमोदन दे दिये जाने के बाद कार्डिनलों का वोट अंतिम औपचारिकता है। सामान्य लोक सभा परिषद में कार्डिनलों की स्वीकृति मिलने के बाद कलीसिया संत घोषणा के लिए दिन निर्धारित करेगी।


(Margaret Sumita Minj)

मिस्र के बमबारी पीड़ितों को जागरण प्रार्थना में सम्मानित किया गया

In Church on April 12, 2017 at 3:24 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत इजीदियो समुदाय ने मंगलवार को वार्षिक विश्वव्यापी प्रार्थना जागरण का आयोजन किया जिसमें विशेष रुप से कोप्टिक ख्रीस्तीय शहीदों और उन सभी को जो विश्वास के कारण सताये गये और मार डाले गये लोगों के लिए प्रार्थना की गई।

जागरण प्रार्थना का आयोजन मिस्र में 2 कोप्टिक गिरजाघरों में बमबारी के दो दिन बाद किया गया। इस बमबारी में 50 लोग मारे गये और दर्जनों लोग घायल हैं।

जागरण प्रार्थना का आयोजन रोम स्थित त्रासतेवेरे के संत मरिया महागिरजाघर में किया गया जिसकी अगुवाई परिवार एवं लोकधर्मियों हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल केविन जोसेफ फार्रेल ने की।

जागरण प्रार्थना में समुदाय के अपने शहीदों और अन्य ख्रीस्तीय शहीदों के यादों को जिंदा रखा गया। पीड़ितों के नाम और उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को याद किया गया। समुदाय ने संत पापा फ्राँसिस के वचनो को भी याद किया, ″आज एकीसवीं सदी में हमारी कलीसिया शहीदों की कलीसिया है।″

संत एजीदियो समुदाय लोकधर्मियों को अंतरराष्ट्रीय ख्रीस्तीय आंदेलन है जो ख्रीस्तीय एकता, वार्ता और एकजुटता के लिए काम करते और प्रार्थना करते हैं। इसकी शुरुआत द्वितीय वाटिकन महासभा के बाद सन् 1968 में हुई और 70 से अधिक देशों में यह समुदाय पाया जाता है।


(Margaret Sumita Minj)

मलाला, सबसे कम उम्र की संयुक्त राष्ट्र की शांति संदेशवाहक

In Church on April 12, 2017 at 3:21 pm

न्यूयोर्क, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : पाकिस्तान की किशोर नोबेल पुरस्कार विजेता और बच्चों और लड़कियों के अधिकार की कार्यकर्ता मलाला युसुफजई को लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान को देखते हुए सबसे कम उम्र की संयुक्त राष्ट्र शांति संदेशवाहक घोषित किया गया।

सोमवार 10 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने समारोह के दौरान कहा,″आप दुनिया में शायद सबसे महत्वपूर्ण बात सभी के लिए शिक्षा की एक प्रतीक हैं। संयुक्त राष्ट्र की शांति संदेशवाहक के रुप में आपको पाकर हम सभी अत्यंत खुश हैं।″ महासचिव गुटेरेस ने  ‘लड़कियों तथा महिलाओं की शिक्षा और समानता’ के साथ-साथ सभी लोगों के अधिकारों का साहसपूर्वक रक्षा और ‘शांति के लिए अटूट प्रतिबद्धता’ हेतु उसकी प्रशंसा की।

सम्मान को स्वीकार करते हुए 19 वर्षीय मलाला ने कहा, “परिवर्तन लाना हमारे साथ शुरू होता है और यह अभी शुरू करना चाहिए। यदि आप अपने भविष्य को उज्ज्वल देखना के चाहते हैं तो अभी ही इसपर काम करना शुरु करना चाहिए। किसी और की प्रतीक्षा न करें।″

मलाला को एक मुस्लिम होने का गर्व है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस्लाम का अर्थ है शांति। उन्होंने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया हर दिन इस्लाम के नाम पर “इस्लामी आतंकवादियों और इस्लामी जिहादियों” की लड़ाई को संदर्भित करता है और फिर लोग पूरे इस्लाम को दोष देते हैं। उसने कहा, ″लोगों को कुछ आतंकवादियों के देखने के बजाय मुझे और अन्य मुसलमानों को देखना चाहिए जो शांति में जीवन बिताते हैं और शांति में विश्वास करते हैं। मुसलमानों को भी एकजुट होकर ‘आतंकवादियों और जिहादियों’ के खिलाफ कदम उठानी चाहिए। वो जो भी करते हैं हम उनके खिलाफ हैं।″

मलाला युसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता है और इन्हें ये पुरस्कार पाकिस्तान में नारीअधिकारों और उनकी शिक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए दिया गया था |  पाकिस्तान के एक छोटे से इलाके खैबर प्ख्तुन्ख्वा की रहने वाली मलाला युसुफजई को आतंकी संगठन तालिबान द्वारा नारी शिक्षा को प्रतिबंधित कर दिए जाने के बाद उसका विरोध किये जाने के कारण सन् 2012 आतंकियों ने मलाला के सिर में गोली मार दी थी लेकिन किस्मत से सही समय पर इलाज़ उपलब्ध हो जाने के कारण मलाला को बचाया जा सका और इसी वजह से तालिबान द्वारा प्रतिबंधित नारी शिक्षा को अन्तराष्ट्रीय पहचान मिली |

वर्तमान में मलाला ब्रिटेन में रहती है जहां उसे गोली लगने के बाद चिकित्सा उपचार मिला था। जून में अपने माध्यमिक विद्यालय की शिक्षा खत्म करने के बाद, वे विश्वविद्यालय में दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन करने की योजना बना रही हैं।


(Margaret Sumita Minj)

ईश्वर का प्रेम अनंत है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 12, 2017 at 3:20 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : चालीसा के पुण्य सप्ताह में संत पापा फ्राँसिस ने विश्व के सभी विश्वासियों को ट्वीट प्रेषित कर ईश्वर पर भरोसा रखते हुए अपनी सभी कमजोरियों पर विजय पाने की प्रेरणा दी।

उन्होंने संदेश में लिखा,″हालांकि बुराई का रहस्य बहुत गहरा है, सच्चाई यह है कि ईश्वर का प्रेम अनंत है येसु ने बुराई पर विजय प्राप्त की है।″


(Margaret Sumita Minj)

मीओ धर्मप्रांत के क्रिस्म ख्रीस्तयाग में अपहृत पुरोहित के लिए प्रार्थना

In Church on April 12, 2017 at 3:13 pm

मीओ, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : भारत के उत्तरपूर्व दूरस्थ मीओ धर्मप्रांत में गत सप्ताह भारतीय मिशनरी सलेसियन पुरोहित को प्रार्थना में याद किया गया जिन्हें यमन में अज्ञात बंदूकधारियों ने अपहरण कर लिया और जिनके ठिकाने अभी भी अज्ञात हैं।

अरुणाचल प्रदेश स्थित मीओ धर्मप्रांत के पुरोहितों के साथ मिलकर धर्माध्यक्ष जोर्ज पाल्लीपारामबिल ने बृहस्तपतिवार 6 अप्रैल को ‘ख्रीस्त की ज्योति’ महागिरजाघर में क्रिस्म ख्रीस्तयाग के दौरान सलेसियन फादर टोम उज़न्नलिल के लिए प्रार्थना की। केरल निवासी फादर टोम बैंगलोर सलेसियन धर्मप्रांत के हैं 4 मार्च 2016 को यमन के एदन में मिसनरीज ऑफ चारिटी धर्मबहनों द्वारा चलाये गये वृद्धाश्रम में अज्ञात बंदूकधारियों ने इनका आपहरण किया। बंदूकधारियों ने चार चारिटी धर्मबहनों और 12 लोगों को मार डाला।

धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पाल्लिपाराम्बिल ने पुरोहितों के साथ पवित्र बृहस्तपतिवार का क्रिस्म ख्रीस्तयाग समारोह का अनुष्ठान किया जिसमें पुरोहिताई संस्कार एवं पवित्र साक्रामेंट की स्थापना का स्मरण और विभिन्न संस्कारों के अनुष्ठान में प्रयोग में लाये जाने वाले पवित्र तेल की आशीष की जाती है।

धर्माध्यक्ष पाल्लिपाराम्बिल ने बताया कि अपने धर्मप्रांत में क्रिस्म ख्रीस्तयाग समारोह का अनुष्ठान एक सप्ताह पहले किया जाता है जिससे कि पुरोहितगण अपने पल्लियों और दूरदराज मिशन स्टेशन लौट सकें और पवित्र सप्ताह की धर्मविधियों का अनुष्ठान अपने पल्ली वासियों के साथ कर सकें।

प्रभु के प्रति निष्ठावान और उसके बताये मार्ग पर चलने की हिम्मत रखने वाले फादर टोम की सुरक्षा और रिहाई के लिए सलेसियन धर्माध्यक्ष पाल्लिपाराम्बिल और सलेसियन पुरोहितों ने विशेष रुप से प्रार्थना की। पुरोहिताई प्रतिज्ञा दुहराने से पहले धर्माध्यक्ष ने पुरोहितों को बधाई देते हुए कहा,″यदि आप जानना चाहते हैं कि येसु किस तरह के याजक हैं, तो उसके क्रूस को देखिये।″ संत पापा फ्राँसिस के उपमान का उपयोग करते हुए उन्होंने कहा कि ‘याजकों को अपनी भेड़ों की गंध’ की पहचान है।

मीओ धर्मप्रांत ने फादर टोम एवं विश्व के सभी ख्रीस्तीयों की सुरक्षा और शांति के लिए प्रार्थना जारी रखा है।


(Margaret Sumita Minj)

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