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Archive for April 17th, 2017|Daily archive page

जी उठे ख्रीस्त की शांति का साक्ष्य देने के अवसरों से न चूकें, संत पापा

In Church on April 17, 2017 at 3:10 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 17 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने पास्का महापर्व के दूसरे दिन सोमवार 17 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में, स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा येसु ख्रीस्त के पुनरुत्थान की घोषणा को पुनः दुहराया।

उन्होंने देवदूत प्रार्थना के पूर्व विश्वासियों से कहा, ″महापर्व के इस सोमवार को स्वर्ग की रानी प्रार्थना में, कल घोषित, पुनरुत्थान की घोषणा को पुनः दुहरायी जाती है, ″ख्रीस्त जी उठे हैं, अल्लेलूया।″

आज के सुसमाचार पाठ में हम दूत के उस संदेश की प्रतिध्वनि को सुनते हैं जिसको उन्होंने कब्रस्थान में महिलाओं को सुनाया था, ″शीघ्र जाओ और उनके शिष्यों को यह समाचार दो कि वे मृतकों में से जी उठे हैं।″ संत पापा ने कहा कि हम भी उसे सीधे अपने लिए कहे गये शब्दों के रूप में लेते हैं, जल्दी जाओ और हमारे समय के स्त्रियों एवं पुरुषों को आशा का संदेश दो। क्रूस पर ठोंके जाने के तीसरे दिन प्रातः तक मृत्यु अंतिम शब्द नहीं रहा किन्तु अब जीवन अंतिम शब्द है।

इस घटना के आधार पर जो इतिहास एवं विश्व की सच्ची खबर है हम आत्मा के अनुसार जीवन के मूल्य की पुष्टि के साथ नये स्त्री और पुरूष बनने के लिए बुलाये गये हैं।

हम पुनरुत्थान के स्त्री एवं पुरूष हैं, दुनिया के उतार-चढ़ाव के बीच और दुनियादारी जो हमें ईश्वर से दूर ले जाता है हम एकात्मता एवं स्वीकार्य के चिन्ह, विश्व शांति की चाह तथा पर्यावरण के लिए अवसाद से मुक्त आकांक्षा की मांग करते हैं। यह सार्वजनिक है और मानवीय चिन्ह है किन्तु जी उठे ख्रीस्त में विश्वास द्वारा पोषित होता है कि वे हमारी क्षमता के परे जा सकते हैं। जी हाँ क्योंकि ख्रीस्त जी उठे हैं तथा इतिहास में पवित्र आत्मा के द्वारा क्रियाशील हैं। हमारी दुखद परिस्थिति से वे हमें मुक्त करते, प्रत्येक मानव हृदय तक पहुँचते तथा शोषित एवं पीड़ित सभी को आशा प्रदान करते हैं।

माता मरियम अपने पुत्र की मृत्यु एवं पुनरूत्थान की मौन साक्षी, हमें दुनिया की घटनाओं में पुनर्जीवित ख्रीस्त के स्पष्ट साक्ष्य बनने में मदद दें ताकि जो लोग कठिनाईयों एवं परेशानियों में हैं वे निराशा के शिकार न बनें किन्तु उन भाई बहनों के माध्यम से जो अपना समर्थन एवं सांत्वना प्रदान करते हैं आशा में बने रहें।

माता मरियम हमें अपने पुत्र येसु के पुनरुत्थान जो मुक्ति का एक अनोखा रहस्य है एवं हृदयों एवं जीवन बदल सकता है, उसपर दृढ़ विश्वास करने में सहायता दें, विशेषकर, ख्रीस्तीय समुदायों के लिए प्रार्थना करें जिन्हें कठिन एवं अधिक साहसपूर्ण साक्ष्य देने की आवश्यकता है।

संत पापा ने स्वर्ग की रानी प्रार्थना हेतु विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, ″अब हम पास्का के आनन्द एवं प्रकाश में उस प्रार्थना के माध्यम से उनकी ओर फिरें जिसको देवदूत प्रार्थना के स्थान पर पेंतेकोस्त तक किया जाता है।″

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने सभी पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया।

उन्होंने कहा, ″पास्का पर्व के माहौल में आज मैं आप सभी का, सभी परिवारों, कलीसियाई समुदायों, संगठनों, प्रत्येक तीर्थयात्री जो इटली अथवा विश्व के अन्य हिस्सों से आयें हैं, हार्दिक अभिवादन करता हूँ।″

आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ कि पास्का के इस अठवारे को शांति पूर्वक मना सकें जो ख्रीस्त के पुनरुत्थान की खुशी को बढ़ा देता है। जी उठे ख्रीस्त की शांति का साक्ष्य देने के अवसरों से न चूकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने आनन्दमय एवं पवित्र पास्का की शुभकामनाएं देते हुए भक्त समुदाय से विदा ली।


(Usha Tirkey)

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प्रभु येसु सचमुच जी उठे, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 17, 2017 at 3:08 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 17 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : पास्का महापर्व के दिन संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी विश्वासियों को शुभकामनाएं अर्पित करते हुए संदेश में लिखा, ″खुश पास्का पर्व! आप जी उठे ख्रीस्त के आनंद और आशा का पैगाम सभी लोगों तक पहुँचायें।″

इसी खुशी को जारी रखते हुए पास्का महापर्व के दूसरे दिन भी ट्वीट संदेश में उन्होंने लिखा, ″हां, हम दृढता के साथ कह सकते हैं कि मसीह सचमुच में मृतकों में से जी उठे हैं!″


(Margaret Sumita Minj)

90 वें जन्मदिन पर एमेरितुस संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें के लिए भारतीय कलीसिया की प्रशंसा

In Church on April 17, 2017 at 3:06 pm

 

 वाटिकन रेडियो, सोमवार,17 अप्रैल 2017 ( वीआर सेदोक) : भारतीय काथलिक कलीसिया ने सेवानिवृत संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें को एक “महान दिग्गज” और “धर्मशास्त्र विद्वान के रुप में प्रशंसा की है जिन्होंने विश्व और विश्वव्यापी कलीसिया के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। 16 अप्रैल पास्का रविवार को एमेरितुस पापा बेनेदिक्त सोलहवें को उसके 90वे जन्मदिन के अवसर पर भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास ने कहा,″वे “महान व्यक्ति” हैं, जिन्होंने “अपनी सादगी तथा नम्रता से कलीसिया और विश्व को मंत्रमुग्ध किया और दुनिया में शांति लाने हेतु प्रबल प्रयास किया। उन्होंने कलीसिया के साथ-साथ पूरी मानवता के लिए बहुत सारे आशीर्वाद लाए।″

धर्माध्यक्ष मसकरेनहास के कहा कि संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने अपनी शिक्षा और उदाहरण द्वारा विश्वव्यापी कलीसिया के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। “उन्होंने प्रेरणात्मक अपीलों के माध्यम से लोगों को क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतिक सीमाओं से उपर उठने हेतु प्रभावित किया और दुनिया में विश्वास और शांति के लिए नियमित रूप से प्रार्थना का निवेदन किया।” संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें की प्रशंसा करते हुए धर्माध्यक्ष मसकरेनहास ने कहा कि उनकी नम्रता और सौजन्यता ने दुनिया भर के लोगों को छू लिया है। उन्होंने जो उपदेश दिया उसे अपने जीवन में पालन किया। धर्माध्यक्ष मसकरेनहास याद करते हैं कि सन् 2011 में पापा बेनेदिक्त ने भारतीय धर्माध्यक्षों के दल को गरीबों के दोस्त बने रहने का परामर्श दिया और भारतीयों के लिए कलासिया की सेवा जारी रखने का वचन दिया है।

संत पापा फ्राँसिस ने 12 अप्रैल को ही अपने पूर्ववर्ती परमाध्यक्ष बेनेदिक्त सोलहवें से मुलाकात कर 90 वे जन्म दिन की शुभकामनाएं दी। संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें वाटिकन स्थित ‘मातेर एक्लेसिया’ मठ में रहते हैं।

वाटिकन डाक टिकट और सिक्का ऑफिस ने भी संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें के जन्मदिन के पहले ही उन्हें शुभकामनाएं दी और इस अवसर पर लगभग 2,000 वर्षों तक कलीसिया के जीवन में महत्वपूर्ण घटनाओं को चिन्हित करते हुए टिकटों को जारी किया गया था। एक डाक टिकट में रोजरी माला प्रार्थना करते हुए सेवानिवृत्त संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें की तस्वीर है।


(Margaret Sumita Minj)

सीरिया में कार बम बिस्फोट द्वारा 100 लोगों की मौत

In Church on April 17, 2017 at 3:05 pm

बेइरुत, सोमवार, 17 अप्रैल 2017 ( मैटर्स इंडिया) : 14 अप्रैल को उत्तरी सीरिया के फौआ शहर से लोगों को सुरक्षित स्थानो में ले जाने के क्रम में एक कार बम के धमाके से बसों में सवार 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

पास्का रविवार के दिन संत पापा फ्राँसिस ने इस धमाके की निंदा करते हुए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि ईश्वर सीरिया के लोगों को राहत पहुंचाने और उनके घाव भरने की कोशिश कर रहे लोगों के प्रयासों को एक ख़ास तरीके से बनाए रखे।

सीरिया में कार्यकर्ताओं के मुताबिक अलेप्पो के पास शुक्रवार को हुए एक धमाके में मरने वालों की संख्या 126 हो गई है, इनमें कम से कम 68 बच्चे हैं।

अलेप्पो के पास हिंसाग्रस्त इलाकों से सुरक्षित निकाले जा रहे लोगों से भरी बसों को निशाना बनाकर शुक्रवार को एक ज़बरदस्त धमाका किया गया था। सरकार के नियंत्रण वाले इलाके से आ रही बसों के एक काफ़िले से विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी टकराई थी।

ब्रिटेन आधारित सीरियन ऑब्ज़र्वेट्री फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि 109 लोग इस धमाके में मारे गए हैं और कई लोग घायल हैं, इसमें सहायता कर्मी और विद्रोही लड़ाके भी शामिल हैं।

ये धमाका तब हुआ था जब ये काफ़िला विद्रोहियों के नियंत्रण वाले एक इलाक़े में रुका हुआ था जो अलेप्पो शहर के बाहर है। बसों में दो गाँवों के लोग थे जो किसी सुरक्षित जगह ले जाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

इन गाँवों पर सरकार का नियंत्रण है मगर इन्हें विद्रोहियों ने घेरा हुआ था जिससे वहाँ लोग फँसे हुए थे।

सीरियाई सरकार द्वारा ईरान और कतर की मध्यस्थता से हुए समझौते के तहत विद्रोहियों और सरकार के नियंत्रण वाले दो-दो इलाकों से करीब 30 हज़ार लोगों को निकाला जाना था लेकिन समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक सरकार के कब्ज़े वाले इलाकों में अब भी पांच हज़ार और विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहरों में 2,200 लोग फंसे हुए हैं।


(Margaret Sumita Minj)

पास्का, अनंत जीवन के लिए ‘संकीर्ण द्वार’ के माध्यम से येसु का अनुसरण,फैसलाबाद के धर्माध्यक्ष

In Church on April 17, 2017 at 3:04 pm

फैसलाबाद, सोमवार,17 अप्रैल 2017 (एशिया न्यूज) : फैसलाबाद के धर्माध्यक्ष जोसेफ अर्शाद ने अपने धर्मप्रांत के विश्वासियों को पास्का पर्व की शुभकामनाएं दी। उन्होने कहा कि जो लोग अंत तक ईश्वर के प्रति निष्ठावान बने रहेंगे, उन्हें अनन्त जीवन प्राप्त होगा।

धर्माध्यक्ष जोसेफ अर्शाद ने विश्वासियों को संबोधित कर कहा कि पास्का का त्योहार हम ख्रीस्तानुयायियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण धटना है जो हममें आध्यात्मिक ताजगी और खुशहाली लाती है। पास्का की यह पवित्र घटना येसु के दुःखभोग क्रूसमरण और पुनरुत्थान की यादगार है। हम विश्वास करते हैं कि येसु ख्रीस्त ने अपने दुःखभोग और क्रूसमरण द्वारा हमें हमारे आदि पाप से मुक्त किया है और हमें अनंत जीवन में सहभागी होने का मार्ग दखाया है।

येसु ख्रीस्त का दुःखभोग, क्रूसमरण और पुनरुत्थान ही हमारे विश्वास का आधार है। येसु ने पहले से ही अपने चेलों को पिता ईश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित पापी मानवता के मुक्ति विधान को पूरा करने हेतु अपने दुःखभोग, क्रूसमरण और पुनरुत्थान के बारे बता चुके थे। रोमियों को लिखे संत पौलुस के पत्र अध्याय 5 पद संख्या 8 में हम पढ़ते हैं ″ किन्तु हम पापी थे जब मसीह हमारे लिए मर गये थे। इस से ईश्वर ने हमारे प्रति अपने प्रेम का प्रमाण दिया है।″  पुनरुत्थान के तथ्य को प्रमाणित करते हुए वे कुरिंथियों के नाम पहले पत्र के अध्याय 15 पद संख्या 14 में लिखते हैं,″यदि मसीह नहीं जी उठे तो हमारा धर्मप्रचार व्यर्थ है और आप लोगों का विश्वास भी व्यर्थ है।″  अतः ख्रीस्त के दुखभोग, क्रूसमरण और पुनरुत्थान पर विश्वास प्रकट करना अत्यंत आवश्यक है। इस संदर्भ में हम प्रभु की अंतिम व्यारी में पाते हैं ″ उन्होंने रोटी ली धन्यवाद की प्रार्थना पढ़ने के बाद उसे तोड़ा और यह कहते हुए शिष्यों को दिया,″यह मेरा शरीर है, जो तुम्हारे लिए दिया जा रहा है। यह मेरी स्मृति में किया करो।″ (लूक. 22,19)

हम पाते हैं कि येसु के मिशन के शुरु करते ही फरीसियों, शास्त्रियों और सदूकियों ने मसीह का विरोध करना शुरू किया। वे चाहते थे कि वे अपने तानाशाह अधिकार के तहत यथास्थिति में रहें। लेकिन उन्हें अपने उद्देश्य में असफल होते देख, उससे छुटकारा पाने के लिए उन्होंने उसे मार डालने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने येसु के चेले यूदस इस्कारयोती को ही मोहरा बनाया। उन्होंने येसु को भयंकर पीड़ा और क्रूस पर यातना सहते हुए कलवारी पहाड़ पर मार डालकर अपने संकल्प को पूरा किया। इतना ही नहीं उन्होंने येसु के जी उठने की भविश्यवाणी को पूरा न होने देने के लिए कब्र के द्वार को एक बड़े पत्थर से सील कर दिया और वहाँ पहरेदार बैठा दिये पर ईश्वर ने उनके दुर्भावनापूर्ण सपनों तथा षड्यंत्रों को तोड़ दिया और मौत के बंधन को तोड़ते हुए अपने बेटे को महिमा में पुनर्जीवित किया।

अतः ईस्टर का पवित्र अवसर हमारे प्रभु येसु मसीह की शानदार पुनरुत्थान है। पिता ईश्वर के मुक्ति विधान को पूरा करने के लिए येसु ने क्रूस मरण को स्वीकार किया और अंत तक आज्ञाकारी बने रहे। वे हमें भी अनंत जीवन की ओर इंगित करते हुए कहते हैं कि संकीर्ण मार्ग से होकर ही हम अनंत जीवन प्राप्त कर सकते हैं। संत मत्ती के सुसमाचार अध्याय 16 पद संख्या 24 में हम पाते हैं, ″जो मेरा अनुशरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करे और अपना क्रूस उठा कर मेरे पीछे हो ले।″

धर्माध्यक्ष ने कहा कि दुःख तकलीफों, अत्यचार, संकट, उत्पीड़न के बिना हमारा जीवन येसु के प्रेम से वंचित हो जाएगा। मृत्यु पर विजय पाये येसु ख्रीस्त हमें हमारे दैनिक जीवन में आने वाले हर तकलीफों कष्टों और उत्पीड़नों को सहने की शक्ति दें ताकि हम पुनर्जीवित प्रभु के प्रेम और आशा का संदेशवाहक बन सकें।


(Margaret Sumita Minj)

आसीसी के विघटित तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर संत पापा का संदेश

In Church on April 17, 2017 at 3:02 pm

संत पापा फ्रांसिस ने आसीसी के विघटित तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर आसीसी प्रांत के धर्माध्यक्ष दोमनिको सोरेनतीनो के नाम अपना प्रेरितिक पत्र प्रेषित करते हुए संदेश दिया।

संत पापा ने अपने पत्र में 04 अक्टूबर सन् 2013 की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि मैं अपनी इस मुलाकात के दौरान उस टूटे हुए कमरे में खड़ा था जहाँ युवा फ्राँसिस अपने वस्त्र और सारी दुनियावी चीजों का परित्याग करते हुए अपने को प्रभु और लोगों की सेवा हेतु अर्पित किया था। इस घटना को प्रकाशित करने हेतु आप ने संत आसीसी के पुराने महागिरजा घर को पुनः स्थापित करने की पहल की है। इस क्रम ने असीसी की पवित्र भूमि को “आसमानी शहरी” का रुप दिया है जो ख्रीस्तीय तीर्थयात्रियों में आध्यात्मिक और प्रेरितिक फल उत्पन्न करता है। अतः मैं 20 मई के इसके आधिकारिक उद्घाटन हेतु आप को अपनी शुभकामनाएं अर्पित करता हूँ।

संत पापा ने आसीसी में अपनी प्रथम यात्रा को अपने दिल के अति करीब बताया। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि संत फ्रांसिस आसीसी उस स्थान पर अपने जीवन से सारी दुनियावी धन दौलत का परित्याग किया जिसके जंजाल में उनका पूरा परिवार पड़ा था, विशेषकर, उनके पिता पीटर बेरनार्ददोने। निश्चित ही, परिवर्तित युवा फ्राँसिस ने अपने पिता के प्रति अपने सम्मान को खोया किन्तु वह अपने जीवन में इस बात को महसूस करता है कि एक बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के रुप उसे, येसु को अपने प्रियजनों से अधिक प्रेम करने की जरूरत है। दीवार पर बनी चित्रकारिता में हम फ्रांसिस के खफा अभिभावकों की आँखों को देख सकते हैं जो अपने बेटे के पैसे और वस्त्र को ले जाते हैं, जबकि नंगा लेकिन सभी चीजों से मुक्त युवा अपने को धर्माध्यक्ष गुइदो की बाहों में समर्पित करता है। इस दृश्य में धर्माध्यक्ष का युवा फ्रांसिस को अपने लबादे से ढ़कना कलीसिया की मातामयी प्रेम की याद दिलाती है।

लूट का सभागार के बारे में जिक्र करते हुए संत पापा ने कहा कि यह हमें विशेष रूप से ग़रीबों से मिलने को आमंत्रित करता है। यह दृश्य हमें आज भी दुनिया में कितने ही गरीब और धनियों के बीच में उत्पन्न खाई की बात को बयाँ करता है जो जीवन की अत्यन्त जरूरी वस्तुओं से अपने को अलग पाते हैं जबकि दूसरी ओर दुनिया के चंद लोगों दुनिया की अकूत संपत्ति के मालिक बनकर रहते हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि सुसमाचार घोषणा के दो हजार सालों के बाद और संत फ्राँसिस के साक्ष्य के आठ दशकों के बाद भी आज हम “वैश्विक असमानता की घटना” और “अर्थव्यवस्था की हत्या”का सामना कर रहे हैं। (एवेनजेलियुस गौदियुम, 52-60) संत पापा ने अपने पत्र में लिखा कि मेरे आसीसी पहुँचने के दूसरे दिन लाम्पदूसा के समुद्री तट ने कितने ही प्रवासियों को अपने में निगल लिया। निर्वासन स्थल के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि युवा फ्रांसिस जब गरीबों कोढ़ग्रस्त लोगों के बीच आयें तो उन्हें अपनी “आत्मा और शरीर के माधुर्य” की अनुभूति हुई।

संत फ्राँसिस के नये पूजन-स्थल की अभिलाषा एक न्यायपूर्ण और संगठित समाज के द्वारा शुरू हुई जो कलीसिया को फ्राँसिस के द्वारा चुने गये पद चिन्हों का स्मरण दिलाती है जिन्होंने अपने को दुनियादारी के वस्त्रों से विमुख करते हुए सुसमाचार के मूल्यों को अंगीकृत किया। संत पापा ने निर्वासन स्थल के बारे में जोर देते हुए कहा, “हम निर्धनता का जीवन जीने हेतु बुलाये गये हैं, हम अपने जीवन का परित्याग करने हेतु बुलाये गये है,  हमें यह सीखने की आवश्यकता है कि निर्धनों के संग कैसे जीवन जीना है। एक ख्रीस्तीय गरीब को नजरंदाज नहीं कर सकता।” आज हमें कलीसिया के जीवन को वचनों के बजाय अपने कार्यों में जीते हुए नवीन सुसमाचार का साक्ष्य देने की जरूरत है। संत पापा ने अपने पत्र में कहा कि हमें मुफ्त में मिला है अतः हमें मुफ्त में देने की जरूरत है।

संत फ्राँसिस ने सुसमाचार के वचनों पर चिंतन किया, विशेषकर, उसने येसु के चेहरे को कोढ़ियों में देखा। संत दोमियानो के द्वारा उन्हें एक संदेश मिला, “फ्राँसिस जाकर मेरे घर की मरम्मत करो।”  संत फ्राँसिस के समय में गिरजाघरों की देखरेख की जरुरत थी। वास्तव में, यह पवित्र उपहारों में से एक था जो ऊपर से पापी को दिया गया था अतः उसे पापों के लिए पश्चाताप और अपने में नवीनीकरण करने की जरूर थी। यदि वह अपने को नहीं देखता तो वह अपना नवीकरण कैसे करता। जिस तरह आप अपने महागिरजाघर का पुननिर्माण करना चाहते हैं। हममें से कितने हैं जो येसु के मनोभवों को अपने में धारण करते हैं क्योंकि वे ईश्वर के प्रति रुप थे लेकिन उन्होंने दास का रुप धारण कर अपने को दीन-हीन बना लिया। वे अपनी नम्रता में क्रूस के मरण तक आज्ञाकारी बने रहे।

जन्म से ले कर पास्का तक हम येसु के रहस्य को पाते हैं। येसु का स्तत्व-हरण प्रेम का रहस्य है। यह दुनिया की वास्तविकता का तिरस्कार करने को नहीं कहती है क्योंकि दुनिया की सारी चीजें ईश्वर की ओर से आती है। संत फ्रांसिस हमें बह्माण्ड की सुन्दरता का गुणगान करने का निमंत्रण देते हैं। यह हमें ईश्वर अपने स्वार्थ का परित्याग करते हुए दुनिया की सारी चीजों में ईश्वर का महिमागान करने हेतु निमंत्रण देता है। एक सच्ची ख्रीस्तीयता हमें दुःख के मार्ग में नहीं वरन खुशी में ले चलती है।


(Usha Tirkey)

उड़ीसा के नए काथलिक शहादत के लिए भी तैयार

In Church on April 17, 2017 at 3:00 pm

रांकिया, सोमवार, 17 अप्रैल 2017 (मैटर्स इंडिया) : प्रबिन डिंगल को अपनी माँ और छोटे भाई के साथ काथलिक बनने का सबसे बड़ा निर्णय लेते वक्त आने वाली जोखिमों का पता था।

उड़ीसा के कंधमाल जिले में रांकिया के दया की मरियम पल्ली में 12 फरवरी को बपतिस्मा लेने के पश्चात 22 वर्षीय प्रबिन ने मैटर्स इंडिसा से कहा, ″ चाहे जो भी हो हम येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास को कभी नहीं छोड़ेंगे। ख्रीस्त पर अपने विश्वास के लिए हम मरने को भी तैयार हैं।″

नौ साल पहले कंधमाल में सबसे बुरी ख्रीस्तीय-विरोधी हिंसा की वारदात हुई थी जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गये थे और 56,000 बेधर हो गये थे जब कट्टरपंथी हिंदुओं ने जिले में ख्रीस्तीयों को निशाना बनाया।

डिंगल की 40 वर्षीय माँ चंद्रिका ने कहा,″ येसु को स्वीकार करने के निर्णय लेने के बाद उसे जो आंतरिक खुशी मिली है उस खुशी का और कोई दूसरा विकल्प हो ही नहीं सकता। यह ईश्वर की आशीष है कि हमने पूर्ण ज्ञान के साथ और पूरी आजादी से ख्रीस्तीय विश्वास को स्वीकार कर लिया है।″

उसने और उनके बेटों ने 6 वर्षों तक ख्रीस्तीय धर्म के बारे शिक्षा पाने और लगातार धर्मविधियों में भाग लेने के बाद बपतिस्मा ग्रहण किया है। वे बपतिस्मा लेने और मसीह के नजदीक आने के इस सुन्दर अवसर के लिए ईश्वर के प्रति आभारी हैं।

उन्होंने कहा, येसु ही हमारा सबकुछ है। ईश्वर हमारे मुक्तिदाता हैं। भारत में ख्रीस्तीयों की परिस्थिति को देखते हुए कहा “विश्वास के लिए मरना एक महान सम्मान होगा। हम साहस और दृढ़ विश्वास के साथ अपने विश्वास का दावा करने के लिए तैयार हैं। मैं किसी भी स्थिति में अपने काथलिक पहचान को नहीं छिपाऊँगी।”


(Margaret Sumita Minj)

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