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पास्का अठवारा हेतु संत पापा का सुझाव

In Church on April 18, 2017 at 2:57 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने पास्का अठवारे में सुसमाचार के उस अंश का पाठ करने की सलाह दी है जो येसु के पुनरूत्थान का वर्णन करता है।

उन्होंने 18 अप्रैल के ट्वीट संदेश में लिखा, ″पास्का के इस सप्ताह में यह हमारे लिए अच्छा होगा कि हम प्रतिदिन सुसमाचार के उस अंश को पढ़ें जो येसु के पुनरूत्थान के बारे बतलाता है।″


(Usha Tirkey)

फ्राँसिस एवं जसिन्ता मारतो ने माता मरियम के संदेश की सच्चाई को प्रकट किया

In Church on April 18, 2017 at 2:55 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (वीआर इताली): वाटिकन में संत पापा फ्राँसिस बृहस्पतिवार 20 अप्रैल को कार्डिनलों की तीसरी आमसभा परिषद का नेतृत्व करेंगे जो 36 नये संतों की घोषणा पर विचार करेगी। जिनमें से दो हैं फ्राँसिस एवं जसिन्ता मारतो जिन्होंने फातिमा में माता मरियम का दिव्य दर्शन किया था और अब उसका एक सौ साल हो चुका है।

इन दो नन्हें चरवाहों की संत घोषणा के महत्व को समझने हेतु लिये गये एक साक्षात्कार में कतानिया और फातिमा के उच्च धार्मिक संस्थान ‘संत लुका’ के प्रोफेसर ने कहा कि सब कुछ फातिमा संदेश, दिव्य दर्शन एवं उसके रहस्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि उन दिव्य दर्शन देखने वालों ने अपने जीवन द्वारा माता मरियम के संदेश की सच्चाई को प्रकट किया तथा पवित्रता के शिखर पर पहुँचे जो प्रमाणित करता है कि दिव्य दर्शन जिसका उन्होंने साक्ष्य दिया वे उसके ठोस साक्षी हैं। इन दो गड़ेरियों की संत घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने माता मरियम के संदेश को ग्रहण किया तथा अपने लघु जीवनकाल में उसका अभ्यास किया। माता मरियम ने शांति हेतु प्रार्थना करने तथा पापियों के लिए तपस्या करने की मांग की थी जिसको उन्होंने पूरा किया।

क्या यह माता मरियम द्वारा सीधे उनसे मांगा गया था? इस सवाल के उत्तर में प्रोफेसर ने कहा, ″माता मरियम के दिव्य दर्शनों में से एक में उन्होंने साक्षात् रूप से प्रकट करते हुए कहा था कि अनेक आत्माएँ नरक की ओर जा रही हैं। जिसके लिए उन नन्हे गड़ेरियों ने अपना जीवन, अपना त्याग, पीड़ा एवं बीमारी अधिक से अधिक आत्माओं को बचाने के लिए अर्पित किया। इस प्रकार उन्होंने अपने जीवन से पवित्रता एवं दिव्य दर्शन की सच्चाई को प्रकट किया।″

इन नन्हें चरवाहों की आध्यात्मिकता क्या थी, के जवाब में उन्होंने कहा कि जसिन्ता ने तीन चीजों के प्रति भक्ति को विकसित किया, पवित्र यूखरिस्त, माता मरियम के निष्कलंक हृदय एवं संत पापा। वे सहर्ष आत्मदमन करती थीं। उन्होंने पश्चाताप हेतु अपने कमर में एक ऐसे कमरबंध का प्रयोग तब तक किया जब तक कि वे बीमार नहीं हो गयीं। वे जमीन पर अथवा पत्थर पर बैठती थी तथा यह दुहराती रहती थीं कि ″मुझे उन आत्माओं के लिए कितना अधिक दुःख है जो नर्क में चली गयी हैं और इसके लिए उसने विलाप किया तथा लगातार प्रार्थना एवं त्याग किया।

जसिन्ता ने पापियों के लिए बीमारी स्वीकार किया, भोजन एवं दवाई से अपने को दूर रखा तथा परिवार से अलग रहने का प्रयास किया। उनकी इच्छा थी कि वे अकेले में प्राण त्याग दें जो सच हुआ।

फ्राँसिस दूसरों के दुःख के प्रति बहुत अधिक सहानुभूति रखते थे। उन्हें बहुधा छिपकर घुटनों के बल प्रार्थना करते एवं येसु पर चिंतन करते हुए पाया गया। उन्होंने दुःखी होकर कहा कि वे ऐसा अनेक पापों के लिए करते हैं। आत्माओं की मुक्ति के लिए उन्होंने प्रार्थना और पश्चाताप किया तथा मुख्य रूप से वे प्रभु को सांत्वना देना चाहते थे।

प्रोफेसर ने कहा कि इस प्रकार उन्होंने अपने जीवन द्वारा माता मरियम के संदेश की सच्चाई को प्रकट किया है।


(Usha Tirkey)

शरणार्थियों एवं विस्थापितों की ओर से पास्का संदेश

In Church on April 18, 2017 at 2:53 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): प्रभु जी उठे हैं हम खुश हों और आनन्द मनायें। यह बात मानव अधिकार कार्यकर्ता, एक भारतीय जेस्विट पुरोहित फा. सेद्रिक प्रकाश ने वाटिकन रेडियो से कही।

लेबनान के बेरूत स्थित मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के लिए जेसुइट रेफ्यूजी सर्विस (जेआरएस) के क्षेत्रीय वकील और संचार अधिकारी फा. प्रकाश ने कहा कि वे यह शुभकामना मध्यपूर्व के उन लाखों लोगों की ओर से भेज रहे हैं जो शरणार्थी बन चुके हैं, जो विस्थापित हैं तथा सीरिया, मिस्र, ईराक एवं आसपास के क्षेत्रों में कई वर्षों से युद्ध एवं हिंसा द्वारा प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा, ″लोगों के लिए यहाँ रहना आसान नहीं है किन्तु हम प्रार्थना एवं आशा करते हैं कि हमारे पुनर्जीवित प्रभु सभी लोगों के जीवन एवं हृदय का स्पर्श करेंगे।″

फादर ने बतलाया कि विगत सप्ताहों में इस क्षेत्र के लोगों ने हिंसा में बढ़ोतरी का अनुभव किया है पुण्य शनिवार को अलेप्पो के बाहर एक बस में बम विस्फोट के कारण 125 लोगों की मृत्यु हो गयी। बस, लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर ले जा रही थी। मारे गये लोगों में से अनेक निर्दोष बच्चे थे। संत पापा फ्राँसिस ने अपने पास्का संदेश में घटना के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना की तथा हमले को सबसे ‘नीच कार्य’ कहा। अप्रैल माह के आरम्भ में रासायनिक बम आक्रमण में दर्जनों की मौत हो गयी है। लगभग उसी समय ईराक के तिक्रीत में कई लोग मारे गये थे। खजूर रविवार को मिस्र के दो गिरजाघरों में आक्रमण ने विश्वभर को चौंका दिया।

फा. प्रकाश ने कहा कि दुर्भाग्य से इस क्षेत्र में हिंसा बहुत अधिक बढ़ चुका है। इस हिंसा में मारे जाने और बुरी तरह प्रभावित होने वाले सभी सामान्य लोग हैं। इसे प्रभावित लोग बहुत अधिक असहाय महसूस करते हैं। निहित स्वार्थ के कारण लोग इस मूर्खतापूर्ण युद्ध को समाप्त करना नहीं चाहते और हिंसा का अंतहीन चक्र रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोगों की यही प्रार्थना है कि जी उठे ख्रीस्त उन लोगों के हृदय को स्पर्श करें, विशेषकर, उन कठोर हृदयों को जो इस क्षेत्र में शांति लाने के लिए उत्तरदायी हैं।

जेस्विट फा. सेद्रिक प्रकाश भारत के गुजरात प्रोविंश के हैं जिन्होंने 2001 में अहमदाबाद में मानव अधिकार, न्याय एवं शांति के लिए जेस्विट केंद्र की स्थापना की थी। मानव अधिकार संबंधी उनके इन कार्यों के लिए उन्हें भारत एवं विदेशों में भी सम्मानित किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि युद्ध एवं हिंसा के इन दुःखों एवं पीड़ाओं के बीच भी आशा से जुड़ी कई कहानियाँ हैं। उन्होंने बतलाया कि एक माह पहले 15 मार्च को, जेसुइट रेफ्यूजी सेवा ने सीरियाई शरणार्थियों और विस्थापन के लिए अभियान जारी किया जो कई लोगों के लिए आशा की किरण के समान है। उन्होंने कहा कि हमारा विश्वास है कि पास्का का संदेश यही है।


(Usha Tirkey)

जॉर्डन के प्रधानमंत्री ने दी ख्रीस्तीय समुदाय को पास्का की शुभकामनाएँ

In Church on April 18, 2017 at 2:51 pm

जॉर्डन, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): ″एक संयुक्त परिवार जो देश के निर्माण में सक्रिय भाग लेता है।″ यह बात जॉर्डन के प्रधानमंत्री हनी मुल्की ने पास्का रविवार को जॉर्डन में ख्रीस्तीय समुदाय के नेताओं से मुलाकात करते हुए कही।

अम्मान स्थित ऑर्थोडोक्स कलीसिया के मुख्य आवास पर पास्का के उपलक्ष्य में निमंत्रित प्रधानमंत्री अपने कई मंत्रियों एवं अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ उपस्थित थे। उन्होंने राजा अब्दुल्लाह की ओर से देश के ख्रीस्तीय समुदाय को पास्का पर्व की शुभकामनाएं अर्पित कीं।

प्रधानमंत्री हनी मुल्की ने कहा, ″राजा अबदुल्लाह के नेतृत्व में जॉर्डन एक सुरक्षित एवं स्थायी राष्ट्र है तथा जॉर्डन वासी एक परिवार के रूप में, राष्ट्रीय सामाजिक विकास तथा अपने देश को आदर्श एवं सफल बनाने के तरीके को बढाने का प्रयास कर रहे हैं।″

जॉर्डन के प्रधानमंत्री ने तानता और अलेक्जाड्रिया के दो कोप्टिक गिरजाघरों में आतंकी हमलों की निंदा की। उन्होंने उसे शर्मनाक करार दिया तथा कहा कि आतंकवादियों को इसकी सज़ा जरूर मिलेगी।

सीनेट के अध्यक्ष फैसल एल फायज़ ने जॉर्डन के मुस्लिम एवं ख्रीस्तीयों के बीच एकता पर गर्व करते हुए कहा कि ख्रीस्तीयता जॉर्डन समाज का एक अनिवार्य अंग है। उन्होंने भी मिस्र के गिरजाघरों में हुए हमलों की निंदा की तथा कहा कि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता।

अंत में, उन्होंने मध्य पूर्व में ईसाइयों के साथ जॉर्डन की एकता व्यक्त की।


(Usha Tirkey)

असम में ‘दो बच्चे नीति’ की ख्रीस्तीयों द्वारा विरोध

In Church on April 18, 2017 at 2:49 pm

नई दिल्ली, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र असम राज्य ने एक ऐसी नीति का प्रस्ताव रखा है जिसमें दम्पति दो से अधिक बच्चे पैदा नहीं कर सकते, जिसके संबंध में ख्रीस्तीय और मुस्लिम नेताओं का विचार है कि यह नीति धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए एक चाल है।

राज्य हिन्दू समर्थक भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित है जिसने यह घोषित किया है कि यह जनसंख्या वृद्धि की जांच हेतु एक नीति मसौदा के रूप में है। इसमें कहा गया है कि दम्पति जिन्हें दो से अधिक बच्चे हैं वे सरकारी नौकरी तथा अन्य सामाजिक कल्याण के लाभ से वंचित होंगे। मसौदा में यह भी कहा गया है कि जिनके दो से अधिक बच्चे हैं वे गांव स्तर पर चुनाव एवं नागरिक या अन्य स्वायत्त परिषद चुनाव में अयोग्य माने जायेंगे।

राज्य स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में एक खतरनाक जनसंख्या विस्फोट देखा जा रहा है। 2001 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 26.7 मिलियन थी जो 2011 की जनगणना के अनुसार बढ़कर 31.2 मिलियन हो गयी है।

उन्होंने जनसंख्या में तीव्र वृद्धि का मुख्य कारण जल्द विवाह बताया। मंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि लोग विवाह हेतु कानूनी आयु पुरुषों के लिए 21 और  महिलाओं के लिए 18 पर भी बहस करें ताकि जल्द विवाह को रोका जा सके। जो ख्रीस्तीयों एवं मुसलमानों के लिए ठीक नहीं है।

असम के गुवाहटी के महाधर्माध्यक्ष जोन मूलाकिरा ने ऊका समाचार से कहा, ″हम इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं क्योंकि बहुत सारे काथलिक आदिवासी समुदाय से आते हैं। सरकार की मनसा धार्मिक अल्पसंख्यकों को परेशान करना है।″

असम राज्य के बोंगाईगाँव के धर्माध्यक्ष थॉमस पुल्लोप्पिल्लील ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव पास हो जायेगा तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है। सभी समुदाय इसे प्रभावित होंगे।

2011 के सरकारी आंकड़े अनुसार असम में मुसलमानों एवं ख्रीस्तीयों की औसत संख्या अधिक है। राज्य के कुल 31 मिलियन में से करीब 35 प्रतिशत लोग मुसलमान हैं, लगभग चार प्रतिशत लोग ख्रीस्तीय हैं और हिन्दूओं की संख्या 61 प्रतिशत है जबकि पूरे भारत में हिन्दूओं की संख्या 80 प्रतिशत, मुस्लिमों की 18 और ख्रीस्तीयों की संख्या कुल 2.3 प्रतिशत है।

अखिल भारतीय संयुक्त डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने प्रस्तावित नीति की निंदा करते हुए कहा कि यह ″मौलिक अधिकारों का हनन है″। इस नीति के तहत मुस्लिम और ख्रीस्तीय अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि उन परिवारों में अधिक बच्चे होते हैं।


(Usha Tirkey)

प्रेरक मोतीः रोम के सन्त अपोल्लोनियुस (161-192)

In Church on April 18, 2017 at 2:48 pm

वाटिकन सिटी, 18 अप्रैल सन् 2017

रोम के अपोल्लोनियुस दूसरी शताब्दी के सन्त और शहीद हैं जो अपनी कृति “अपोलोजिया” अर्थात् “विश्वास के बचाव” शीर्षक से लिखी पुस्तक के लिये विख्यात हैं। अपोल्लोनियुस की यह कृति आरम्भिक कलीसिया के अनमोल दस्तावेज़ों में गिनी जाती है।

अपोल्लिनियुस एक रोमी शतपति थे तथा प्रभु ख्रीस्त में उनकी अपार आस्था थी। इसी कारण उनके ही एक गुलाम ने उनकी शिकायत कर दी थी। ख्रीस्त में उनके विश्वास के कारण तिजिदियुस पेरेन्निस ने अपोल्लोनियुस को गिरफ्तार कर लिया तथा सूचना देनेवाले गुलाम को भी मौत के घाट उतार दिया। पेरेन्निस ने मांग की शतपति अपोल्लिनियुस अपने विश्वास का परित्यग करें किन्तु उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

अपोल्लिनियुस के इनकार के बाद प्रकरण रोमी महासभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस सभा में पेरेन्निस तथा अपोल्लिनियुस के बीच वाद विवाद हुआ जिसमें अपोल्लिनियुस ने ख्रीस्तीय धर्म के मूल्य तथा उसके सौन्दर्य को रेखांकित किया। अपने सुस्पष्ट एवं सुन्दर बचाव के बावजूद अपोल्लिनियुस को प्राणदण्ड की सज़ा दे दी गई तथा सिर से धड़ अलग कर उन्हें मार डाला गया। शहीद सन्त अपोल्लिनियुस का पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाता है।

चिन्तनः सतत् प्रार्थना द्वारा कठिनाइयों एवं अत्याचारों के क्षणों में भी हम अपने विश्वास का साक्ष्य प्रदान करें।


(Juliet Genevive Christopher)

पास्का की ज्योति जो कभी नहीं बूझती

In Church on April 18, 2017 at 2:47 pm

पाणाजी, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (ऊकान): काथलिक कलीसिया की परम्परा में पास्का पर्व में प्रयुक्त मोमबत्ती का निर्माण, भारत की कलीसिया के लिए गोवा की एक औद्योगिक इकाई करती है।

गोवा में मोमबत्ती केंद्र के प्रबंध निदेशक फा. जोस फुरतेदो ने कहा, ″धन्य यूसुफ वज़ एंटरप्राइजेज में, गोवा महाधर्मप्रांत में मशीन से बनी पास्का मोमबत्ती का प्रयोग नहीं किया जाता है। वहाँ 2013 से ही हस्तनिर्मित मोमबत्ती का प्रयोग किया जा रहा है।″

इस मोमबत्ती की विशेषता है कि इसके सभी भाग मोम से ही बने होते हैं जो कि पहले ऐसा नहीं था 2013 से पहले मोमबत्ती में पारदर्शी विनाइल स्टिकर अथवा पेपर का प्रयोग अक्षरों को अंकित करने के लिए किया जाता था।। अब, एक मोम शीट का उपयोग किया जाता है।

फा. फुरतादो ने कहा, ″इस वर्ष, हमने मोम से युक्त पिपलीक्स का उपयोग किया है। इसमें फीता, कपड़ा, या कागज जैसी किसी दूसरी वस्तु का प्रयोग नहीं किया गया है। पास्का मोमबत्ती पूरी तरह मोम से बना है।″

उन्होंने जानकारी दी कि विभिन्न पल्लियों से मात्र इस वर्ष केंद्र से करीब 250 पास्का मोमबत्ती की मांग की गयी थी।

मोम बत्ती का निर्माण एक गहन श्रम का कार्य है एक मोमबत्ती के निर्माण में करीब दिनभर का समय लग जाता है तथा चार ही मोम बत्तियों में सजावट किया जाना संभव है। मोमबत्तियों के आकार अलग-अलग हैं सबसे छोटी मोमबत्ती 15 एंच लम्बी है तथा दूसरी 20,22 और 24 इंच की होती हैं।

गोवा में वेर्ना की मोमबत्ती बिक्री केंद्र ही एक मात्र मोमबत्ती दुकान है जो 50 साल पुराना है जिसकी देखभाल हैंडमेडस ऑफ ख्राईस्ट धर्मसमाज की धर्मबहनें करती हैं।


(Usha Tirkey)

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