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पुनरुत्थान हमारे विश्वास का आधार

In Church on April 19, 2017 at 3:34 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को आशा पर अपनी धर्मशिक्षा को आगे बढ़ते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

हम आज पुनरुत्थान की ज्योति में मिलते हैं जिसे हमने पास्का के रुप में मनाया और इन दिनों कलीसिया की धर्मविधि में मना रहे हैं। आज की धर्मशिक्षा में हम ख्रीस्तीय आशा पर चिंतन करेंगे जो येसु के पुनरुत्थान पर आधारित है जिसकी चर्चा संत पौलुस कुरिंथियों के नाम लिखित अपने प्रथम पत्र में करते हैं। कुरिंथियों के समुदाय में पुनरुत्थान एक चर्चा का विषय था जिसे वे स्पष्ट करना चाहते हैं। पुनरुत्थान का जिक्र संत पौलुस कुरिंथियों के नाम अपने पहले पत्र के सबसे अंतिम अध्याय में करते हैं किन्तु महत्वपूर्णतः के क्रम में यह प्रथम स्थान पर आता है क्योंकि बाकी अन्य चीज़े इसी पर आधारित हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि संत पौलुस हमें कहते हैं कि यह किसी बुद्धिमान व्यक्ति के निर्णयात्मक चिंता से नहीं वरन एक सत्य से शुरू होती है जिसके द्वारा लोग अपने जीवन में प्रभावित होते हैं। ख्रीस्तीयता का उद्गम यहीं से होता है। यह कोई विचार धारा नहीं है और न ही दार्शनिक प्रणाली वरन यह विश्वास की एक यात्रा है जो एक घटना के द्वारा शुरू होती है जिसका साक्ष्य येसु के प्रथम शिष्यों ने दिया। संत पौलुस संक्षेप में इसे प्रस्तुत करते हुए कहते हैं- “येसु हमारे पापों के कारण मर गये, दफनाये गये और तीसरे दिन मृतकों में से जीव उठते और अपने शिष्यों को दिखाई दिये।” (1 कुरि. 15. 3-5)

यह घटना हमारे विश्वास का आधार है जिसकी चर्चा करते हुए संत पौलुस पास्का के रहस्य पर जोर देते हैं जो कि येसु ख्रीस्त का पुनरुत्थान, उनका सचमुच मुर्दों में से जी उठा है। येसु के पुनरुत्थान में हम अपने विश्वास के मूल रुप को पाते हैं। हमारा विश्वास येसु के क्रूस मरण पर पूर्णतः को प्राप्त नहीं करती वरन यह उनके जी उठने पर अपनी पूर्णतः को प्राप्त करती है। अतः हमारे विश्वास का जन्म पास्का रविवार की सुबह को होता है। संत पौलुस हमें उन सभी लोगों का एक विवरण प्रस्तुत करते हैं जिन्हें पुनर्जीवित प्रभु येसु ख्रीस्त ने दर्शन दिये।(1 कुरि. 15.5-7) इसमें सर्वप्रथम केफस अर्थ पेत्रुस और बारह शिष्यों का समुदाय और इसके अलावे पाँच सौ की संख्या में विश्वासी का समुदाय शामिल हैं जो उनके दर्शन का साक्ष्य देते हैं जिनमें योहन का नाम भी शामिल है। इन सभों की सूची में संत पौलुस का नाम सबसे नीचे आता है जो अपने को परित्यक्त, सबसे अयोग्य समझते हैं।

संत पौलुस अपने लिए इन शब्दों का उपयोग करते हैं क्योंकि उनके व्यक्तिगत जीवन को हम एक नाटकीय रुप में पाते हैं। वे कलीसिया को प्रताड़ित करते थे। उन्हें अपने धर्म सतावट के कार्यों पर तब तक गर्व था जब तक उनकी मुलाकात आश्चर्यजनक रुप से पुनर्जीवित प्रभु येसु से दमिश्क की राह पर नहीं होती है। वे न केवल जमीन पर अधोमुँह गिरे वरन उस गिरने के द्वारा उनके सम्पूर्ण जीवन का अर्थ ही बदल गया।

ख्रीस्तीयता के बारे में विचार करना हमारे लिए कितना अच्छा है जहाँ हम ईश्वर और अच्छाई की खोज नहीं करते वरन हम स्वयं में अपने ईश्वर की खोज करते हैं। ईश्वर हमें अपने में पकड़ कर रखते हैं उन्होंने हमारे लिए विजय प्राप्त की है और वे हमें कभी नहीं छोड़ते हैं। ख्रीस्तीयता हमें आश्चर्य नहीं करती वरन यह हमारे हृदय में विस्मय के भाव जागृत करती है।

अतः संत पापा कहते हैं कि यदि हमारे अच्छे सोच केवल काग़ज़ों तक ही सीमित होकर रह गये हों या हम अपने जीवन में अवलोकन करते हुए इस बात का एहसास करते हैं कि हम में बहुत सारी बुराइयाँ हैं तो हम पास्का के सुबह की तरह उन लोगों की भाँति कार्य करें जिनकी चर्चा सुसमाचार हमारे लिए करता है, हम येसु की कब्र के पास जायें और बड़े पत्थर जिसे हटा दिया गया है, देखें और ईश्वर के बारे में चिंतन करें जो हमारे भविष्य के बारे में सोचते हैं। यहाँ हम अपने जीवन में अंधकार, दुःख और हार के बदले आनन्द, खुशी और जीवन का अनुभव करते हैं।

इस तरह ख्रीस्तीय होना मृत्यु का नहीं वरन ईश्वर के प्रेम का अंग होना है जो हमारे जीवन से हार और शत्रु की कटुता को दूर करती है। ईश्वर किसी भी चीज से बड़े हैं। हमें अंधकार पर विजय प्राप्त करने हेतु एक मोमबत्ती की जरूरत है। संत पौलुस कहते हैं, “मृत्यु कहाँ है तेरी विजय? कहाँ है तेरा दंश?” पास्का काल की इस अवधि में हम इन वचनों को अपने हृदय में झंकृत होने दें और यदि हम अपने में पूछें कि क्यों हमारे चेहरे पर मुस्कान है, हम क्यों धैर्य को एक दूसरे के साथ साझा करते हैं तो इसका उत्तर हमारे लिए यही है कि येसु हमारे साथ हैं, वे हमारे बीच रहना जारी रखते हैं।
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और सबों को पास्का के पुण्य अवधि की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

प्रभु के पुनरुत्थान के महान रहस्य पर मनन ध्यान करें, संत पापा

In Church on April 19, 2017 at 3:33 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर पास्का सप्ताह में पुनर्जीवित येसु की उपस्थिति का अनुभव करने हेतु विश्व के ख्रीस्तीयों को मनन चिंतन करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, ″आइए, हम विस्मय और कृतज्ञता के साथ प्रभु के पुनरुत्थान के महान रहस्य पर मनन ध्यान करें।″


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने ब्राजील के राष्ट्रपति को पत्र भेजा

In Church on April 19, 2017 at 3:32 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल तेमेर को यह कहते हुए पत्र लिखा कि वे कार्यक्रमों की व्यस्तता के कारण सन् 2017 में उसके देश का दौरा नहीं कर पाएंगे।

वाटिकन प्रेस ऑफिस ने पुष्टि की कि संत पापा ने “कुछ दिन पहले” पत्र भेजा था, लेकिन यह पूरी तरह से प्रकाशित नहीं किया गया था क्योंकि “यह एक निजी प्रकृति का था”।

बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति मिशेल तेमेर ने पत्र में संत पापा को 2017 में अपारसिदा की माता मरियम की 300 वी वर्षगांठ पर आमंत्रित किया था।

संत पापा ने पत्र में कहा कि “दुर्भाग्य से वे यात्रा नहीं कर सकते क्योंकि उनका कार्यक्रम इसे अनुमति नहीं देता।”

इसके अलावा,  पत्र में राष्ट्रपति तेमेर ने देश की सामाजिक समस्याओं का सामना करने के अपने प्रयासों के बारे में भी लिखा था। इस संदर्भ में संत पापा ने इस पहलू को रेखांकित करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे देश के सबसे गरीब लोगों को बढ़ावा देने के लिए काम करें।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस की चेसेना और बोलोन्या प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम

In Church on April 19, 2017 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) :  वाटिकन ने संत पापा फ्राँसिस की रविवार 1 अक्टूबर 2017 के प्रेरितिक यात्रा के कार्यक्रम को प्रकाशित किया है। संत पापा उत्तर इटली के चेसेना और बोलोन्या शहरों का दौरा करेंगे।

उनकी प्रेरितिक यात्रा संत पापा पियुस छठे की 300 वीं जन्मदिन सन् 1717 ई. से मेल खाती है उन्होंने 15 फरवरी सन् 1775 से 29 अगस्त सन् 1799 तक में विश्व व्यापी काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष का पद संभाला।

संत पापा फ्राँसिस बोलेन्या के धर्माध्यक्ष मत्तेओ मरिया जुप्पी और चेसेना-सारसीना के धर्माध्यक्ष डोग्लास रेगातियेरी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए यह प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

बोलोन्या महाधर्मप्रांत द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार संत पापा की प्रेरितिक यात्रा ‘धर्मप्रांतीय युखरीस्तीय कॉग्रेस’ के अवसर पर होगी जहाँ धर्मप्रांत के विश्वासी पवित्र बाइबिल को जानने और समझने तथा सुसमाचार प्रसार के लिए अपने प्रयासों को नवीनीकृत करने हेतु आमंत्रित किये गये हैं।

महाधर्माध्यक्ष ज़ुप्पी ने “निमंत्रण की स्वीकृति” के लिए संत पापा फ्राँसिस को धन्यवाद दिया।

संत पापा फ्राँसिस की यात्रा के कार्यक्रम निम्नलिखित हैः

07.00      वाटिकन हेलीपैड से हेलीकॉप्टर द्वारा चेसेना के लिए प्रस्थान।

08.00      चेसेना के हेलीपैड में आगमन।

पियासा देल पोपोलो में स्थानीय लोगों से मुलाकात।

महागिरजाघर में पुरोहितों, युवाओं और परिवारों से मुलाकात।

10.00      चेसेना के हेलीपैड से बोलोन्या के लिए प्रस्थान।

10.20      बोलोन्या आगमन।

विया मटेई के क्षेत्रीय केंद्र का दौरा।

इतालवी तट पर उतरे युवा आप्रवासियों के साथ बैठक।

12.00      पियाजा ग्रांदे में, काम की दुनिया के प्रतिनिधियों के साथ दूत संवाद प्रार्थना का पाठ।

12.30      संत पेत्रोनियो महागिरजाघर में गरीब लोगों के साथ दोपहर का भोजन।

14.30      महागिरजाघर में पुरोहितों के साथ बैठक।

15.30       संत दोमनिक महागिरजाघर में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों के

साथ बैठक।

17.00      युखरीस्तीय समारोह का अनुष्ठान।

18.45      हेलीकॉप्टर द्वारा बोलेन्या से वाटिकन के लिए प्रस्थान।

 


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने जन्मदिन पर बवेरिया के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया

In Church on April 19, 2017 at 3:29 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने सोमवार को अपना 90 वां जन्मदिन जर्मन साथियों और परिवार के सदस्यों को साथ पारंपरिक बवेरियन संगीत और बियर के साथ मनाया।

समारोह में उनके बड़े भाई मोन्सिन्योर जोर्ज रात्सिंगर, बवेरिया के प्रधानमंत्री होर्स्ट सीहोफर उपस्थित थे।

एमेरितुस पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने 90 वर्ष के जीवन के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया। उन्होंने जन्मभूमि बवेरिया जैसे सुन्दर देश के लिए ईश्वर के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा,″जीवन में बहुत सारी कठिनाईयां और चुनौतियाँ आई पर ईश्वर ने हमेशा मुझे मार्गदर्शन दिया और मुझे उन परिस्थितियों से उपर उठाया जिससे कि मैं अपने मार्ग में आगे बढ़ता रहूँ।″

एमेरितुस पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने अपनी जन्मभूमि की प्रशंसा करते हुए कहा, ″बवेरिया शुरु से ही सुन्दर देश रहा है वहाँ के घंटा घर, फूलों से भरे बालकनियों वाले घर और अच्छे लोग देश की सुन्दरता को बढ़ा देते हैं। बवेरिया की सुन्दरता को देखते ही लोग जानते हैं कि ईश्वर ने दुनिया की सृष्टि की है और वे जानते हैं कि ईश्वर के साथ मिलकर काम करने में ही सबकी भलाई है।

संत पापा ने वाटिकन उद्यान में उपस्थित बवेरियन पर्वत राईफलमेन से कहा, ″बवेरिया को यहाँ लाने के लिए आप लोगों को शुक्रिया। बवेरिया दुनिया के लिए खुली है और खुशी दे सकती है क्योंकि इसकी जड़ें विश्वास में अंतर्निहित हैं।”

अंत में संत पापा ने अपनी जन्मभूमि और देशवासियों को आशीर्वाद दिया और कहा, ″दिल में खुशी लिए मैं अपनी जीवन यात्रा जारी रखता हूँ।″

चूंकि उनका असली जन्मदिन 16 अप्रैल ईस्टर रविवार को हुआ, इसलिए पापा बेनेदिक्त सोलहवें  ने जन्म दिन मनाने के लिए अगले दिन सोमवार को चुना।


(Margaret Sumita Minj)

फातिमा के माता मरियम तीर्थ में ‘कुर्सिल्लोस दी क्रिस्तियानिता’ के पांचवें विश्व सम्मेलन पर विशेष दूत की नियुक्ति

In Church on April 19, 2017 at 3:27 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 19 अप्रैल को कार्डिनल जोआओ ब्राज़ द एवीज़ को पुर्तगाल में फातिमा की माता मरियम तीर्थालय में 4 से 6 मई तक आयोजित ‘कुर्सिल्लोस दी क्रिस्तियानिता’  के पांचवें विश्व सम्मेलन में भाग लेने हेतु अपना विशेष दूत नियुक्त किया।

कार्डिनल जोआओ ब्राज़ दे एवीज़ धर्मसंघी और धर्मसमाजियों एवं समर्पित जीवन की संस्थाओं के लिए बने संघ हेतु गठित  परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष हैं।


(Margaret Sumita Minj)

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