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संत पापा ने तय की नये संतों की संत घोषणा समारोह की तिथि

In Church on April 20, 2017 at 3:08 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 2017 (वीआर इताली): फातिमा के चरवाहे धन्य फ्राँसिस और जसिन्ता मारतो की संत घोषणा समारोह 13 मई को सम्पन्न किया जाएगा। इसकी घोषणा वाटिकन प्रेरितिक प्रासाद में 20 अप्रैल को आयोजित कार्डिनलों की एक आमसभा परिषद में वोट के बाद की गयी।

इस प्रकार यह संत घोषणा उस अवसर पर सम्पन्न की जायेगी, जब संत पापा फ्राँसिस माता मरियम के दिव्य दर्शन के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में फातिमा की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

बाकी सभी की संत घोषणा 15 अक्टूबर को तय की गयी है जिसमें धर्मप्रांतीय पुरोहितों धन्य अंद्रेया दी सोवेराल एवं धन्य अम्ब्रोसे फ्रांचेस्को फेर्रो, लोकधर्मी मातेओ मोरेईरा एवं उनके 27 शहीद साथियों की संत घोषणा सम्पन्न की जायेगी।

उसी दिन किशोर शहीद ख्रिस्टोफर, अंतोनियो तथा जॉन की भी संत घोषणा 15 अक्तूबर को ही सम्पन्न होगी, साथ ही डिवाईन पास्टर की पुत्रियों के धर्मसंघ के संस्थापक फा. फौस्तीनो माक्वेज़ तथा कपुचिन पुरोहित अंजेलो दा आक्री की भी संत घोषणा समारोह 15 अक्तूबर को मनायी जायेगी।


(Usha Tirkey)

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कृतज्ञता की भावना हेतु ईश्वर के कार्यों को पहचानने की आवश्यकता, संत पापा

In Church on April 20, 2017 at 3:06 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मेरिस्ट (मरियाभक्त) ब्रादर्स धर्मसमाज की स्थापना की 200वीं जयन्ती के अवसर पर धर्मसमाज के शीर्ष अधिकारी को एक पत्र प्रेषित कर कहा कि वे जयन्ती के इस अवसर पर इतिहास को कृतज्ञता के भाव से देखें, वर्तमान स्थिति का अवलोकन करें तथा भविष्य में आशा के साथ आगे बढें।

मेरिस्ट धर्मबंधु 200 साल की इस जयन्ती को धर्मसमाज की 22वीं आमसभा के साथ मनायेंगे जो कोलोम्बिया में सम्पन्न होगी। जिसका आदर्श वाक्य है, ″एक नई शुरूआत″ जिसमें नवीनीकरण के सभी कार्यक्रम सम्पन्न होंगे।

संत पापा ने संदेश में लिखा कि कृतज्ञता पहला एहसास है जो हृदय से आता है। कृतज्ञता की इस भावना हेतु ईश्वर के कार्यों को पहचानने की आवश्यकता है जिसको उन्होंने धर्मसमाज के लिए किया है। उन्होंने संदेश में कहा है कि ईश्वर को धन्यवाद देना अच्छा है जो हमें ईश्वर के सामने विनम्र बनने में मदद देता है तथा उन लोगों के प्रति भी जिन्होंने हमें मुफ्त में हमारी परम्पराओं को बनाये रखने में मदद दी है।

संत पापा ने धर्मसमाज के साक्ष्यों की यादकर कहा कि धर्मसमाज ने ईश्वर के प्रेम के खातिर एवं भाईचारे की भावना के कारण अपना जीवन अर्पित किया है। उन्होंने कहा कि इन दो सौ सालों में बच्चों एवं युवाओं को उन्होंने आदर्श नागरिक बनने और सबसे बढ़कर अच्छा ख्रीस्तीय बनने की शिक्षा दी है। ये भले कार्य ईश्वर की अच्छाई और करुणा को प्रकट करने के कार्य हैं जो उनकी कमज़ोरियों के बावजूद उन्हें नहीं भूलते।

संत पापा वर्तमान पर चिंतन करने की सलाह देते हुए कहा कि मात्र इतिहास का अवलोकन करना काफी नहीं हैं किन्तु वर्तमान की अवश्यकताओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। पवित्र आत्मा के प्रकाश में उन पर चिंतन करना उत्तम है। मूल भाव के साथ वर्तमान की परिस्थिति पर विचार चाहिए।

धर्मसमाज के संस्थापक मर्सेलिन कम्पानेट ने अपने समय में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस की तथा अनुभव किया कि प्रेम करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के अंदर छिपी क्षमता को बाहर निकालने की आवश्यकता है।

संत पापा ने कहा कि एक शिक्षक का कार्य लगातार समर्पण एवं त्याग का कार्य है फिर भी यह हृदय से आता है जो उसे अलग एवं उत्तम बना देता है। उन्होंने धर्मसमाजी प्रशिक्षकों को परामर्श देते हुए कहा कि वे उनके आंतरिक जीवन की देखभाल करें उनके मानवीय तथा आध्यात्मिक भंडार की रक्षा करें ताकि वे उस भूमि में फल उत्पन्न कर सके जो उन्हें सौंपा जाए। उन्हें सजग होना चाहिए कि जिस भूमि पर वे कार्य कर रहे हैं वह पवित्र है उसपर वे ईश्वर के प्रतिरूप को देखें।

संत पापा ने भविष्य में आशा के साथ आगे बढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि वे नवीकृत भावना के साथ आगे बढें। यद्यपि यह कोई नया रास्ता नहीं है किन्तु भावना में उत्साह भरकर आगे बढें। आज के समाज में कर्मठ लोगों की आवश्यकता है जो सभी लोगों के लिए एक बेहतर विश्व का निर्माण कर सकें तथा वे जिसपर विश्वास करते हैं उसका साक्ष्य दे सकें। संत पापा ने धर्मसमाज के आदर्शवाक्य, ″सब कुछ येसु को मरियम के लिए, सब कुछ मरियम को येसु के लिए″ पर गौर करते हुए कहा कि इसका अर्थ है मरियम पर भरोसा रखना तथा उनकी विनम्रता एवं सेवा की भावना से प्रेरित होना, उनकी तत्परता एवं मौन समर्पण को अपनाना जो एक अच्छे धर्मसमाजी एवं शिक्षक की विशेषताएं हैं। धर्मसमाजियों के इन मूल्यों से युवा प्रभावित होकर समझेंगे कि यह न केवल सीखने के लिए है बल्कि आत्मसात करने एवं उनका अनुसरण करने के लिए भी है। माता मरियम उनके इस उद्देश्य में उनका साथ देंगी और बुलाहट को नवीकृत करेंगी जिसके द्वारा वे नये मानवता के निर्माण में सहयोग दे पायेंगे जहाँ कमजोर एवं बहिष्कृत लोगों को भी महत्व और प्रेम दिया जा सकेगा। जिस भविष्य की वे आशा करते हैं तथा जिसके लिए वे स्वप्न देखते हैं वह मात्र कल्पना नहीं किन्तु उसका निर्माण ईश्वर की इच्छा को हाँ कहने के द्वारा होगा। वे हमारे भले पिता हैं तथा हमारी आशा को कभी निराश होने नहीं देते।

संत पापा ने पवित्र आत्मा से प्रार्थना की कि वह धर्मसमाज का संचालन करे ताकि वे बच्चों और युवाओं तथा जरूरतमंद लोगों को अपना सामीप्य एवं ईश्वर का कोमल स्नेह प्रदान कर सकें।


(Usha Tirkey)

संत पापा का प्रधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो के साथ काहिरा में मुलाकात की उम्मीद

In Church on April 20, 2017 at 3:04 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 2017 (वीआर अंग्रेजी): करीब एक सप्ताह बाद संत पापा फ्राँसिस मिस्र की राजधानी काहिरा की यात्रा करेंगे जहाँ वे विख्यात इस्लामी विद्या केंद्र अल अज़हर का दौरा करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि वे वहाँ कॉप्टिक कलीसिया के परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के साथ ऑर्थोडोक्स कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम से भी मुलाकात करेंगे।

इन तीनों धर्मगुरूओं को अल अजहर के ग्रैंड इमाम शेख अहमद एल तायेब ने एक अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलमन में भाग लेने हेतु निमंत्रण दिया है।

मिस्र हेतु वाटिकन के पूर्व प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष मिखाएल फिज़ेराल्ड ने वाटिकन रेडियो से कहा कि मिस्र में संत पापा की यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि वहाँ अतिवादियों के कारण कई समस्याएँ एवं अनिश्चितताएँ हैं जो संस्थाओं एवं खासकर ख्रीस्तीय समुदायों के खिलाफ हैं। उन्होंने गौर किया कि यह पहली प्रेरितिक यात्रा नहीं हैं, इससे पूर्व वर्ष 2000 में संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने भी मिस्र की यात्रा की थी।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि इस यात्रा की खासियत इसमें भी है कि संत पापा फ्राँसिस की मुलाकात कॉप्टिक परमाध्यक्ष तावाद्रोस से होगी जो अलेक्जेंड्रिया के प्रधिधर्माध्यक्ष चुने जाने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात होगी। इस यात्रा के द्वारा दोनों परमाध्यक्षों के बीच मित्रवत् संबंध के सुदृढ़ीकरण की आशा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यात्रा में ईशशास्त्रीय वार्ता की जायेगी किन्तु धार्मिक विचार-विमर्श से कहीं बढ़कर व्यक्तिगत संबंध महत्वपूर्ण होगी जो काहिरा यात्रा का मुख्य बिन्दु होगा।

मुस्लिम जगत के साथ संबंध के मामले में महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अल अजहर के साथ वाटिकन के संबंध को मजबूत करना है। उन्होंने याद किया कि ग्रैंड ईमाम अहमद एल तायेब संत पापा से मुलाकात करने रोम आये थे अतः आपसी मुलाकात काफी सराहनीय मानी जा रही है।

महाधर्माध्यक्ष ने इस मुलाकात को संस्कार की संज्ञा दी क्योंकि यह मात्र चिन्ह नहीं है वरन् आशा के परे फल उत्पन्न कर सकता है।

वाटिकन और अल अजहर के बीच संवाद पर गौर करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि चरमपंथ की आलोचना विश्व के अधिकतर मुसलमानों द्वारा की जा चुकी है। उन्होंने रेखांकित किया कि अल अजहर काहिरा स्थित डोमिनिकन पुरोहितों के साथ भी कार्य कर रही है। जिन्होंने चरमपंथियों पर अध्ययन करने हेतु एक दल का गठन किया है।

28 और 29 अप्रैल की इस लघु प्रेरितिक यात्रा में संत पापा मिस्र के राष्ट्रपति अबदेल फत्ताह अल सीसी से भी मिलेंगे। वे स्थानीय काथलिक समुदाय के लिए ख्रीस्तयाग भी अर्पित करेंगे।

उनकी यात्रा ऐसे समय में होने वाली है जब मिस्र के दो गिरजाघरों में एक माह से भी कम समय के अंदर कथित इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों द्वारा, दो बम विस्फोट किये गये थे, जिसमें 45 लोगों की मौत हो गयी थी तथा दर्जनों घायल हो गये हैं।


(Usha Tirkey)

मोकोआ के बाढ़ पीड़ितों को कलीसिया की सहायता

In Church on April 20, 2017 at 3:03 pm

मोकोआ, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 2017 (वीआर अंग्रेजी): कोलोम्बियाई कलीसिया ने मोकोआ के बाढ़ पीड़ितों की सहायता हेतु 10 टन मानवीय सहायता सामग्री प्रदान की है। ये सामग्रियाँ कोलोम्बिया के काथलिक समुदाय एवं स्थानीय कारितास के सहयोग से उपलब्ध की गयी हैं।

मोकोआ के धर्माध्यक्ष लुईस अलबेईरो मालदोनादो ने कहा कि भोजन, कम्बल, निजी स्वच्छता की वस्तुएँ तथा कपड़े द्वारा मोकोआ के उन जरूरतमंद बच्चों एवं परिवारों को राहत मिलेगी, जिनका 1 अप्रैल के भूस्खलन में सब कुछ समाप्त हो चुका है। इस भूस्खलन में करीब 300 लोगों की मृत्यु हो गयी थी तथा बहुत लोग घायल एवं विस्थापित हो गये हैं।

राष्ट्रपति जुवान मानवेल संतोस ने देश के उस क्षेत्र में आपातकालिन स्थिति की घोषणा की थी।

संत पापा फ्राँसिस ने भी भूस्खलन के शिकार लोगों के लिए विशेष प्रार्थना अर्पित की थी।

मोकोआ धर्मप्रांत के प्रतिधर्माध्यक्ष तथा संकट से निपटने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष फा. लुइस फेरनार्नदो कारवाजाल ने कहा कि सहायता का पहला चरण, तत्काल चिकित्सा सुविधा तथा आवश्यक उपकरण आदि कोलोम्बिया तथा विश्वभर के संगठनों द्वारा उपलब्ध किये जा रहे हैं।

उन्होंने 80 प्रतिशत उन स्वयंसेवकों के कार्यों की भी बड़ी सराहना की जो बाढ़ एवं भूस्खलन से पीड़ित परिवारों एवं सहायता केंद्रों का दौरा कर राहत सामग्री उपलब्ध कराने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।


(Usha Tirkey)

धर्माध्यक्षों ने सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की मांग की

In Church on April 20, 2017 at 3:01 pm

 

नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 17 (मैटर्स इंडिया): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने 19 अप्रैल को केंद्रीय सरकार से अपील की कि प्रत्येक नागरिक को कोई भी धर्म मानने का मौलिक अधिकार प्राप्त हो।

मैडर्स इंडिया की रिपोर्ट अनुसार तमिलनाडु के एक गाँव के दलित ख्रीस्तीयों को पुलिस ने पुण्य शुक्रवार की धर्मविधि सम्पन्न करने में बाधा पहुँचायी थी।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने चेंगलपेट के सोगंदी गाँव में 14 अप्रैल को हुई घटना की निंदा की।

सीबीसीआई के प्रवक्ता ने कहा कि तमिलनाडु में पुण्य शुक्रवार को जो घटना घटी उससे सीबीसीआई बहुत चिंतित और परेशान है क्योंकि यह सभी ख्रीस्तीयों के लिए अत्यन्त पवित्र दिन होता है।

सीबीसीआई के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास ने कहा, ″हम हमारे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री तथा अन्य सभी अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि देशभर में हर व्यक्ति के लिए सुरक्षा सुनिश्चित हो तथा धर्म मानने हेतु अपने मौलिक अधिकार को बिना भय, स्वतंत्रता पूर्वक सभी लोग प्राप्त कर सकें।″

रिपोर्ट अनुसार तमिलनाडु के सोगंधी गाँव के दलित ख्रीस्तीय जब स्थानीय पहाड़ी पर पुण्य शुक्रवार के दिन प्रार्थना कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें वहाँ प्रार्थना करने से रोक दिया था।


(Usha Tirkey)

जीवन की घटनाओं का अवलोकन करने के संबंध में संत पापा की सलाह

In Church on April 20, 2017 at 3:00 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 20 अप्रैल 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने हमारे जीवन की सभी घटनाओं को नई दृष्टि और नये हृदय से देखने की सलाह दी।

पास्का महापर्व के बाद प्रेषित एक ट्वीट संदेश में उन्होंने लिखा, ″चूँकि ख्रीस्त जी उठे हैं, हम जीवन की सभी घटनाओं को चाहे वे बहुत अधिक नकारात्मक क्यों न हों, नई दृष्टि एवं नये हृदय से देख सकते हैं।″


(Usha Tirkey)

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