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पवित्र आत्मा हमें कठोर नहीं पर स्वतंत्र बनाता है, संत पापा

In Church on April 24, 2017 at 3:44 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार 24 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 24 अप्रैल को वाटिकन के प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन युखरीस्तीय समारोह का अनुष्ठान किया जिसमें संत पापा के 9 सलाहकार कार्डिनल भी उपस्थित थे। जिनकी संत पापा के साथ बैठक आज से शुरु होगी और 26 अप्रैल को समाप्त होगी।

संत पापा ने अपने प्रवचन में पवित्र आत्मा पर केंद्रित करते हुए कहा कि पवित्र आत्मा सुसमाचार की घोषणा बिना किसी समझौता और कठोरता से, स्वततंत्र रुप में करता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि क हमारा विश्वास ठोस है यह समझौता और आदर्शरुप को स्वीकार नहीं करता है।

प्रेरित चरित से लिए गये पहले पाठ में हम पाते हैं कि प्रेरित पेत्रुस और योहन ने एक लंगड़े को चंगा किया। यह देखकर फरीसियों के समझ में नहीं आ रहा था कि वे किस प्रकार इन बातों को फैलने से रोकें। उन्होंने प्रेरितों को चुपचाप रहने का आदेश दिया। इसपर पेत्रुस ने उत्तर दिया, नहीं! हम चुप नहीं रह सकते। हमने जो सुना और देखा है उसे बताना हम जारी रखेंगे।

शब्द देह बना यह हमारा ठोस विश्वास है।

संत पापा ने कहा, यह है ″एक तथ्य की सार्थकता″ ″विश्वास की वास्तविकता″ जिसे फरीसियों ने समझौता करना चाहा था पर पेत्रुस और योहन ने साहस के साथ खुले आम इसे ठुकरा दिया। यही आत्मा की स्वतंत्रता और विश्वास की वास्तविकता है।

संत पापा ने कहा, कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि हमारा विश्वास ठोस है। वचन देह बना, न कि वचन  विचार बना। धर्मसार प्रार्थना में हम कहते हैं ″मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर में विश्वास करता हूँ जिन्होंने स्वर्ग और पृथ्वी को बनाया। मैं येसु ख्रीस्त में विश्वास करता हूँ जिन्होंने जन्म लिया…और क्रूस पर मर गये…. इन ठोस बातों पर हम विश्वास करते हैं। हम यह नहीं कहते हैं कि मैं विश्वास करता हूँ कि मुझे ये करना है या वो करना है। विश्वास की स्थूलता में खुलापन है, शहादत तक गवाही देना है जो विश्वास के आदर्शरुप और समझौते के विपरीत है।

संत पापा ने कहा कि कानून के शिक्षकों के लिए शब्द देह नहीं परंतु कानून बना है। उनके लिए नियम कानून के अलावे और कोई दूसरा तथ्य मान्य नहीं था और इसलिए वे तर्क की मनसिकता में ही फंसे रहे। कलीसिया के इतिहास में हम भी पाते हैं कि कई बार कलसिया ने बुद्धिवाद की प्रबद्धता की निंदा की है तथा कई बार स्वयं ईश शास्त्र के तर्क में फँस गई कि इसे किस हद तक करनी चाहए या नहीं करनी चाहिए और पवित्र आत्मा की शक्ति एवं स्वतंत्रता को भूल गई। संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा में दुबारा जन्म, आपको खुलकर येसु मसीह को प्रभु घोषित करने की स्वतंत्रता देता है।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने सुसमाचार प्रचार हेतु पवित्र आत्मा के विशेष अभिषेक के लिए कृपा मांगी। जी उठे येसु ख्रीस्त हमें बिना समझौता किये, खुलकर उसके संदेश का प्रचार करने में हमें साहस दें।


(Margaret Sumita Minj)

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