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शहीद कलीसिया के जीवित रक्त हैं, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 24, 2017 at 3:39 pm

रोम, सोमवार 24 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 22 अप्रैल को रोम के ताईबर स्थित संत बरथोलोमियो महागिरजाघर में नये शहीदों को सम्मानित किया जिन्हें उन्होंने ‘कलीसिया का जीवित रक्त’ कहा।

संत पापा ने संत बरथोलोमियो महागिरजाघर में बीसवीं और एक्कीसवीं सदी के शहीदों को सम्मानित किये जाने हेतु आयोजित प्रार्थना सभा का नेतृत्व किया।

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि हम सब ताईबर के संत बारथोलोमेयो महागिरजाघर में तीर्थयात्रियों के रुप में आये हैं। शहीदों का प्रचीण इतिहास नये शहीदों की याद में शामिल होता है जहाँ पिछली शताब्दी में उन्मादी विचारधाराओं की वजह से कई ख्रीस्तीयों को इसीलिए मार डाला गया क्योंकि वे येसु के अनुयायी थे। इन पुराने और नये वीरों की गवाहियाँ इस बात की पुष्टि करती है कि कलीसिया शहीदों की कलीसिया है। प्रकाशना ग्रंथ में हम पाते हैं कि शहीद वे हैं जो बड़ी आपत्ति से बाहर आये हैं, जिन्होंने आपने वस्त्र मेमने के रक्त से धोकर उन्हें सफेद बनाया है। उन्हें दुःख सहते हुए मृत्यु तक येसु का साक्ष्य देने की कृपा मिली और आज हम उनके साक्ष्य के बदौलत ईश्वरीय कृपा पाते हैं। दुनिया में बहुत से अज्ञात शहीद हैं जिन्होंने पवित्र आत्मा की आवाज को सुना और प्रभु के प्यार में अपने भाई-बहनों की मदद की।

संत पापा ने कहा कि हर उत्पीड़न का कारण बैर है दुनिया उन लोगों से बैर करती है जिन्हें येसु ख्रीस्त ने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा बचाया है। येसु जो हमेशा प्रेम के बारे में उपदेश दिया करते थे आज नफरत के बारे में कहते हैं, ″यदि संसार तुमलोगों से बैर करे, तो याद रखो कि तुम से पहले उसने मुझ से बैर किया। यदि तुम संसार के होते, तो संसार तुम्हें अपना समझकर प्यार करता। परंतु तुम संसार के नहीं हो, क्योंकि मैंने तुम्हें संसार से चुन लिया है। इसीलिए संसार तुम से बैर करता है।″ (योहन, 15, 18-19) येसु ने हम से प्रेम किया। उन्होंने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा दुनियाई और शैतानी शक्तियों से हमें बचाया है। ये शक्तियाँ नहीं चाहती कि प्रभु हमसे प्रेम करे, अतः येसु के समय से ही और कलीसिया के शुरुआत से लेकर आज तक उत्पीड़न जारी है। “इस दुनिया में द्वेष की वजह से” आज बहुत से ख्रीस्तीय समुदाय सताये जा रहे हैं।

संत पापा ने कहा, इतिहास की कठिन परिस्थितियों में हमने यह कहते हुए सुना, ″ आज हमारे देश में नायकों की जरुरत है।″  उसी तरह आज हम प्रश्न कर सकते हैं आज हमारी कलीसिया को किसकी जरुरत है शहीदों के साक्ष्य की? वे लोग जो आपने दैनिक जीवन में संतों का जीवन जी रहे हैं। हमें उन लोगों की भी जरुरत है जो मृत्यु तक ईश्वर की कृपा को स्वीकार करने का साहस रखते हैं। ये सभी कलीसिया के जीवित रक्त हैं। ये वे हैं जे प्रभु की गवाही देने की कृपा पाते हैं और कलीसिया को आगे ले चलते हैं।

उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थान में उनके विश्वास के साक्ष्य को याद करना और प्रार्थना करना एक बहुत बड़ी कृपा है। संत इजीदियो समुदाय रोम की कलीसिया और अनेक तीर्थयात्रियों के लिए एक उपहार है। शहीदों की विरासत आज हमें शांति और एकता दे। शहीद आज हमें शिक्षा देते हैं कि प्यार और नम्रता की ताकत द्वारा घमंड, हिंसा और युद्ध से लड़ा जा सकता है तथा धैर्य से शांति प्राप्त की जा सकती है।

संत पापा ने अपना प्रवचन एक छोटी प्रार्थना द्वारा समाप्त किया ।″हे प्रभु हमें आपके सुसमाचार और प्रेम के योग्य गवाह बना, पूरी मानवता में अपना दया उड़ेल दे, अपनी कलीसिया को नवीकृत कर दे, सताये जा रहे ख्रीस्तीयों की रक्षा कर और पूरी दुनिया को शांति प्रदान कर।″


(Margaret Sumita Minj)

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