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मिस्र में सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा शुरू, पृष्ठभूमि

In Church on April 28, 2017 at 1:55 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 28 अप्रैल सन् 2017 (सेदोक): “मिस्र में शांति के तीर्थयात्री रूप में कल शुरु होनेवाली मेरी यात्रा के लिये प्रार्थना करें”। 27 अप्रैल को अपने ट्वीट पर प्रार्थना का आर्त निवेदन करने के उपरान्त, विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु, सन्त पापा फ्राँसिस शुक्रवार, 28 अप्रैल को रोम के फ्यूमीचीनो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से, स्थानीय समयानुसार प्रातः पौने ग्यारह बजे मिस्र में अपनी दो दिवसीय यात्रा के लिये रवाना हो गये। आल इतालिया के ए-321 विमान पर सवा तीन घण्टों की उड़ान के बाद, मिस्र समयानुयार दोपहर के दो बजे सन्त पापा काहिरा अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पधारे। शनिवार देर सन्ध्या समाप्त होनेवाली यह प्रेरितिक यात्रा मिस्र में सन्त पापा फ्राँसिस की पहली तथा इटली से बाहर उनकी 18 वीं प्रेरितिक यात्रा है।

सातवीं शताब्दी से पूर्व, हालांकि, मिस्र एक ईसाई देश था मुसलमानों के आक्रमण के बाद शनैः शनैः यह एक मुस्लिम बहुल देश बन गया है। नौ करोड़ बीस लाख की कुल आबादी वाला मिस्र उत्तरी अफ्रीका एवं अरब जगत का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र है। सुन्नी मुस्लिम बहुल देश मिस्र में 90 प्रतिशत इस्लाम धर्मानुयायी, नौ प्रतिशत कॉप्टिक ख्रीस्तीय तथा एक प्रतिशत अन्य ख्रीस्तीय सम्प्रदायों के लोग हैं। राष्ट्र में केवल इस्लाम, ख्रीस्तीय एवं यहूदी धर्मों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। सन्त मारकुस के सुसमाचार प्रचार के परिणामस्वरूप पहली शताब्दी से अस्तित्व में आये एलेक्ज़ेनड्रिया के कॉप्टिक ऑरथोडोक्स चर्च तथा सन् 970 ई. में स्थापित अल अज़हर इस्लामिक स्कूल एवं विश्वविद्यालय यहाँ की दो प्रमुख धार्मिक संस्थाएं हैं।

दो दिवसीय मिस्र यात्रा का मुख्य आकर्षण है एक हज़ार वर्षीय प्राचीन प्रतिष्ठित सुन्नी इस्लामी  विश्वविद्यालय, अल अज़हर में प्रधान इमाम, शेख अहमद एल- तैयाब के साथ सन्त पापा फ्राँसिस की वैयक्तिक मुलाकात एवं विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन में उनका भाग लेना।

सन्त पापा फ्राँसिस इस बात पर बल देते रहे हैं कि ईसाई-मुस्लिम संवाद ही वह रास्ता है जिससे इस्लामी चरमपंथ पर काबू पाया जा सकता है। उस चरमपंथ को मात दे सकता है जिसने ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को निशाना बनाकर उन्हें ईराक, सिरिया तथा मध्यपूर्व के अन्य देशों में 2000 वर्षों से जीवन यापन करते आये ख्रीस्तीयों को मार भगाया है।

हाल ही में मिस्र के ख्रीस्तीय गिरजाघरों पर हुए नृशंस हमलों की पृष्ठभूमि में सन्त पापा फ्राँसिस धर्म और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने तथा मिस्र के मुसलमान नेताओं के साथ सम्बन्धों के सुधार का प्रयास कर रहे हैं। ईस्टर से एक सप्ताह पूर्व, 10 अप्रैल को खजूर इतवार के दिन इस्लामी चरमपंथियों द्वारा एलेक्ज़ेनड्रिया के दो कॉप्टिक गिरजाघरों पर हुए हमलों में कम से कम 45 व्यक्तियों के प्राण चले गये थे तथा दर्ज़नों घायल हो गये थे।

सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा के दौरान इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राजधानी काहिरा के उन स्थलों के आस-पड़ोस में जहाँ-जहाँ सन्त पापा जानेवाले हैं तथा जहाँ वे शुक्रवार रात्रि पड़ाव कर रहे हैं, दूकानें बन्द कर दी गई हैं तथा पुलिस घर-घर जाकर जाँच –पड़ताल में लगी है। शनिवार को ख्रीस्तयाग अर्पण का आयोजन भी सेना के एक बहुसुरक्षित स्टेडियम में किया गया है।

वाटिकन के प्रवक्ता ग्रेग बुर्के ने पत्रकारों से कहा, “सन्त पापा फ्राँसिस सुरक्षा के प्रति अधिक चिन्तित नहीं हैं और इसीलिये यात्रा के दौरान वे बख़्तरबंद गाड़ी का उपयोग करने के बजाय एक साधारण मोटर गाड़ी का उपयोग कर रहे हैं।” इस सन्दर्भ में, वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने कहा, “सन्त पापा इस यात्रा का परित्याग किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहते थे, वे उन परिस्थितियों में उपस्थित रहना चाहते हैं जहाँ लोग हिंसा से पीड़ित हैं, विशेष कर, मिस्र में वे शांति और मैत्रीपूर्ण वार्ता के सन्देशवाहक बनना चाहते हैं।”

कार्डिनल पारोलीन ने इस बात पर बल दिया कि मिस्र की सरकार को अपने सभी लोगों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिये भले ही वे किसी भी धर्म, जाति अथवा समुदाय के ही क्यों न हों। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि आतंकवाद का मुद्दा सम्पूर्ण विश्व के लिये एक वृहद चुनौती है इसलिये युवाओं में जीवन के मूल्यों को पोषित करना तथा हिंसा की निर्रथकता को उजागर करना नितान्त आवश्यक है।

इसी बीच, एलेक्ज़ेनड्रिया के कॉप्टिक चर्च के प्राधिधर्माध्यक्ष इब्राहीम इसाक सेद्राक ने वाटिकन  समाचार पत्र लोस्सरवात्तोरे रोमानो से की बातचीत में कहा, “इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि देश में हुए हाल के आतंकवादी हमलों से नागरिकों और, विशेष रूप से, ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का मनोबल घटा है। लोग हिंसा के प्रति चिन्तित हैं जो लगातार ख्रीस्तीय पर्वों के इर्द-गिर्द होती रही है किन्तु इसके बावजूद हमारा विश्वास मज़बूत है इसलिये न केवल आयोजन स्तर पर अपितु सूझ-बूझ के साथ हमने इस यात्रा की तैयारी की है और हमारी प्रार्थना है कि प्रभु ईश्वर हमारे प्रिय सन्त पापा फ्राँसिस के हर कदम को सुरक्षा और सफलता प्रदान करें।

प्राधिधर्माध्यक्ष इब्राहीम सेद्राक ने कहा, “सन्त पापा इस यात्रा के दौरान अल अज़हर के प्रधान इमाम आल तैयाब तथा कॉप्टिक ऑरथोडोक्स कलीसिया के धर्मगुरु तावाद्रोस द्वितीय से मुलाकात कर मिस्र के काथलिकों के लिये ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे। हमारा विश्वास है कि उनकी मुलाकातें एवं उनके प्रवचन अन्तरधार्मिक सम्वाद को प्रोत्साहित कर, मिस्र के समस्त लोगों में शांति की अभिलाषा को जागृत करेंगे।”


(Juliet Genevive Christopher)

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