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संत पापा फ्राँसिस ने राष्ट्रपति और कूटनीतिज्ञों से मुलाकात की

In Church on April 29, 2017 at 3:47 pm

 

काहिरा, शनिवार, 29 अप्रैल 2017(वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने मिस्र की प्रेरितिक यात्रा के दौरान 28 अप्रैल की शाम को राष्ट्रपति, संसद के सदस्यों, राजदूतों और राजनायकों को संबोधित किया।

संत पापा ने शांति का अभिवादन कर राष्ट्रपति अब्देल फतह एल. सीसी को अपने देश में आमंत्रित करने हेतु आभार प्रकट किया।  संत पापा ने कहा कि वे नवम्बर 2014 में राष्ट्रपति की रोम यात्रा, सन् 2013 में परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात और बीते वर्ष अल् अज़हर विश्वविदयालय के ग्रांड इमाम डॉक्टर अहमद अल-ताईब के साथ हुए मुलाकात को भली भाँति याद करते हैं।

संत पापा ने प्राचीन और महान सभ्यता के देश मिस्र आने की खुशी जाहिर करते हुए कहा,″ इतने वर्षों के बाद भी इन अवशेषों में आज भी राजसी वैभव की झलक देखती है। यह भूमि न केवल अतीत के प्रतिष्ठित राजाओं, कोप्टों और मुस्लिमों के कारण मानवता के इतिहास और कलीसिया की परंपराओं का लिए महत्वपूर्ण है बल्कि इस देश में बहुत से प्राधिधर्माध्यक्षों ने अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया है। दरअसल, मिस्र अक्सर पवित्र शास्त्रों में वर्णित है इस देश में, परमेश्वर ने “मूसा को अपना नाम प्रकट किया था” और सिनाई पर्वत पर उन्होंने अपने लोगों और पूरी मानव जाति को अपनी आज्ञाओं को सौंपा था। मिस्र की धरती पर पवित्र परिवार येसु मरियम और जोसेफ ने शरण और आतिथ्य पाया था।

दो हजार पहले के आतिथ्य को आज भी पूरी मानवता याद करती है और यह पूरी मानवता के लिए प्रचुर मात्रा में आशीर्वाद का श्रोत है। अतः मिस्र एक ऐसी भूमि है कुछ अर्थों में हम सभी यहाँ अपनत्व महसूस करते हैं! जैसा आप कहते हैं कि “मिस्र दुनिया की मां है।”आज भी, यह देश सूडान, इरिट्रिया, सीरिया और इराक सहित विभिन्न देशों से लाखों शरणार्थियों का स्वागत करता है जिन्हें आप मिस्र के समाज में एकीकृत करने हेतु प्रशंसनीय प्रयास करते आ रहे हैं। लोगों का भाग्य और मिस्र की भूमिका लोगों को मिस्र आने के लिए प्रेरित करती है जहाँ भोजन, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की कमी नहीं है।

संत पापा ने कहा कि मिस्र का एक विशेष कार्य है और वह है समेकित क्षेत्रीय शांति को मजबूत करना, हालंकि इस धरती धरती पर भी हिंसा के कृत्यों द्वारा हमला किया गया है जिसमें यहाँ उपस्थित आप में से कुछ अपने प्रियजनों के लिए शोकित होंगे।

संत पापा ने नागर समाज और धार्मिक नेताओं के प्रति आभार प्रकट किया जिन्होंने दुःख की घड़ी में लोगों की मदद की, विशेष रुप से गत दिसम्बर और हाल में तान्ता और अलेकजेंड्रिया के कोप्टिक गिरजाघर में हुए विस्फोटों में मरे लोगों के परिजनों और सभी मिस्र वासियों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की।

संत पापा ने देश के अंदर शांति बहाल करने हेतु बनाई योजनाओं की सफलता के लिए राष्ट्रपति और सभी विशिष्ट अधिकारियों को प्रोत्साहित किया।

विकास, समृद्धि और शांति बलिदान के बदौलत हासिल की जाती है जो कड़ी मेहनत, विश्वास और प्रतिबद्धता, पर्याप्त नियोजन और सब से ऊपर अतुलनीय मानवाधिकारों के लिए बिना शर्त सम्मान जैसे सभी नागरिकों में समानता, बिना किसी भेद भाव के धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग करती है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में महिलाओं, युवाओं, गरीब और बीमार लोगों की भूमिका पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सही विकास मनुष्यों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा हेतु उनके प्रयोजन से मापा जाता है। किसी भी राष्ट्र की महानता समाज के सबसे कमजोर सदस्यों जैसे महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों, विकलांगों और अल्पसंख्यकों की देखभाल से पता चला है।

संत पापा ने राष्ट्रपति की बातों को स्वीकार करते हुए कहा कि आज की नाजुक और जटिल दुनिया में ” विश्व युद्ध अलग अलग करके लड़ी जा रही है,” इसे स्पस्ट रुप से जाहिर करने की आवश्यकता है कि बुराई के हर विचारधारा को अस्वीकार करते हुए, दूसरों को दबाने के लिए हिंसा और उग्रवाद के प्रयोग तथा ईश्वर के नाम पर विविधता को स्वीकार करके ही कोई सभ्य समाज बनाया जा सकता है।

हम सभी का फर्ज बनता हैं कि हम आने वाली पीढ़ी को शिक्षा दे कि स्वर्ग और पृथ्वी के बनाने वाले ईश्वर को मनुष्यों द्वारा सुरक्षा की कोई जरुरत नहीं है। वास्तव में, वे ही सभी मनुष्यों की सुरक्षा करते हैं। वे अपने बच्चों की मृत्यु नहीं लेकिन जीवन और खुशी की कामना करते हैं। वे न ही हिंसा की मांग करते और न ही इसे औचित्य साबित कर सकते हैं। वास्तव में, वे हिंसा से नफरत करते हैं। ( ईश्वर… वह अत्याचारी से घृणा करता है। स्तोत्र 11:5) सच्चे ईश्वर हमें निःस्वार्थ प्रेम, क्षमा, दया, हर जीवन के लिए पूर्ण सम्मान, और अपने बच्चों के बीच भाईचारा, विश्वासियों और गैर विश्वासियों के बीच समानता का भाव रखने को कहते हैं।

यह बताना हम सभी का कर्तव्य है कि इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता जो न्याय का प्रचार करते पर अन्याय करते हैं, जो समानता का प्रचार करते पर स्वयं रंग-विभेद करते हैं। उन लोगों को बेनकाब करना हमारा कर्तव्य है जो पुनर्जन्म के बारे में भ्रम पैदा करते तथा लोगों के बीच घृणा का बीच बोते हैं, जो दूसरों के चयन करने की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी से विश्वास करने की क्षमता का शोषण करते हैं। घातक अतिवादी विचारों और विचारधाराओं को नष्ट करना हमारा कर्तव्य है

इतिहास उन शांति प्रिय पुरुषों और महिलाओं को सम्मानित करता है जो साहस और अहिंसात्मक तरीके से एक बेहतर दुनिया बनाने का प्रयास करते हैं। ″धन्य हैं वे जो मेल कराते हैं स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।″ (मत्ती,5:9)

जोसेफ के दिनों में मिस्र ने लोगों को अकाल से बचाया था, ( उत्पत्ति 47:57) आज इसे भाईचारे और प्रेम के अकाल से लोगों को बचाना है। हिंसा और आतंकवाद की निंदा करना और उसपर जीत हासिल करना है।

आज सबों के दिलों में शांति रुपी अनाज को डालने की जरुरत है जिससे कि शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, गरिमामय रोजगार और मानवीय शिक्षा की भूख मिटाई जा सके। मिस्र ने शांति के निर्माण और आतंकवाद का मुकाबला करने हेतु 23 जुलाई सन् 1952 के क्रांति के आदर्श वाक्य ″धर्म ईश्वर का और देश सभों का है।″ को लिया है। मिस्र को यह प्रदर्शित करना हैं कि सभी धर्मों के लोगों को साथ मिलकर और एक दूसरे का सम्मान करते हुए तथा भौतिक मानवीय मूल्यों को साझा करते हुए सद्भावना के साथ जीवन बिताना संभव है। तीन बड़े धर्मों का उद्गम स्थल मिस्र को शांति के मार्ग पर चलने के लिए न्याय और भाईचारे के सर्वोच मूल्यों के प्रसार की विशेष भूमिका निभानी है।

संत पापा ने कहा कि यह वर्ष परमधर्मपीठ और अरब गणराज्य मिस्र के बीच राजनयिक संबंधों की सत्तरवीं वर्षगांठ है अरब देशों में रोम के साथ संबंध स्थापित करने वाला पहला देश है। उन संबंधों की विशेषता हमेशा दोस्ती, सम्मान और पारस्परिक सहयोग की है। संत पापा ने आशा व्यक्त की, कि उनकी यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। संत पापा ने विशेष रुप से फिलीस्तीन, इस्राएल, सीरिया लीबिया यमन इराक दणिण सूडान के लिए शांति की कामना की।

अंत में संत पापा ने वहाँ उपस्थित और मिस्र के सभी कोप्टिक ओर्थोडोक्स, ग्रीक बैजंटीन, अरमेनियन ओर्थोडोक्स, प्रोटेस्टेंट और काथलिक ख्रीस्तीयों का सप्रेम अभिवादन करते हुए कहा,″इस धरती के प्रेरित संत मारकुस, प्रभु की इच्छा एकता को बनाये रखने में आपका मार्गदर्शन करें।  आपकी उपस्थिति इस देश में नई या आकस्मिक नहीं है, लेकिन प्राचीन और मिस्र के इतिहास का अविभाज्य अंग है।″

संत पापा ने पुनः एकबार उनके स्वागत् के लिए शुक्रिया अदा कर, देश में शांति की शुभ कामना करते हुए अपना संदेश समाप्त किया।


(Margaret Sumita Minj)

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