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सन्त पापा फ्राँसिस एवं कॉप्टिक पोप तावाद्रोस की संयुक्त घोषणा

In Church on April 29, 2017 at 3:50 pm

 

काहिरा, शनिवार, 29 अप्रैल सन् 2017 (सेदोक): काहिरा में, शुक्रवार 28 अप्रैल को, कॉप्टिक ख्रीस्तीय कलीसिया की प्राधिधर्माध्यक्षीय पीठ में सन्त पापा फ्राँसिस एवं कॉप्टिक ख्रीस्तीय कलीसिया के धर्मगुरु पोप तावाद्रोस द्वितीय ने एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये। उन्होंने प्रभु येसु ख्रीस्त द्वारा सिखाई गई “हे पिता हमारे” प्रार्थना के समान अनुवाद एवं येसु के पुनःरुत्थान महापर्व को दोनों कलीसियाओं द्वारा एक ही दिन मनाने का आह्वान किया।

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस तथा कॉप्टिक ख्रीस्तीय कलीसिया के धर्मगुरु पोप तावाद्रोस द्वितीय के बीच संयुक्त घोषणा चालीस वर्ष पूर्व सन्त पापा पौल षष्टम एवं भूतपूर्व कॉप्टिक धर्मगुरु पोप शिनोडा तृतीय के बीच सन् 1973 में सम्पन्न मुलाकात के बाद की गई। तत्कालीन मुलाकात सदियों से अलग हुई काथलिक एवं कॉप्टिक कलीसियाओं के बीच सम्बन्धों के सुधार हेतु मील का पत्थर सिद्ध हुई थी जिसके बाद पूर्वी ऑरथोडोक्स कलीसियाओं के साथ धर्मतत्ववैज्ञानिक वार्ताओं का सूत्रपात हो सका था। शुक्रवार को तावाद्रोस ने उस समय से अब तक हुए विकास का स्मरण दिलाया तथा सामान्य प्रार्थनाओं द्वारा प्रभु येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

संयुक्त घोषणा में कहा गया कि काथलिक एवं कॉप्टिक ख्रीस्तीय मानव जीवन, विवाह और परिवार की पवित्रता, सृष्टि के प्रति सम्मान आदि मूल्यों का साक्ष्य एक साथ मिलकर दे सकते हैं। घोषणा में समस्त विश्व के उन ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों के लिये प्रार्थनाओं को सघन किये जाने का आह्वान किया गया जो ख्रीस्तीय धर्म और विश्वास के कारण हत्या एवं उत्पीड़न के शिकार बनाये जाते हैं, विशेष रूप से, मिस्र एवं मध्य पूर्व के अन्य देशों में।

घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य कॉप्टिक एवं काथलिक कलीसियाओं में बपतिस्मा संस्कार को लेकर बने तनाव को दूर करना रहा। शुक्रवार को काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष सन्त पापा फ्राँसिस एवं कॉप्टिक कलीसिया के धर्मगुरु तावाद्रोस ने घोषणा की कि वे बपतिस्मा संस्कार को दुहरायेंगे नहीं। उन्होंने कहा, “यदि कोई विश्वासी एक कलीसिया से दूसरी कलीसिया में जाना चाहे तो काथलिक एवं कॉप्टिक कलीसियाओं में सम्पादित बपतिस्मा मान्य होगा, इसे दुहराया नहीं जायेगा।”

मिस्र में अपनी यात्रा के दूसरे एवं आखिरी दिन सन्त पापा फ्राँसिस ने मिस्र के काथलिक विश्वासियों के लिये काहिरा स्थित सैन्य स्टेडियम में ख्रीस्तयाग अर्पित किया। इस समारोह में लगभग 30,000 विश्वासियों के शामिल होने का अनुमान है।

मिस्र से विदा लेने से पूर्व सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक धर्मसमाजियों, धर्मसंघियों एवं धर्मबहनों के साथ सान्ध्य वन्दना का नेतृत्व किया तथा उन्हें अपना सन्देश दिया। श्रोताओ, इसी के साथ मिस्र में सन्त पापा की प्रेरितिक यात्रा पर हमारी संक्षिप्त रिपोर्ट समाप्त होती है। मिस्र में सन्त पापा फ्राँसिस की यह पहली तथा इटली से बाहर 18 वीं विदेश यात्रा थी। हमारी आशा है कि इस्लामी चरमपंथियों एवं आतंकवादियों के अनवरत हमलों से पीड़ित मिस्र के समस्त नागरिक और, विशेष रूप से, यहाँ के ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों के लिये सन्त पापा फ्राँसिस की राष्ट्र में उपस्थिति आशा की एक किरण सिद्ध हो।


(Juliet Genevive Christopher)

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