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पवित्र आत्मा पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on May 31, 2017 at 3:15 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 31 मई 2017 (सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

पेंतेकोस्त महापर्व के संदर्भ में हम कलीसिया और पवित्र आत्मा के बीच के संबंध की चर्चा किये बिना नहीं रह सकते हैं। पवित्र आत्मा वह वायु है जो हमें हमारे जीवन में आगे बढने हेतु मदद करता है। वह हमारे जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हुए हमें अनुभूति दिलाता है कि हम इस दुनिया में तीर्थयात्री के समान हैं जो अपने में कभी बैठे नहीं रह सकते और न ही कभी “विराम” की स्थिति में बने रह सकते हैं।

इब्रानियों के नाम संत पौलुस का पत्र हमारे लिए आशा को सुदृढ़ लंगर के सदृश प्रस्तुत करता है जो समुद्री लहरों के मध्य जहाज को आगे की ओर ले चलती है। हमारी आशा उसकी पाल की तरह है जो पवित्र आत्मा की शक्ति को हममें संचित करती और हमारे जीवन रूपी नाव को जीवन के तूफान भरी विभिन्न परिस्थितियों में आगे की ओर ले चलती है।

संत पौलुस रोमियों के नाम अपने पत्र में हमें कहते हैं, “आशा के स्रोत, ईश्वर आप लोगों को विश्वास द्वारा प्रचुर आनन्द और शांति प्रदान करे, जिससे पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से आप लोगों की आशा परिपूर्ण हो।” (रोमि.15.13)

“आशा का ईश्वर”, यह अभिव्यक्ति ईश्वर को हमारी आशा का आधार केवल नहीं कहता, वरन् उनके साथ एक दिन अनंत जीवन में हमारे मिलन की बात कहता है। इसका अर्थ हमारे लिए यह भी है कि ईश्वर ही हैं जो हमें आशा में बनाये रखते और इस आशा में हमें जीवन की खुशी प्रदान करते हैं। आशा आप को आनन्दित बनाये रखे। (रोमि. 12.12) एक सुप्रसिद्ध कहावत “जब तक हमारा यह जीवन है हमारी आशा बनी हुई है” और इसके विपरीत एक दूसरी बात भी अपने में सच है कि जब तक आशा है तब तक जीवन है। संत पापा ने कहा मनुष्य को जीवन जीने हेतु आशा की जरूरत है और आशा में बन रहने हेतु पवित्र आत्मा की जरूरत है।

संत पौलुस हमें आशा में बने रहने का आह्वान करते हैं। आशा में बने रहने का अर्थ है अपने जीवन में निराश नहीं होना, वरन जीवन की सारी विषम परिस्थितियों में भी आशावान बने रहना। (रोमि. 4.18) अब्राहम के लिए यह अपने एक मात्र बेटे को ईश्वर के आज्ञानुसार बलि चढाना था और माता मरियम को विकट परिस्थिति में अपने बेटे येसु के क्रूस के नीचे खड़ा होना था।

पवित्र आत्मा हमारे हृदय की गहराई में इस बात की प्रेरणा देते हुए कि हम ईश्वर की संतान और उनके उत्तराधिकारी हैं, आशा से रूबरू करता है। “उसने अपने निजी पुत्र को भी नहीं बचाया, उसने हम सब के लिए उसे समर्पित कर दिया। तो, इतना देने के बाद क्या वह हमें सब कुछ नहीं देगाॽ” (रोमि.8.32) “आशा व्यर्थ नहीं होती क्योंकि ईश्वर ने हमें पवित्र आत्मा प्रदान किया है और उसके द्वारा ही ईश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उमड़ पड़ा है।” (रोमि. 5.5)

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा न केवल हमें आशा में बने रहने को प्रेरित करता बल्कि वह हम में आशा के बीज बोता है जिससे द्वारा हम अपने जीवन में अन्यों के लिए, विशेषकर, अपने भाई-बहनों के लिए सहायक बनते, उनकी देख-रेख और रक्षा करते हैं। धन्य कार्डिनल न्यूमैन ने अपने प्रवचन में विश्वासियों से कहा था, “अपने जीवन में अपने दुःखों और अपनी तकलीफों द्वारा हम शिक्षा ग्रहण करते हैं, वास्तव में, हम अपने पापों के कारण अपने मन और हृदय में जरूरमंदों की स्नेहमय सहायता करने हेतु आगे आना सीखते हैं। हम अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार अन्यों के लिए सहायता, परामर्श और सांत्वना के स्रोत बनते हैं। हमारे शब्द और हमारी सलाह, हमारे कार्य करने के तरीके, हमारी आवाज और हमारी नजरें नर्म और कोमल बनते हैं। हमारे जीवन में गरीब, परित्यक्त और नाकारे भाई-बहनों को हमारे प्रेम की आवश्यकता है।

पवित्र आत्मा न केवल हमारे हृदयों में आशा को जागृत करता वरन् सारी सृष्टि में इसे प्रसारित करता है। संत पौलुस कहते हैं, “यह सृष्टि को जो इस संसार की असारता के अधीन हो गयी है-अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि उसकी इच्छा से, जिसने उसे अधीन बनाया है- किन्तु यह आशा भी बनी रही कि वह असारता की दासता से मुक्त हो जायेगी और ईश्वर की संतान की महिमामय स्वतंत्रता की सहभागी बनेगी। हम जानते हैं कि समस्त सृष्टि अब तक मानो प्रसव-पीड़ा में कराहती रही है और सृष्टि ही नहीं, हम भीतर-ही-भीतर कराहते हैं।” (रोमि.8. 20-22) संसार को संचालित करने वाली शक्ति कोई अज्ञात अंधी शक्ति नहीं है बल्कि यह ईश्वर का आत्मा है जो सागर पर विचरण करता है। यह हमें सारी सृष्टि का सम्मान और उसकी देख-रेख करने को प्रेरित करता है।

पेंतेकोस्त का त्योहार हमें माता मरियम येसु की मां और हमारी माँ के साथ प्रार्थना में संलग्न पायें जिससे कि हम आत्मा के वरदानों से अपने को विभूषित कर पायें जो हममें आशा का संचार करता है।
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया। संत पापा फ्रांसिस ने विशेष रूप से काथलिक करिश्माई नवीकरण की पचासवीं वर्षगांठ के अवसर पर पेन्तेकोस्त प्रार्थना में भाग लेने आए प्रतिभागियों का अभिवादन किया और उन पर पवित्र आत्मा की आशीष और वरदानों की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

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ईश्वर की दया के जीवंत प्रतीक बनें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 31, 2017 at 3:13 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 31 मई 2017 (वीआर सेदोक) : आज 31 मई को कलीसिया माता मरियम का अभ्यागमन पर्व मनाती है। इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी काथलिक विश्वासियों से दया के कार्यों के करने हेतु माता मरियम से सीखने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने संदेश में लिखा,″ईश्वर की दया के जीवंत प्रतीक बनने हेतु आइए हम हमारी माता मरियम के मजबूत विश्वास और सेवा से सीख लें।″


(Margaret Sumita Minj)

डिजिटल दुनिया को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना

In Church on May 31, 2017 at 3:11 pm

 

रोम, बुधवार, 31 मई 2017 (वीआर सेदोक) : “डिजिटल वर्ल्ड में बाल प्रतिष्ठा” पर अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन 3 से 6 अक्टूबर तक रोम के परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के बाल संरक्षण केंद्र द्वारा ‘वीप्रोटेक्ट ग्लोबल अलायंस’ के सहयोग से किया गया है।

दुनिया भर में 3.2 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता के एक चौथाई से अधिक बच्चे उपयोग करते हैं। इस पीढ़ी के 800 मिलियन से अधिक युवा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं यौन शोषण के लिए तैयार की गई साइबर धमकी, बहकावे, सेक्सटोरशन के रूप में नुकसान और दुरुपयोग के चपेट में पूरी तरह से आ गये है। अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी समझ पर ध्यान दिया जाएगा तथा डिजिटल एजेंसियों के जोखिमों और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों और निर्णय निर्माताओं को एक साथ लाया जाएगा।

‘वीप्रोटेक्ट ग्लोबल अलायंस’ ने दुनिया भर के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षा, व्यापार और नागरिक समाज विशेषज्ञों, राजनीतिक नेताओं और धार्मिक प्रतिनिधियों के करीब 140 लोगों को आमंत्रित किया है। कांग्रेस के अंत में घोषणापत्र को संत पापा फ्राँसिस के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

एशिया में युवा ख्रीस्तीय शांति के राजदूत

In Church on May 31, 2017 at 3:09 pm


चियांग माई, बुधवार, 31 मई 2017 (एशिया न्यूज) : एशियाई ख्रीस्तीय संघ के मुख्यालय थाईलैंड के चियांग माई शहर में सोमवार 29 मई से ″एशिया में युवा ख्रीस्तीय शांति के राजदूत″ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया है जिसमें एशिया के विभिन्न देशों से 30 युवा सेमिनार में भाग ले रहे हैं। इस सेमिनार का उद्देश्य युवाओं को अंतरधार्मिक दृष्टिकोण के आधार पर शांति शिक्षा प्रदान करने के विभिन्न तरीकों का सिखाना तथा विभिन्न धार्मिक नेताओं और विद्वानों के साथ बातचीत कराना है। प्रशिक्षण के दौरान, युवा लोगों को चियांग माई शहर के बौद्ध, हिंदू, मुस्लिम और सिख धार्मिक तीर्थ स्थानों और मठों का दौरा कराया जाएगा।

इस प्रशिक्षण द्वारा युवाओं में अंतरधार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण विकसित करते हुए स्थानीय समुदायों में शांति निर्माण हेतु उन्हें सक्षम बनाना है। एशियाई ख्रीस्तीय संघ के महासचिव मैथ्यु जोर्ज चुनाकारा ने एशियाई धर्मों और आध्यात्मिकता में न्याय के साथ शांति को जोड़ते हुए कहा, ″सभी धार्मिक परंपराएँ पृथ्वी पर शांति और दुश्मनी की दीवारों को तोड़ने के संदेश पर सहमत हैं। सभी धार्मिक मूल्य इस बात को स्वीकार करते हैं कि मनुष्य ईश्वर के प्रतिरुप में बनाये गये हैं एवं मानव अधिकार और गरिमा की मान्यता न्याय के साथ शांति का महत्वपूर्ण सिद्धांत है। महासचिव मैथ्यु ने कहा कि इस सम्मेलन द्वारा एशिया के युवाओं को अपने स्थानीय समाज में शांति के प्रवर्तकों के रुप में वापस भेजना है।″

धर्म, संस्कृति और शांति संस्थान के निदेशक जोसेफ मानिकम ने न्याय और शांति के लिए अंतरधार्मिक वार्ता विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा, ″शांति एक यात्रा है इसकी शुरुआत असहिष्णुता से सहिष्णुता की ओर होती है। संघर्ष को समाप्त करने के लिए हमें एक आम भाषा में बातें करनी चाहिए।″


(Margaret Sumita Minj)

काथलिक धर्माध्यक्षों द्वारा धार्मिक स्थानों की सुरक्षा की अपील

In Church on May 31, 2017 at 3:07 pm

नई दिल्ली, बुधवार 31 मई 2017 (उकान) :  दक्षिण भारत के गिरजाघर में ताड़फोड़ और पवित्र वस्तुओं तथा प्रतिमाओं को अपवित्र करने की धटना को देखते हुए भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने राजनेताओं से सभी धर्मों के पूजा स्थानों की सुरक्षा की अपील की है।

21 मई को तेलांगना जिले के कुन्डापाल्ली गाँव के फातिमा की माता मरियम को समर्पित नये गिरजाघर में 100 से अधिक लोग प्रवेशकर येसु, माता मरियम और क्रूस को तोड़ दिया और वहां रखी गई सभी फर्नीचर को क्षतिग्रस्त कर दिया। 13 मई को हैदराबाद के महाधर्माध्यक्ष थुम्मा बाला ने इस नये गिरजाघर की आशीष की थी।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्हास ने उका समाचार से कहा,″ “हमारे देश में जिस तरह से धटनायें धट रही हैं, उसके बारे में हम चिंतित हैं। हम सरकार को दोष नहीं दे रहे हैं पर ऐसा लगता है कि कुछ असामाजिक तत्वों को बढ़ावा मिल रहा है और यह देश के लिए अच्छी बात नहीं है।”

उन्होंने कहा, ″हम हमारे राजनेताओं से अपील करते हैं कि वे सभी समुदायों के पवित्र स्थानों को उपद्रवी तत्वों से सुरक्षा सुनिश्चित करें। प्रत्येक नागरिक और समुदाय को अपने विश्वास के अनुसार ईश्वर की पूजा आराधना करने का अधिकार है। हर किसी को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। क्यों दूसरों के धार्मिक स्थानों में जाकर तोड़फोड़ करना है?  इस तरह के कृत्य हमारे प्यारे देश और सभी समुदायों के शांतिप्रिय लोगों को विभाजित और बदनाम करता है।″

हैदराबाद के महाधर्माध्यक्ष बाला ने अपने धर्मप्रांत के सभी पल्लियों, पुरोहितों धर्मसंघियों और लोकधर्मियों से आग्रह किया है कि वे क्षतिग्रस्त गिरजाघर के शुद्धिकरण की धर्मविधि, पवित्र साक्रामेंट की आराधना, उपवास, रोजरी माला प्रार्थना में भाग लें।


(Margaret Sumita Minj)

भारतीय वकील द्वारा रोहिंग्या कार्रवाई में जांच दल का नेतृत्व

In Church on May 31, 2017 at 3:06 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार, 31 मई 2017 (वीआर सेदोक) : रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा कथित अत्याचारों की जांच करने हेतु संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय महिला वकील की अध्यक्षता में तीन सदस्यों के एक दल को नामित किया है।

मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एल साल्वादोर के राजदूत जोआकिन अलेक्जान्डर माज़ा मारतेल्ली ने मंगलवार को भारतीय सर्वोच न्यायालय के वकील इन्द्रा जयसिंग को जाँच दल का मुखिया नियुक्त किया। दल में श्रीलंका के वकील राधिका कुमारस्वामी और ऑस्ट्रेलियाई अधिकार सलाहकार क्रिस्टोफ़र डोमिनिक सिडोटी हैं।

म्यांमार में, विशेषकर राखीन राज्य में सेना और सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के तथ्यों और परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद ने 24 मार्च को तत्काल एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन को प्रेषित करने का निर्णय लिया।

गत अक्टूबर रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा मौंगडोव सीमा पर नौ पुलिस अधिकारी मारे गए थे इसी के प्रत्युत्तर में म्यांमार सेना द्वारा बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियान चलाए जाने के बाद करीब 75,000 रोहिंगिया उत्तर पश्चिमी राखीन राज्य से बांग्लादेश भाग गए थे। एयूएन के साथ साक्षात्कार में रोहिंग्या प्रवासियों ने बताया कि म्यांमार सुरक्षा सेना ने बड़े पैमाने पर हत्या और रोहिंग्या महिलाओं पर सामूहिक बलात्कार किया है। उन्होंने रोहिंग्या लोगों के अपने देश से समाप्त करने का अभियान चलाया है और यह मानवता के विरुद्ध अपराध है।

म्यांमार ने संयुक्त राष्ट्र जांच का विरोध किया है

म्यांमार राजनयिकों ने इस कदम को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए यह “स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने अपने राष्ट्रीय जांच को समाप्त करने और निष्कर्षों तक पहुँचने तक का समय पूछा है।

तथ्य-खोज मिशन के सदस्य आने वाले हफ्तों में जिनेवा में योजना बनाने के लिए जमा हो रहे हैं जिससे कि आगे के महीनों में काम शुरु करने की उम्मीद है। तथ्य-खोज मिशन इस साल सितंबर महीने में मानवाधिकार परिषद के छत्तीसवें सत्र में एक मौखिक रिपोर्ट तथा मार्च 2018 में परिषद के सैंतीसवें सत्र में जाँच का पूरा रिपोर्ट पेश करेगी।


(Margaret Sumita Minj)

कलीसिया के धर्माध्यक्षों की विशेषताएँ

In Church on May 30, 2017 at 3:01 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा ने कहा कि सच्चा चरवाहा अपनी छोटी कलीसिया से विच्छेद करना जानता है क्योंकि वह भलीभाँति समझता है कि वह खुद इतिहास का केंद्र नहीं है किन्तु एक स्वतंत्र व्यक्ति है जो बिना किसी समझौता के कलीसिया की सेवा करता है।

संत पापा ने मंगलवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में एक अच्छे चरवाहे की विशेषता पर ध्यान आकृष्ट किया।

उन्होंने प्रेरित चरित से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ संत पौलुस अपने द्वारा स्थापित एफेसुस की कलीसिया से विदा लेते हैं। संत पापा ने कहा कि एक चरवाहे को अपनी कलीसिया से विदा लेकर दूसरी ओर जाने हेतु तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, ″एक समय आता है जब प्रभु हमें एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर भेजते हैं। जिसके लिए हमें पूरी तरह तैयार होना चाहिए। एक चरवाहा जो पूरी तरह चला जाना नहीं जानता इसका अर्थ है कि विश्वासियों के साथ उसका अच्छा संबंध बन गया है। संत पापा ने इस संबंध को येसु के क्रूस के लिए पूरी तरह शुद्ध नहीं होना बतलाया।″

संत पापा ने कहा कि विदाई के दिन संत पौलुस ने एफेसुस के सभी पुरोहितों को बुलाया तथा वहाँ एक छोटी सभा में उन्हें कई परामर्श दिये।

संत पापा ने संत पौलुस के तीन मनोभावों पर प्रकाश डाला। पहला, मोह रहित मनोभाव। इस मनोभाव के द्वारा वे पीछे खींचे जाने का अनुभव कभी नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह भावना एक याजक को शांति प्रदान करेगा जब वह याद करेगा कि उसने कभी भी समझौता करते हुए कलीसिया का संचालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए साहस की आवश्यकता है।

दूसरा मनोभाव है पवित्र आत्मा के प्रति खुलापन का मनोभाव। संत पौलुस कहते हैं कि वे पवित्र आत्मा की प्रेरणा से विवश होकर येरूसालेम जा रहे हैं जहाँ उन्हें मालूम नहीं है कि क्या होने वाला है। संत पापा ने कहा कि पौलुस पवित्र आत्मा की आज्ञा का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि चरवाहे को मालूम होना चाहिए कि वह यात्रा पर है।

संत पापा ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के कलीसिया का संचालन कर रहे थे किन्तु अब पवित्र आत्मा उन्हें वहाँ ले जा रहा था जिसके बारे उसे कुछ भी पता नहीं था। वे उनका अनुसरण करते हैं क्योंकि वे अपने आप से कुछ नहीं करते। उन्होंने सेवा दी थी और अब ईश्वर उन्हें उस स्थान को छोड़ने के लिए कह रहे थे। पवित्र आत्मा ने प्रकट किया था कि येरूसालेम में बेड़ियाँ एवं कष्ट उनका इंतजार कर रहे थे। इस बात को जानते हुए भी वे किसी और कलीसिया में जाकर सेवा करने की इच्छा प्रकट नहीं किये। वे ईश्वर की वाणी के लिए सदा खुले थे अतः वे प्रभु के आदेश अनुसार आगे बढ़े।

संत पापा ने तीसरे मनोभाव के बारे कहा कि संत पौलुस में सेवक का मनोभाव था। संत पौलुस अपने आपके महान होने का दावा कभी नहीं किया, वे खुद को इतिहास का केंद्र नहीं मानते थे बल्कि एक सेवक कहा। इस प्रकार हर तरह के समझौते से मुक्त वे आगे बढ़ें।

संत पापा ने विश्वासियों से आग्रह किया कि वे कलीसिया के परमाध्यक्ष, धर्माध्यक्षों एवं पल्ली पुरोहितों के लिए प्रार्थना करें ताकि वे समझौता रहित जीवन जीते हुए अपनी यात्रा पर आगे बढ़ते रहें, वे खुद इतिहास के केंद्र में न जीयें किन्तु त्यागना सीखें।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने कनाडा के प्रधानमंत्री से मुलाकात की

In Church on May 30, 2017 at 2:59 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 29 मई को वाटिकन के प्रेरितिक प्रासाद में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एवं उनकी पत्नी सोफिया ग्रेगोइरे ट्रूडो से मुलाकात की।
वाटिकन द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि संत पापा एवं कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात सौहार्दपूर्ण रही।
 कहा गया कि मुलाकात में ″परमधर्मपीठ एवं कनाडा के बीच सकारात्मक संबंधों की याद की गयी, साथ ही देश में काथलिक कलीसिया के योगदान पर भी गौर किया गया।″ दोनों पक्षों ने एकीकरण, मेल-मिलाप, धर्म मानने की स्वतंत्रता और नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
वक्तव्य में यह भी कहा गया कि ″हाल के जी 7 शिखर सम्मेलन के परिणामों के प्रकाश में, कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान दिया गया, खासकर, मध्यपूर्वी देशों एवं संघर्ष चल रहे इलाकों पर।″
कनाडा के प्रधानमंत्री ने संत पापा से मुलाकात के उपरांत वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन एवं वाटिकन विदेश सचिव पौल गल्लाघर से भी मुलाकातें कीं।


(Usha Tirkey)

हमारे आनन्द का स्रोत पवित्र आत्मा

In Church on May 30, 2017 at 2:57 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 मई 2017 (वीआर सेदोक): माता कलीसिया पवित्र आत्मा का इंतजार कर रही है जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु येसु अपने स्वर्गारोहण के पूर्व की थी। संत पापा ने पवित्र आत्मा से प्रार्थना करने की सलाह देते हुए ट्वीट किया।

संत पापा ने ट्वीट संदेश में लिखा, ″ख्रीस्तीय आनन्द पवित्र आत्मा का वरदान है जो हमें सच्ची स्वतंत्रता एवं भाई बहनों को येसु के पास लाने की कृपा प्रदान करता है।″


(Usha Tirkey)

सिकंदराबाद के तोड़फोड़ किये गये गिरजाघर के शुद्धीकरण की पहल

In Church on May 30, 2017 at 2:55 pm

सिकंदराबाद, मंगलवार, 30 मई 2017 (एशियान्यूज़): ″मैं महाधर्मप्रांत के पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों से अपील करता हूँ कि वे केसर, मेडचल जिला (तेलांगना) स्थित फातिमा की माता मरियम को समर्पित अपवित्रीकृत गिरजाघर के शुद्धिकरण की धर्मविधि में भाग लें।″ यह बात हैदराबाद के महाधर्माध्यक्ष बाला ने कही।

एशियान्यूज के अनुसार हैदराबाद के महाधर्माध्यक्ष बाला ने 9 जून को गिरजाघर शुद्धिकरण की धर्मविधि सम्पन्न करने का निश्चय किया है।

उन्होंने स्थानीय विश्वासियों से अपील की है कि वे गिरजाघर में तोड़फोड़ का प्रत्युत्तर प्रार्थना द्वारा दें जिसको कुछ धार्मिक चरमपंथियों के उकसाने पर करीब 100 लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था।

नये गिरजाघर पर 21 मई को हुई इस दुखद घटना के बाद महाधर्माध्यक्ष ने धर्मप्रांत के पुरोहितों से अपील की है कि वे शुद्धिकरण धर्मविधि के आयोजन की सूचना अधिक से अधिक विश्वासियों को दें।

एक जून को गिरजाघर के शुद्धिकरण के उपलक्ष्य में सिकंदराबाद के संत मरियम उच्च विद्यालय में, महाधर्माध्यक्ष द्वारा ख्रीस्तयाग अर्पित किया जाएगा तथा अगले शुक्रवार को दो घंटे तक पवित्र संस्कार की आराधना, धर्मप्रांत के सभी पल्लियों में की जाएगी जिसके दूसरे दिन रोजरी माला विन्ती भी की जाएगी।

9 जून को सभी काथलिक पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं लोकधर्मियों के लिए उपवास एवं प्रार्थना का दिन होगा। दूसरी ओर काथलिकों का एक दल हमले के शिकार गिरजाघर जाकर शुद्धिकरण की धर्मविधि सम्पन्न करेगा।

बताया गया है कि नव निर्मित गिरजाघर यू. जोर्ज रेड्डी नामक एक काथलिक की जमीन पर स्थापित थी। स्थानीय कलीसिया ने पुलिस इंस्पेक्टर से अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

महाधर्मप्रांत ने तेलांगना के गृहमंत्री से गिरजाघरों एवं काथलिक अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की गुहार लगायी है। जिसका उत्तर देते हुए उन्होंने न्याय का पूरा समर्थन करने का आश्वासन दिया है।

बयान में कहा गया कि निजी भूमि पर बिना स्पष्ट कारण के, गिरजाघर के अंदर तोड़फोड़ एक जानबूझकर किया गया कार्य था। महाधर्माध्यक्ष ने इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि रेड्डी ने 500 वर्ग यार्ड जमीन दान दिया था जबकि गिरजा ने 700 वर्ग यार्ड खरीदा था। (कुल 1200 वर्ग यार्ड)

रेड्डी ने विभिन्न उद्देश्यों के लिए हॉल बनाने की अनुमति भी पहले ही ले ली थी। तीन माह पहले पल्ली पुरोहित ने गिरजाघर के निर्माण हेतु कलेक्टर को आवेदन दिया था जो प्रक्रिया में है और जिस को अंतिम रूप दिया जा रहा था।


(Usha Tirkey)

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