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अनंत जीवन का मार्ग येसु, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 1, 2017 at 3:25 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 मई 2017 (वीआर सेदोक) : एक मई को पूरे विश्व में ″मजदूर दिवस″ मनाया जाता है। विश्वव्यापी कलीसिया भी आज संत जोसेफ का पर्व मनाती है। संत जोसेफ बढ़ईगिरी के कार्य को ईमानदारी से करते रहे। वे हर वर्ग के श्रमिकों के लिए उज्जवल आदर्श हैं।

संत जोसेफ के नाम दिवस पर संत पापा ने ट्वीट संदेश में लिखा, ″संत जोसेफ युवाओं को बड़े कार्यों को करने की जोखिम उठाने के सपने को देखने की क्षमता प्रदान करे जैसे ईश्वर हमारे लिए सपना देखते हैं।″

संत पापा ने पास्का के तीसरे रविवार 30 अप्रैल को अपने संदेश में लिखा,″अपने पुनरुत्थान द्वारा येसु ख्रीस्त ने हमें पाप और मृत्यु की दासता से मुक्त किया है और हमारे लिए अनंत जीवन का मार्ग खोल दिया है।″


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा “काथलिक एक्शन” की 150 वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए

In Church on May 1, 2017 at 3:24 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 मई 2017 (वीआर सेदोक ) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 30 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में आयोजित इटली के लोकधर्मियों के संगठन “काथलिक एक्शन” की 150 वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए।

‘काथलिक एक्शन’ विशेष रूप से 19 वीं शताब्दी के दौरान सक्रिय था जिसका उद्देश्य उन देशों के समाज पर काथलिक प्रभाव को प्रोत्साहित करना था, जो गैर-याजकीय शासनों के अधीन हो गये थे।

इटली का “काथलिक एक्शन” आज भी लोकधर्मियों का सबसे सक्रिय संगठन है। इसकी स्थापना 1867 में मारियो फानी और जोवान्नी अक्वादेरनी द्वारा ″इटालियन काथलिक युवा समुदाय ″ के नाम से की गई थी।

संत पापा फ्राँसिस ने समारोह में उपस्थित 70 हजार प्रतिभागियों को संबोधित कर कहा, ″येसु के मिशनरी चेलों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है वे उपनगरों और दूर दराज क्षेत्रों में सुसमाचार के संदेश को फैलाने में पीछे नहीं पर आगे ही बढ़ते जायें।″

संत पापा ने कहा कि कलीसिया “काथलिक एक्शन” द्वारा विश्व और समाज को अपने जुनून के साथ दिये गये योगदान के प्रति आभारी है।

उन्होंने सभी सदस्यों को संगठन के एक शानदार इतिहास को सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि प्रभु के आनंद और आशा की गवाही देने के लिए मिशनरी बनकर दुनिया में जाने हेतु प्रोत्साहित किया।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने विमान में परमाणु युद्ध, उत्तर कोरिया के बारे में बातचीत की

In Church on May 1, 2017 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 मई 2017 (वीआर सेदोक ) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 29 अप्रैल को मिस्र की प्रेरितिक यात्रा से वापस रोम लौटते वक्त विमान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि संघर्ष और परमाणु युद्ध की संभावना को देखते हुए कूटनीति और शांतिपूर्ण बातचीत पर ध्यान केंद्रित कर संयुक्त राष्ट्र के नेताओं को एक मजबूत नेतृत्व प्रदान करने की आवश्यकता है।”मैं हमेशा समस्याओं को हल करने के लिए कूटनीति, वार्ता के रास्ते को अपनाने के लिए कहता हूँ।”

“मेरा मानना है कि संघर्ष के राजनयिक समाधान खोजने के लिए संयुक्त राष्ट्र को फिर से अपने नेतृत्व को शुरू करने की जरुरत है, क्योंकि इस मुद्दे पर उसने थोड़ी ढिलाई की है।”

यह पूछे जाने पर कि उत्तरी कोरिया द्वारा परमाणु हमले की संभावना के भय को देखते हुए वे राजनेताओं से क्या कहेगे, इसके जवाब में संत पापा ने कहा, “कूटनीति के मार्ग को अपनाते हुए वे उन्हें समस्याओं का समाधान करने को कहेंगे जैसे उन्होंने विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के लिए नेताओं से कहा है।

संत पापा ने कहा, ” बातचीत का मार्ग ही राजनयिक समाधानों का मार्ग है,” इस छिट पुट विश्व युद्ध के बारे वे दो वर्षों से कहते आ रहे हैं। और यह युद्ध अब विकराल रुप लेती जा रही है।

“मुद्दा पहले से ही गंभीर हैं, क्योंकि उत्तरी कोरिया में मिसाइलों की समस्या एक से अधिक वर्षों से है और अब ऐसा लगता है कि बात बहुत ही ज्वलंत हो गई है।”

उत्तरी कोरिया में परमाणु हथियारों का मुद्दा सबसे आगे रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 28 अप्रैल 2017 को बैठक की थी, जिसमें उन्होंने कई प्रतिबंधों को लागू करने के लिए चर्चा की थी, जिसे उत्तर कोरिया पर पहले से ही लगाया है जैसे कि 9 सितंबर 2016 को उत्तरी कोरिया के नवीनतम सफल परमाणु परीक्षण के बाद उसी वर्ष नवंबर में 2321 संकल्प पारित किया गया।

अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई रक्षा अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के कुछ ही घंटों पश्चात उत्तर कोरिया ने एक और मिसाइल छोड़ा जो शुरू होने के कुछ सेकंड के भीतर विस्फोट हुआ।

सुरक्षा परिषद की बैठक के आगे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यदि राजनयिक प्रयास विफल हो जाते हैं, तो अमेरिका परमाणु हथियार कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए उत्तर कोरिया के साथ बात करने को तैयार है।

संत पापा ने कहा कि प्रत्यक्ष संघर्ष संभव है, पर वे कूटनीति के मार्ग को अपनाते हुए समस्याओं का समाधान करना पसंद करते हैं।

32 मिनट के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संत पापा ने मध्य पूर्व में शांति और वेनेजुएला की स्थिति के बारे में भी कहा। उन्होंने लोकप्रियता के बारे में पूछे गये एक सवाल का जवाब दिया, विशेष रूप से यूरोप की लोकप्रियता और लैटिन अमेरिका की लोकप्रियता के बीच के अंतर पर प्रकाश डाला।

डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संभावित बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा उसे किसी भी अनुरोध के बारे में सूचित नहीं किया गया है, लेकिन अगर देश के प्रमुख उनसे मिलना चाहते हैं तो वे हमेशा उनसे मिलते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

दया के कार्यों में माता मरिया का उदाहरण लें, कार्डिनल क्वेवेदो

In Church on May 1, 2017 at 3:21 pm

फिलीपींस, वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 मई 2017 (वीआर सेदोक) : फिलीपींस में कोताबातो के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओरलांडो क्वेवेदो ने फिलीपीन वासियों से आग्रह किया कि वे गरीबों की पुकार सुनने और उनकी मदद हेतु सदा तैयार कुवांरी माता मरियम से सीखें।

″माता मरिया नित्य सहायिका″ के हजारों भक्तों को संबोधित करते हुए कार्डिनल ने कहा,″माता मरियम का प्रेम सभी के लिए समान है। आइये, हम गरीब –धनी, समाज से तिरस्कृत और हाशिये पर जीवन यापन करने वालों के लिए माता मरियम के प्रेम का अनुसरण कर सकें।

मनिला में ″ माता मरिया नित्य सहायिका″ के आइकन का 150 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर फिलीपींस इस सप्ताह एक वैश्विक तीर्थ-कांग्रेस की मेजबानी कर रही है।

बैजंटाइन आइकन ″ माता मरिया नित्य सहायिका″ को सन् 1866 में मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसंध को सौंपा गया था।

कार्डिनल क्वेवेदो ने कहा, ″माता मरिया ने येसु के साथ उसके दुःख में सहभागी हुई थी और आज वे हमारे दुःख तकलीफों में हमारे साथ हैं। मरिया की दयालुता की कोई सीमा नहीं है। वे नशा पान करने वालों, किसी तरह के अन्याय के शिकार लोगों, हत्याओं के शिकार लोगों और हम सभी को बड़े प्रेम से आलिंगन करती हैं।″

माता मरिया आपदा, अपराध, मानव तस्करी, गरीबी और सामाजिक अन्याय के शिकार लोगों के साथ दुःख सहती हैं। और उनके दुःखों में सांत्वना देती हैं।


(Margaret Sumita Minj)

किसानों को प्रवासन से बचाने हेतु कारितास की मदद

In Church on May 1, 2017 at 3:20 pm

 

नई दिल्ली, सोमवार, 1 मई 2017 (ऊका समाचार) : भारत के गांवों से शहरों में बड़ी संख्या में लोगों के प्रवास ने कलीसिया के कारितास कार्यकर्ताओं को लोगों की भूख मिटाने और बेहतर जीवन जीने के लिए खेती के नये तरीकों को खोज निकालने की चुनौती दी है।

उत्तर भारत के कई गावों में कारितास इंडिया ने ग्रामीणों को आय के वैकल्पिक स्रोत प्रदान करने के लिए कृषि समृद्धि कार्यक्रम (एपीपी) शुरु की है।

कृषि समृद्धि कार्यक्रम सन् 2011 से झारखंड राज्य के कई गावों में शुरु की गई है। यह फसलों के विविधीकरण और वर्तन पर केंद्रित है जिससे पूरे साल ग्रामीण इलाकों में ग्रामीणों को प्रयाप्त मात्रा में बेहतर भोजन मिल सके।

यह कार्यक्रम झारखंड स्थित गुमला जिले के 10 गावों में सक्रिय है राज्य का मानना है कि इन गावों से किसान बड़ी संख्या में शहरों में प्रवास करते थे।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के सन् 2007-2008 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 309 मिलियन आंतरिक प्रवासी हैं जो नौकरियों की तलाश में शहरों की यात्रा करते हैं।

अधिकांश प्रवासी आर्थिक रुप से गरीब राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, राजस्थान और उत्तरप्रदेश से आते हैं और शहरों में अकुशल श्रमिक के रुप में घरेलू कार्यकर्ता, भवन निर्माण  मजदूर, परिवहन, वस्त्र उद्योग और कृषि उद्योगों में काम करते हैं।

सन् 2001 से 2011 तक में झारखंड से ही करीब 5 मिलयन लोग नौकरी की खोज में शहरों में प्रवास किये हैं।

कारितास ने किसानों को जैविक खेती, स्वदेशी बीज के संरक्षण प्रणाली जैसी नई तकनीकों से अवगत कराया साथ ही पानी को बचाने के लिए चेक बांध, तालाबों, टैंकों और कुओं का नवीनीकरण और निर्माण करने में उनकी मदद की।

उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘स्वयं-सहायता समूह’ और किसानों के बेहतर आजीविका के अवसर तथा उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए ‘किसान क्लब’ बनाया।

कारितास अधिकारी प्रदीप किशोर चंद ने ऊका न्यूस से कहा कि किसान अब खाद्यान्न का उत्पादन सालभर कर रहे हैं इससे पहले  वे केवल धान की खेती करते थे जिससे केवल 4-5 महीने की खाद्य सुरक्षा होती थी।

प्रदीप किशोर चंद ने कहा कि कार्यक्रम की सफलता परिणामों से पता लगाया जा सकता है। 10 गांवों में कृषि समृद्धि कार्यक्रम लागू किया गया था ओर्बेंगा और कुरुम गाँवों में प्रवासन पूरी तरह से बंद हो गया है और दूसरे गावों में भी प्रवासन काफी कम हो गया है।

कारितास इंडिया के कार्यकारी निदेशक फादर फ्रेडरिक डिसूजा ने ऊका समाचार से कहा, “कारितस इंडिया का उद्देश्य हमेशा विकास के पहल से उन लोगों तक पहुँचना है जो अन्य लोगों की पहुँच से बाहर हैं। पहले गांवों में लाभप्रद कामों की कमी थी लेकिन अब लोग अतिरिक्त आय वाले कई फसलों को उगाते और साल-भर व्यस्त रहते हैं।″


(Margaret Sumita Minj)

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