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परमधर्मपीठीय समाज विज्ञान अकाडमी द्वारा संधटन हेतु नये मार्ग की मांग

In Church on May 3, 2017 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 3 मई 2017 (वीआर संदोक) : परमधर्मपीठीय समाज विज्ञान अकाडमी ने मंगलवार 2 मई को आमसभा सम्मेलन का समापन किया जिसमें उन्होंने हाशिये पर जीवन यापन करने वालों को समाज में संघटन करने की मांग की। पाँच दिवसीय आमसभा सम्मेलन की विषय वस्तु, “एक भागीदारी समाज की ओर : सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के लिए नये मार्ग” थी।

संत पापा फ्राँसिस के संदेश को आमसभा के लिए दिशा निर्देश के रुप में लिया गया था। पिछली दो शताब्दियों में श्रमिकों के अधिकारों के लिए आंदोलनों और लड़ाइयों को याद करते हुए संत पापा ने कहा कि “ये लड़ाई अब तक खत्म हो चुकी है” और अब हम भाईचारे के महत्व को आधार मानते हुए दुनिया को नई दृष्टि से देखने के लिए बुलाये गये हैं।

वाटिकन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आमसभा के प्रतिभागियों में से एक दक्षिण अफ्रीका के प्रोफेसर पौलुस जुलु ने इस तथ्य को उजागर किया कि अफ्रीका में लोगों की दुर्दशा के प्रमुख कारणों में से एक राजनीतिक व्यवस्था में पाया जा सकता है जिसमें लोगों को जीवन के बुनियादी संसाधनों तक पहुंचने से रोका जाता है।

प्रोफेसर जुलु ने बताया कि अफ्रीका में प्रतिनिधि लोकतंत्र की समस्या है जो सामाजिक बहिष्कार का प्रमुख कारण है। जिसकी वजह से समाज में असमानता बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, “इन असमानताओं के परिणामों में से एक है प्रवासन। बहिष्कृत आबादी में से कुछ लोग बेहतर जीवन और सुरक्षा की खोज में देश के अंदर और दूसरे देशों में प्रवासन के लिए बाध्य हो जाते हैं।″

प्रोफेसर ज़ुलु ने निष्कर्ष निकाला कि इन असामानताओं को दूर करने का एक उपाय यह हो सकता है कि सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से एक ऐसा सामाजिक समावेशन तंत्र बनाना जहाँ देश के सभी लोग विशेष कर समाज से बहिष्कृत लोग जीवन के बुनियादी संसाधनों का उपयोग करने में शामिल हो सकें।


(Margaret Sumita Minj)

बांद्रा में क्रूस का अवैध विध्वंस, कार्डिनल ग्रेसियस

In Church on May 3, 2017 at 3:38 pm

मुम्बई, बुधवार, 3 मई 2017 (उकान) : स्थानीय काथलिक समुदाय के दृढ़ विरोध के बावजूद मुंबई नगरपालिका अधिकारियों ने बांद्रा जिले में बाज़ार रोड के एक क्रूस को तोड़ दिया। मुम्बई महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ग्रासियस ओसवाल्ड ने एशिया न्यूस को बताया कि वे सरकार द्वारा की गई इस उत्तेजनात्मक कृत्य की निंदा करते हैं। ″यह सब वाकई खतरनाक है विध्वंस को प्राधिकृत करने वाले अधिकारी को इस तरह की अवैध कार्यवाही के लिए उत्तरदायी होना चाहिए।”

कार्डिनल ग्रेसियस की शिकायत है कि 100 साल से भी पुराना क्रूस “एक निजी संपत्ति की दीवार पर खड़ा था” यह किसी के लिए कोई व्यवधान नहीं था और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि सन् 1890 के लगभग जब मुम्बई में महामारी फैली था तो शहर के विभिन्न स्थानों में ख्रीस्तीयों द्वारा धार्मिक प्रतीक क्रॉस बनाया गया था। कार्डिनल ने कहा,” मुंबई में “क्रूस का एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है क्योंकि ख्रीस्तीयों द्वारा उन महामारियों से बचने के लिए और जो जीवित नहीं रहे, उनको याद दिलाने के लिए जगह-जगह पर क्रूस बनाया गया था।”

29 अप्रैल को क्रूस तोड़ा गया। यह ख्रीस्तीयों और उनके धार्मिक प्रतीकों के विध्वंस की श्रृंखला में नवीनतम है। फरवरी में कुवांरी माता मरियम की प्रतिमा का सिर तोड़ कर उसे बर्बाद कर दिया गया था। अप्रैल में क्रूसित येसु की प्रतिमा में जूते और चप्पल को बाँध कर उसे अपवित्र कर दिया गया था।

बाजार रोड पर हुए संघर्ष की शुरुआत सन् 2010 में ही हुई थी तब इसके खिलाफ मुंबई के उच्च न्यायालय में याचिका पेश की गई थी। ख्रीस्तीय अधिकारियों की शिकायत है कि इस मामले के प्रभारी आयुक्त शरद उघाडे द्वारा पूछे गये दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के बावजूद क्रूस को तोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी प्रमाणित किया था कि क्रूस एक ख्रीस्तीय के निजी भूमि में स्थित था  और निजी स्थानों में सभी को धार्मिक संरचनाओं की अनुमति है।

स्थानीय काथलिक नगर निगम के फैसले के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और वे इस फैसले को  ईश निन्दा अधिनियम के रूप में देखते हैं। उन्होंने एक नया अस्थायी क्रूस खड़ा किया है और इसके सामने एकत्र होकर प्रार्थना करते हैं।

महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता और धर्मप्रांतीय सप्ताहिक पत्रिका ″दी एक्जामिनर″ के निदेशक फादर अंतोनी चारंगाट ने कहा, “सरकार ने ख्रीस्तीय की अपनी निजी संपत्ति में प्रवेश करके और क्रॉस को तोड़ा। सरकार ने ख्रीस्तीय के निजी अधिकारों के नियमों का उल्लंघन किया है।”

कार्डिनल ग्रेसियस ने कहा, “यह विध्वंस न केवल हमारी धार्मिक भावना को चोट पहुँचाती है बल्कि अन्य धर्मों के विश्वासियों को भी चोट पहुँचाती है। इस तरह के कार्य हमारे शहर और हमारे देश के लिए ठीक नहीं है। ये सांप्रदायिक सद्भाव को बर्बाद करते हैं एवं सामाजिक और धार्मिक एकता को तोडने का कारण बनते हैं।″


(Margaret Sumita Minj)

श्री लंका के काथलिकों द्वारा दलदल जमीन में कचड़ा फेंकने पर विरोध प्रदर्शन

In Church on May 3, 2017 at 3:33 pm

कोलोम्बो, बुधवार, 3 मई 2017 (उकान) : श्री लंका के काथलिकों ने हाल ही में मुथुराजावेला दलदल में कचरा फेंकने के लिए दो विरोध अभियान का आयोजन किया। मुथुराजावेला देश का सबसे बड़ा दलदल जमीन है जो वनस्पति, जीव और पक्षियों की असंख्य प्रजातियों का पनाह देता है। काथलिकों ने कोलोम्बो से 30 किलोमीटर उत्तर पर स्थित पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर सरकारी अधिकारियों के साथ बातें की और सामूहिक प्रदर्शन का आयोजन किया।

बोपित्या स्थित संत निकोलस पल्ली के सहायक पल्ली पुरोहित फादर दिनुश ज्ञान ने कहा, ″लोग मुथुराजावेला दलदल जमीन में कचरा फेंकने के लिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह विभिन्न जीव-जन्तुओं की प्रजातियों का घर है और प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षेत्र के रूप में बाढ़ को नियंत्रित करता है।”

फादर ने कहा, ″मुथुराजावेला दलदल जमीन में कचरा फेंकने के विरोध में हमने 21 और 22 अप्रैल को दो प्रदर्शन किया। राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ चर्चा की। कचरे को रोकने के लिए हमने कोलोम्बो के नगरपालिका आयुक्त से भी बातें की। प्रदर्शन पर नियंत्रण रखने के लिए 150 से ज्यादा विशेष कार्य बल पुलिस आई और जबरदस्ती से दलदल भूमि में कचरा फेंका गया।″ फादर ज्ञान हैरान थे कि सरकारी अधिकारियों ने मुथुराजावेला दलदल भूमि में कचरे फेंकने की इजाजत क्यों दी जबकि यह देश और पर्यावरण के लिए इतना महत्वपूर्ण है। सन् 1996 में विशाल जैव विविधता के कारण इसे पशुविहार घोषित किया गया था। यह सबसे घनी आबादी वाले और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र पर स्थित है।

पवित्र परिवार की धर्मबहन रंगीका ने कहा कि दो पुरोहित, छह धर्मबहनें, एक बौद्ध भिक्षु और 1,000 से अधिक लोगों ने मुथुराजावेला दलदल की रक्षा के लिए प्रदर्शन किया। 14 अप्रैल को कोलेम्बो के निकट मीतोतामूला शहर में कचरे का एक विशाल टीला ढह गया जिसमें बहुत से घर क्षतिग्रस्त हो गये। 32 लोगों की मौत हो गई और 8 लोग लापता हैं। इसी के बाद से काथलिकों ने विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।


(Margaret Sumita Minj)

पंजाब में ख्रीस्तीय और मुस्लिम, हिंसा और दोस्ती के इशारों के बीच

In Church on May 3, 2017 at 3:31 pm

 

लाहौर, बुधवार, 3 मई 2017 (वीआर संदोक) : मोटरसाइकिल पर 20 से 25 वर्षीय इस्लामी युवाओं के एक सशस्त्र समूह ने हाल ही के दिनों में पाकिस्तानी पंजाब के कसूर जिले में भाई फिरू के एक ख्रीस्तीय गाँव पर हमला किया। सामूहिक कार्रवाई पिछले दिन हुई एक घटना का परिणाम थी : 19 वर्षीय अफाक मसीह, काम करते वापस घर लौट रहा था और कुछ युवा मुसलमानों उसे रोका और उससे बहस करने और मारने पीटने लगे। अगले दिन वे फिर लौटे और ख्रीस्तीय घरों पर पत्थर फेंकने लगे तथा पूरे समुदाय को धमकी दी।

ग्रामीणों ने थाने में शिकायत दर्ज की पर पुलिस हमलावरों को गिरफ्तार करने के लिए अनिच्छुक थी। पाकिस्तानी समाज में सबसे कमजोर वर्ग ख्रीस्तीय हैं और छोटे छोटे कारणों से बहुधा उनहें पाटा और उनपर हमला किया जाता है।

ख्रीस्तीय वकील मुश्ताक गिल ने फीदेस को बताया, ″यहाँ कानून प्रवर्तन की कमी है और अक्सर कुछ युवा लोग इस्लामी आतंकवादी समूहों के साथ संबंध रखते हैं जो उन्हें ईसाइयों के खिलाफ हिंसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

दूसरी ओर, काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अंतर धार्मिक वार्ता आयोग के काथलिक और मुस्लिम नेताओं और लोकधर्मियों के बीच दोस्ती और शांति को बढ़ावा देने का प्रयास जारी है।

एक कार्यक्रम के तहत काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष एवं लाहौर के महाधर्माध्यक्ष सेबास्टियन फ्राँसिस शाह मदरसा गये जहां उन्होंने शांति की निशानी एक जैतून का पेड़ लगाया। काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के कार्यकारी सचिव फादर फ्रांसिस नदीम ओएमएम कैप, भी समारोह में प्रस्तुत थे। दोनों ने जामिया मस्जिद-कुबरा इस्लामिक सेमिनरी के नेताओं के बधाई और धन्यवाद किया। फादर नदीम ने बताया कि जैतून का पेड़ लगाने का उद्देश्य शाँति की संस्कृति को बढ़ावा देना था। इस्लामी नेताओं ने इस प्रकार की गतिविधि को जारी रखने की इच्छा जाहिर की।


(Margaret Sumita Minj)

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