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बांद्रा में क्रूस का अवैध विध्वंस, कार्डिनल ग्रेसियस

In Church on May 3, 2017 at 3:38 pm

मुम्बई, बुधवार, 3 मई 2017 (उकान) : स्थानीय काथलिक समुदाय के दृढ़ विरोध के बावजूद मुंबई नगरपालिका अधिकारियों ने बांद्रा जिले में बाज़ार रोड के एक क्रूस को तोड़ दिया। मुम्बई महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ग्रासियस ओसवाल्ड ने एशिया न्यूस को बताया कि वे सरकार द्वारा की गई इस उत्तेजनात्मक कृत्य की निंदा करते हैं। ″यह सब वाकई खतरनाक है विध्वंस को प्राधिकृत करने वाले अधिकारी को इस तरह की अवैध कार्यवाही के लिए उत्तरदायी होना चाहिए।”

कार्डिनल ग्रेसियस की शिकायत है कि 100 साल से भी पुराना क्रूस “एक निजी संपत्ति की दीवार पर खड़ा था” यह किसी के लिए कोई व्यवधान नहीं था और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि सन् 1890 के लगभग जब मुम्बई में महामारी फैली था तो शहर के विभिन्न स्थानों में ख्रीस्तीयों द्वारा धार्मिक प्रतीक क्रॉस बनाया गया था। कार्डिनल ने कहा,” मुंबई में “क्रूस का एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है क्योंकि ख्रीस्तीयों द्वारा उन महामारियों से बचने के लिए और जो जीवित नहीं रहे, उनको याद दिलाने के लिए जगह-जगह पर क्रूस बनाया गया था।”

29 अप्रैल को क्रूस तोड़ा गया। यह ख्रीस्तीयों और उनके धार्मिक प्रतीकों के विध्वंस की श्रृंखला में नवीनतम है। फरवरी में कुवांरी माता मरियम की प्रतिमा का सिर तोड़ कर उसे बर्बाद कर दिया गया था। अप्रैल में क्रूसित येसु की प्रतिमा में जूते और चप्पल को बाँध कर उसे अपवित्र कर दिया गया था।

बाजार रोड पर हुए संघर्ष की शुरुआत सन् 2010 में ही हुई थी तब इसके खिलाफ मुंबई के उच्च न्यायालय में याचिका पेश की गई थी। ख्रीस्तीय अधिकारियों की शिकायत है कि इस मामले के प्रभारी आयुक्त शरद उघाडे द्वारा पूछे गये दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के बावजूद क्रूस को तोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी प्रमाणित किया था कि क्रूस एक ख्रीस्तीय के निजी भूमि में स्थित था  और निजी स्थानों में सभी को धार्मिक संरचनाओं की अनुमति है।

स्थानीय काथलिक नगर निगम के फैसले के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और वे इस फैसले को  ईश निन्दा अधिनियम के रूप में देखते हैं। उन्होंने एक नया अस्थायी क्रूस खड़ा किया है और इसके सामने एकत्र होकर प्रार्थना करते हैं।

महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता और धर्मप्रांतीय सप्ताहिक पत्रिका ″दी एक्जामिनर″ के निदेशक फादर अंतोनी चारंगाट ने कहा, “सरकार ने ख्रीस्तीय की अपनी निजी संपत्ति में प्रवेश करके और क्रॉस को तोड़ा। सरकार ने ख्रीस्तीय के निजी अधिकारों के नियमों का उल्लंघन किया है।”

कार्डिनल ग्रेसियस ने कहा, “यह विध्वंस न केवल हमारी धार्मिक भावना को चोट पहुँचाती है बल्कि अन्य धर्मों के विश्वासियों को भी चोट पहुँचाती है। इस तरह के कार्य हमारे शहर और हमारे देश के लिए ठीक नहीं है। ये सांप्रदायिक सद्भाव को बर्बाद करते हैं एवं सामाजिक और धार्मिक एकता को तोडने का कारण बनते हैं।″


(Margaret Sumita Minj)

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