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डॉनल्ड ट्रम्प मिलेंगे सन्त पापा फ्राँसिस से

In Church on May 5, 2017 at 3:00 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 5 मई 2017 (सेदोक): वाटिकन में 24 मई को संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प सन्त पापा फ्राँसिस से मुलाकात करेंगे।

गुरुवार को परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय ने एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर सूचना दी कि 24 मई को सन्त पापा फ्राँसिस से वैयक्तिक मुलाकात के बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन तथा वाटिकन के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गालाघार से भी औपचारिक बातचीत करेंगे।

वाशिंग्टन स्थित वाईट हाऊस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की पहली विदेश यात्रा है जिसके दौरान वे इटली के अलावा बैल्जियम, इस्राएल तथा साऊदी अरब का भी दौरा करेंगे।

उन्होंने बताया कि 25 मई को राष्ट्रपति ट्रम्प ब्रसल्स में नेटो की बैठक में भाग लेंगे तथा 26 मई को वे इटली के सिसली द्वीप में आयोजित जी-7 शीर्ष सम्मेलन में शरीक होंगे।


(Juliet Genevive Christopher)

महाधर्माध्यक्ष ऊरबानज़िक ने की परमाणु अस्त्रों से मुक्त विश्व की कामना

In Church on May 5, 2017 at 2:58 pm

विएना, शुक्रवार, 5 मई 2017 (सेदोक): ऑस्ट्रिया के विएना शहर में परमाणु अस्त्र अप्रसार सन्धि के पुनरावलोकन हेतु 2 से 12 मई तक आयोजित सम्मेलन में परमधर्मपीठ के शिष्ठमण्डल के अध्यक्ष वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष यानुस ऊरबानज़िक ने कहा कि परमधर्मपीठ अस्त्रों से मुक्त विश्व की कामना करती है तथा इसके लिये काम करने हेतु वह प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए महाधर्माध्यक्ष ऊरबानज़िक ने कहा कि इस सम्मेलन में परमधर्मपीठ की उपस्थिति का लक्ष्य “विश्व को परमाणु अस्त्रों से मुक्त बनाने के प्रयास में नैतिक योगदान देना है ताकि परमाणु अस्त्र अप्रसार सन्धि पूर्ण रूपेण लागू की जा सके तथा विश्व में इन हथियारों पर निषेध लगाया जा सके।”

उन्होंने कहा कि अपने सम्मानित पूर्ववर्तियों के नक्शेकदम पर चलते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने बारम्बार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह न केवल युद्ध, संघर्ष और संघर्ष के अंत की तलाश करे, बल्कि प्रभावशाली ढंग से शांति का आलिंगन उसके विकास का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि शांति के मूल्य को एक ‘सक्रिय सद्गुण’  रूप में मान्यता दी जानी चाहिये जिसमें प्रत्येक व्यक्ति और समाज का सहयोग शामिल हो।

इस बात की ओर उन्होंने ध्यान आकर्षित कराया कि परमाणु अस्त्र सुरक्षा का भ्रम उत्पन्न करते हैं और इसी प्रकार सत्ता के सन्तुलन द्वारा नकारात्मक शांति पाने के प्रयास भी भ्राँतियाँ उत्पन्न करते हैं।

महाधर्माध्यक्ष ऊरबानज़िक ने कहा कि राष्ट्रों को यह अधिकार है और यह उनका दायित्व भी है कि वे अपनी सुरक्षा का प्रबन्ध करें जो सामूहिक सुरक्षा, जनकल्याण एवं शांति से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।

इस सन्दर्भ में उन्होंने कहा, “न्याय, अखण्ड मानव विकास, मूलभूत मानवाधिकार के सम्मान, सृष्टि और पर्यावरण की सुरक्षा, सार्वजनिक जीवन में सबकी भागीदारी, लोगों के बीच परस्पर विश्वास तथा शांति, सम्वाद एवं एकात्मता को प्रोत्साहन देनेवाली संस्थाओं को समर्थन देकर ही शांति का निर्माण किया जा सकता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

म्यानमार की काथलिक कलीसिया परमधर्मपीठ के साथ सम्बन्धों से सन्तुष्ट

In Church on May 5, 2017 at 2:57 pm

म्यानमार, शुक्रवार, 5 मई 2017 (सेदोक): म्यानमार के काथलिक धर्माध्यक्षों ने म्यानमार एवं परमधर्मपीठ के बीच स्थापित सम्बन्धों पर सन्तोष व्यक्त किया है। बर्मा के विदेश मंत्री की परामर्शदाता श्रीमती आऊँग सान सूकी की 04 मई को सन्त पापा फ्राँसिस के साथ मुलाकात तथा दोनों राष्ट्रों के बीच कूटनैतिक सम्बन्धों की स्थापना की घोषणा के बाद काथलिक धर्माध्यक्षों ने इस वर्ष को “शांति का वर्ष” घोषित किया।

वाटिकन की सुसमाचार प्रचार सम्बन्धी परिषद की प्रेस एजेन्सी फीदेस समाचार से बातचीत में म्यानमार के धर्माध्यक्षों की ओर से पाथेन धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष जॉन सेन हेजी ने कहा, “हम इस निर्णय, इस रचनात्मक विकास एवं सकारात्मक परिवर्तन से प्रसन्न हैं। लोगों में विश्वास जागृत हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिये कि इस समय सत्तारूढ़ सरकार केवल एक साल से प्रभावी है और इस प्रकार के जटिल मुद्दों के सामाधान में कई वर्षों का समय लग सकता था। धर्माध्यक्ष ने श्रीमती सूकी के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया जो आरम्भ ही से न्याय एवं मानवाधिकारों के सम्मान की पैरवी करती रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को विश्वास है कि श्रीमती सूकी जनकल्याण एवं विकास के लिये काम करती रहेंगी।

म्यानमार के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियों को गिनाते हुए धर्माध्यक्ष हेजी ने कहा कि सर्वाधिक गम्भीर चुनौती अल्पसंख्यक जातियों के साथ बने तनावों एवं संघर्षों को समाप्त करना है।

ग़ौरतलब है कि सैन्य दलों एवं विभिन्न अल्पसंख्यक जातियों के विद्रोहियों के बीच जंग जारी है। 24 मई को याँगून में एक राष्ट्रीय बैठक बुलाई गई है ताकि युद्ध विराम पर हस्ताक्षर किये जा सकें।

धर्माध्यक्ष हेजी ने आशा व्यक्त की विभिन्न जातियों के प्रतिनिधि दल शांति के पक्ष में इस युद्ध विराम पर हस्ताक्षर करेंगे तथा हथियारों का परित्याग कर इसका अनुपालन करेंगे। उन्होंने इस तथ्य पर बल दिया कि म्यानमार की समस्त जातियाँ एवं यहाँ के सभी धर्मों के लोग शांति की अभिलाषा करते हैं।

रोहिंगिया मुसलमानों पर बोलते हुए धर्माध्यक्ष  ने कहा कि काथलिक कलीसिया उनके प्रति पूर्ण एकात्मता प्रदर्शित करती है तथा उनके दुःख में उनके समीप है।


(Juliet Genevive Christopher)

भारत सरकार पर आदिवासी अस्मिता मिटा देने का लगा आरोप

In Church on May 5, 2017 at 2:55 pm

 

नई दिल्ली, शुक्रवार, 5 मई 2017 (ऊका समाचार): झारखण्ड में सरकार द्वारा एक कॉलेज के नाम को एक हिन्दू राष्ट्रवादी के नाम में परिवर्तित करने के बाद से राज्य में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। कलीसियाई एवं मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्वदेशी जनजातियों की पहचान को ख़त्म करने के लिये सरकार ने ऐसा किया है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आदिवासी प्रेरिताई सम्बन्धी समिति के अध्यक्ष सिमडेगा के काथलिक धर्माध्यक्ष विन्सेन्ट बरवा ने ऊका समाचार से कहा, “सरकार का कदम पूरी तरह से अस्वीकार्य है, हम इसका खण्डन करते हैं।”

17 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी समर्थक झारखण्ड सरकार ने राज्य के विख्यात राँची कॉलेज का नाम बदल कर इसे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम दे दिया था। इसी के बाद से विरोध प्रदर्शन शुरु हो गये हैं।

श्री मुखर्जी ने सन् 1951 ई. में राष्ट्रवादी भारतीय जन संघ की स्थापना की थी। संघ एक हिन्दू राष्ट्रवादी आन्दोलन है जिसे भाजपा का पूर्वाद्ध माना जाता है।

केन्द्र तथा उत्तरप्रदेश के कई राज्यों में भाजपा के सत्ता में जाने के बाद से हिन्दू चरमपंथी दल मज़बूत हुए हैं तथा भारत में विद्यमान विविध संस्कृतियों की उपेक्षा करते हुए वे भारत को एक  हिन्दू प्रभुता वाला देश बनाने का प्रयास करते रहे हैं।

धर्माध्यक्ष बरवा ने कहा कि भारत के अन्य राज्यों के लोग सरकार के इस फैसले के दुष्परिणामों को स्पष्ट रूप से न देख पायें किन्तु इससे आदिवासी समुदायों के जनजीवन और उनकी पहचान को भारी क्षति होगी।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड की धरती के लिये कई आदिवासी नेताओं ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये हैं किन्तु सरकार ने उनके नाम पर किसी कॉलेज का नाम नहीं बदला है।

विगत दो सप्ताहों से आदिवासी छात्रों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं। छात्रों ने झारखण्ड सरकार पर हिन्दू चरमपंथी विचारधाराओं को लोगों पर थोपने का भी आरोप लगाया है।


(Juliet Genevive Christopher)

कलीसिया रास्ते पर, आनन्द के साथ, लोगों की परेशानियों को सुनते हुए

In Church on May 5, 2017 at 8:45 am

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 4 मई 2017 (वीआर सेदोक): कलीसिया को हमेशा चलते हुए, लोगों को सुनते और आनन्द के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

प्रवचन में उन्होंने प्रेरित चरित से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, ″कलीसिया के सम्पूर्ण इतिहास का सारांश प्रेरित चरित के प्रथम आठ अध्यायों में निहित है। धर्मशिक्षा, बपतिस्मा, मन-परिवर्तन, चमत्कार, अत्याचार, आनन्द और उन लोगों का पाप जिन्होंने अपने व्यापार के लिए कलीसिया को माध्यम बनाया। अपने को कलीसिया के शुभचिंतक बताने वाले अनानियस और सोफिया ने अंततः कलीसिया को धोखा दिया।″

संत पापा ने अपने प्रवचन में इस बात पर प्रकाश डाला कि येसु ने कलीसिया के आरम्भ से ही शिष्यों का साथ दिया। अपनी उपस्थिति को उन्होंने चमत्कार द्वारा प्रमाणित किया तथा विकट परिस्थिति में भी उन्हें नहीं त्यागा।

संत पापा ने प्रथम पाठ के तीन शब्दों पर चिंतन करते हुए निमंत्रण दिया कि हम उस पाठ को पुनः पढ़ें। आत्मा ने फिलीप को आदेश दिया, ″उठिए और जाइये।″ संत पापा ने कहा कि यह सुसमाचार प्रचार करने का चिन्ह है। कलीसिया की बुलाहट है सुसमाचार का प्रचार करना।

उन्होंने कहा कि सुसमाचार प्रचार करने हेतु उठना और जाना है। आत्मा यह नहीं कहता कि अपने घरों में शांत बैठे रहें, जी नहीं, कलीसिया जो प्रभु के प्रति हमेशा विश्वस्त रहना चाहती है उसे उठना एवं चलना होगा। उन्होंने कहा कि जो कलीसिया नहीं उठती और नहीं चलती है वह बीमार हो जाती है। वह कई तरह के मानसिक एवं आध्यात्मिक घाव से भर जाती है। बिना क्षितिज के अपनी छोटी दुनिया में बंद हो जाती है। अतः सुसमाचार प्रचार हेतु कलीसिया को सक्रिय होने की जरूरत है।

आत्मा ने दूसरी बार फिलीप से कहा, ″आगे बढ़िये और रथ के साथ चलिए।″ संत पापा ने रथ पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि उस रथ पर इथोपिया की महारानी का उच्चाधिकारी तथा प्रधान कोषाध्यक्ष सवार था जो येरूसालेम में ईश्वर की पूजा करने आया था। जब वह यात्रा कर रहा था वह नबी इसायस का ग्रंथ पढ़ रहा था। संत पापा ने कोषाध्यक्ष के मन-परिवर्तन को महान चमत्कार कहा। आत्मा फिलिप को निर्देश देता है कि वह उसके पास जाये। संत पापा ने कहा कि कलीसिया का कार्य है प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की जिज्ञासा को सुन पाना।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों के दिलों में चिंता और बेचैनी है जिसे हमें सुनने का प्रयास करना चाहिए।″ आत्मा नहीं कहती कि जाओ और धर्मातरण करो किन्तु जाओ और सुनो।

संत पापा ने कहा कि सुनना दूसरा चरण है। सुनने की क्षमता कि लोग कैसा अनुभव करते हैं, उन लोगों का हृदय कैसा है, वे क्या सोचते हैं आदि आदि। यदि वे गलत सोचते हैं तो उसे भी सुनना और समझने का प्रयास करना कि बेचैनी किस बात में है।

लोगों के उलझन को समझना कलीसिया का महत्वपूर्ण कार्य है। संत पापा ने कहा कि खोजा आशा से भर गया क्योंकि फिलीप उसके पास गया, उसे सुना एवं समझाया।

जब खोजा सुन रहा था ईश्वर उसके अंदर क्रियाशील थे। इस तरह उसने महसूस किया कि नबी इसायस की भविष्यवाणी येसु में पूर्ण हुई है। येसु पर उसका विश्वास इतना बढ़ गया कि वह बपतिस्मा लेने के लिए भी तैयार हो गया क्योंकि आत्मा ने उसके हृदय के अंदर कार्य किया। संत पापा ने अह्वान किया कि हम पवित्र आत्मा को लोगों के हृदयों में कार्य करने दें। खोजा आनन्द से भर कर अपनी राह आगे बढ़ा जबकि आत्मा ने फिलीप को दूसरी ओर ले गया।

संत पापा के चिंतन का तीसरा शब्द है आनन्द। उन्होंने विश्वासियों से कहा कि कलीसिया उठती, सुनती तथा पवित्र आत्मा की कृपा से बोलने हेतु शब्द प्राप्त करती है।

उन्होंने कहा, ″माता कलीसिया इसी तरह बहुत सारे बच्चों को जन्म देती है। यह धर्मांतरण नहीं है किन्तु आज्ञापालन का साक्ष्य है। आज कलीसिया हमें प्रोत्साहन दे रही है कि हम आनन्द मनायें, विपरीत परिस्थिति में भी क्योंकि स्तेफन के पत्थरवाह के बाद अत्याचार शुरू हुआ और ख्रीस्तीय सभी ओर बिखर गये किन्तु उनका बिखरना भी सकारात्मक फल लाया वे बीज की तरह विभिन्न जगहों में गये और सुसमाचार का प्रचार किया। प्रभु हम सभी को कृपा दे कि हम कलीसिया में लोगों के साथ रहकर उन्हें सुनते हुए आनन्द के साथ जी सकें।


(Usha Tirkey)

सभी लोगों के बीच सुसमाचार प्रचार हेतु संचार माध्यमों में सुधार आवश्यक

In Church on May 5, 2017 at 8:43 am

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 4 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 4 मई को वाटिकन के सामान्य लोकसभा परिषद भवन में, संचार सचिवालय की प्रथम आमसभा के 40 प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा कहा कि वे सुधार तथा बदलाव की चुनौतियों से न घबरायें क्योंकि यह सुसमाचार प्रचार में मददगार होगा।

उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा कि सभा में एक ऐसी विषय पर विचार-विमर्श की जा रही है जो मेरे हृदय में है और मैंने कई बार इस विषय पर चर्चा की है। यह अध्ययन सभी लोगों के लिए एवं विभिन्न संस्कृतियों के बीच करुणा के सुसमाचार प्रचार हेतु नई प्रकार की तकनीकी एवं उपकरणों का है जो संचार के माध्यम से नए डिजिटल सांस्कृतिक संदर्भ को हमारे समकालीनों के लिए उपलब्ध कराता है।

संत पापा ने कहा कि यह परिषद जो 27 जून का दो साल पूरा करेगी परमधर्मपीठ में संचार प्रणाली पर पुनः विचार करते हुए द्रुत गति से एकीकरण एवं एकात्मक प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वाटिकन में नई संचार प्रणाली, कलीसिया की प्रेरिताई की आवश्यकताओं को बेहतर उत्तर दे पायेगी।

उन्होंने नये विभाग की रचना करते समय प्रकाशित अपने प्रेरितिक प्रबोधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुधार का अर्थ विभिन्न मंचों का समन्वय या विलय नहीं है किन्तु एक ऐसा एकीकृत प्रबंधन स्थापित करना है जो कलीसिया की प्रेरिताई की आवश्यकता को बेहतर जवाब दे सके।

संत पापा ने पुराने उपकरणों की याद करते हुए कहा कि विगत वर्षों में हर संचार माध्यम का अपना चैनल होता था, जैसे लेखन, दूरदर्शन तथा ध्वनि एवं संगीत। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रकार के संचार माध्यम आज एकल कोड में सम्माहित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस परिपेक्ष में वाटिकन समाचार पत्र को अपने पाठकों तक पहुँचने हेतु नये एवं अलग तरीक़ों की खोज करनी होगी।

उन्होंने वाटिकन रेडियो के बारे भी कहा कि यह कई वर्षों से द्वार के चिन्ह के रूप में रह गया है जिसे आधुनिक उपकरणों को अपनाते हुए तथा समकालीन आवश्यकताओं को समझते हुए अब उसपर पुनः गौर किये जाने की आवश्यकता है।

संत पापा ने रेडियो को लेकर विभाग के उन प्रयासों की सराहना की जो वह कम तकनीकी उपलब्धता वाले देशों के लिए कर रही हैं।″ उन्होंने सचेत किया कि नई उपकरणों को लागू करने क्रम में पुराने उपकरणों को दरकिनार न किया जाए जिससे कि पुरानी चीजों द्वारा भी भविष्य में आगे बढ़ने का साहस एवं प्रेरणा मिल सके।

उन्होंने कहा, ″इतिहास निश्चय ही मूल्यवान अनुभवों की धरोहर है जिनकी रक्षा की जानी चाहिए तथा भविष्य में आगे बढ़ने हेतु प्रेरणा के रूप में लिया जाना चाहिए। अन्यथा यह मात्र संग्रहालय बन कर रह जायेगा। जिसको देखना रूचिकर एवं सुन्दर जरूर होगा किन्तु यह यात्रा को आगे बढ़ाने हेतु बल और साहस प्रदान नहीं कर पायेगा।″

संत पापा ने विभाग को प्रोत्साहन दिया कि वे सुधार के इस कार्य की सफलता हेतु एक-दूसरे को सहयोग दें एवं साहस पूर्वक आगे बढ़ें ताकि समय की मांग, गरीबी और परेशानी को भी ध्यान में रखते हुए सभी लोगों तक सुसमाचार पहुँचाया जा सके, मानव संसाधनों को मूल्य दिया जा सके तथा स्थानीय कलीसियाओं को मदद मिल सके।

संत पापा ने कहा कि हम महिमामय भूत पर आसक्त रहने के प्रलोभन में न पड़ें बल्कि संचार की चुनौतियों का बेहतर जवाब देने हेतु दल के रूप में नये संचार माध्यमों के कारण उठने वाली चुनौतियों का सामना करें। संत पापा ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस कार्य को पूरा करने हेतु भाईचारा पूर्ण सहयोग करें।


(Usha Tirkey)

धन्य घोषणा हेतु संत पापा ने प्रस्तावित आज्ञप्तियों को दिया अनुमोदन

In Church on May 5, 2017 at 8:39 am

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 4 मई 2017 (वीआर सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार, चार मई को कार्डिनल आन्जेलो आमातो के नेतृत्व में परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद द्वारा धन्य घोषणा हेतु प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन दे दिया है।

उन्होंने निम्नलिखित प्रभु सेवकों के माध्यम से सम्पन्न चमत्कारों को स्वीकार कर, उनकी धन्य घोषणा को अनुमोदन दिया।

प्रभु सेवक प्राँचेस्को सोलानो कासे, कपुचिन धर्मसमाज के पुरोहित। उनका जन्म 25 नवम्बर 1870 को तथा मृत्यु 31 जुलाई 1957 को हुई।

प्रभु सेविका मेरी कनसेप्शन, निष्कलंक मरियम की पुत्रियों के धर्मसंघ की संस्थापिका। उनका जन्म 10 जून 1789 को तथा मृत्यु 10 जनवरी 1828 को हुई।

प्रभु सेविका कियारा फे, गरीब बालक येसु की धर्मबहनों के धर्मसंघ की संस्थापिका। जन्म 11 अप्रील 1815 तथा मृत्यु 8 मई 1894 को।

प्रभु सेविका कैथरिन ऑफ मेरी, येसु के पवित्र हृदय की सेविका धर्मबहनों के धर्मसंघ की संस्थापिका। जन्म 27 नवम्बर 1823 तथा मृत्यु 5 अप्रैल 1896 को हुई।

प्रभु सेवक लुचियानो बोटोवासोआ, संत फ्राँसिस के तीसरे ऑर्डर के सदस्य, एक पिता एवं लोकधर्मी जो मडागास्कर में विश्वास के कारण मार डाले गये।

प्रभु सेवक एलाइजा, जो एक कार्डिनल तथा फ्लोरेंस के महाधर्माध्यक्ष थे। जन्म 14 मई 1872 तथा मृत्यु 22 दिसम्बर 1961 को।

प्रभु सेवक फ्राँसिस जेवियर गुयेन वान थाउन जो एक कार्डिनल थे। जन्म 17 अप्रैल 1928 तथा मृत्यु 16 सितम्बर 2002 को।

प्रभु सेविका जेवन्ना मेनेघीनी जो मरियम के पवित्र हृदय की ओर्सोलाईन धर्मबहनों की संस्थापिका थीं। जन्म 23 मई 1868 तथा मृत्यु 2 मार्च 1918 को।

प्रभु सेविका विन्चेंसा कुसमानो जो गरीब सेविकाएँ धर्मसमाज की प्रथम परमाधिकारिणी थी। जन्म 6 जनवरी 1826 तथा मृत्यु 2 फरवरी 1894 को।

प्रभु सेवक अलेक्जेन्डर नोट्टेगर, एक लोक धर्मी, परिवार का एक पिता जिन्होंने रेजिना पाचिस समुदाय का निर्माण किया। जन्म 30 अक्टूबर 1943 तथा मृत्यु 19 सितम्बर 1986 को।

प्रभु सेवक एडविग कारबोनी, एक लोक धर्मी। जन्म  2 मई 1880 तथा मृत्यु 17 फरवरी 1952 को।

प्रभु सेवक मेरी ग्वादालुपे तथा फेरनांडिज जो लोक धर्मी थे। जन्म 12 दिसम्बर 1916 तथा मृत्यु 16 जुलाई 1975 को।


(Usha Tirkey)

वाटिकन एवं म्यानमार के बीच राजनायिक संबंध की स्थापना

In Church on May 5, 2017 at 8:37 am

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 4 मई 2017 (वीआर सेदोक): परमधर्मपीठ एवं म्यानमार ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उन्होंने आपसी मित्रता के संबंध को प्रोत्साहन देने का निश्चय किया है जिसके तहत परमधर्मपीठ की ओर से प्रेरितिक राजदूत एवं म्यानमार की ओर से राजदूत के स्तर की कूटनीतिक संबंध की स्थापना पर सहमति जतायी गयी।

बृहस्पतिवार को यह घोषणा संत पापा फ्राँसिस का वाटिकन में म्यानमार की विदेश मंत्री औंग सान सू क्वी के साथ मुलाकात की पृष्टभूमि पर की गयी है।


(Usha Tirkey)

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