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रोम स्थित परमधर्मपीठीय पुर्तगाली कॉलेज समुदाय को संत पापा फ्राँसिस का संदेश

In Church on May 8, 2017 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 8 मई 2017 (वीआर सेदोक) :संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 8 मई को वाटिकन के कार्डिनल मंडल भवन में रोम के परमधर्मपीठीय पुर्तगाली कॉलेज समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

संत पापा ने कॉलेज के प्राचार्य फादर कालदास और कॉलेज में कार्यरत धर्मबहनों और उनके सहयोगियों का अभिवादन करते हुए उनकी उपस्थिति  के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि जल्द ही वे पुर्तगाल की प्रेरितिक यात्रा करेंगे और फातिमा का माता मरिया के तीर्थस्थल का दर्शन करेंगे जहाँ 100 वर्ष पहले माता मरियम ने तीन चरवाहे बच्चों को दर्शन दिया था। माता मरिया के साथ मुलाकात उनके  लिए कृपादायनी अनुभव था जिसकी वजह से उन्होंने जीवन भर येसु से बेइतहां प्रेम किया। एक अच्छी शिक्षिका के समान माता मरियम ने उन्हों पवित्र त्रित्वमय ईश्वर के प्रेम को समझाया।

संत पापा ने कहा, ″आपका रोम आने के उद्देश्य में येसु के ज्ञान और प्रेम को भी जोड़ लें। जैसे संत प्रेरित पौलुस कहते हैं के वे अपने आप के पूर्णरुप से देते हुए प्रभु के बारे जानने और अनुभव करने का प्रयास करते हैं। संत पापा ने पुरोहितों को इंगित करते हुए कहा, ″आप ठोस रुप से येसु ख्रीस्त, पुरोहिताई, लोक धर्मियों की देखभाल और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ने के लिए यहाँ आये हुए हैं। आप पुरोहिताई मार्ग में अपने समर्पण में आगे बढ़ते रहें। माता मरिया की छत्र छाया में येसु के प्रेम और भाईचारे में दिनोदिन बढ़ते जायें।

संत पापा ने कहा,″मुझे फादर कालदास से यह जानकर खुशी हुई कि सन् 1929 से कॉलेज के प्रार्थनालय में फातिमा का माता मरिया की प्रतिमा है जो उस प्रार्थनालय की वेदी पर आने वालों पर माता मरिया की स्नेहमयी नज़र रहती है और वे अपने बेटे से उनके लिए प्रार्थना करती हैं। आप भी माता मरिया की नजरों में हैं।″  जैसा कि आपका कॉलेज येसु के पवित्र हृदय को समर्पित है येसु के साथ मजबूत संबंध बनाये रखने हेतु माता मरियम के पास जायें। ईश्वर ने अपनी दीन दासी पर कृपा दृष्टि की है उनकी मध्यस्ता द्वारा हमें भी कृपा प्राप्त होगी। (लूक,1:48)

माता मरिया के साथ हमारा संबंध, कलीसिया के साथ अच्छा संबंध बनाने को लिए मदद करता है। दोनों ही माताएँ हैं। इसके संबंध में संत इसहाक ने इस प्रकार टिप्पणी की थी। मरिया के बारे में हम जो बातें कहते हैं वो सब हम कलीसिया के लिए भी कह सकते हैं और हमारी आत्मा के लिए भी कह सकते हैं। तीनों महिलाएं हैं, तीनों माताएँ हैं और तीनों जन्म देती हैं। इसलिए माता मरियम के साथ संबंध बनाये रखना बहुत जरुरी है। एक पुरोहित जो दुःख या कठिनाई की घड़ी में माता मरियम को भूल जाता है, इसका अर्थ है कि उसे किसी चीज की कमी है जैसे कि वह अनाथ है। साधारणतः दुःख के समय एक बच्चा हमेशा अपनी माँ के पास जाता है उसे ढूढ़ता है। (स्तोत्र, 131:2)

अंत में संत पापा ने ईश सेविका लुसिया, धन्य फ्राँसिस और जसिंता की मध्यस्ता से प्रार्थना करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, ″ईश्वर का वचन हमें बच्चों की भाँति माँ की गोद में जाने के लिए प्रेरित करे।″


(Margaret Sumita Minj)

दैनिक जीवन में शांति प्रदान करने वाले येसु मसीह, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 8, 2017 at 3:21 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 8 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 8 मई को ट्वीट प्रेषित कर विश्व के विश्वासियों को शांति हेतु प्रार्थना करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने संदेश में लिखा,″येसु ख्रीस्त जिन्होंने पाप और मृत्यु के अंधकार से विजय पायी है, हमारे दैनिक जीवन में शांति प्रदान करें।″

संत पापा फ्राँसिस ने सात मई, पास्का के चौथे रविवार को जो ‘भला गड़ेरिया रविवार’ से जाना जाता है और इस दिन पवित्र बुलाहट के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है, अपने ट्वीट संदेश में लिखा, ″आइए, हम येसु के कार्यों और वचनों के द्वारा अपने आप को चुनौती दें, उनके प्यार में खुशी के साथ जीवन बिताने हेतु उनके बुलावे को स्वीकार करें।″


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने दस नये पुरोहितों का अभिषेक किया

In Church on May 8, 2017 at 3:20 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 8 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने सात मई, पास्का के चौथे रविवार को, संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रातःकालीन यूखरीस्तीय समारोह के दौरान दस नये पुरोहितों का अभिषेक किया। यह रविवार ‘भला गड़ेरिया रविवार’ से जाना जाता है और इस दिन पवित्र बुलाहट के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

संत पापा ने रोमन अनुष्ठान के आधार पर पुरोहितों के अभिषेक हेतु तैयार तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए  प्रवचन में कहा कि पुरोहिताई सामान्य अर्थों में “पेशा या व्यवसाय” नहीं है और इसे कलीसिया के अंदर तरक्की के मार्ग के रूप में नहीं लेना चाहिए। इन पुरोहितों को प्रभु येसु ने पुरोहिताई के लिए चुना है ताकि वे अपनी सेवा दे सकें।

संत पापा ने उनसे कहा,″जब आप उपदेश देते हैं तो आपका उपदेश सैधांतिक और बहुत विस्तार से नहीं, पर साधारण होनी चाहिए जो लोगों के दिलों में प्रवेश करे।″

पुरोहित जिसने ईशशास्त्र का गहन अध्ययन किया है और एक, दो, तीन या चार उन्नत डिग्रियाँ हासिल की है पर मसीह के क्रूस को लेकर चलना नहीं सीखा हो तो वे सारी डिग्रियाँ बेकार हैं। वह एक अच्छा विद्यामूलक, एक अच्छा प्रोफेसर होगा, लेकिन एक अच्छा पुरोहित नहीं होगा। ”

संत पापा ने पापस्वीकार संस्कार देने के संदर्भ में नये पुरोहितों से कहा, “मैं येसु मसीह और कलीसिया के नाम पर आपसे हमेशा दयालु बने रहने का आग्रह करता हूँ । लोकधर्मियों को इतना भारी उत्तरदायिस्व न सौंपे जिसके बोझ को वे ढो ना कर सकें और ना ही आप अपने उपर भारी बोझ लें। येसु ने फरीसियों को इस बात से खंडन किया और उन्हें ढोंगी कहा।”

संत पापा ने सभी नये पुरोहितों को दया के ठोस कार्य के रुप में बीमारों को देखने जाने को कहा। बहुत से कामों में से एक, जो शायद आपको उतना अच्छा ना लगे, कुछ के लिए यह दर्दनाक हो सकता है, आप सभी बीमारों को देखने जायें। इसे लोकधर्मी और उपयाजक लोग भी कर सकते हैं। याद रखें कि उन्हें स्पर्श करना ना भूलें। येसु ख्रीस्त बीमारों में दुःख सहते हैं। बीमारों से मिलने का कार्य आपको पवित्र करता है और आपको मसीह के करीब लाता है।”

संत पापा ने आनंद की अपील करते हुए अपने प्रवचन के अंत में कहा, ″आप हमेशा खुश रहिए कभी दुःखी नहीं, यहाँ तक कि पीड़ा और गलतफ़हमी के समय भी मसीह की सेवा आनंदपूर्वक करें। भले चरवाहे मसीह को आप अपना आदर्श मानते हुए उनका अनुसरण करें। वे सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने आये आये थे। कृपया आप मालिक ना बनें और ना ही राजपुरोहित परंतु रखवाले बनें, ईश्वर की भेड़ों के चरवाहे बनें।″


(Margaret Sumita Minj)

दुनिया में युद्ध है पर अच्छी चीजें भी मौजूद हैं, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 8, 2017 at 3:19 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 8 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 6 मई को वाटिकन के संत पापा पौल छटे के सभागार में शांति और मानवाधिकार के लिए स्थानीय सरकारों के राष्ट्रीय समन्वय के छात्रों के साथ मुलाकात की। वहाँ उपस्थित विद्यार्थियों में से 5 विद्यार्थियों ने आधुनिक दुनिया के संकट और प्रतिक्रिया के बारे में पूछा। संत पापा ने कहा, “विनाश की संस्कृति” पूरी दुनिया में फैल गई है हालांकि दुनिया में अच्छाई भी है पर अक्सर किसी का ध्यान इनपर नहीं जाता है।

दुनियां आज भी भले लोग और अच्छी चीजें मौजूद हैं, “लेकिन दुनिया में युद्ध है,”…और बम अस्पतालों और स्कूलों में विस्फोट होते हैं जहाँ बीमार लोग हैं, स्कूलों में बच्चे हैं। वे बम गिराते हैं उनके लिए कोई फर्क नहीं पड़ता है।

संत पापा ने 13 अप्रैल की घटना की याद दिलाते हैं जब संयुक्त राज्य ने अफगनिस्तान के आतंकवादियों को निशाना लगाते हुए सबसे बड़े बम फेंका था।  उस बड़े बम का उपनाम “सभी बमों की मां”, यह संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में से एक है और अप्रैल से पहले कभी हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया गया था।

संत पापा ने कहा, माता जीवन देती है। इस संदर्भ में जब “माँ” शब्द का प्रयोग किया जाता है यह बमों की माँ तो विनाश करती है। यह सच है कि हम युद्ध में जी रहे हैं

मरिया द्वारा पूछे जाने पर कि दुनिया में कई आधुनिक संकट हैं पर प्यार करना सीखना इतना मुश्किल क्यों है? ”

इसके प्रत्युत्तर में संत पापा ने कहा कि ईश्वर ने जब दुनिया को बनाया तो उन्होंने इसे फलने फूलने और आगे बढ़ने के लिए बनाया था। लेकिन एक निश्चित क्षण पर, “विनाश की संस्कृति शुरू हुई।”

यह विनाश की संस्कृति प्रारंभ में अपने भाई हाबिल के प्रति काईन की ईर्ष्या से शुरु हुई। उसने अपने भाई को मार डाला। आज भी ईर्ष्या और अत्याचार जारी है।

आज भी युद्ध और आप्रवास के कारण बहुत से बच्चे, महिलाएँ और पुरुषों को दुःख सहना पड़ रहा है और बहुतों की मौत हो गई है। कुछ लोग अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का शोषण करते हैं।

उन्होंने कहा, ″पहले हम फोटो या समाचार पत्रों में विनाश की झलक देखा करते थे पर आज टीवी पर घटना को घटते हुए देखते हैं।  आज टीवी में अच्छी चीजें नहीं पर केवल नकारात्मक चीजें हैं जो समाचार बनाते हैं।″

संत पापा ने कहा कि  दुनिया में अच्छी चीजें भी हो रही हैं “कई लोग हैं जो दूसरों के लिए अपना जीवन देते हैं, जो दूसरों के साथ समय बिताते हैं, जो दूसरों के लिए अच्छा करने की तलाश करते हैं। संत पापा ने 2016 में सेंट्रल अफ्रीका की प्रेरितिक यात्रा के दौरान एक 84 वर्षीय मिश्नरी धर्मबहन से मुलाकात की जो 24 वर्ष की उम्र से ही सेवा कार्य में समर्पित है। पर इसे हम नहीं जानते हैं। इसे टीवी में नहीं देखते हैं। ”

हमें इन नकारात्मक और भयानक चीजों की निंदा भी करनी चाहिए, ताकि दुनिया उन लोगों को देखे जो दूसरों की सहायता करते हैं दूसरों के लिए प्रेरणा हैं पर अभी छिपे हुए हैं।


(Margaret Sumita Minj)

झारखंड सरकार पर आदिवासी पहचान पर हमला करने का आरोप लगा

In Church on May 8, 2017 at 3:16 pm

 

नई दिल्ली, सोमवार, 8 मई 2017 (ऊका समाचार) : भारत के झारखण्ड राज्य में सरकार द्वारा एक कॉलेज के नाम को एक हिन्दू राष्ट्रवादी के नाम में परिवर्तित करने के बाद से राज्य में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। कलीसिया एवं मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं ने आरोप लगाया है कि आदिवासियों की पहचान को ख़त्म करने के लिये सरकार ने ऐसा किया है।

17 अप्रैल को झारखण्ड सरकार ने राज्य के विख्यात राँची कॉलेज का नाम बदल कर इसे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम दे दिया था। इसी के बाद से विरोध प्रदर्शन शुरु हो गये हैं।

डॉक्टर मुखर्जी ने सन् 1951 ई. में राष्ट्रवादी भारतीय जन संघ की स्थापना की थी। संघ एक हिन्दू राष्ट्रवादी आन्दोलन है जिसे भाजपा का पूर्वाद्ध माना जाता है।

नई दिल्ली में केन्द्रीय सरकार तथा कई राज्यों में भाजपा के सत्ता में जाने के बाद से हिन्दू चरमपंथी दल भारतीय आदिवासियों और दलितों की उपेक्षा करते आ रहे हैं। वे भारत को एक हिन्दू प्रभुता वाला देश बनाने का जी जान से प्रयास कर रहे हैं।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आदिवासी प्रेरिताई संबंधी समिति के अध्यक्ष एवं सिमडेगा धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष विन्सेन्ट बरवा ने ऊका समाचार से कहा, “सरकार का कदम पूरी तरह से अस्वीकार्य है, हम इसका विरोध करते हैं।”

धर्माध्यक्ष बरवा जो स्वयं एक आदिवासी हैं और उरांव जाति से आते हैं, ने कहा, ″बाहर के लोग आदिवासी समुदायों की पहचान के विरुद्ध लिये गये राज्य सरकार के फैसले और परिणामों के असर को पूरी तरह समझ नहीं सकते हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्र में सरकार ने कई आदिवासी नायकों में से एक के नाम पर कॉलेज का नाम बदलने पर विचार भी नहीं किया, जिन्होंने स्वदेशी भूमि और पहचान की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान किया था।”

आदिवासी छात्र नेता आकाश कच्छप ने उका समाचार से कहा कि वे सरकार से स्थानीय आदिवासी नेता के नाम पर कॉलेज का नाम देना चाहते हैं पर यह सरकार हिंदू विचारधाराओं को आदिवासी लोगों पर थोपने के प्रयास में लगी है।

सन् 1926 में रांची कॉलेज की स्थापना हुई और 2015 में इसे विश्वविद्यालय बनाया गया। विश्वविद्यालयके रुप में यह राज्य का पहला कॉलेज है। इसमें करीब 4,000 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र हैं।

जमशेदपुर में जेसुइट-प्रबंधित जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एनाबेल बेंजामिन बड़ा ने उका समाचार से कहा कि सरकार का कदम “आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि यह आदिवासी पहचान को नष्ट करने और आदिवासी लोगों को लूटने हेतु अन्य लोगों के लिए रास्ता साफ करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है।”

नवम्बर 2016 में सरकार ने विकास के नाम पर राज्य को पारंपरिक आदिवासी भूमि को लेने में मदद करने के लिए दो कानूनों को बदल दिया।

बड़ा ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों के नामों को बदलने से लोग ऐतिहासिक नेताओं के नामों को स्वीकार करते हैं। कॉलेज का नाम बदलना ” छोटी घटना हो सकती है लेकिन संदेश स्पष्ट है। वे आदिवासी पहचान को समाप्त करना चाहते हैं।″


(Margaret Sumita Minj)

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