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आवासहीन लोगों के प्रति जागरूकता लाने हेतु सलेशियन विद्यार्थियों का प्रयास

In Church on May 9, 2017 at 4:32 pm

 

न्यू रोशेल, मंगलवार, 9 मई 2017 (मैटर्स इंडिया): न्यू रोशेल स्थित सलेशियन उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों ने विगत शुक्रवार को कार्डबॉर्ड बॉक्स से बने घर में रात बिताया।

कार्डबॉर्ड बॉक्स से बने घर में रात बिताने का उद्देश्य था आवास विहीन लोगों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।

ब्रा. क्रेग स्पेंस का कहना था कि यह सबक छात्रों को सहानुभूति की भावना में बढ़ने हेतु प्रेरित करेगा।

न्यूज़ 12 को बतलाते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना में छात्रा काफी उत्साही लगे। ठंढक एवं असुविधा के बावजूद वे एक रात को आवासहीन के रूप में बिताना चाहते थे क्योंकि कुछ लोग इससे भी बदतर स्थिति में जीवन व्यतीत करते हैं।

न्यू रोशेल के एक छात्र मैथ्यू ब्रूनो ने कहा, ″जब आप घर जाते हैं, आप अपने आराम एवं गर्म पलंग पर सोते हैं और आपको पूर्ण भोजन मिलता है किन्तु कई ऐसे लोग हैं जिन्हें ये सुविधाएँ नसीब नहीं हैं।″

दूसरे छात्र हेक्टर क्रूज़ ने कहा, ″जरूरतमंद लोग हमेशा मिलते हैं, कई अवसर हैं लोगों की मदद करने के लिए जैसे- सूप किचन, चैरिटी दान एवं अन्य उदार कार्यों द्वारा।″


(Usha Tirkey)

हम वचन को विनम्रता से ग्रहण करें

In Church on May 9, 2017 at 4:28 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 9 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 9 मई को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित किया तथा प्रवचन में उन्होंने पवित्र आत्मा का विरोध नहीं करने बल्कि ईश वचन को विनम्रता के साथ स्वीकार करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि वचन को स्वीकार करने वाले का मनोभाव अच्छाई, शांति एवं आत्मसंयम का मनोभाव बन जाता है जो उसे जानते एवं उससे अच्छी तरह परिचित होते हैं।

संत पापा ने कहा कि विगत कुछ दिनों में हमने पवित्र आत्मा के विरोध के बारे में चिंतन किया है जिसका उदाहरण हम संहिता के पंडितों में पाते हैं जिन्होंने स्तेफन पर अभियोग लगाया। आज के पाठ में हम उसके ठीक विपरीत मनोभाव, पवित्र आत्मा के प्रति विनम्र ख्रीस्तीयों के बारे सुनते हैं।

उन्होंने कहा, ″स्तेफन की शहादत के बाद, येरूसालेम में भयंकर अत्याचार होने लगा। केवल प्रेरित वहाँ ठहरे जबकि विश्वासी साईप्रस, पोईनिसिया और अंतियोख आदि की ओर तितर-बितर हो गये तथा यहूदियों के बीच सुसमाचार का प्रचार किया। कुछ लोग अंतियोख में यूनानी लोगों के बीच भी सुसमाचार का प्रचार करने लगे क्योंकि उन्होंने अनुभव किया कि यह पवित्र आत्मा की प्रेरणा थी।″  यद्यपि वे लोकधर्मी थे तथापि अत्याचार के बावजूद उन्होंने सुसमाचार का प्रचार करना जारी रखा क्योंकि उनमें पवित्र आत्मा क्रियाशील था और वे विनम्र थे।

प्रेरित याकूब अपने प्रथम पत्र में आग्रह करते हैं, कि हम पवित्र आत्मा को विनम्रता के साथ ग्रहण करें। जिसके लिए हमें कठोर नहीं बल्कि खुला होने की आवश्यकता है। संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा को स्वीकार करने का पहला चरण है विनम्र होना अर्थात् हृदय को खुला रखना। दूसरा है वचन को जानना, येसु को जानना, जो कहते हैं, ″मेरी भेड़ें मेरी आवाज पहचानती हैं और मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरा अनुसरण करती हैं। वे जानते हैं कि वे क्यों पवित्र आत्मा के प्रति उदार हैं।

तीसरा चरण है वचन से गहरा परिचय। संत पापा ने कहा, ″अपने साथ हमेशा ईश वचन की प्रति रखें, उसे पढ़ें तथा वचन के लिए अपना हृदय खोलें एवं पवित्र आत्मा के लिए अपने आपको खोलें जो हमारे लिए वचन को समझाता है। परिणामतः हम वचन को ग्रहण कर पायेंगे और अपने साथ रख पायेंगे। ऐसे लोगों का मनोभाव होगा अच्छाई, सद इच्छा, आनन्द, शांति, आत्मसंयम एवं कोमलता।″

संत पापा ने कहा कि वचन के साथ विनम्रता हमें पवित्र आत्मा का विरोध करने से बचायेगी। वह हमें जीवन की राह पर आगे ले जायेगी और हम ख्रीस्तीय मनोभाव में बढ़ेंगे।

जब साइप्रस और साइरेन के लोगों द्वारा अंतियोख में सुसमाचार सुनाये जाने की खबर येरूसालेम आयी तो लोग थोड़ा घबराये किन्तु जब बरनाबस ने वहाँ जाकर देखा तो वह ईश्वर की कृपा देखकर आनन्दित हुआ तथा प्रभु के प्रति निष्ठावान बने रहने का आग्रह किया क्योंकि वह पवित्र आत्मा से पूर्ण था।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा हमें गलती नहीं करने, पवित्र आत्मा के प्रति विनम्र रहने, उन्हें पहचानने तथा उससे प्रेरित होकर जीने हेतु हमारा मार्गदर्शन करता है।


(Usha Tirkey)

भलाई हेतु सहयोग देने पर संत पापा का ट्वीट

In Church on May 9, 2017 at 4:27 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 9 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने समाज में योगदान देने हेतु प्रत्येक को प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, ″हरेक को समाज के लिए कुछ न कुछ देना है, सभी की भलाई हेतु सहयोग देने से कोई भी अपवर्जित नहीं है।″

संत पापा ने यह प्रोत्साहन उस दिन दिया जब विश्व उन लोगों की याद करती है जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में अपना जीवन खो दिया था। 8 और 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गये लोगों की यादगारी में समर्पित है।


(Usha Tirkey)

वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक की प्रवास पर ‘दूरदर्शी’ समझौता हेतु सलाह

In Church on May 9, 2017 at 4:26 pm

 

जेनेवा, मंगलवार, 9 मई 2017 (वीआर सेदोक): जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों हेतु वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान योरकोविक ने जेनेवा में सोमवार को एक परामर्श सम्मेलन को सम्बोधित किया जो विस्थापितों एवं मानव अधिकार पर अंतरराष्ट्रीय समझौता हेतु रास्ता तैयार करने हेतु आयोजित की गयी थी।

समझौता जो ″वैश्विक संविदा″ से जाना जाता है उसका उद्देश्य है अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के सभी पहलुओं को संबोधित सिद्धांतों और प्रतिबद्धताओं की एक सूची तैयार करना।

उन्होंने कहा कि विस्थापन एवं शरणार्थी जैसे दो वैश्विक मुद्दों के प्रति हमारे समर्पण को स्वीकार किये जाने एवं भ्रातृत्व के मूल्यों द्वारा संचालित होने की आवश्यकता है जो मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा और कई सम्मेलनों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में निर्मित मानवता की आम विरासत पर प्रतिष्ठापित हो।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि विस्थापितों की जिम्मेदारी है मेजबान देशों की संस्कृति एवं आध्यात्मिक समृद्धि का सम्मान करना तथा वैश्विकरण के मानव चेहरे को प्रस्तुत करना। जो राष्ट्रों के बीच शांति एवं आपसी संबंध को प्रोत्साहन देने का माध्यम बन सकता है। वे इस बात को स्पष्ट करते हैं कि हम एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं। जबकि वे बहुधा बहुमूल्य योगदान मात्र के लिए स्वीकार किये जाते हैं जो वे मेजबान देशों के लिए आर्थिक लाभ, क्षतिपूर्ति, जनसांख्यिकीय घाटे और श्रमिकों की कमी के रूप में प्रदान करते हैं। दुःखद बात ये है कि वे नस्लवाद, असहिष्णुता तथा अन्य तरह के भेदभाव के शिकार होते हैं क्योंकि उन्हें अलग दृष्टि से देखा जाता है।

उन्होंने अपील की कि विस्थापन की मानवीय सच्चाई की वास्तविक समझ का समर्थन करने के लिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्यधारा से जाए और जिससे सामान्य जनता के बीच विदेशी और नस्लीय पूर्वाग्रह के उदय को रोकने में मदद मिलेगी।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने दिया पवित्र आत्मा का विरोध करने के पाप के खिलाफ चेतावनी

In Church on May 9, 2017 at 4:24 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 9 मई 2017 (वीआर सेदोक): पवित्र आत्मा का विरोध करने के पाप से सावधान रहें तथा ईश्वर के आश्चर्य के प्रति खुले रहें। यह अपील संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 8 मई को, वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में की।

प्रवचन में संत पापा ने प्रेरित चरित से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ संत पेत्रुस, गैंरख्रीस्तीयों के मसीही समुदाय में प्रवेश के संबंध में प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय को समझाते हैं। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि पवित्र आत्मा कलीसिया एवं ख्रीस्तीय समुदाय में सदा क्रियाशील रहते हैं।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा चमत्कार करते तथा नई चीजों को उत्पन्न करते हैं और कुछ लोग कलीसिया की इन नई चीजों से घबराते हैं।

उन्होंने कहा, पवित्र आत्मा ईश्वर का वरदान है उस पिता का वरदान जो हमें सदा विस्मित करते हैं। वे हमें क्यों विस्मित करते हैं? क्योंकि वे जीवित ईश्वर हैं जो हममें निवास करते। वे एक ऐसे ईश्वर हैं जो हमारे हृदय को परिवर्तित करते, कलीसिया में निवास करते तथा हमारे साथ चलते और इस यात्रा में हमें विस्मित करते हैं। उनमें दुनिया की सृष्टि करने एवं उसे नवीकृत करने की रचनात्मकता है।

संत पापा ने कहा कि उनका यह कार्य उलझन पैदा कर सकता है। जैसा कि संत पेत्रुस को सामना करना पड़ा, जब गैर ख्रीस्तीयों ने ईश वचन स्वीकार किया और जिसके संबंध में अन्य शिष्यों ने उनसे पूछताछ की। उनके लिए पेत्रुस रास्ते से भटक गया था क्योंकि उनके अनुसार पेत्रुस कलीसिया के शीर्ष होकर ठोकर का कारण बन गया था।

संत पापा ने बतलाया कि इस परिस्थिति में संत पेत्रुस ने उस दिव्य दर्शन का वर्णन किया जिसको प्रभु ने उनके लिए प्रकट किया था और जिसके माध्यम से उन्हें निर्णय लेने में सहायता मिली। संत पापा ने कहा, ″पेत्रुस ईश्वर के चमत्कार को स्वीकार कर पाने में समर्थ था जिसके कारण उन्होंने ईश्वर के कई चमत्कारों को देख पाया। प्रेरित एक साथ आये, विचार-विमर्श किये तथा इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि प्रभु की इच्छा अनुसार और एक कदम आगे बढ़ाया जाए।″

संत पापा ने कहा कि नबियों के समय से लेकर आज तक पवित्र आत्मा का विरोध करने का पाप जारी है। यही पाप है जिसके द्वारा स्तेफन को दोषी करार दिया गया तथा उन्हें शहीद होना पड़ा।

संत पापा ने भले और बुरे का फर्क कर पाने हेतु कृपा की याचना करने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु हमें अपने हृदय को कठोर नहीं करने का आग्रह करते हैं।

संत पापा ने कहा, ″पवित्र आत्मा के लिए द्वार बंद एवं उनका विरोध हमेशा से किया जाता रहा है जो स्वतंत्रता को नष्ट करता, आनन्द को मिटा देता एवं पवित्र आत्मा के प्रति निष्ठा को समाप्त कर देता है।″ हमारे सामने एक सवाल है कि हम किस तरह जान सकते हैं कि यह पवित्र आत्मा की ओर से है अथवा सांसारिक आत्मा की ओर से। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें परख हेतु कृपा के लिए प्रार्थना करना है और हम परखने या निर्णय लेने के लिए प्रेरितों का उदाहरण ले सकते हैं जिन्होंने एक साथ विचार-विमर्श किया एवं पवित्र आत्मा के रास्ते को देखा जबकि जिन्होंने प्रार्थना नहीं की, वे बंद बने रहे।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीयों को परख करने सीखना चाहिए। विश्वास कभी नहीं बदलता वह हमेशा एक समान बना रहता है बल्कि कलीसिया की सच्चाई आगे बढ़ती एवं समय के साथ विकास करती है। उन्होंने विश्वासियों को कठोरता, बंद हृदय एवं अचलता की गलती में नहीं पड़ने हेतु परख की कृपा के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी।


(Usha Tirkey)

वाटिकन राजदूत को कर्नाटक के मुख्य मंत्री ने दिया निमंत्रण

In Church on May 9, 2017 at 4:23 pm

 

बेंगलूरू, मंगलवार, 9 मई 2017 (ऊकान): भारत में वाटिकन के नये प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जामबपतिस्ता दीक्वात्रो को, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलूरू स्थित अपने आधिकारिक आवास ‘कवेरी’ में 3 मई को निमंत्रण दिया था।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का निमंत्रण स्वीकार करते हुए वाटिकन प्रेरितिक राजदूत, बेंगलूरू के महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्ड एवं  राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और भारतीय काथलिक परिषद के वित्त समिति के अध्यक्ष के साथ वहाँ पहुँचे।

मुलाकात के दौरान प्रेरितिक राजदूत दीक्वात्रो एवं महाधर्माध्यक्ष मोरेस ने मुख्यमंत्री के साथ कई मुद्दों पर बातें कीं। उन्होंने ख्रीस्तीय समुदाय, खासकर, कर्नाटक ख्रीस्तीय समुदाय के कार्यक्रमों पर बहस किया जिनकी मुख्य मंत्री ने बड़ी प्रशंसा की।

इस अवसर पर बेंगलूरू विकास मंत्री, नगर नियोजन के. जे. जोर्ज तथा बेंगलूरू महाधर्मप्रांत के कुलपति फा. अंतोनी स्वामी भी उपस्थित थे।


(Usha Tirkey)

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