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विश्वास एवं नैतिकता के रास्ते पर बढ़ते ख्रीस्तीय

In Church on May 11, 2017 at 2:53 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 11 मई 2017 (वीआर सेदोक): ईश प्रजा अपने विश्वास को सुदृढ़ करने हेतु हमेशा यात्रा पर है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में 11 मई को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उन्होंने प्रेरित चरित से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ संत पौलुस मुक्ति इतिहास में शुरू से लेकर येसु तक चर्चा करते हैं।

संत पापा ने कहा, ″ईश्वर ने अपने आप को इतिहास में प्रकट किया, अपने मुक्ति इतिहास में जो एक लम्बा इतिहास है।″ मुक्ति इतिहास उपयुक्त समय के साथ संतों एवं पापियों की एक लम्बी यात्रा है। प्रभु उन्हें अच्छे और बुरे, दासता एवं स्वतंत्रता दोनों ही परिस्थितियों में उनका साथ देते हैं। अंत में येसु आते हैं जो अपने बाद पवित्र आत्मा को भेजते हैं ताकि हम येसु के संदेश को समझ सकें। संत पापा ने कहा कि यहीं से कलीसिया की यात्रा शुरू होती है जो कई संतों एवं पापियों के साथ, कृपा एवं पाप के बीच आगे बढ़ती है।

संत पापा ने कहा कि इस रास्ते को जानने, येसु के साथ गहरा संबंध स्थापित करने, अपने विश्वास को गहरा करने एवं आज्ञाओं को भी समझने की आवश्यक है क्योंकि एक समय जिसे सामान्य माना जाता था अब वह महापाप के रूप में पहचाना जाता है।

संत पापा ने कहा, ″हम गुलामी पर गौर करें। जब हम स्कूल गये तो हमें बतलाया गया कि पहले गुलामी की प्रथा थी। गुलामों को एक स्थान से दूसरे स्थानों में बेचा जाता था। लैटिन अमरीका में भी यह प्रथा लागू थी। उन्होंने कहा कि आज हम इसे महापाप मानते हैं जबकि पहले ऐसा नहीं माना जाता था। लोग सोचते थे कि गुलामों में आत्मा नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोगों को विश्वास एवं नैतिकता की बेहतर समझदारी की ओर आगे बढ़ना था। उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा, किन्तु आज इसकी पूरी समझ के बावजूद गुलामी समाप्त नहीं हुई है। संत पापा ने मृत्यु दण्ड की सज़ा का भी विरोध किया।

संत पापा ने कहा कि ईश प्रजा विश्वास एवं नैतिकता की समझ को गहरा करने के लिए हमेशा यात्रा पर है।

धर्मों के नाम पर युद्ध विश्वास एवं नैतिकता की समझदारी में कमी का परिणाम है किन्तु इसके बीच भी संतों की कमी नहीं है। कलीसिया अघोषित संतों से भरी है। उनकी पवित्रता हमें प्रभु के द्वितीय आगमन जिसमें वे महिमा के साथ आयेंगे, उस ओर जाने हेतु प्रेरित करता है। प्रभु चाहते हैं कि इस रास्ते पर सभी लोग उन्हें पहचानें।

संत पापा ने कहा कि ईश प्रजा यात्रा पर है और जब वह रुक जाती है तब वह गधे की तरह स्थिरता के पिंजरे में बंद हो जाती है जो न आगे बढ़ती, न विश्वास, प्रेम और आत्मा के शुद्धिकरण को समझती है। हम सभी अपने निश्चित समय की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हम प्रत्येक का एक उपयुक्त समय है जब इस जीवन का अंत हो जायेगा तथा हम प्रभु में एक हो जायेंगे। यही हमारा उपयुक्त समय होगा।

संत पापा ने विश्वासियों को परामर्श दिया कि वे आत्मा जाँच करें तथा देखें कि हम किस ओर आगे बढ़ रहे हैं। येसु ने पवित्र आत्मा को भेजा है ताकि वह हमारी यात्रा में हमारा साथ दे। वह हमें ईश्वर की करुणा के रास्ते पर आगे ले चलता है।

संत पापा ने मेल-मिलाप संस्कार द्वारा प्रभु से मुलाकात करने हेतु प्रोत्साहन दिया।


(Usha Tirkey)

फातिमा में आशा और शांति के तीर्थयात्री संत पापा

In Church on May 11, 2017 at 2:50 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 11 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि हम माता मरियम में सब कुछ को ईश्वर की कृपा के रूप में देखें।

फातिमा यात्रा के पूर्व प्रेषित अपने ट्वीट संदेश में संत पापा ने विश्वासियों से कहा, ″मरियम के साथ, आशा और शांति की तीर्थयात्री के रूप में″ मैं कल फातिमा की यात्रा कर रहा हूँ। आइये, हम उनमें देखे कि सबकुछ ईश्वर का दान है और वे ही हमारे बल हैं।″

विदित हो कि फातिमा में माता मरियम के दिव्य दर्शन की शतवर्षीय जयन्ती के उपलक्ष्य में संत पापा 12 और 13 मई को फातिमा की तीर्थयात्रा करने वाले हैं।


(Usha Tirkey)

बेनेजुएला की स्थिति के अध्ययन हेतु चेलम ने एक समिति का गठन किया

In Church on May 11, 2017 at 2:49 pm

 

एल सलवाडोर, बृहस्पतिवार, 11 मई 2017 (फिदेस): लैटिन अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ‘चेलम’ की 36वीं आम सभा ने बेनेजुएला की स्थिति का अध्ययन करने हेतु एक समिति का गठन किया है।

मोर्लिया के सहायक धर्माध्यक्ष तथा लैटिन अमरीकी धर्माध्यक्षों के महासचिव धर्माध्यक्ष जुवान एसपीनोत्सा ने घोषित किया कि समिति वेनेजुएला में मानवाधिकारों की गिरावट के बारे में एक बयान देगी।

फिदेस को मिली जानकारी के अनुसार धर्माध्यक्ष एसपीनोत्सा ने यह भी बतलाया कि देश की स्थिति का अध्ययन करने हेतु एक खास समिति की रचना की गयी है।

समिति का गठन दक्षिण अमरीकी देशों की गंभीर स्थिति से प्रेरित होकर की गयी है जहां विपक्षी प्रदर्शनकारियों के दमन में करीब चालीस लोगों की मौत हुई है तथा प्रदर्शनकारियों ने वेनेजुएला के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन से, राज्य बल की ओर से जारी हिंसा का अंत करने के लिए कलीसिया के हस्तक्षेप की मांग की थी।

समिति की अध्यक्षता मनागुवा के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल लेओपोल्द ब्रेनेस करेंगे। उनके साथ कुमाना के धर्माध्यक्ष दियेगो रफाएल पाद्रोन, मेडलिन के सहायक धर्माध्यक्ष एलकिन फेरनानदो अलवारेज, असूनसोन के महाधर्माध्यक्ष एडमंड वालेनजुवेला तथा चेलम के न्याय एवं एकात्मता विभाग के एलवे मोंज़ात समिति के सदस्य होंगे।

चेलम की 36वीं आम सभा 9 से 12 मई को एल सलवाडोर में हो रही है। आम सभा के आरम्भ में संत पापा द्वारा प्रेषित संदेश को पढ़कर सुनाया गया। जिसमें उन्होंने सभा के प्रतिभागियों को लोगों के प्रति उनके समर्पण हेतु प्रोत्साहन दिया है कि वे अपारेचिदा की माता मरियम को आदर्श मानते हुए अमरीका की मिशनरी कलीसियाओं की ओर जाएँ। अपारेचिदा की माता मरियम की प्रतिमा की स्थापना का यह 300वाँ साल है।


(Usha Tirkey)

फातिमा तीर्थयात्रा के पूर्व संत पापा का वीडियो संदेश

In Church on May 11, 2017 at 2:47 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 11 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 13 मई को पुर्तगाल में अपनी तीर्थयात्रा के पूर्व वहाँ के लोगों का अभिवादन करने हेतु एक संदेश प्रकाशित किया।

फातिमा के तीन चरवाहों को माता मरियम के दिव्यदर्शन की शतवर्षीय जयन्ती के उपलक्ष्य में संत पापा 12 और 13 मई को पुर्तगाल की यात्रा करेंगे।

10 मई को प्रकाशित एक विडीयो संदेश में संत पापा ने कहा, ″फातिमा की माता मरिया की तीर्थयात्रा हेतु अब कुछ ही घंटें रह गये हैं। मैं अत्यन्त खुश हूँ तथा आशा करता हूँ कि हमारी मुलाकात माता के घर में होगी।″

उन्होंने कहा, ″मैं इस बात से पूरी तरह वाकिफ हूँ कि आप मुझे अपने घरों, अपने समुदायों और अपने शहरों में स्वागत करना चाहेंगे, मैं आपके निमंत्रण को स्वीकार करता हूँ।″ उन्होंने कहा कि मैं आपके सभी निमंत्रण स्वीकार करना पसंद करूंगा किन्तु इसे पूरा करना असम्भव है। मैं आपको आपकी समझदारी के लिए धन्यवाद देना चाहूँगा कि मैं अपने को फातिमा तीर्थस्थल तक ही सीमित कर पाऊँगा। मैं आशा करता हूँ कि हम सभी धन्य कुँवारी मरियम के चरणों में एक-दूसरे से मिलेंगे।″ विश्वव्यापी कलीसिया के गड़ेरिये के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने को उनके चरणों में अर्पित करूँ तथा शारीरिक अथवा आध्यात्मिक रूप से आपके नजदीक रहूँ ताकि हम मन और दिल से एक रह सकें।

संदेश में संत पापा ने यह भी कहा कि वे पुर्तगाल के सभी लोगों को माता मरियम के चरणों सिपुर्द करते हैं तथा प्रार्थना करते हैं कि माता मरियम का निष्कलंक हृदय सभी के लिए शरण एवं मार्ग बने जो उन्हें ईश्वर की ओर ले चले।

संत पापा की तीर्थयात्रा का आदर्शवाक्य है ″मरियम के साथ, आशा और शांति के तीर्थयात्री के रूप में″।

उन्होंने तीर्थयात्रा हेतु प्रसन्नता जाहिर करते हुए विश्वासियों को निमंत्रण दिया कि वे ईश्वर की कृपा को ग्रहण करने के लिए अपना हृदय द्वार खोलें। उन्होंने सभी विश्वासियों को उनकी प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि उन्हें इसकी अति आवश्यकता है क्योंकि पापियों के बीच वे भी पापी हैं।

उन्होंने कहा, ″मैं आपके पास आ रहा हूँ ताकि आशा एवं शांति के सुसमाचार की घोषणा कर सकूँ। प्रभु आप सभी को आशीष प्रदान करें तथा माता मरियम आपकी रक्षा करें।″


(Usha Tirkey)

संत पापा ने आग में जलकर मरने वाले जिप्सी परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट की

In Church on May 11, 2017 at 2:46 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 11 मई 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने रोम के चेंतोचेले में मंगलवार को तीन खानाबदोश बहनों की जल कर मृत्यु हो जाने पर उनके परिवार वालों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य एवं सहानुभूति प्रकट की।

फ्रांचेस्का, अंजेलिका तथा एलिजबेथ ये तीनों बहनें क्रमशः 4,8 और 20 साल की थीं जो उस समय जल कर मर गयीं जब उस झोपड़ी में आग लग गयी जहाँ वे सो रही थीं। उनके माता-पिता एवं आठ अन्य बच्चे आग से बचकर भागने में सफल रहे।

वाटिकन प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि संत पापा की चैरिटी कोष के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष कोनराड क्राजेवस्की को एक संदेश भेजकर संत पापा ने कहा कि वे आगजनी की घटना से बचे सदस्यों से मुलाकात कर उनकी मदद करें।

अभियोजन पक्ष ने कथित तौर पर त्रासदी में एक आगजनी जांच केंद्र खोला है क्योंकि परिवार के सदस्यों ने हाल के दिनों में धमकियों की सूचना दी थी और पिछले हफ्ते एक अन्य कैंप पर आग लग गई थी।

विश्लेषकों का मानना है कि रोम विरोधी अधिनियम के तहत स्थानीय लोगों के विरोध के बजाय, शहर के जिप्सी समुदाय के अंदर हमला संभवतः एक प्रतिशोध था।

रोम पुलिस ने कहा कि जांच प्रक्रिया जारी है।

जानकारी अनुसार 11 मई को रोम समयानुसार साढ़े 6 बजे त्रास्तेवेरे के संत मरियम महागिरजाघर में संत एजिदो समुदाय के द्वारा तीनों बच्चों के नाम पर जागरण प्रार्थना का आयोजन किया गया है जिसका नेतृत्व दक्षिणी रोम के सहायक धर्माध्यक्ष मोनसिन्योंर पाओलो लोजूदिचे करेंगे। जागरण प्रार्थना के दौरान वे शहर के अधिकारियों, परिवारों एवं नागरिकों को सम्बोधित भी करेंगे।


(Usha Tirkey)

मरियम आशा की माता

In Church on May 11, 2017 at 9:26 am

वाटिकन सिटी, बुधवार, 10 मई 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज हम अपनी धर्मशिक्षा माला में मरियम जो आशा की माता हैं उन पर चिंतन करेंगे। मरियम ने येसु का साथ जीवनपर्यंत दिया। मुक्ति इतिहास के शुरू से ही हम उन्हें उनके जीवन में पाते हैं। संत पापा ने कहा कि स्वर्गदूत के द्वारा दिये गये संदेश को स्वीकार करते हुए उसके प्रत्युत्तर में “हाँ” कहना उनके लिए सहज नहीं था। फिर भी युवा नारी ने अपने जीवन में निर्भय होकर ईश्वरीय योजना को यह नहीं जानते हुए भी कि भविष्य में क्या होने वाला है स्वीकार किया। मरियम इस तरह हम सभों के लिए दुनिया की माताओं में एक माता है जो अपने गर्भ में अति साहस के साथ येसु को स्वीकार करती है।

मरियम का वह “हाँ” आज्ञाकारिता का पहला कदम था जहाँ वह माता के रुप में सारी मानव जाति के साथ चलने को तैयार होती है। इस तरह हम सुसमाचार में मरियम को एक शांत नारी के रुप में पाते हैं जो बहुत बार अपने जीवन में होने वाली घटनाओं और बातों को नहीं समझती थी लेकिन उन्हें अपने हृदय में संजोकर रखते हुए उन पर मनन-चिंतन करती थी।

इस संदर्भ में हम मरियम की एक सुन्दर मनोवैज्ञानिक स्थिति से रूबरू होते हैं, वह अपने को जीवन की अनिश्चिताओं से दूर नहीं रखती है, विशेषकर, जब उनके जीवन में चीजें अच्छी दिशा में नहीं चल रही होती हैं। वह अपने जीवन की विषम परिस्थितियों का विरोध नहीं करती और न ही उन परिस्थिति से विचलित होती है। इसके विपरीत वह अपने जीवन की सारी घटनाओं को सहज स्वीकार करती, बातों को सुनती और घोर विपत्ति में अपने पुत्र के क्रूस मरण का सम्मान बड़े धीरज के साथ करती है।

येसु के क्रूस मरण के अंतिम समय तक वह सुसमाचार के पदों में लुप्त रहती है। लेकिन वह इस विकट परिस्थिति में येसु का साथ देने हेतु क्रूस के नीचे पुनः प्रकट होती है जबकि येसु के मित्र भय के कारण वहाँ से भाग जाते हैं। संत पापा ने कहा कि माताएं हमारे जीवन में हमें धोखा नहीं देती हैं। कलवारी के दृश्य में निर्दोष बेटे का क्रूस मरण या क्रूस की घोर पीड़ा सह रहे बेटे के क्रूस के नीचे खड़े हो कर अपने बेटे को साथ देना, कौन अधिक कष्टदायक है हम उसके बारे में नहीं कह सकते हैं। सुसमाचार मरियम को क्रूस के नीचे खड़े होने का जिक्र करता है लेकिन हमें उनकी प्रतिक्रिया और दुःख के बारे में कुछ नहीं बतलाता। उनकी असहनीय पीड़ा का अनुमान हम कविओं की रचनाओं और चित्रकारों के द्वारा गढ़ी गई कला कृति में देखकर लगा सकते हैं जो कला के इतिहास और साहित्य के पन्नों में दर्ज हो गई हैं।

मरिया वहाँ मात्र “खड़ी” थी। यहाँ हम नाजरेत की युवा नारी को और एक बार देखते हैं जो अपने जीवन की इस घोर अंधकार भरे क्षण में अपने को ईश्वर के साथ एक अटूट संबंध से जोड़े रखती है, जिसे हम अपने जीवन में सिर्फ गले लगा सकते हैं। मरियम क्रूस के नीचे अपने पूर्ण विश्वास में उपस्थिति थी। उस परिस्थिति में वह अपने बेटे के पुनरूत्थान के बारे में नहीं जानती थी, लेकिन उस अपार दुःख की घड़ी में भी वह ईश्वर की योजना को पूरा करने हेतु निष्ठावान बनी रही जिसे उन्होंने अपनी बुलाहट के दौरान ‘हाँ’ कहा था। एक माता के रुप में उन्हें अपने बेटे की पीड़ा के कारण घोर दुःख और कष्ट से होकर गुजरना पड़ा।

कलीसिया की स्थापना के प्रथम दिन में हम उन्हें आशा की माता के रुप में शिष्यों के समुदाय में पाते हैं जिनके बीच भय का आतंक छाया हुआ था। मरिया उनके बीच सामान्य स्थिति में उपस्थित थी, मानो ये सारी चीजें पूर्ण रूपेण सामान्य घटनाएं हों। यही कारण है कि हम मरिया को माता के रुप में प्रेम करते हैं क्योंकि सारी अर्थहीन परिस्थिति में भी वह हमें आशा में प्रतीक्षा करने को सिखलाती है। संत पापा कहा कि हम अपने में अनाथ नहीं हैं लेकिन हमारी एक माँ है जो स्वर्ग में है। वह सदैव ईश्वर के रहस्य पूर्ण कार्यों के प्रति विश्वस्त है यद्यपि दुनिया बुराइयों के भरी हुई है। ऐसी परिस्थिति में येसु की माता हमारी सहायता करती और हमें जीवन की राह पर आगे बढ़ने हेतु मदद करती है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें पास्का काल की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा फ्राँसिस ने परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय को संदेश भेजा

In Church on May 11, 2017 at 9:24 am

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 10 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 10 मई को कॉप्टिक कलीसिया के धर्मगुरु तावाद्रोस द्वितीय को एक संदेश भेजा जिसमें उन्होंने 10 मई 2013 को रोम में परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के साथ पहली मुलाकात की चौथी वर्षगाँठ के अवसर पर तथा मिस्र की प्रेरितिक यात्रा और काहिरा में परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के साथ मुलाकात के बाद पुनः उन्हें शांति और स्वास्थ्य की शुभकामनाएं दी, साथ ही उन्होंने काथलिक कलीसिया एवं कॉप्टिक कलीसिया के बीच हुई आध्यात्मिक एकता पर आभार प्रकट करते हुए खुशी जाहिर की। संत पापा ने पुनः एकबार मिस्र में उनके आतिथि सत्कार हेतु सहृदय धन्यवाद दिया और वहाँ एक साथ सामान्य प्रार्थना और मसीही भाइयों के बीच हुई बैठकों की हार्दिक सराहना की।

संदेश में उन्होंने लिखा, ″ मैं विशेष रूप से आभारी हूं कि हमने एक साथ घोषणा करके मसीह की कलीसिया में अपनी बपतिस्मा एकता को मजबूत किया है।”हम ईमानदारी के साथ एक मन और हृदय से बपतिस्मा दोहराना नहीं चाहते हैं, यदि कोई विश्वासी एक कलीसिया से दूसरी कलीसिया में जाना चाहे तो काथलिक एवं कॉप्टिक कलीसियाओं में सम्पादित बपतिस्मा मान्य होगा। पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में, भाईचारे का हमारा संबंध विविधता में एकता की खोज में हमारे सामान्य प्रयासों को आगे बढ़ाने हेतु दृढ़ रहने की चुनौती देता है।”

इस मार्ग में आगे बढने के लिए शहीदों का उदारण और उनकी मध्यस्त प्रार्थनाएँ हमें मदद करेंगी। हम जीवन यात्रा में एक साथ मिलकर पवित्र युखारिस्त समारोह एवं प्रेम और मेल मिलाप करते हुए आगे बढ़ते जायें।

अंत में संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक कलीसिया एवं कॉप्टिक कलीसिया के बीच मित्रता के इस दिन में परमाध्यक्ष तावाद्रोस द्वितीय के लिए तथा मध्य पूर्वी देशों और मिस्र में शांति के लिए अपनी प्रार्थना जारी रखने का आश्वासन दिया।


(Margaret Sumita Minj)

जलती मोमबत्ती अंधकार दूर करने के लिए प्रयाप्त, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 11, 2017 at 9:22 am

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 10 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर सृष्टिकर्ता ईश्वर की महानता पर विश्वास करने हेतु सी विश्वासियों को प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,″ना कुछ से सृष्टि की रचना करने वाले ईश्वर महान हैं, जैसे जलती मोमबत्ती की रोशनी अंधकार दूर करने के लिए पर्याप्त है।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने बांग्लादेश के लिए प्रशंसा व्यक्त की, कार्डिनल पैट्रिक रोजारियो

In Church on May 11, 2017 at 9:20 am

वाटिकन रेडियो, बुधवार, 10 मई 2017 (वीआर सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने बांग्लादेश के काथलिकों के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की जिन्होंने देश के पहले कार्डिनल की नियुक्ति को आशीष के रुप में लिया है। “मैं काथलिक समुदाय और बांग्लादेश के लोगों के प्रति खुशी प्रकट करता हूँ उन्होंने इस नियुक्ति के माध्यम से आशीष प्राप्त की है।” ढाका महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल डी रोजारियो ने वाटिकन रेडियो संत पापा के साथ निजी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने उनसे बातें की और वे खुश थे और उन्होंने इस नियुक्ति के बारे में ….बहुत गहरा अर्थ भी देखा।”

ढाका के महाधर्माध्यक्ष ने 7 मई को रोम स्थित मरिया मेजर पल्ली के संत वितो में बांग्लादेश के काथलिक समुदाय द्वारा आयोजित ख्रीस्तयाग और स्वागत समारोह के दौरान कही।

73 वर्षीय कार्डिनल रोम में हैं वे शनिवार, 13 मई को रोम शहर की एक पल्ली को स्वीकार करने की औपचारिकता को पूरी करेंगे। संत पापा पारंपरिक रूप से रोम के अपने धर्मप्रांत की पल्लियों को कार्डिनलों को प्रदान करते है। हालांकि, कार्डिनल अपने नामधारी पल्लियों के विश्वासियों की आध्यात्मिक देखभाल हेतु व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं हैं।

कार्डिनल डी’रोज़ारियो ने संत पापा फ्राँसिस को सदियों पुरानी बंगाली कला में कढाई की गई एक परंपरागत रजाई ‘नक्षीकत्था’ उपहार में दी। उन्होंने संत पापा को बांग्लादेश आने का अनुरोध करते हुए कहा कि सभी उनके इंतजार में हैं।

हालांकि, कार्डिनल डी ‘रोज़ारियो ने संवाददाताओं से कहा कि “तकनीकी कारणों से वे एक विशिष्ट तारीख नहीं दे सकते।” बांग्लादेश की मौसम के अनुसार, संत पापा की यात्रा के लिए अक्टूबर-नवंबर महीना उत्तम होगा।


(Margaret Sumita Minj)

अरुणाचल की महिलाओं द्वारा शांति के लिए प्रार्थना

In Church on May 11, 2017 at 9:17 am

 

कानुबारी, बुधवार, 10 मई 2017 (वीआर सेदोक) : अरुणाचल प्रदेश के आठ जिलों से लगभग 450 काथलिक महिलाओं ने तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान शांति हेतु प्रार्थना करने के लिए 6 मई को मोमबत्ती जागरण प्रार्थना रैली में भाग लिया। 5 मई को केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के तिरपा, लॉन्गिंग और चांगलांग जिले को अशांत क्षेत्र घोषित किया। इसी के उत्तर में शांति प्रार्थना रैली का आयोजन किया गया था।

मिआओ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जॉर्ज पालीपाराम्बिल एसडीबी सम्मेलन में उपस्थित थे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश, भारत और विश्व में शांति के लिए मोमबत्ती जागरण प्रार्थना रैली को प्रोत्साहित किया। धर्माध्यक्ष जॉर्ज ने कहा, ″शांति की शुरुआत घर में होती है। हम एक रात में दुनिया को बदल नहीं सकते पर हमारा प्रतिदिन का निष्ठापूर्वक किया गया प्रयास समाज और विश्व में अंतर जरुर लाएगा।″

उन्होंने कहा कि पुर्तगाल स्थित फातिमा में सौ वर्ष पहले इसी मई महिने में माता मरियम ने तीन चरवाहें बच्चों को दर्शन दिया था। माता मरिया जो हमेशा हमारे लिए प्रार्थना करती हैं, हम उनकी मध्यस्ता से हमारे परिवार, समाज, हमारे जिले, देश और पूरे विश्व में शांति के लिए प्रार्थना करें।

सेमिनार के दौरान धर्माध्यक्ष जॉर्ज ने प्रतिनिधियों को इन तीनों ‘अशांत’ जिलों में ड्रग और शराब के खतरों को रोकने में महिलाओं को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा,”शराब के बिना हमारे सामाजिक समारोहों की पहल शराब-मुक्त शांतिपूर्ण समाज बनाने की दिशा में एक बढ़िया कदम होगा।″

मिआओ धर्मप्रांत महिला सम्मेलन की अध्यक्ष श्रीमती चांगन तेंगखत और सचिव श्रीमती नागपाइ जामख़म ने धार्मिक सभा में सामाजिक प्रासंगिकता देने के लिए मोमबत्ती जागरण रैली का आयोजन किया। श्रीमती टिंगाखत्रा ने कहा, “शांति समय की मांग है और पहले से कहीं ज़्यादा आज शांति की ज़रूरत है। हम आशा करते हैं कि हमारी प्रार्थनाएं फलप्रद होंगी तथा अरुणाचल प्रदेश के तिरुप, चंगलांग और लांगडींग जिलों में शांति के परिणाम देखने को मिलेंगे।”

प्रार्थना रैली कानुबारी के संत जॉन गिरजाघर से शुरू हुई और लोगों के साथ मिलकर कानुबारी टाउन के चारों ओर घूमते हुए रोजरी प्रार्थना की गई। लोगों की उम्मीद है कि इस तरह की प्रार्थना और जागरूकता अभियान द्वारा अरुणाचल प्रदेश के “अशांत” जिलों में शांति बहाल की जा सकेगी।


(Margaret Sumita Minj)

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