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पुर्तगाल में सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा की पृष्ठभूमि

In Church on May 12, 2017 at 4:03 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 12 मई सन् 2017 (सेदोक): “मरियम के साथ, आशा और शांति के तीर्थयात्री रूप में मैं फातिमा की तीर्थयात्रा कर रहा हूँ”, इन शब्दों से पुर्तगाल यात्रा की पूर्वसन्ध्या एक ट्वीट कर, काथलिक कलीसिया के परमधर्गुरु सन्त पापा फ्राँसिस, शुक्रवार 12 मई को रोमसमयानुसार दोपहर के दो बजे रोम अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पुर्तगाल के लिये रवाना हो गये। फातिमा के तीन बच्चों को मिले मरियम के दिव्य दर्शन की 100 वीं वर्षगाँठ का समारोह मनाने के लिये सन्त पापा यह तीर्थयात्रा कर रहे हैं जो इटली से बाहर उनकी 19वीँ विदेश यात्रा है तथा फातिमा की पहली तीर्थयात्रा है। इससे पूर्व 1967 में सन्त पापा पौल षष्टम, फिर 1982, 1991 तथा सन् 2000 में सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय तथा 2010 में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने फातिमा की तीर्थयात्राएँ की थीं।

“मरियम के संग-संग आशा और शांति के तीर्थयात्री”, 12 तथा 13 मई के लिये निर्धारित सन्त पापा फ्राँसिस की फातिमा यात्रा का आदर्श वाक्य है जिसके दौरान वे पुर्तगाल के वरिष्ठ सरकारी एवं कलीसियाई अधिकारियों के साथ मुलाकातें करेंगे तथा धन्य फ्राँसिसको मार्तो एवं धन्य जसिन्ता मार्तो को सन्त घोषित कर काथलिक कलीसिया में वेदी का सम्मान प्रदान करेंगे।

लूसिया दोस सान्तोस के साथ धन्य फ्राँसिसको मार्तो एवं धन्य जसिन्ता मार्तो वही चरवाहे बच्चे हैं जिन्होंने अपने बाल्यकाल में, सन् 1917 ई. में, कई बार मरियम के दिव्य दर्शन प्राप्त किये थे। उस समय लूसिया की उम्र 10 वर्ष की तथा उनके चचेरे भाई बहन फ्राँसिसको एवं जसिन्ता की उम्र 9 एवं 07 वर्ष की थी। बताया जाता है कि अपनी भेड़ों को चराते हुए ये तीनों बच्चे माता मरियम के आदर में रोज़री विनती किया करते थे तथा दो पहर को सूर्य का प्रकाश तेज़ हो जाने पर पत्थरों को इकट्ठा कर एक छोटा सा घर बनाया करते थे। इसी छोटे से घर पर मरियम महागिरजागर का निर्माण किया गया था।

फातिमा के इन बच्चों ने सन् 1917 ई. में पहली बार 13 मई को एक बिजली चमकती देखी जिससे वे डर से गये किन्तु बाद में बिजली का प्रकाश गहराता गया जिसके बीच से उन्होंने सूर्य से भी अधिक दैदीप्यमान प्रकाश से घिरी एक महिला को देखा जो अपने हाथों में रोज़री माला लिये हुए थी। इसी स्थल पर मरियम दर्शन प्रार्थनालय की स्थापना कर दी गई थी। “प्रार्थना करना बहुत ज़रूरी है”, यह कहकर महिला ने बच्चों से कहा था कि वे दर्शन स्थल पर पाँच महीनों तक लगातार आते रहें। माँ मरियम के इसी आदेश का पालन करते हुए उसी वर्ष के 13 जून, 13 जुलाई और फिर उसके बाद 13 सितम्बर एवं 13 अक्टूबर को लूसिया, फ्राँसिसको एवं जसिन्ता ने माँ मरियम के दर्शन पाये थे। बताया जाता है कि अक्टूबर 1917 ई. को अन्तिम दर्शन के अवसर पर लगभग 70,000 लोगों की उपस्थिति में तीन बच्चों ने माँ मरियम के दर्शन किये जिन्होंने स्वतः को “रोज़री माला की रानी” रूप में प्रकट किया तथा आग्रह किया कि उसी स्थल पर उनके आदर में एक प्रार्थनालय का निर्माण कराया जाये। इसी को फातिमा का पहला रहस्य घोषित किया गया था। दूसरा रहस्य थाः माँ मरियम द्वारा रूस के विषय में भविष्यवाणी जिसे विश्व ने द्वितीय विश्व युद्ध तथा उसके बाद की दर्दनाक घटनाओं में देखा। फातिमा के तीसरे रहस्य के बारे में परमधर्मपीठ ने सन् 2000 में प्रकाशित किया था कि माँ मरियम ने सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय पर घातक आक्रमण की भविष्यवाणी की थी। सन् 1981 में, सन्त पेत्रुस महामन्दिर के प्राँगण में, तुर्की के असी आक्चा नामक बन्दूकची ने सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय पर गोलियाँ चला दी थी। इस प्राणघाती हमले से बच निकलने के बाद, धन्यवाद ज्ञापन स्वरूप, सन्त पापा ने अपने शरीर में लगी गोली फातिमा को अर्पित कर दी थी जिसे आज फातिमा की रानी मरियम के मुकुट में देखा जा सकता है।

यूरोप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में बसे तथा स्पेन की सीमा से संलग्न पुर्तगाल की कुल आबादी एक करोड़, चौत्तीस लाख, नौ हज़ार है जिनमें 88 प्रतिशत काथलिक धर्मानुयायी हैं। सन्त पापा फ्राँसिस की राष्ट्र में उपस्थिति से पूर्व ही सम्पूर्ण पुर्तगाल की सीमाओं पर कड़ा पहरा लगा दिया गया है। समाचारों में बताया गया कि कड़ी जाँच के बाद गुरुवार तड़के पुलिस ने पुर्तगाल की राजधानी लिसबन से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर दो चीनी नागरिकों की अप्रत्याशित गिरफ्तारी की है जो अपने साथ 500 अमरीकी डॉलर से अधिक नकदी लिये हुए थे।

सन्त पापा फ्राँसिस के फातिमा में आगमन से पूर्व नगर की सड़कों के ओर-छोर “सन्त पापा फ्राँसिस आपका हार्दिक स्वागत है” शब्दों वाले विशाल पोस्टरों को देखा गया। बुधवार 10 मई को सन्त पापा ने एक विडियो सन्देश प्रकाशित कर विश्व के काथलिक धर्मानुयियों से आग्रह किया था कि वे उनकी इस तीर्थयात्रा में अपनी प्रार्थनाओं द्वारा उनके समीप रहें। उन्होंने कहा था कि प्रार्थनाओं द्वारा उनकी आँखों को वह रोशनी मिलती है जो “मुझे अन्यों को उस प्रकार देखने में सक्षम बनाती है जैसे ईश्वर उन्हें देखते हैं तथा उसी तरह प्यार करने में सक्षम बनाती है जैसे ईश्वर प्यार करते हैं।” अनुमान है कि सन्त पापा फ्राँसिस की दो दिवसीय फातिमा तीर्थयात्रा के दौरान आयोजित विभिन्न समारोहों में लगभग दस लाख श्रद्धालु उपस्थित होंगे।


(Juliet Genevive Christopher)

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