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येसु प्रदत्त शांति कष्टों के बीच भी बनी रहती है

In Church on May 16, 2017 at 2:20 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): सच्ची शांति हम खुद नहीं ला सकते, यह पवित्र आत्मा का वरदान है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 16 मई के वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने ″शांति जो क्रूस के बिना मिलती है, येसु की शांति नहीं है″ पर प्रकाश डाला तथा स्मरण दिलाया कि कठिनाइयों के बीच मात्र ख्रीस्त हमें शांति प्रदान कर सकते हैं।

प्रवचन में उन्होंने सुसमाचार पाठ के उस अंश पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने शिष्यों को शांति प्रदान करते हैं। ″मैं तुम्हारे लिए शांति छोड़ जाता हूँ। अपनी शांति तुम्हें प्रदान करता हूँ।″ उन्होंने प्रभु द्वारा प्रदान किये गये शांति का अर्थ समझाया।

प्रेरित चरित से लिए गये पाठ की ओर विश्वासियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए संत पापा ने संत पौलुस एवं बरनाबस द्वारा सुसमाचार प्रचार के दौरान उठाये गये कष्टों की ओर संकेत करते हुए  सवाल किया कि क्या यही शांति है जिसे येसु हमें प्रदान करते हैं? संत पापा ने इस बात पर भी गौर किया कि येसु हमें जो शांति प्रदान करते हैं वह दुनिया की शांति नहीं है।

उन्होंने कहा कि दुनिया जो शांति हमें प्रदान करती है वह कठिनाईयों से रहित है, एक कृत्रिम शांति है और मात्र शांत रहने तक सीमित है। यह एक ऐसी शांति है जो सिर्फ अपने लाभ और आश्वासनों को देखती है ताकि उनमें से कुछ भी न खो जाए। संत पापा ने उसे एक धनी ग़ोताख़ोर की शांति कहा जो अपने में बंद होकर बाहर कुछ भी नहीं देख सकता। दुनिया प्रदत्त शांति हमें जीवन की सच्चाई अर्थात् दुःख को देखने नहीं देती है। यही कारण है कि संत पौलुस विश्वासियों को ढाढ़स बँधाते हुए कहते हैं, ″हमें बहुत सारे कष्ट सह कर ईश्वर के राज्य में प्रवेश करना है।″

संत पापा ने प्रश्न किया कि क्या कष्टों के बीच शांति प्राप्त किया जा सकता है? उन्होंने कहा, ″जी नहीं, पीड़ा, बीमार एवं मृत्यु जैसे विभिन्न कष्टों के कारण हम खुद शांति का निर्माण नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि शांति हमें येसु प्रदान करते हैं जो एक वरदान है पवित्र आत्मा का वरदान। यह शांति कष्टों के बीच भी बनी रहती है।

ईश्वर की शांति एक वरदान है जो हमें आगे बढ़ने में मदद देती है। अपने शिष्यों को शांति प्रदान करने के पश्चात् येसु ने ज़ैतून की वाटिका में कष्ट उठाया। वहाँ उन्होंने सब कुछ पिता की इच्छा को अर्पित किया तथा कष्ट को स्वाकार किया किन्तु उस समय उसे ईश्वर से कोई सांत्वना नहीं मिली। सुसमाचार बतलाता है कि स्वर्ग से एक दूत ने आकर उन्हें सांत्वना प्रदान किया।

ईश्वर की शांति एक सच्ची शांति है जो वास्तविक जीवन से होकर गुजरती है जो जीवन की उपेक्षा नहीं करती। दुनिया में दुःख, बीमारी, युद्ध और कई तरह की बुरी चीजें हैं किन्तु अंदर से मिलने वाली शांति उनसे बाधित नहीं होती, वह दुःख एवं पीड़ाओं का सामना करती है। क्रूस के बिना शांति येसु की शांति नहीं है। इसे हम खुद ला सकते हैं किन्तु यह स्थायी नहीं होता।

संत पापा ने कहा कि जब कोई नाराज रहता है तो वह कहता है कि मैं शांति खो चुका हूँ। उन्होंने कहा कि हम तभी परेशान रहते हैं जब हम येसु की शांति के लिए अपना हृदय नहीं खोलते क्योंकि हम दुःखों एवं पीड़ाओं के साथ जीवन को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। ऐसे समय में हमें प्रभु से शांति की कृपा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

शांति की कृपा द्वारा हम आंतरिक शांति को बनाये रख सकते हैं। संत अगुस्टीन ने कहा है, ″ख्रीस्तीय जीवन दुनिया के अत्याचार एवं ईश्वर की सांत्वना के बीच एक यात्रा है।″

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु हमें पवित्र आत्मा द्वारा प्रदान की जाने वाली शांति को स्वीकार करने की कृपा प्रदान करे।


(Usha Tirkey)

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खिलाड़ी निष्ठा, ईमानदारी, मानवता और सामंजस्य का उदाहरण दें, संत पापा

In Church on May 16, 2017 at 2:19 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 16 मई को, वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में राष्ट्रीय पेशेवर लीग शृंखला ए के, जुवेंटस और लात्सियो फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों एवं फुटबॉल के प्रबंधकों तथा अधिकारियों से मुलाकात की।

″कोप्पा इतालिया″ खेल के पूर्व उन्हें सम्बोधित कर, संत पाप ने कहा कि जुवेंटस और लात्सियो फुटबॉल टीम को वे बधाई देते हैं जिन्होंने उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया है। यह उन्हें खेल के मूल्य को प्रकट करने हेतु अधिक प्रतिबद्ध बनाये।

संत पापा ने मुलाकात में उन्हें आधुनिक समय में खेल के महत्व पर प्रकाश डाला। फुटबॉल के प्रति लोगों के आकर्षण एवं रुचि का ख्याल करते हुए, विशेषकर, युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि जो लोग खेल में चैम्पियन बन जाते हैं वे आसानी के लोगों के चहेते बन जाते हैं। इस प्रकार वे अपने व्यवहार से अपने प्रशंसकों के लिए आदर्श बनते हैं। संत पापा ने प्रत्येक खिलाड़ी से कहा कि वे निष्ठा, ईमानदारी, मानवता और सामंजस्य के साक्षी बनें।

उन्होंने खेल के दौरान होने वाले खतरों से सावधान कराते हुए कहा, ″कई बार दुर्भाग्य से खेल स्टेडियम में हिंसा के दृश्य भी देखने को मिलते हैं जो खेल के सुव्यवस्थित संचालन एवं लोगों के मनोरंजन में बाधा पहुँचाता है।″

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि वे खेल के मूल्य को बनाये रखने में सहयोग देंगे। उन्होंने हरेक  की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया जो खिलाड़ियों और पूरे समाज के बीच सामंजस्य के लिए एक माध्यम बन सकता है।

संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 

 


(Usha Tirkey)

फ्राँस के नये राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को संत पापा का तार संदेश

In Church on May 16, 2017 at 2:17 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 16 मई को फ्राँस के नये राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक तार संदेश प्रेषित कर शुभकामनाएं अर्पित की।

39 बर्षीय इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है। यूरोप समर्थक मध्यमार्गी नेता इमैनुएल मैक्रों पहली बार कोई निर्वाचित पद संभाल रहे हैं।

संत पापा ने संदेश में लिखा, ″फ्राँस के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के अवसर पर मैं आपको हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ कि आप इस उच्च पद पर अपने सभी देशवासियों की कुशल सेवा कर सकें। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपका देश अपनी नैतिक एवं आध्यात्मिक  परंपराओं की समृद्ध विविधता के प्रति निष्ठा में, ख्रीस्तीय परम्परा से चिह्नित होकर, अधिक न्याय एवं भाईचारा पूर्ण समाज के निर्माण को ध्यान में रख सके। विविधताओं का सम्मान करे तथा अनिश्चितता और बहिष्कृत परिस्थिति में लोगों पर ध्यान दे सके जो राष्ट्रों के बीच सहयोग और एकता हेतु योगदान देता है।″

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि फ्राँस, यूरोप तथा पूरे विश्व में शांति एवं सार्वजनिक भलाई, जीवन के प्रति सम्मान तथा हरेक के जीवन की रक्षा को प्रोत्साहित करना जारी रखेगा।

संत पापा ने समस्त फ्राँस वासियों की याद कर उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

सैन्य दलों की सेवा में नियुक्त पुरोहितों की 59वें अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संत पापा का संदेश

In Church on May 16, 2017 at 2:14 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): सैन्य दलों की सेवा में नियुक्त पुरोहितों की 59वें अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर, 19 से 21 मई को 40 देशों के कुल 12,000 पुरोहित फ्राँस के लूर्द में एकत्र होंगे जिन्हें संत पापा ने एक संदेश प्रेषित किया। मिलन समारोह की विषयवस्तु है, ″हमें शांति प्रदान कर।″

इस अवसर पर प्रेषित अपन संदेश में संत पापा ने सभी पुरोहितों को उनकी सेवा के लिए धन्यवाद अर्पित करते हुए आध्यात्मिक सामीप्य प्रकट की।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से एक पत्र प्रेषित कर कहा कि संत पापा उन सभी को धन्यवाद देते हैं जो विश्व में शांति को बनाये रखने हेतु प्रयासरत हैं। इस मुसीबत की घड़ी में, यह याद करना आवश्यक है कि शांति एक वरदान है जिसे मानव को पिता ईश्वर से याचना करने से नहीं रुकना चाहिए क्योंकि ईश्वर अपने बच्चों की प्रार्थना सदा सुनते तथा उसका उत्तर देते हैं, वे शांति, भाईचारा एवं एकात्मता के निर्माताओं को प्रेरित करते हैं।

संत पापा ने पुरोहितों का आह्वान किया है कि वे बुराई और घृणा पर विजय पाने हेतु ख्रीस्त के चरणों में आयें तथा सच्चाई के सच्चे साक्षी बनें। अंततः संत पापा ने जोखिमों के बीच रहने वाले सभी पुरोहितों को अपना आध्यात्मिक सामीप्य एवं समर्थन प्रदान किया तथा उन्हें लूर्द की माता मरियम के चरणों सिपुर्द किया है।


(Usha Tirkey)

27 मई को संत पापा करेंगे जेनोवा की यात्रा

In Church on May 16, 2017 at 2:12 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस आगामी शनिवार 27  मई को इटली के जेनोवा शहर की एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा करेंगे। इसकी विस्तृत जानकारी वाटिकन ने प्रकाशित कर दी है।

संत पापा की जेनोवा यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार है-

07.00 – बजे प्रातः वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था से रोम के चम्पिनो हवाई अड्डा प्रस्थान।

07.30 – चम्पिनो हवाई अड्डे से जेनोवा प्रस्थान।

08.15 – जेनोवा में संत पापा का आगमन।

08.30-  संत पापा ″मजदूर जगत ″ से मुलाकात कर उनके चार सवालों का उत्तर देंगे।

10.00 –लिगुरिया के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, गुरूकुल छात्रों, धर्मसमाजियों, लोकधर्मी तथा अन्य

ख्रीस्तीय समुदायों के प्रतिनिधियों से वे संत लोरेंत्सो महागिरजाघर में मुलाकात करेंगे।

12.15- ‘मदोना देला ग्वारदिया’ मरियम तीर्थ में, संत पापा धर्मप्रांतीय मिशनरी युवाओं के साथ

कुछ समय व्यतीत करेंगे।

13:00 – दोपहर का भोजन वे ग़रीबों, शरणार्थियों, आवासहीनों एवं कैदियों के साथ करेंगे।

15.15 – ‘जान्निना गासलिनी’ बाल चिकित्सा अस्पताल के विभिन्न विभागों का दौरा कर वे बच्चों

की भेंट करेंगे।

16.30-   कार द्वारा केन्नेडी प्रांगण की ओर प्रस्थान कर,

17.00 – संत पापा केन्नेडी प्रांगण में ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान करेंगे।

18.30 – तब वे हवाई अड्डा की ओर प्रस्थान।

18.45 – अंततः जेनोवा से रोम हेतु प्रस्थान कर,

19.30 – चाम्पिनो हवाई अड्डा पहुँच जायेंगे।

 

 


(Usha Tirkey)

सच्ची शांति प्राप्त करने के उपाय

In Church on May 16, 2017 at 2:11 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 16 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शांति प्राप्त करने हेतु उदार बनने की सलाह दी।

उन्होंने 16 मई को एक ट्वीट संदेश प्रेषित कर लिखा, ″येसु हमारी निगाहों में देखे जाने, स्वीकार किये जाने एवं प्रेम किये जाने का निमंत्रण देते हैं।″

संत पापा ने अपने इस संदेश को विश्व के नौ भाषाओं में प्रकाशित किया।


(Usha Tirkey)

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