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संत पापा फ्राँसिस का राजदूतों के नाम संदेश

In Church on May 18, 2017 at 3:12 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 18 मई 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने गुरुवार 18 मई को काजिकस्तान, मॉरिटानिया, नेपाल, नाइजर, सूडान और त्रिनिदाद और टोबैगो के राजदूतों से मुलाकात की और उन्हें अपना संदेश दिया।

उन्होंने विशेष रुप से मॉरिटानिया के प्रथम राजदूत मान्यवर श्रीमती मैहहाम का वाटिकन में पहली बार स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अन्तराष्ट्रीय दृश्य वर्तमान में जटिल दिखाई पड़ती है और न ही यह मुसीबतों के काले बादलों से अछूती है। यह हमें बड़ी सावधानी और सतर्कता से अपने कार्यों के निर्वाहन की माँग करती है जिससे हम आपसी तनाव को कम करते हुए शांति के मार्ग में चल सकें। आज बढ़ती समस्याओं के कारण एक आर्थिक और वित्तीय प्रणाली है, जो लोगों की सेवा के बदले, मुख्य रूप से अपनी सेवा कराने और सार्वजनिक प्राधिकरणों का सदुपयोग निरीक्षण करने हेतु की जाती है। अधिकारी सामान्य जन जीवन हेतु जिम्मेदार है लेकिन उन्हें कुछके लोगों के लालच रूपी भूख मिटाने हेतु साधनों की कमी महसूस होती है।

हम बहुत बार परिणाम की चिंता किये बगैर बल का उपयोग करते हुए अपने कार्य को निर्देशित करने की कोशिश करते हैं। एक दूसरी बात जो हमारे बीच मतभेद को बढ़ता है वह है चरमपंथ। इसके द्वारा हम धर्म का दुरुपयोग करते और इसे न्यायसंगत बतलाते हुए अपने में प्रबल शक्ति की भूख को तृप्त करते हैं। हम ईश्वर का पवित्र नाम लेकर हर संभव अपने स्वार्थसिद्धि का प्रयास करते हैं।

इन विकृतियों के कारण हम विश्व की शांति को खतरे में डाल देते हैं। संत पापा ने कहा कि धन दौलत के बदले हमें पुनः मानव जीवन को अर्थव्यवस्था की धुरी बनाने की जरूरत है। हमें साहस और धैर्य के साथ वार्ता के द्वारा आपसी विभिन्नताओं का सामना करने की जरूरत है जिससे शांति कायम हो सके न कि अपनी शक्ति और तुनकमिज़ाजी सलाह का उपयोग जो विभाजन का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि जो इस तरह ईश्वर के नाम का दुरुपयोग करते हैं उनका सामना उचित रुप से करने की जरूरत है। जब हम इन बातों पर अमल करते तो हम संतुलित रूप से सभों के लिए विकास के प्रत्यक्ष कार्य करते हैं।

संत पापा ने विभिन्न देशों के राजदूतों को उनके नये उत्तरदायित्व हेतु शुभकामनाएँ अर्पित की और उनके माध्यम से देश को चरवाहों और काथलिक विश्वासी समुदाय को अपनी शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए उन्हें अपने विश्वास के साक्ष्य द्वारा समाज के विकास हेतु उदारता पूर्ण सहयोग का आह्वान किया।


(Usha Tirkey)

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येसु का प्रेम असीम है, संत पापा

In Church on May 18, 2017 at 3:09 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 18 मई 2017 (वीआर सेदोक): येसु का प्रेम असीम है यह उस प्रेम के समान नहीं है जो सत्ता और अभिमान की खोज करता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने 18 मई को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

प्रवचन में संत पापा ने संत योहन रचित सुसमाचार पाठ के उस अंश पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने प्रेम में बने दृढ़ रहने की सलाह देते हैं, ″यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे, तो मेरे प्रेम में दृढ़ बने रहोगे।″

संत पापा ने कहा कि येसु हमें अपने प्रेम में दृढ़ बने रहने की सलाह इस लिए देते हैं क्योंकि यह पिता का प्रेम है तथा उनकी आज्ञाओं का पालन करने का निमंत्रण। उन्होंने कहा कि दस आज्ञाएँ इसके आधार हैं किन्तु हमें येसु द्वारा दैनिक जीवन से संबंधित शिक्षा का भी पालन करना चाहिए क्योंकि यही सच्चा ख्रीस्तीय जीवन है।

संत पापा ने कहा कि दुनिया में कई तरह प्यार हैं जो हमें येसु के प्रेम से दूर कर देते हैं। जबकि सभी आज्ञाओं का सार एक ही है, पिता से प्रेम। दुनिया हमें धन, अभिमान और सत्ता आदि के प्रति प्रेम को प्रस्तुत करती है। इससे भी बुरी बात ये है कि उन्हें हासिल करने के लिए अनुचित रास्तों को अपनाया जाता है। संत पापा ने कहा कि ये प्यार येसु से नहीं आते और न ही पिता से आते हैं।

संत पापा ने येसु के प्रेम का अर्थ बतलाते हुए कहा कि इसका अर्थ है हम जितनी की आशा करते हैं उससे अधिक। उनके प्रेम की कोई सीमा नहीं है। येसु ने कहा है कि आज्ञाओं का पालन करने के द्वारा हम पिता के प्रेम में दृढ़ बने रह सकते हैं। येसु के लिए महान प्रेम है उनके प्रेम में दृढ़ बने रहना, जिसमें आनन्द है। प्रेम और आनन्द ईश्वर की कृपा है।

उन्होंने सभी ख्रीस्तीयों, पुरोहितों, धर्मसमाजियों और धर्माध्यक्षों से कहा कि वे लोगों को आनन्द बाटें क्योंकि हमारा ख्रीस्तीय मिशन है लोगों के बीच खुशी लाना। उन्होंने सलाह दी कि हम प्रेम एवं आनन्द की कृपा के लिए ईश्वर से याचना करें।

 


(Usha Tirkey)

कोरिया के बीमार लोगों से संत पापा की मुलाकात

In Church on May 18, 2017 at 3:08 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 18 मई 2017 (सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को वाटिकन में कोरिया के बीमारों और बुजूर्गों से मुलाकात की और उन्हें अपना संदेश दिया।

उन्होंने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें यहाँ आने में अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, ″मैं आप सबों को धन्यवाद देता हूँ तथा आपका स्वागत करता हूँ। मैंने आप की कठिनाइयों और पीड़ा के बारे सुन लिया है। मैं विशेष रुप से आप के परिवारों और आप की सेवा में संलग्न सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ।″

हनटिंग्टन रोग से ग्रसित मरीजों और उनके परिवार वालों को बहुत बार शर्म के दौरे से होकर गुजरना पड़ता है क्योंकि वे अन्यों के द्वारा नकार और छोड़ दिये जाते हैं। संत पापा ने कहा आप यहाँ आकर अपने को दुनिया के सामने यह कहते हुए प्रस्तुत कर रहे हैं, “हम छिपे नहीं है।” यह एक नारा मात्र नहीं, वरन् हमारा जीवन समर्पण है जिसे हम सभी को जीने की जरूरत है। हमारे साहस और विश्वास में इस बात की घोषणा हमें येसु की शिक्षा को व्यक्त करता है। अपने प्रेरिताई काल के दौरान उन्होंने रोगियों से मुलाकात की, उनके दुःख तकलीफों को अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने कलंक की उस दीवार को ढह दिया जो लोगों को सम्मान और प्रेम की अनुभूति प्राप्त करने में बाधक था। येसु के लिए बीमार लोगों से मिलने हेतु कभी कोई बाधा नहीं हुई। उन्होंने हमें इस बात की शिक्षा दी कि मानव हमेशा मूल्यवान है जिसकी गरिमा कोई भी व्यक्ति या रोग नहीं मिटा सकती है। दुर्बलता एक बीमारी नहीं है और बीमारी जो कमजोरी की निशानी है हम में यह विचार उत्पन्न न करे कि हम ईश्वर की नजरों में कम मूल्यवान हैं।

बीमारी हमारे लिए एक अवसर देती है जहाँ हम अपने जीवन को दूसरों के साथ साझा करते और मजबूती में बढ़ते हैं। बीमार व्यक्ति जिनसे येसु ने मुलाकात किया वे विश्वास में मजबूत हुए। उन्होंने अपने में अनुभव किया कि वे समझे, सम्मान किये और प्रेम भरी नजरों से देखे जाते हैं। संत पापा ने सभी बीमार लोगों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि आप में से कोई भी यह न समझे कि मैं अकेला हूँ, मैं दूसरों के लिए बोझ के समान हूँ, मुझे जीवन से चला जाना चाहिए। आप ईश्वर की नजरों में कीमती है। आप कलीसिया की नजरों में बहुमूल्य हैं।

संत पापा ने हनटिंग्टन रोग से ग्रसित लोगों के परिवार वालों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जो उनकी सेवा में लगे हैं उसके लिए सह-यात्री के समान हैं क्योंकि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति अपने में अकेलापन और निराशा का अनुभव करता एवं उससे बाहर नहीं निकल सकता है यदि उसके साथ कोई न हो। आप उनके लिए माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन, बच्चे और सब कुछ के समान हैं। इस कठिन यात्रा में आप उनके साथ चलें। संत पापा ने सेवारत लोगों में साहस और उत्साह का संचार करते हुए कहा कि आप अपने में अकेलेपन का अनुभव न करें और न ही अपनी इस सेवा में कोई शर्म या ग्लानि का अनुभव। परिवार जीवन और मानवीय गरिमा का स्थल है जहाँ हम आपसी सहयोग के द्वारा एक-दूसरे को मजबूती प्रदान करते हैं।

संत पापा ने चिकित्सकों, स्वयंसेवी और सेवा कार्य में संलग्न लोगों को अपने संदेश में कहा कि   आप की सेवा मूल्यवान है क्योंकि यह रोगियों और उनके परिवार के लोगों में आशा और विश्वास का संचार करती है। ईश्वर आप को अपना आशीष प्रदान करें जिससे कि आप मानव गरिमा के प्रवर्तक बन सकें। आप ईश्वर के हाथ के सामन हैं जो आशा के बीज बोता है। आप इन बीमार लोगों की आवाज हैं जिनके द्वारा वे अपने अधिकारों को प्राप्त करते हैं।

संत पापा ने अपने संबोधन में आनुवंशिक और अनुसंधान कर्ताओं से कहा कि आप की खोज और कार्य में हम सभी आश्रित हैं जो हमें इस बीमारी से निजात दिलाते हुए हमें जीवन शैली को बेहतर करने हेतु मदद करेगा। ईश्वर आप के कार्यों को अपनी आशीष से भरे दे। उन्होंने उनसे कहा कि आप “फेंकने की संस्कृति” से बचे।

अंत में संत पापा ने हनटिंग्टन रोग से ग्रसित मरीजों से कहा कि आप एक बृहद प्रेरित समुदाय के सदस्य हैं अतः आप येसु की आशा को अपने जीवन के कठिन और दुःख भरे क्षणों में भी बनाये रखें।

तीन नये धर्माध्यक्षों के अभिषेक हेतु कार्डिनल फिलोनी गिनी में

In Church on May 18, 2017 at 3:06 pm


वाटिकन सिटी, गुरूवार 18 मई 2017 (फिदेस) नवीन सुसमाचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल फेरन्दो फिलोनी 18 से 20 मई तक गिनी की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान मोंगोमो में तीन नये धर्माध्यक्षों का अभिषेक करेंगे।

विदित हो कि 01 अप्रैल को संत पापा फ्राँसिस ने इक्वेटोरियल गिनी में दो नये धर्मप्रान्तों एविनायांग और मोंगोमो की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने माननीय कलेस्तोव पौलिनो एसोनो अबागा ओवोनो को एविनायांग धर्मप्रान्त का प्रथम धर्माध्यक्ष नियुक्त किया था जबकि फादर जुआन दोमिंगो-बेका एसोनोआयंग, सीएमएफ कालरिसियन बेटा गुरुकुल में कार्यरत खजांची को उन्होंने नव घोषित धर्मप्रान्त मोंगोमा का प्रथम धर्माध्यक्ष नियुक्त किया था। संत पापा ने उसी दिन पुरोहित मिगुएल एन्जल नगुमा बी, एसबीडी  सेलेशियन धर्मसमाज के परमाधिकारी को एबिबीयंन धर्मप्रान्त का धर्माध्यक्ष घोषित किया था।

अपनी एक सप्ताह की प्रेरितिक यात्रा के दौरान कार्डिनल फिलोनी नये धर्माध्यक्षों के पद भार ग्रहण समारोह में भाग लेने के अलावे एक्वेटोरियल गिनी के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन, विभिन्न धर्मप्रान्तों के धर्मसमाजी तथा लोकधर्मियों से भी मुलाकात करेंगे। 23 मई को वे ओयाला, एक्वीटोरियल गिनी की प्रशासनिक राजधानी की भेंट करेंगे। ज्ञात हो कि प्रजात्रंत  इक्वेटोरियल गिनी जो अफ्रीका महादेश में एक सबसे छोटा प्रान्त है एक समय स्पानी उपनिवेश हुआ करता था। कलीसियाई सांख्यिकी वार्षिक पुस्तिका के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 28,051 वर्ग किलो मीटर है जबकि इसकी आबादी कुल 759,000 है जिसमें काथलिकों की संख्या 736,000 है।

कोरिया के राष्ट्रपति ने दिया सच्चा ख्रीस्तीय का उदाहरण

In Church on May 18, 2017 at 3:05 pm


दक्षिण कोरिया, बृहस्पतिवार, 18 मई 2017 (फिदेस): दक्षिण कोरिया के नव नियुक्त राष्ट्रपति मून जाय इन ने एक आदर्श काथलिक का उदाहरण पेश किया, जब उन्होंने नये गृह में प्रवेश करने एवं उसमें निवास करने के पूर्व उसकी आशीष करायी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति भवन ″ब्लू हाऊस″ में राष्ट्रपति का कार्यालय है तथा राष्ट्रों के शीर्ष अधिकारी जब कोरिया की यात्रा करते हैं तो वहीं उनका स्वागत किया जाता है। राष्ट्रपति मून ने सेओल के होंगजे डोंग स्थित पवित्र त्रिएक गिरजाघर के एक काथलिक पुरोहित को आशीष हेतु निमंत्रण दिया था।

फिदेस समाचार के अनुसार होंगजे डोंग के पल्ली पुरोहित फा. पौल रू योंग मन ने राष्ट्रपति के निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए 13 मई को राष्ट्रपति भवन पर ईश्वर की आशीष प्रदान की। आशीष की समारोही धर्मविधि में पुरोहित के साथ कुछ धर्मबहनें भी उपस्थित थीं जिन्होंने राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी पर हाथ रखकर प्रार्थना की ताकि वे ″राजा सुलेमान की तरह प्रज्ञा से पूर्ण हों।″ पुरोहित ने उन्हें सलाह दी कि किसी भी निर्णय लेने के पूर्व वे पवित्र आत्मा से प्रार्थना करें ताकि पवित्र आत्मा उनके ऊपर आकर उन्हें प्रकाश एवं सामर्थ्य प्रदान करेंगे। फा. पौल ने राष्ट्रपति के बारे बतलाया कि वे एक विनम्र, उदार एवं धर्मी व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति ने फादर को बतलाया कि वे हमेशा रोजरी की अंगूठी धारण करते हैं जो माता मरियम के प्रति श्रद्धा का चिन्ह है।

ब्लू हाऊस में प्रवेश समारोह फातिमा की माता मरियम के दिव्यदर्शन पर्व के दिन सम्पन्न हुआ अतः देश को राष्ट्रपति की सेवा माता मरियम के संरक्षण में आरम्भ हुई। पल्ली पुरोहित ने राष्ट्रपति को शांति के एक प्रतीक की तस्वीर भेंट की।


(Usha Tirkey)

उड़ीसा में फातिमा की माता मरियम का उत्सव

In Church on May 18, 2017 at 3:03 pm

उड़ीसा, गुरुवार, 18 मई, (उका न्यूज) उड़ीसा के सुदूर सलीमांगुच्चा पल्ली में विश्वासियों ने करीब तीन हजार की संख्या में जमा होकर फातिमा में माता मरियम के दिव्य दर्शन की 100वीं वर्षगाँठ मानते हुए मिशनरीस ऑफ चैरिटी धर्मसमाज के एक सेवा केन्द्र का उद्घाटन किया।

कटक-भुनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बरवा ने धर्मविधि के अनुष्ठान में स्थानीय विश्वासियों की अगुवाई की और संत मदर तेरेसा की धर्मबहनों के एक नये घर की आशीष करते हुए कहा, “यह ग़रीबों, जरूरतमंदों, हाशिए पर जीवन यापन करने वाले और वंचित लोगों के लिए एक उपहार है।

सालीमांगुच्चा पल्ली जो कटक-भुनेश्वर महाधर्माप्रांत में 18 साल पहले स्थापित किया गया था जिसके अंतर्गत 350 काथलिक परिवार आते हैं। पल्ली पुरोहित शिशिर सोबानायक ने कहा कि एम. सी. धर्मबहनें इस क्षेत्र में विगत कई दशकों से अपनी सेवाएँ देती आ रही हैं।

धर्माध्यक्ष ने कहा कि विश्वासियों की यह तीव्र अभिलाषा थी कि उनकी पल्ली में धर्मबहनों का कोई समाज कार्य करें। “हम धर्मबहनों के कई धर्मसंघों से संपर्क किया और अंततः एम.सी. धर्मबहनों ने मानव समाज की सेवा हेतु अपना एक समुदाय हमारे बीच खोला।” युवा संग के नेता राजन सिंध ने धर्मसमाज के आगमन की खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमारे बीच एम. सी. धर्मबहनों का आना सौभाग्य की बात है। वे मानवता की सेवा के लिए सारी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।”


(Usha Tirkey)

अफगानिस्तान युद्ध में कई बच्चों के मारे जाने की आशंका

In Church on May 18, 2017 at 3:02 pm

 

वाटिकन रेडियो, गुरुवार, 18 मई (वी.आर) अफगानिस्तान में चल रहे विभिन्न दलों के बीच युद्ध के कारण असंख्य बच्चों के हताहत होने की शांका को लेकर संयुक्त राष्ट्र के देशों ने अपनी चिंता जताई है।

अफगानिस्तान के उनामा में संयुक्त राष्ट्र के देशों द्वारा सहायता हेतु गठित समिति ने कहा कि सन् 2017 के चार महीनों के अन्तराल में देश में गृह युद्ध की स्थिति में अधिकतर बच्चों की जानें गई हैं। उनामा ने अपने आँकड़ों के मुताबिक कहा कि 01 जनवरी से 30 अप्रैल तक कुल 283 बच्चे मारे गये हैं जो कि 2016 के आँकड़े से 21 प्रतिशत अधिक है।

उनामा के रिपोर्ट अनुसार बच्चों के मारे जाने का कारण युद्ध के दौरान उपयोग किये गये विस्फोट उपकरणों और जमीनी युद्ध रहे हैं। करीब 700 बच्चे इस युद्ध के कारण अपंग हो गये हैं। इनकी आँखों में अपने माता-पिता और परिवार से प्रियजनों को मरते देखना तथा अपने आशियानों के उजाड़े जाने का सदमा स्पष्ट देखा जा सकता है।

उनामा ने युद्ध दलों से निवेदन किया है कि वे बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखने के साथ-साथ युद्ध ग्रस्त क्षेत्रों को चिन्हित कर, युद्ध में उपयोग किये गये विस्फोटक वस्तुओं के अवशेष की सफाई करते हुए उसे अपने ही क्षेत्र में नष्ट करें जिससे बच्चे युद्ध के दुष्प्रभाव के शिकार न हों।

भूतपूर्व सिपाहियों को संत पापा का सम्मान

In Church on May 18, 2017 at 3:00 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 18 मई 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने पोलैंड के भूतपूर्व सिपाहियों को सम्मानित किया जिन्होंने 1944 में मॉन्ते कस्सिनो की लड़ाई लड़ी थी।

″सेकेंड कोर्पस″ के पूर्व पोलिश सैन्य दल, द्वितीय विश्व युद्ध की यादगारी मनाने रोम में एकत्रित है जिनका अभिवादन संत पापा ने साप्ताहिक आमदर्शन समारोह के दौरान किया।

उन्होंने आमदर्शन के दौरान पूर्व सिपाहियों को सम्बोधित कर कहा, ″आप जिन्होंने अपने तथा दूसरे देशों की स्वतंत्रता हेतु संघर्ष किया, आपके प्रयासों एवं आपके साथियों के जीवन बलिदान ने यूरोप एवं समस्त विश्व में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

मोंते कस्सिनो की लड़ाई, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों द्वारा चार हमलों की एक श्रृंखला है जो 17 जनवरी 1944 से 19 मई 1944 के बीच लड़ी गयी थी जिसमें दोनों पक्षों के हज़ारों सैनिकों की जानें गयीं। उद्देश्य था इटली को जर्मनी से मुक्त करना।


(Usha Tirkey)

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