Vatican Radio HIndi

Archive for May 19th, 2017|Daily archive page

सच्चा धर्म सिद्धांत हमें जोड़ता है

In Church on May 19, 2017 at 12:59 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को संत मार्था ने अपने निवास में प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान प्रवचन में कहा कि विचारधाराएँ हमें विखंडित करतीं जबकि सच्चा धर्म सिद्धांत हमें आपस में जोड़ता है।

संत पापा ने दैनिक पाठों के आधार पर अपना चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा, “हम मानव हैं, हम पापी हैं।” प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय में भी आपसी ईर्ष्या, द्वेष और अधिकार हेतु संघर्ष की भावना थी। “कठिनाइयाँ कलीसिया के जीवन में शुरू से ही रहीं हैं।” लेकिन हमारी पापमय स्थिति हमें नम्र बनाती और येसु के पास लेकर आती है जो हमें पापों से मुक्ति दिलाते हैं। गैरख्रीसतियों जो पवित्र आत्मा के बुलावे द्वारा ख्रीस्तीय समुदाय में सम्मिलित होने हेतु बुलाये जाते हैं, प्रेरितों और समुदाय के बुज़ुर्गों द्वारा कुछ पौलुस और बरनाबस के पास आतोखिया ले जाये जाते हैं। हम यहाँ दो दलों को पाते हैं जहाँ एक दल “अच्छी आत्मा” तो दूसरा अपने में “अस्पष्ट” कड़ा निर्णय लेता है।

प्रेरितों का दल अपने में समस्याओं का समाधान विचार-विमर्श करते हुए निकालना चाहा तो दूसरा दल समस्याओं को और भी जटिल बनाते हुए कलीसिया को विभाजित करता है। प्रेरित समस्याओं पर विचार-विमर्श करते और उसका हल निकालते हैं लेकिन यह राजनीति समस्या नहीं है। वे पवित्र आत्मा द्वारा संचालित किये जाते हैं अतः वे देवमूर्तियों को बलि चढाये और गाल घोटे हुए पशुओं का माँस सेवन करने से परहेज करते हैं।

संत पापा ने कहा कि आत्मा हमें मुक्त करता है अतः अख्रीस्तीय खतना के बिना भी कलीसिया के अंग बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह विषयवस्तु प्रथम कलीसियाई महा धर्मसभा का मुद्दा था जहाँ संत पापा और धर्माध्यक्षों ने पवित्र आत्मा के मुद्दे पर प्रकाश डाला। यह कलीसिया का कर्तव्य है कि इस धर्म सिद्धांत को सुस्पष्ट किया जाये जिससे हम सुसमाचार में येसु की शिक्षा को समझ सकें जो कि पवित्र आत्मा द्वारा उत्प्रेरित है।

संत पापा ने कहा कि लेकिन बहुत से लोग हैं जो अन्यों को दिग्भ्रमित करते और उनकी आत्मा को अशांत कर देते हैं। वह धर्मविरोधी बातें कहता है, ऐसे नहीं कहा जाना चाहिए, कलीसिया के सिद्धांत ऐसे हैं…। ऐसी बातें ख्रीस्तीय समुदाय को विभाजित करती हैं। धर्म सिद्धांत का विचारधारा में परिवर्तन हमारे लिए समस्या उत्पन्न करती है। प्रेरितों ने इस पर विचार मंथन करते हुए अपने हृदय को पवित्र आत्मा के कार्यों हेतु खुला रखा।

संत पापा ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि कलीसिया के अपने धर्म सिद्धांत हैं जो येसु की शिक्षा पर आधारित और पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित है जो “हमेशा खुला और स्वतंत्र” है। धर्म सिद्धांत और धर्मसभा हमें एक समुदाय के रुप में पिरो कर रखते हैं जबकि “विचारधारा” हमें विभाजित करती है।


(Dilip Sanjay Ekka)

Advertisements

19 मई को सन्त पापा ने किया ट्वीट

In Church on May 19, 2017 at 12:58 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार, 19 मई को एक ट्वीट प्रकाशित कर हम सब से जीवन के उद्देश्य पर मनन-चिन्तन का आग्रह किया है।

19 मई के ट्वीट पर सन्त पापा ने लिखा, “अपने जीवन के स्वर को हम सदैव ऊँचा रखने का प्रयास करें, यह याद करते हुए कि हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, किस महान पुरस्कार के लिये हम अस्तित्व में हैं, किसके लिये काम करते, संघर्ष करते तथा दुःख भोगते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

हन्टिंगटन पीड़ितों से सन्त पापा ने कहाः आप बहुमूल्य हैं

In Church on May 19, 2017 at 12:56 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): वाटिकन स्थित पौल षष्टम भवन में सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को हन्टिंगटन रोग से ग्रस्त पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

हन्टिंगटन रोग, पार्किनसन बीमारी जैसी एक दुर्लभ और विकृतिपूर्ण न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। यह एक जननिक विकार है जिससे, विश्वव्यापी स्तर पर, प्रति 1000 व्यक्तियों में 5 से 10 व्यक्ति ग्रस्त होते हैं। एशिया में प्रति दस लाख व्यक्तियों में एक व्यक्ति जबकि, वेनेज्यूएला के लेक माराकायबो क्षेत्र में प्रति एक लाख में 700 व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं। इस रोग से पीड़ित लोगों में गम्भीर शारीरिक विकारों के अलावा वृद्धावस्था के आते ही डिमेनशिया यानि भूल जाने की बीमारी शुरु हो जाती है।

गुरुवार को, हन्टिंगटन पीड़ितों, उनके परिजनों, उनकी देख-रेख करनेवालों, चिकित्सकों, शोधकर्त्ताओं एवं वकीलों को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “बहुत अधिक समय तक हन्टिंगटन रोग से ग्रस्त लोगों के जीवन को प्रभावित करनेवाला भय एवं कठिनाइयाँ बनी रही हैं जिसने इनके प्रति ग़ैरसमझदारी एवं बाधाओं को उत्पन्न किया है तथा इन्हें हाशिये पर रहने के लिये बाध्य किया है।”

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, इस रोग से पीड़ित लोगों एवं उनके परिजनों को कई बार लज्जा, अलगाव एवं परित्यक्ति का कटु अनुभव करना पड़ा है। आज, हालांकि, हम यहाँ उपस्थित हैं क्योंकि हम अपने आप से तथा सम्पूर्ण विश्व से कहना चाहते हैं, “छिपा हुआ अब कभी नहीं!”

पीड़ितों को सन्त पापा फ्राँसिस ने कलीसिया के समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा, “आप में से कोई भी स्वतः को अकेला न महसूस करे; आप में कोई स्वतः को बोझ न समझे; कोई भी भागने के लिये स्वतः को मजबूर न समझे। आप ईश्वर की दृष्टि में बहुमूल्य हैं; आप कलीसिया की दृष्टि में अनमोल हैं।”

अन्वेषकों एवं शोधकर्त्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए सन्त पापा ने उनसे आग्रह किया कि वे अपना काम अनवरत जारी रखें। इस क्षेत्र में उन्होंने ठोस एकात्मता का आह्वान करते हुए कहा कि हर शोध कार्य को सुसंगत ढंग से तथा मानव व्यक्ति की अलंघनीय प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिये।


(Juliet Genevive Christopher)

कॉरपुस क्रिस्टी शोभायात्रा हुई मुल्तवी

In Church on May 19, 2017 at 12:54 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय के निर्देशक ने एक घोषणा कर बताया कि सन्त पापा फ्राँसिस ने कॉरपुस क्रिस्टी शोभायात्रा को मुल्तवी करने का फ़ैसला किया है।

निर्देशक ग्रेग बुरके ने गुरुवार को घोषित किया, “सन्त पापा फ्राँसिस ने कॉरपुस क्रिस्टी धर्मविधिक समारोह के आयोजन को गुरुवार 15 जून के बजाय रविवार 18 जून को रखने का फ़ैसला किया है।”

बुर्के ने स्पष्ट किया कि सन्त पापा का निर्णय ईश प्रजा एवं पुरोहितों तथा रोम धर्मप्रान्त के विश्वासियों की बेहतर भागीदारी के पक्ष में लिया गया है। उन्होंने कहा, “दूसरा कारण यह है कि गुरुवार सप्ताह का सामान्य दिन है तथा अपने काम-धन्धों में व्यस्त रहने के कारण रोम के लोग समारोह में शरीक नहीं हो पायेंगे।”

पवित्र यूखारिस्त में प्रभु येसु ख्रीस्त के रक्त एवं शरीर की यथार्थ उपस्थिति सम्बन्धी विश्वास के आदर में प्रति वर्ष कॉरपुस क्रिस्टी महापर्व मनाया जाता है। कलीसियाई धर्मविधिक वर्ष के अनुसार यह महापर्व पवित्र तृत्व महापर्व के बाद पड़नेवाले गुरुवार को मनाया जाता है किन्तु इस वर्ष सन्त पापा फ्राँसिस ने इसे रविवार को मनाये जाने का निर्णय लिया है।

रोम में प्रतिवर्ष कॉरपुस क्रिस्टी महापर्व पर कलीसिया के परमाध्यक्ष रोम स्थित मरियम महागिरजाघर तथा सन्त जान लातेरान महागिरजाघर के बीच पवित्र यूखारिस्त सहित शोभायात्रा का नेतृत्व करते हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

कार्डिनल ने असमानता एवं आय विषमता से निपटने हेतु उद्यमियों का किया आह्वान

In Church on May 19, 2017 at 12:51 pm

रोम, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): रोम में गुरुवार, 18 मई को “अर्थव्यवस्था एवं समाज” के लिये निर्धारित, अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के तीसरे संस्करण के अवसर पर, पुरस्कार विजेताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपतियों एवं उद्यमियों को सम्बोधित करते हुए वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने असमानता एवं आय विषमता से निपटने हेतु उद्यमियों का आह्वान किया।

सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा प्रकाशित विश्व पत्र “चेनतेसिमुस आन्नुस” के नाम पर स्थापित न्यास द्वारा “अर्थव्यवस्था एवं समाज” में रचनात्मक योगदान देनेवालों को प्रतिवर्ष पुरस्कृत किया जाता है।

इस वर्ष का पुरस्कार समारोह न्यास द्वारा विविध विषयों जैसे संघर्षों के युग में विकल्प, नौकरियों की रचना, डिजिटल युग में मानव की अखण्डता तथा एकात्मता एवं नागरिक मूल्यों को प्रोत्साहन पर आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान सम्पन्न हुआ।

काथलिक कलीसिया की सामाजिक धर्मशिक्षा को बरकरार रखते हुए अपने शोध प्रबन्धों द्वारा  विश्व की अर्थव्यवस्था में रचनात्मक योगदान देने के लिये इस वर्ष जर्मनी में काथलिक धर्मतत्वविज्ञान एवं पर्यावरणीय नैतिक शास्त्र के प्राध्यापक डॉ. मारकुस वॉग्ट, फ्राँस के काथलिक पुरोहित एवं पत्रकार फादर दोमिनीक ग्राईनर तथा जर्मन रेडियो के कार्यक्रम निर्माता डॉ. बुखार्ड शेफर्स को प्रदान किया गया है।

पुरस्कार समारोह में कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने कहा, “हमें वास्तव में समाज के सभी एजेंटों की भागीदारी की आवश्यकता है, विशेष रूप से, उद्यमियों की भागीदारी की जरूरत है, न केवल अनुदान के प्रति वचनबद्धता बढ़ाने के लिए बल्कि एक निर्णायक तरीके से, असमानता की समस्या और आय की विषमता जैसी समस्याओं का समाधान ढूँढ़ने के लिये।”

कार्डिनल महोदय ने कहा, सामाजिक असमानता और आय की विषमता, विकसित देशों में भी, कई लोगों एवं परिवारों में दुर्बलता को प्रश्रय देती है इसलिये इसके अन्त हेतु उदारता की भावना को प्रोत्साहन दिये जाने की नितान्त आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “इस सन्दर्भ में सुसमाचार हमारे समक्ष ज़खेयुस का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं जिसने प्रभु येसु की दृष्टि से विस्मित होकर अपनी आधी सम्पत्ति निर्धनों में वितरित कर दी थी।”

यूरोप में आज ज्वलंत “आप्रवासियों एवं शरणार्थियों”  के विषय पर बोलते हुए कार्डिनल पारोलीन ने कहा ने कि मौलिक लक्ष्य “प्रत्येक व्यक्ति के प्रतिष्ठापूर्ण जीने के अधिकार की सुरक्षा होना चाहिये ताकि किसी को भी आप्रवास के लिये बाध्य न होना पड़े।” उन्होंने कहा कि इसके लिये ज़रूरी है कि विश्व की सरकारें एवं अन्तरराष्ट्रीय समुदाय “शांति के पक्ष में निर्णायक प्रयास” करे।


(Juliet Genevive Christopher)

%d bloggers like this: