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पवित्र आत्मा के बिना हमारा विश्वास ठंडा और विचार मात्र है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 29, 2017 at 3:42 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 29 मई 2017 (सेदोक) : ″कोई भी निर्णय लेने से पहले हमें पवित्र आत्मा की आवाज सुनने और सीखने की जरुरत है। यदि इसमें आत्म परीक्षण नहीं है तो हमारा विश्वास एक विचार मात्र है।″ उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 29 मई को वाटिकन स्थित अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन पवित्र युखारिस्त समारोह के दौरान कही।

अगले रविवार पेंतेकोस्त महापर्व को ध्यान में रखते हुए संत पापा ने अपना प्रवचन पवित्र आत्मा पर केंद्रित करते हुए कहा कि कलीसिया हमसे प्रार्थना का अपेक्षा करती है जिससे कि पवित्र आत्मा हमारे हृदय में, हमारी पल्ली और समुदाय में आ जाये। संत पापा ने कहा कि प्रेरित चरित से लिये गये प्रथम पाठ को हम ″एफेसियों का पेंतेकोस्त″ कह सकते हैं। एफेसुस के समुदाय ने विश्वास को पाया था पर उन्हें पवित्र आत्मा के बारे में कुछ भी पता नहीं था। वहाँ के लोग अच्छे थे विश्वासी थे पर ईश्वर के दान पवित्र आत्मा से अनभिज्ञ थे। जब संत पौलुस ने उनपर हाथ रखी तो पवित्र आत्मा उनपर उतरा और वे विभिन्न भाषाएँ बोलने लगे।

पवित्र आत्मा हृदय को प्रेरित करता है।

संत पापा ने कहा, आज के सुसमाचार में हम पाते हैं कि पवित्र आत्मा ने निकोदेमुस, पापिनी स्त्री, समारितानी, रक्तश्राव से पीड़ित स्त्री को येसु के पास जाने के लिए प्रेरित किया। संत पापा ने अपने आप से प्रश्न करने के लिए कहा कि पवित्र आत्मा का हमारे जीवन में कौन सा स्थान है ? क्या मैं उसकी आवाज सुन सकता हूँ? क्या मैं कोई भी निर्णय लेने से पहले पवित्र आत्मा की आवाज सुन सकता हूँ?  क्या मेरा हृदय भावनाहीन और स्थिर है? सुसमाचार में हम फरीसियों को पाते हैं कि वे ईश्वर में विश्वास करते थे वे ईश्वर के नियमों को भली भांति जानते थे परंतु उनका हृदय स्थिर, बंद और भावनाहीन था। वे किसी के लिए भी चिंता नहीं करते थे।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा की आवाज को सुनकर और उसपर आत्म परीक्षण करते हुए उसे स्वीकार करते हैं तो यह सही मार्ग है।″यदि मुझे बीमार व्यक्ति से मिलने जाने की इच्छा हुई या अपने जीवन को बदलने की इच्छा हुई तो यह सिर्फ भावना या इच्छा मात्र नहीं है पर यह पवित्र आत्मा की प्रेरणा है। एक व्यक्ति जिसके हृदय में इस तरह की भावना नहीं आती है वह आत्म परीक्षण नहीं करता है तो उसका विश्वास ठंडा है उसका विश्वास मात्र एक विचारधारा है।″

संत पापा ने कहा,″ हम सभी को पवित्र आत्मा के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने की जरुरत है। हमें अपने दैनिक जीवन की राहों पर चलने के लिए पवित्र आत्मा की अगुवाई के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। पवित्र आत्मा हमें अच्छे और कम अच्छे के बीच भेद करने की कृपा प्रदान करे क्योंकि अच्छे और बुरे के बीच तो आसानी से भेद किया जा सकता है।

प्रेरित संत योहन ने सात कलीसिया, जो उस समय की सात धर्मप्रांत थी, को पवित्र आत्मा की आवाज सुनने और स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया था। प्रवचन के अंत में संत पापा ने विश्वासियों से आग्रह करते हुए कहा,″आइए, हम प्रभु से पवित्र आत्मा की आवाज सुनने और उसकी भाषा को सीखने व समझने की कृपा मांगे। पवित्र आत्मा हमारी कलीसिया, हमारे समुदाय, हमारी पल्ली और हमारे परिवारों को जो कहना चाहते हैं, उसे हम सुन और समझ सकें।″


(Margaret Sumita Minj)

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