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इताली-लातीनी अमेरिकी संगठन की 50वीं बरसी, संत पापा का संदेश

In Church on June 30, 2017 at 3:20 pm

वाटिकन सिटी, 30 जून 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने इताली-लातीनी अमेरिकी संगठन की 50वीं बरसी के अवसर पर संगठन के लोगों को संबोधित करते हुए अपने संदेश दिया।

संत पापा ने दोनों देशों के बीच विकास और तालमेल हेतु गठित संगठन के सदस्यों को वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप तीन मुख्य बिन्दुओं की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि लातीनी अमेरीका के देश अपने इतिहास, संस्कृति और प्रकृति ससंधनों में धनी हैं साथ ही देश के निवासी अपने में अच्छे और दूसरों से अच्छा संबंध बनाने में सबल है। हमें अपने इन सामाजिक गुणों की प्रशंसा करते हुए इनका विस्तार करने की जरूरत है। दूसरी ओर अपनी इन सारी अच्छाइयों के बावजूद वर्तमान अर्थव्यवस्था ने बेरोजगारी और सामाजिक असमानता को जन्म दिया है जिसके कारण हमने अपने सामान्य निवास पृथ्वी का दोहन और दुरुपयोग किया गया है। ऐसी परिस्थिति में हमें लोगों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण करने की आवश्यकता है जो हमें उनकी ज़रूरतों से रूबरू करेगा और हम लोक धन को महत्व दे सकेंगे।

दूसरी महत्वपूर्ण बात हमारे लिए यह है कि हमें एकजुट होकर देश के लोगों की ज़रूरतों हेतु कार्य करना है। समन्वयन का अर्थ अन्यों के हाथों अपनी व्यवस्था को सुपुर्द करना नहीं वरन यह हम से समय और प्रयास की माँग करता है जो हम में गुप्त रुप से व्याप्त और अप्रशंसनीय है। लातीनी अमेरीका को एकजुट होकर वैश्विक प्रवासी समस्या का समाना करने की जरूरत है जो वर्षों से चली आ रही है और वर्तमान में और भी गहराती जान पड़ती है। अपने जीवन में जरूरत की पूर्ति हेतु हमारे लोग “नये रमणीय” स्थानों की खोज करते हैं जिससे वे स्थाई रुप से कार्य करते हुए सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें। इस खोज में कितनों को दुःख और अपने मौलिक अधिकारों को खोना पड़ता है। इसके कारण बहुत से बच्चे और युवा मानव व्यापार और दुराचार के शिकार होते और अपराध की दुनिया में खो जाते हैं। प्रवास एक विभाजन करने वाला मंच है जहाँ परिवार, बच्चे, माता-पिता एक दूसरे और अपने वाजूद से अलग हो जाते और सरकार स्वयं इस हकीकत से अपने में विभक्त हो जाती है। हमें इस समस्या के समाधान हेतु एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है।

संत पापा ने कहा कि हमारे लिए तीसरी मुख्य बात है प्रचार। हमें वार्ता की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने की अति आवश्यकता है। बहुत से देशों को आज राजनीति, सामाजिक और अर्थव्यवस्था की दृष्टिकोण से कठिनाई का समाना करना पड़ रहा है। देश के नागरिक अल्प साधनों की स्थिति में भ्रष्टाचार के शिकार होते जा रहे हैं। हमें राजनीतिक स्तर पर संगठन और देशों के मध्य वार्ता का प्रचार करने की जरूरत है। इस समन्वयन और वार्ता के प्रचार में व्यवहार कुशलता द्वारा हम शांति और एकता की स्थापना कर सकते हैं। आज वार्ता हमारे लिए अपरिहार्य है लेकिन हम “बहरों से वार्ता” नहीं कर सकते हैं। यह हमें एक दूसरों को सुनने की माँग करता है जहाँ हम विश्वास में एक दूसरे के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान करते जो दोनों पक्षों को मजबूत प्रदान करती, आपसी मित्रता को बढ़ावा देती तथा न्याय और शांति की स्थापना करती है।

संत पापा ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि मैं आप सभों को प्रोत्साहित करता हूँ कि आप अपने समर्पण के द्वारा अमेरिकी महाद्वीप के मध्य आपसी तालमेल बनाते हुए एक न्याय और सहिष्णुता पूर्ण मानव समाज की स्थापना हेतु प्रयासरत रहें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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जर्मन संसद द्वारा समलैंगिक विवाह को स्वीकृति

In Church on June 30, 2017 at 3:18 pm

वाटिकन सिटी, 30 जून 2017 (रेई)  जर्मन की संसद के समलैंगिक विवाह और समलैंगिकों द्वारा गोद लेने के प्रेषित बिल को स्वीकार कर लिया है।

यह बिल सामान्य चुनाव के तीन महीने बाद सामाजिक प्रजातंत्र द्वारा पेश किया गया जिसे 226 मतों की तुलना में 393 मतों का समर्थन मिला। जर्मनी के चांसलर एंजेला मेर्केल ने अपने विधायकों के विरूद्ध इस बिल के विपरीत अपने मत डालें। उन्होंने कहा, “विवाह मेरे लिए पुरुष और स्त्री के बीच का संबंध है” जो जर्मन संविधान के की धारा 6 में भी निहित है।
कार्डिनल रेइनहार्ड मार्क्स, जर्मन धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा, “विवाह केवल ख्रीस्तीय मान्यता नहीं वरन स्त्री और पुरुष के बीच प्रेम और जीवन का एक समन्वयन है जो एक नये जीवन को जन्म देता है। हम विश्वास करते हैं कि देश विवाह की सुरक्षा करते हुए इसे प्रोत्साहित करने में सहायता करेगा।”

पारिवारिक प्रेरिताई हेतु जर्मन धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष, बर्लिन के महाधर्माध्यक्ष हेइनर कोच ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा, “मुझे खेद है कि इस विधेय ने विवाह के मूलभूत सार की अनदेखी की है। एक अन्तर बनाने का अर्थ भेदभाव नहीं है।” उन्होंने कहा कि विवाह के पवित्र संस्कार ने अपने में राजनीतिक जामा को वहन कर लिया है।


(Dilip Sanjay Ekka)

धर्माध्यक्ष लियोपोल्ड गोजालेंज, मैस्किको के धर्माध्यक्ष नियुक्त

In Church on June 30, 2017 at 3:16 pm

वाटिकन सिटी, 30 जून 2017 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने धर्माध्यक्ष लियोपोल्ड गोजालेंज को अकापुल्को, मैस्किको का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया।

धर्माध्यक्ष लियोपोल्ड गोजालेंज का जन्म 31 अक्टूबर 1950 अबासोलो के इरापुआतो धर्माप्रान्त में  हुआ था। उन्होंने कलीसिया से संबंधित विषयों पर अपना शिक्षण मोरेलिया के मेजर गुरुकुल से पूरा किया। उसके बाद उन्होंने तोलुका के प्रशिक्षण स्कूल से मनोविज्ञान संकाय और मानव विज्ञान  व्यवसाय से संबंधित एक डिग्री प्राप्त की जो ग्रेगोरियन परमधर्मपीठीय विश्वविद्यालय के संबद्ध है। उनका पुरोहिताभिषेक 23 नवम्बर सन् 1975 को मोरेलिया धर्माप्रान्त में संपन्न हुआ।

एक पुरोहित के रुप में उन्होंने पुरोहिताई प्रशिक्षण, दर्शनशास्त्र, ईश शास्त्र, मनोविज्ञान और पौट्रोलोजी जैसे विषयों पर एक प्राध्यापक स्वरूप अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने मोरेलिया के मेजर गुरुकुल में अनुशासन अधिकारी, अध्ययन की देख-रेख हेतु प्रधान अधिकारी और उसके बाद मोरेलिया के मेजर गुरुकुल में ही सहायक रेक्टर का पद भार सँभाला। 1995 से 1999 तक वे धर्माप्रान्त में सामान्य पुरोहित के रुप में कार्यरत रहे।

18 मार्च सन् 1999 में वृ बोनकरिया और मोरेलिया के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये और 19 मई धर्माध्यक्ष अभिषेक उपरान्त उनका तबादला 09 जून 2005 को तापाकुला धर्माप्रान्त में हो गया। वे दो वर्षों तक मैक्सिको धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अलावे उन्होंने अन्तरधार्मिक वार्ता सम्मेलन के अध्यक्ष का पदभार भी सँभाला।


(Dilip Sanjay Ekka)

मैक्सिको और यूएस के राष्ट्रपतियों का जी20 में मिलन

In Church on June 30, 2017 at 3:15 pm

वाटिकन रेडियो, 30 जून 2017 (वीआर) आगामी सप्ताह जर्मनी में होने वाले जी20 संगोष्ठी के दौरान मैक्सिको और यूएस के राष्ट्रपतियों के बीच आपसी मिलन के अवसर है जहाँ वे अपने बीच 6 महीने से चली आ रही द्विपक्षीय तकरार में सुधार ला सकते हैं।

संवाददाता जेम्स ब्लेयर्स के अनुसार मैक्सिको से विदेश मंत्री ने इस बात की पुष्टि की है कि मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो और डोनल्ड ट्रंफ जर्मनी में होने वाली जी20 की संगोष्ठी में आगामी सप्ताह एक दूसरे से भेंट करेंगे।

विदित हो कि अमरीका के राष्ट्रपति द्वारा मैक्सिको की सीमा रेखा पर दीवार निर्माण के भुगतान की मांग करने पर एनरिक पेना नीतो ने जनवरी के महीने में आकस्मिक रुप से अपनी वाशिंगटन की यात्रा रद्द कर दी थी। इस विषय पर अमेरीकी अधिकारियों ने इस बात की धमकी दी थी कि मैक्सिको पर इसका भुगतान आयात किये जाने वाली वस्तु पर कर के तौर पर किया जायेगा। इस बात को निरस्त कर दिया गया क्योंकि यह उत्तरी अमेरिका से स्वतंत्र व्यापार के समझौते में सुधार को निराधार और व्यर्थ कर देता है। अगस्त के महीने में नाफ्ता समझौते शुरू होने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया है कि उसने साथ उचित सौदा किया जाना चाहिए और मैक्सिको के साथ लाखों रुप में बची व्यापार की कटौती होनी चाहिए।

मैक्सिको इस समय चीन के साथ व्यापार के मुफ्त समझौते पर विचार कर रहा है।


(Dilip Sanjay Ekka)

अरुणाचल प्रदेश को प्रथम संतों की आशा

In Church on June 30, 2017 at 3:12 pm

वाटिकन रेडियो, 30 जून 2017 ( फीदेस) भारत का उत्तरी-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश अपने प्रथम शहीदों की संत घोषणा के आशे में है।

धन्य घोषणा और संत प्रकरण की विधि यदि विधिवत उचित रुप से निर्देशित की जाती है तो दो फ्राँसीसी पुरोहितों निकोलस-माइकल क्रिक और अगुस्टिन-एटीन बोरी अरुणाचल प्रदेश के प्रथम शहीद घोषित किये जायेंगे। इन दोनों पुरोहितों को धन्य घोषणा के प्रकरण में संलग्न सलेशियन धर्माध्यक्ष जॉर्ज पल्लीपरमम्बिल, अरुणाचल प्रदेश के धर्माध्यक्ष ने कहा कि पुरोहित क्रिक और एटीन बोरी, पेरिस विदेशी मिशन धर्मसमाज के उत्साही पुरोहित थे जिन्होंने एशिया में सुसमाचार प्रचार हेतु अपने प्राणों की आहूति दी। उनका मुख्य कार्य क्षेत्र तिब्बत था। यह उनकी प्रेरिताई का प्रतिफल है कि आज अरुणाचल प्रदेश के लोग ख्रीस्तीयता की ज्योति से जगमगा रहें हैं।

अरुणाचल प्रदेश पश्चिम में भूटान, उत्तर में म्यांमार और उत्तर में चीन की सीमा रेखा से सटा हुआ है। दोनों शहीद पुरोहित उत्तरी-पूर्वी प्रान्तों में अपने प्रेरिताई कार्य हेतु आया-जाया करते थे जो उस समय ब्रिटिश इंडिया का अंग था। अपने प्रेरिताई कार्य के क्रम में उन्हें मिशामी लोगों के मुखिया द्वारा 2 अगस्त सन् 1854 को लोहित जिले के सोमे गाँव में शहादत का शिकार होना पड़ा। उस समय पुरोहित क्रिक की उम्र 35 वर्ष थी जबकि एटीन बोरी मात्र 28 साल के थे। इनकी शहादत के करीब 160 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन उनके मृत शरीर के अवशेष अब भी गाँव में सुरक्षित रखे गये हैं।

मियाओ धर्माप्रान्त के संचार सचिव, पुरोहित फेलिक्स अंतोनी ने वाटिकन रेडियो से अपनी वार्ता के दौरान कहा कि कैसे दोनों शहीदों ने 160 साल पहले चेन्नई से कोलकाता और फिर गुवाहाटी और तदोउपरान्त अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की और ख्रीस्त की ज्योति को स्थानी लोगों के बीच प्रज्वलित किया।भारत का उत्तरी-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश अपने प्रथम शहीदों की संत घोषणा के आशे में है


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पेत्रुस एवं संत पौलुस के महापर्व पर देवदूत प्रार्थना

In Church on June 29, 2017 at 3:14 pm

29/06/2017 15:58

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने कलीसिया के संरक्षक संत पेत्रुस एवं संत पौलुस की शहादत दिवस 29 जून को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर इन महाप्रेरितों को कलीसिया का स्तम्भ कहा, जिसपर दृश्यमान कलीसिया खड़ी है।

उन्होंने कहा, ″प्राचीन ख्रीस्तीय समुदाय की सेवा एवं ख्रीस्त का साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु दोनों प्रेरितों पर खून की मुहर लगी है।″

संत पापा ने प्रेरित चरित से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पेत्रुस के बारे कहा कि उन्होंने चमत्कारिक ढंग से येरूसालेम एवं रोम में ख्रीस्तीय समुदाय के बीच अपनी प्रेरिताई पूरी की। उसी तरह संत पौलुस ने भी पुनर्जीवित प्रभु द्वारा मुक्त किये जाने के बाद गैरख्रीस्तीयों के कई शहरों में ख्रीस्त का प्रचार किया जिसके लिए उन्हें अत्याचार भी सहना पड़ा।

संत पापा ने कहा कि पेत्रुस एवं पौलुस दोनों ने प्रेरितों के एक ही रास्ते को प्रकट किया जो येसु द्वारा कठिन परिस्थितियों के बावजूद सुसमाचार प्रचार हेतु भेजे गये थे। अपने व्यक्तिगत एवं सामुदायिक साक्ष्य द्वारा वे आज भी हमें इस बात को प्रकट करते हैं कि प्रभु सदा हमारे साथ चलते हैं खासकर, कठिनाई के समय में।

उन्होंने स्मरण दिलाया कि पाप एवं बुराई ही हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं जो हमें प्रभु से दूर कर देते हैं। जब हम मेल-मिलाप संस्कार में येसु ख्रीस्त के साथ पुनः संबंध स्थापित करते हैं तब हम बुराई के बंधन से मुक्त होते हैं। इस प्रकार हम सुसमाचार प्रचार करने एवं साक्ष्य देने की अपनी यात्रा में आनन्द पूर्वक आगे बढ़ सकते हैं।

संत पापा ने माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि प्रभु की कृपा सभी विश्वासियों पर हो ताकि वे भाईचारा एवं सामंजस्य के साथ जी सकें, ख्रीस्तीय विश्वास को प्रकट कर सकें जिसका साक्ष्य प्रेरित संत पेत्रुस एवं संत पौलुस ने दिया है।

संत पापा ने देवदूत प्रार्थना के उपरांत ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने 5 नये कार्डिनलों को शुभकामनाएँ दीं जिन्होंने बुधवार को नये कार्डिनल के रूप में लाल टोपी प्राप्त की है।

संत पापा ने देश-विदेश के सभी पयर्टकों एवं तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया, विशेषकर, रोम के लोगों को जो इस त्योहार के दिन परम्परा के अनुसार फूल द्वारा कलात्मक ढंग से सजाते हैं तथा पटाखों का प्रदर्शन करते हैं।

उन्होंने सभी को शांति की शुभकामनाएँ दीं तथा संत पेत्रुस एवं पौलुस के समान ख्रीस्तीय विश्वास का साक्ष्य देने हेतु प्रेरित किया।


(Usha Tirkey)

कलीसिया के संरक्षक संत पेत्रुस एवं संत पौलुस का महापर्व, संत पापा का प्रवचन

In Church on June 29, 2017 at 3:12 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 29 जून को काथलिक कलीसिया के संरक्षक एवं महाप्रेरित संत पेत्रुस एवं संत पौलुस के शहादत के महापर्व के उपलक्ष्य में, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में प्रेरितों के जीवन की तीन मुख्य बातों पर प्रकाश डाला- अभिव्यक्ति, अत्याचार एवं प्रार्थना।

अभिव्यक्ति – पेत्रुस सुसमाचार पर अपने विश्वास की अभिव्यक्ति उस समय करता है जब प्रभु ने सार्वजनिक तथा बाद में व्यक्तिगत प्रश्न किया। पहली बार येसु अपने चेलों से पूछा ″लोग क्या कहते हैं कि मैं कौन हूँ?″ (मती. 16:13) इस आकलन का परिणाम दिखलाता है कि वे व्यापक रूप से एक नबी के रूप में जाने जाते थे। इसके बाद येसु ने एक व्यक्तिगत सवाल पूछा, ″तुम क्या कहते हो कि मैं कौन हूँ?″ (पद. 15) इस पर पेत्रुस तुरन्त इसका जवाब देता है, ″आप मसीह हैं आप जीवन्त ईश्वर के पुत्र हैं।” (पद. 16).

संत पापा ने कहा कि विश्वास की अभिव्यक्ति का अर्थ है, येसु को स्वीकार करना है जो लंबे समय से प्रतीक्षित मसीहा, जीवन्त ईश्वर एवं हमारे जीवन के प्रभु हैं।

संत पापा ने कहा कि आज प्रभु यही सवाल हम प्रत्येक से कर रहे हैं, खासकर, जो गड़ेरिये हैं। यह एक विशेष सवाल है। यह समर्पण की मांग करता है क्योंकि यह हमारे सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है। जीवन का सवाल जीवन के प्रत्युत्तर की मांग करता है। आज प्रभु हमसे पूछ रहे हैं। ″मैं तुम्हारे लिए कौन हूँ? मानो कि वे कहना चाह रहे हों कि मैं अभी भी तुम्हारे जीवन का मालिक हूँ, तुम्हारे हृदय की अभिलाषा, आशा का कारण एवं तुम्हारे दृढ़ भरोसा का स्रोत। संत पेत्रुस के समान हम भी येसु के शिष्य रूप में अपने जीवन को नवीकृत करें।

संत पापा ने विश्वासियों को सचेत किया कि वे बकवादी ख्रीस्तीय बनने से बचें जो मात्र बहस करना पसंद करते हैं वरन् प्रेरितों के समान अपने जीवन द्वारा येसु की अभिव्यक्ति करें।

दूसरा बिन्दु है, अत्याचार। पेत्रुस एवं पौलुस ने ख्रीस्त के लिए अपना खून बहाया। आज भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में बहुधा मौन रूप से ख्रीस्तीय, हाशिये पर जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं, विकृत तथा भेदभाव एवं हिंसा के शिकार बन रहे हैं। कई बार उन्हें मृत्यु का भी सामना करना पड़ता है। संत पौलुस के शब्दों का हवाला देते हुए संत पापा ने कहा, ″मैं प्रभु को अर्पित किया जा रहा हूँ।” (2 तिम 4:6). मेरे लिए तो जीवन है मसीह। (फिल. 1:21), जिन्होंने उन्हें अपना जीवन अर्पित किया। संत पौलुस ने प्रभु का अनुसरण करते हुए अपना जीवन अर्पित किया क्योंकि ख्रीस्त को क्रूस से अलग नहीं किया जा सकता। ख्रीस्तीय मूल्य न केवल अच्छे कार्य करना है किन्तु बुराई का सामना करना भी है। जैसा कि येसु ने किया। बुराई का सामना केवल धीरज पूर्वक चुपचाप सह लेना नहीं है बल्कि येसु का अनुसरण करना है जिन्होंने क्रूस के बोझ को अपने कंधों पर लिया तथा दूसरों के खातिर उसे उठाया। इसका अर्थ है क्रूस को स्वीकार करना तथा यह दृढ़ विश्वास करना कि प्रभु सदा हमारे साथ हैं ताकि पौलुस की तरह हम भी कह सकें कि ″हम कष्टों से घिरे हैं परन्तु कभी हार नहीं मानते, हम परेशान रहते किन्तु कभी हार नहीं मानते, हम परेशान होते हैं किन्तु कभी निरास नहीं होते हैं।” (2 कोरि. 4:8-9).

बुराई का सामना करने का अर्थ है येसु के साथ तथा उन्हीं के द्वारा दिखाये रास्ते पर चलकर बुराई का सामना करना जो दुनिया का रास्ता नहीं है। इसी तरह के रास्ते पर चलते हुए संत पौलुस विजयी होने की घोषणा करते हैं। वे हमें बतलाते हैं कि उन्होंने विश्वास को छोड़ बाकी सब कुछ का त्याग किया। कष्ट अपमान एवं अत्याचार को उन्होंने खुशी से स्वीकार किया। दुःख के इस रहस्य के द्वारा उन्होंने अपना प्रेम प्रकट किया।

तीसरा शब्द है- प्रार्थना। एक प्रेरित का जीवन जो विश्वास की अभिव्यक्ति से आरम्भ होता एवं कठिनाईयों में आगे बढ़ता है, निरंतर एक प्रार्थना है। प्रार्थना पानी के समान है जो हमारी आशा एवं निष्ठा को सिंचित करती है। प्रार्थना हमें प्रेम किये जाने का एहसास देती एवं बदले में प्रेम करने की क्षमता प्रदान करती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की शक्ति देती है। पहले पाठ में हम देखते हैं कि पेत्रुस जब बंदीगृह में थे तो कलीसिया निरंतर उनके लिए प्रार्थना कर रही थी।

संत पापा ने कहा कि एक कलीसिया जो प्रार्थना करती है प्रभु उसपर दृष्टि रखते एवं उसकी देखभाल करते हैं। प्रार्थना शक्तिशाली है जो एकता के सूत्र में बांधती एवं बल प्रदान करती है। जबकि आत्म निर्भरता आध्यात्मिक मृत्यु की ओर ले जाती है। प्रार्थना के बिना आंतरिक कैदखाना जो हमें कैद कर रखती है खुल नहीं सकती।

संत पापा ने दोनों महान संतों की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि जब हम प्रार्थना करते हैं तो पवित्र आत्मा हमें सांत्वना प्रदान करे।  उन्होंने पालियुम ग्रहण करने वाले महाधर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना की कि वे अपने रेवड़ की अच्छी देखभाल कर सकें। संत पापा ने पूर्वी कलीसिया से आये प्रतिनिधियों के लिए भी प्रार्थना की कि ईश्वर उनकी रक्षा करे।


(Usha Tirkey)

नये कार्डिनलों से संत पापा, आपकी प्रेरिताई है सेवा

In Church on June 29, 2017 at 3:09 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 28 जून को वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में, कार्डिनलों की सामान्य आमसभा परिषद में पाँच नये कार्डिनलों की रचना की। ये कार्डिनल रोम में याजकों के प्रतिनिधि होंगे जिनकी जिम्मेदारी होगी रोम के धर्माध्यक्ष की नियुक्ति करना, संत पापा को परामर्श देना तथा विश्वव्यापी कलीसिया के संचालन में उन्हें सहयोग देना।

पाँच नये कार्डिनल हैं –

1.    माली से बामाको के महाधर्माध्यक्ष जॉ जेरबो

2.    स्पेन से बरसेलोना के महाधर्माध्यक्ष जोन जोश ओमेल्ला

3.    स्वीडेन से स्टॉकहॉम के धर्माध्यक्ष अंदेरस अर्बोरेलियुस ओक्ड

4.    लाओस से पाक्से के प्रेरितिक विकार लुइस मरिये लिंग मंगखानेखोन

5.    एल सलवाडोर से सन सल्वाडोर के महाधर्माध्यक्ष ग्रेगोरियो रोसा कावेज़।

नये कार्डिनलों की रचना के अवसर पर संत पापा ने सेवा के मिशन पर प्रकाश डाला जिसके लिए नये कार्डिनल बुलाये जाते हैं।

संत पापा ने कहा, ″(येसु) आपको अपने समान एवं अपने साथ सेवा देने हेतु बुलाते हैं, पिता ईश्वर तथा अपने ही भाई-बहनों की सेवा हेतु।″

उन्होंने कहा कि वे उन्हें उसी तरह चुनौतियों का सामना करने के लिए बुलाते हैं जिस तरह उन्होंने दुनिया के पापों के लिए कष्ट उठाया जो आज मानव जाति को प्रेरित करता है। संत पापा ने नये कार्डिनलों से आह्वान किया कि वे प्रभु के क्रूस एवं पुनरुत्थान पर केंद्रित होकर उनका अनुसरण करें तथा ईश्वर की पवित्र प्रजा की अगुवाई करें।

कार्डिनलों की सामान्य लोकसभा परिषद, काथलिक कलीसिया के संरक्षक प्रेरित संत पेत्रुस एवं संत पौलुस की शहादत के महापर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित की गयी थी।

 


(Usha Tirkey)

मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ, कार्डिनल जोर्ज पेल

In Church on June 29, 2017 at 3:07 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 जून 2017 (रेई): आर्थिक मामलों हेतु गठित परमधर्मपीठीय सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा ऑस्ट्रेलिया के काथलिक कार्डिनल जोर्ज पेल पर, पूर्व में किये गये यौन शोषण के कई आरोप लगे हैं। ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने आरोप दर्ज किया है कि कार्डिनल पेल पर कई आरोप लगे हैं तथा मामले में “कई शिकायतकर्ता” शामिल हैं।

कार्डिनल पेल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को वाटिकन प्रेस सम्मेलन में कहा, ″अंततः मैं अदालत में उपस्थित होने जा रहा हूँ। मैं इन सभी आरोपों में निर्दोष हूँ। वे गलत हैं। यौन दुर्व्यवहार का पूरा विचार मेरे लिए घृणित है।″

पुलिस ने अभी तक आरोप पत्र को प्रकट नहीं किया है किन्तु कहा है कि कार्डिनल को 18 जुलाई को मेलबोर्न मैजिस्ट्रेट कोर्ट का सामना करना पड़ेगा।

वाटिकन ने इस केस के संबंध में एक वक्तव्य में कहा है कि ″कार्डिनल के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में दर्ज आरोप की खबर पर वाटिकन को अफसोस है। कार्डिनल जॉर्ज पेल पर दशकों पुराने कार्यों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है।″

आरोपों के बारे में जानने के बाद, कार्डिनल पेल ने  देश के कानूनों के प्रति पूर्ण सम्मान एवं सच्चाई की खोज में अपनी भागीदारी के महत्व को समझते हुए, देश लौटकर आरोपों का सामना करने का निश्चय किया है।

वाटिकन प्रेस से मिली जानकारी के अनुसार कार्डिनल पेल ने इस बात की जानकारी संत पापा को दी है जिन्होंने स्वयं के बचाव हेतु उन्हें देश लौटने की अनुमति दे दी है। उनकी अनुपस्थिति में भी सचिवालय का कार्य जारी रहेगा।

प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि परमधर्मपीठ ऑस्ट्रेलिया के न्यायिक प्रणाली का सम्मान करती है।

विक्टोरिया पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शेन पैटन ने कहा, ″कार्डिनल पेल को कई आरोपों का सामना करना पड़ रहा है और इसके कई शिकायतकर्ता हैं। इस बात को ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि कार्डिनल के खिलाफ लगाये गये कोई भी आरोप अभी तक किसी भी अदालत में स्पष्ट रूप से परीक्षण नहीं किया गया हैं। अतः कार्डिनल पेल के समान किसी भी आरोपी को उचित प्रक्रिया का अधिकार है।″


(Usha Tirkey)

सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रचार को रोकने हेतु वाटिकन की अपील

In Church on June 29, 2017 at 3:05 pm

न्यूयॉर्क, बृहस्पतिवार, 29 जून 17 (रेई): परमधर्मपीठ ने सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के अंत हेतु अपनी अपील को नवीकृत किया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र के संकल्प के छः महीनों बाद भी बदलाव में कमी है।

अमरीका के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक एवं प्रेरित राजदूत महाधर्माध्यक्ष बेर्नादितो औजा ने सुरक्षा परिषद के एक खुले विवाद में यह अपील दोहरायी है।

संयुक्त राष्ट्र ने 15 दिसंबर 2016 को सामूहिक विनाश के हथियारों के अप्रसार पर संकल्प 2325 अपनाया था।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा कि संकल्प के बावजूद इस संबंध में स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, ″जैसा कि संत पापा ने कहा है, हम कहते हैं कि युद्ध फिर कभी नहीं किन्तु हथियारों का उत्पादन भी जारी रखते हैं और उन लोगों के लिए बेचते हैं जो एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध में संलग्न है।″

उन्होंने कहा कि संत पापा इस संकल्प का पूरा समर्थन करते हैं जो सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रचार को रोकने हेतु प्रेरित करेगा तथा अंतरराष्ट्रीय मामलों के संचालन में सशस्त्र बल पर दुनिया की निर्भरता में कमी आयेगी।


(Usha Tirkey)

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