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कार्डिनल हुसार के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

In Church on June 1, 2017 at 3:06 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): यूक्रेन स्थित कैव हालेक के महाधर्माध्यक्ष एवं यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया के शीर्ष कार्डिनल लुबोम्यार हुसार का निधन एक गंभीर बीमारी की वजह से 31 मई को हुई। वे 84 वर्ष के थे। उनके निधन के साथ ही कार्डिनलों की कुल संख्या 221 हो गयी है जिनमें 116 कॉनक्लेव में भाग ले सकेंगे और 105 कॉनक्लव में भाग नहीं ले सकेंगे।

संत पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन की ग्रीक काथलिक कलीसिया के शीर्ष स्वीयातोस्लाव को एक तार संदेश प्रेषित कर कार्डिनल लुबोम्यार हुसार के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने संदेश में कार्डिनल लुबोम्यार हुसार के बारे कहा कि वे एक उत्साही चरवाहे थे तथा चुनौतियों के बावजूद ख्रीस्त के प्रति उनकी निष्ठा की याद की।

कार्डिनल लुबोम्यार हुसार का जन्म 26 फरवरी सन् 1933 ई. में लविव में हुई थी। युद्ध के कारण उनका परिवार ऑस्ट्रिया चला गया था तथा बाद में अमरीका।

उन्होंने सेमिनरी में शिक्षक का काम किया एवं न्यूयॉर्क में पल्ली पुरोहित के रूप में भी सेवा दी थी। रोम के परमधर्मपीठीय उर्बानियन विश्वविद्यालय से ईश शास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि हासिल करने के उपरांत उन्होंने स्टूडैट मठ में प्रवेश किया था। उनका पुरोहिताभिषेक 2 अप्रैल 1977 को यूक्रेन में हुआ था।

सन् 1994 ई. में उन्होंने तेरनोपित में एक नये स्टूडैट मोनास्ट्री की स्थापना की। 22 फरवरी 1996 को वे धर्माध्यक्ष नियुक्त हुए थे।

14 अक्टूबर 1996 को यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया के धर्माध्यक्षीय धर्मसभा ने उन्हें लविव के महाधर्माध्यक्ष के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किया था। कार्डिनल मेरोस्लाव लुबाकिवस्की के निधन के बाद 25 जनवरी 2001 को, यूक्रेन के धर्माध्यक्षीय धर्मसभा ने उन्हें यूक्रेन की कलीसिया के लिए महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया था। संत पापा जोन पौल द्वितीय ने इस चुनाव को अनुमोदन दिया था तथा उसके एक माह बाद 21 फरवरी 2001 को उन्हें कार्डिनल नियुक्त किया था।

जून 2001 में कार्डिनल हुसार ने संत पापा जॉन पौल द्वितीय को यूक्रेन निमंत्रण दिया था।

सन् 2005 में कार्डिनल हुसार ने कॉनक्लेव में हिस्सा लिया था जिसने संत पापा बेनेडिक्ट 16वें का चुनाव किया था।

कार्डिनल हुसार ने महाधर्माध्यक्ष एवं यूक्रेन की ग्रीक काथलिक कलीसिया के सिनॉड अध्यक्ष के रूप में 10 फरवरी 2011 तक अपनी सेवा प्रदान की।


(Usha Tirkey)

परिवार ख़मीर के समान है जो विश्व को अधिक मानवीय बनाने में मदद करता

In Church on June 1, 2017 at 3:04 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 1 जून को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में यूरोप में काथलिक परिवार संगठन के महासंघ से, संगठन की स्थापना की 20वीं वर्षगाँठ पर मुलाकात की।

संत पापा ने सदस्यों को सम्बोधित कर उन्हें 20 वर्षों तक उनकी प्रतिदिन की प्रतिबद्धता को जारी रखने हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनका संगठन परिवारों की सेवा हेतु दूसरों को आकर्षित करता है ताकि यूरोप के लोग परिवार को सबसे मूल्यवान खजाना मान सकें।

संत पापा ने परिवार की तुलना खमीर से की तथा उसकी सेवा हेतु प्रेरित करते हुए कहा, ″परिवार कोई संग्रहालय नहीं है किन्तु उसके द्वारा आपसी समर्पण एवं बच्चों के प्रति उदारता द्वारा वरदानों को ठोस बनाया जा सकता है और जिसके द्वारा कलीसिया की भी सेवा की जा सकती है। इस प्रकार, परिवार एक तरह का ख़मीर है जो विश्व को अधिक मानवीय और अधिक भ्रातृपूर्ण बनाने में मदद करता है, जहां कोई भी अस्वीकृत या परित्यक्त महसूस नहीं करता।″

संत पापा ने कहा कि हम वरदान को सुन्दरता एवं आपसी प्रेम के आनन्द द्वारा साकार रूप दे सकते हैं। आज भी परिवार ही समाज का आधार है तथा मानव के सर्वांगीण विकास हेतु सबसे उपयुक्त संरचना। संत पापा ने परिवार के सदस्यों के बीच एकता तथा परिवार का समाज के साथ भाईचारा पूर्ण समर्पण पर जोर दिया जो सार्वजनिक भलाई एवं शांति का समर्थक है। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का ख्याल रखें एवं एक ऐसा माहौल बनायें, जहाँ परिवार का हर सदस्य स्थान पा सके, न कि किसी तरह के अलगाव अथवा दबाव से प्रभावित हो। आज हम मुलाकात की संस्कृति की आवश्यकता को कहीं अधिक महसूस करते हैं जो विविधता, पारस्परिकता और पीढ़ियों के बीच एकता को बढ़ा सकता है।

संत पापा ने संगठन के सदस्यों को सलाह दी कि उनका संगठन विभिन्न समस्याओं के मद्देनजर गठित की गयी है। उन समस्याओं के समाधान हेतु उन्हें प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान एवं प्रतिष्ठा का ख्याल करना चाहिए जिसके लिए मुलाकात की संस्कृति, वार्ता तथा एक-दूसरे को सुनना हमेशा आवश्यक है। संत पापा ने कहा कि उनकी वार्ता सदा कार्यों, साक्ष्यों, अनुभवों एवं जीवन शैली पर आधारित हो।

संत पापा ने कहा कि उन कार्यों को आगे बढ़ाने में परिवार को अलग नहीं किया जा सकता। परिवारों को अपने दायरे से बाहर निकलने, वार्ता करने और दूसरों के साथ मुलाकात करने की आवश्यकता है ताकि एकता स्थापित किया जा सके, जिसका अर्थ एकरूपता नहीं हो और जो सार्वजनिक भलाई को आगे ले सके।

संत पापा ने परिवारों को अपने पूर्वजों के धरोहर को बनाये रखने की सलाह दी जो उन्हें प्रज्ञा प्रदान करता है। इस प्रज्ञा के द्वारा वे जीवन की पवित्रता, पीढ़ीयों के बीच की खाई भरने तथा विकलांग एवं अनाथ बच्चों की सेवा हेतु प्रेरित होते हैं। यह विस्थापितों के प्रति एकात्मता का भाव उत्पन्न करता, अजन्मे के अधिकारों की रक्षा तथा वयोवृद्धों के लिए सम्मानित स्थिति सुनिश्चित करता है।

संत पापा ने संगठन के सभी सदस्यों को प्रोत्साहन दिया कि वे विकास एवं रचनात्मक नई प्रणाली तथा संसाधनों को प्रोत्साहन दें जिससे कि परिवार, कलीसिया एवं समाज में नयी पीढ़ी को जीवन के रास्ते पर मूल्यों एवं जीवन के अर्थ हेतु उनका साथ दिया जा सके।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने याजकों के धर्मसंघ के सदस्यों से मुलाकात की

In Church on June 1, 2017 at 2:58 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने याजकों के धर्मसंघ की आमसभा में भाग ले रहे 100 प्रतिभागियों से बृहस्पतिवार को कहा कि वे युवा पुरोहितों को आगे बढ़ने में मदद दें।

याजकों के धर्मसंघ की आमसभा 30 मई को शुरू हुई जिसमें विभिन्न विषयों पर चर्चा की गयी। सभा में पल्ली, पल्ली पुरोहित की प्रेरिताई, धर्मप्रांत के विभिन्न पल्ली तथा कलीसियाई कानून संख्या 517 के आलोक में मेषालीय देखभाल आदि विषयों पर भी विचार विमर्श किया गया।

संत पापा ने अपने सम्बोधन में पुरोहितों के प्रशिक्षण पर हाल ही में प्रकाशित दस्तावेज राशियो फंडामेटालिस इंस्टीट्यूशनीस सचरदोतालिस पर चिंतन किया। उन्होंने पुरोहितों की बुलाहट एवं उनसे अपेक्षा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ″युवा पुरोहितों को अकसर सतही रूप में देखा जाता है एवं उन्हें जुनून और आदर्शों से रहित “तरल” पीढ़ी मान लिया जाता है। निश्चय ही, वे उपभोक्तावाद और व्यक्तिवाद की संस्कृति से संक्रामित होते हैं किन्तु इसके कारण उनके उस पक्ष को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए कि वे “दृढ़ता से” जीवन को आगे ले जाने में सक्षम होते तथा उदारता के साथ भविष्य को देखने और आशा की हानि के प्रतिकारक के रूप में, रचनात्मक, कल्पनाशील और उदार होकर समाज को बदलने का साहस करते हैं। जब दूसरों के लिए या एकता, न्याय और शांति जैसे मामलों के लिए खर्च करने की बात आती है, तब  वे अपनी सभी सीमाओं के साथ, हमेशा एक संसाधन होते हैं।″

संत पापा ने युवा पुरोहितों के संदर्भ में हमारे दृष्टिकोण पर गौर करने का आग्रह करते हुए कहा कि हम युवा पुरोहित को किस तरह देखते हैं? उन्होंने युवा पुरोहितों को समझने के लिए ईशवचन से आलोकित किये जाने की सलाह दी जो हमें दिखलाता है कि प्रभु उन्हें किस तरह बुलाते, उनपर विश्वास करते तथा मिशन के लिए भेजते हैं।

संत पापा ने कहा कि बाईबिल में हम पाते हैं कि ईश्वर ने नबी सामुएल, राजा दाऊद, नबी येरेमियाह और अन्य नबियों को बुलाया जो छोटे थे अथवा दूसरों की तुलना में कमजोर थे। सुसमाचार में हम पाते हैं कि येसु ने छोटे समझे जाने वाले लोगों को चुना तथा उन्हें सुसमाचार के मिशन को सौंपा। संत पापा ने कहा कि बुलाहट मानव शक्ति पर नहीं किन्तु पवित्र आत्मा द्वारा संचालित किये जाने हेतु हमारे खुलेपन पर निर्भर है।

संत पापा ने पुरोहितों को सम्बोधित कर कहा, ″आप चुने गये हैं आप प्रभु के लिए प्रिय हैं। ईश्वर आप पर पिता की कोमलता से दृष्टि डालते हैं और जब आप अपने दिल में उनके प्रेम का एहसास करते हैं तो वे आप को गिरने नहीं देंगे। उनकी नजरों में आप मूल्यवान हैं तथा वे विश्वास करते हैं कि जिस मिशन के लिए उन्होंने आपको बुलाया है उसे आप पूरा करेंगे।″ संत पापा ने पल्ली पुरोहितों एवं धर्माध्यक्षों को सलाह दी कि वे युवा पुरोहितों को प्रोत्साहन दें, न कि उनके द्वारा खाली स्थानों को भरने का प्रयास करें।

संत पापा ने युवा पुरोहितों के प्रति अपना मनोभाव बतलाते हुए कहा कि उन्हें उनसे मुलाकात कर खुशी होती है क्योंकि वे उनमें युवा कलीसिया को देखते हैं। वे एक नये तर्क की याद करते हैं जो पुरोहितों को मिशनरी शिष्य के रूप में प्रस्तुत करता है जो हमेशा प्रशिक्षित किया जाता है।

संत पापा ने युवा पुरोहितों के लिए महत्वपूर्ण मनोभावों पर बल दिया : अथक प्रार्थना, हमेशा चलते रहना एवं हृदय से बांटना।

संत पापा ने कहा कि उन्हें बिना थके निरंतर प्रार्थना करना चाहिए क्योंकि खुद को प्रभु की कोमलता द्वारा फंसाये गये समझे जाने के द्वारा ही वे ″मनुष्यों के मछवारे″ बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी बुलाहट तभी आरम्भ होती है जब हम अपने आप एवं निजी योजनाओं से बाहर निकलते हैं।

संत पापा ने कहा कि एक शिष्य हमेशा सुसमाचार एवं जीवन के तीर्थ हेतु यात्रा पर है जो अपनी नजरें ईश्वर के रहस्यों, पवित्र भूमि एवं उन्हें सौंपे गये लोगों की ओर रखता है। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी संतुष्ट नहीं हो जाना अथवा रूकना चाहिए। हमेशा नयी चीजों के लिए खुला होना चाहिए। वास्तव में, एक पुरोहित के जीवन के हर दृष्टिकोण में यह महत्वपूर्ण है कि वह विश्वास, प्रेम एवं प्रेरितिक उदारता में दूसरों से आगे हो।

संत पापा ने कहा कि युवा पुरोहित हृदय से बांटे क्योंकि पुरोहितीय जीवन कोई एक नौकरशाही कार्यालय नहीं है जहाँ हर काम को समाप्त करने की चिंता होती है किन्तु उनका कार्य है लोगों के आनन्द एवं दुःख को प्रभु के पास लाना। जिसके लिए उन्हें लोगों को समय देना, उनकी बात सुनना, उनके घावों को समझना तथा उन्हें पिता की कोमलता प्रदान करना है। संत पापा ने कहा कि वे लोगों के बीच रहें, विशेषकर, युवाओं के जिसके लिए विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता नहीं है किन्तु ईमानदारी से उनके जीवन में संलग्न होने, उन्हें सम्मान देने और प्यार से सुनने की आवश्यकता है।


(Usha Tirkey)

संत पौलुस के जीवन के तीन मुख्य पहलु प्रेरिताई में सहायक

In Church on June 1, 2017 at 2:55 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): सुसमाचार प्रचार, अत्याचार एवं प्रार्थना ये ही तीन शब्द थे बृहस्पतिवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में, ख्रीस्तयाग के दौरान संत पापा फ्राँसिस के प्रवचन के मुख्य बिन्दु।

संत पापा ने इन तीनों शब्दों का प्रयोग प्रेरित संत पौलुस के जीवन पर प्रकाश डालने हेतु किया जो आज भी सुसमाचार के प्रचार हेतु विश्वासियों को प्रेरणा प्रदान करते हैं।

संत पापा ने कहा, ″संत पौलुस का जीवन एक ऐसा जीवन था जो हमेशा सक्रिय था उनके लिए समुद्र के किनारे सूर्य का ताप लेने अथवा विश्राम के बारे सोचना मुश्किल था। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा चलते रहते थे।″

प्रवचन में संत पापा ने प्रेरित चरित से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जो संत पौलुस के जीवन के तीन आयामों को प्रकट करता है।

संत पापा ने कहा कि संत पौलुस के जीवन का पहला आयाम था, सुसमाचार प्रचार करना, घोषणा करना। वे एक स्थान से दूसरे स्थान जाकर ख्रीस्त का प्रचार करते थे और जब वे प्रचार नहीं कर रहे होते थे तो काम करते थे। किन्तु उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण था सुसमाचार का प्रचार करना। ख्रीस्त का प्रचार करना उनका एक जुनून था। वे मेज पर बैठे नहीं रहते थे किन्तु सदैव सक्रिय रहते थे। हमेशा ख्रीस्त की घोषणा में लगे रहते थे। उनके अंदर एक आग थी, उत्साह की आग… प्रेरितिक उत्साह जो उन्हें आगे बढ़ाता था। वे पीछे कभी नहीं लौटे किन्तु आगे ही बढ़ते गये।

संत पौलुस के जीवन का दूसरा आयाम था कठिनाई। उन्हें अत्याचारों का सामना करना पड़ा। वे कई बार फरीसियों एवं सदुकियों के सवालों के घेरे में पड़े और अदालत एवं जेल भी गये।

संत पापा ने संत पौलुस के जीवन के तीसरे आयाम के बारे बतलाया कि वह प्रार्थना था। वे येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त थे। संत पौलुस की शक्ति प्रभु के साथ उनकी मुलाकात में थी जिसे वे प्रार्थना द्वारा प्राप्त करते थे। संत पौलुस ही वे व्यक्ति हैं जिन्होंने प्रभु से एक बार मुलाकात करने  बाद उन्हें कभी नहीं भूल पाये।

संत पापा ने कहा कि संत पौलुस के ये तीन मनोभाव हमें प्रेरितिक उत्साह, अत्याचार में धीर बने रहने एवं प्रार्थना करने की प्रेरणा देता है।

संत पापा ने ईश्वर से प्रार्थना की कि प्रभु हमें कृपा प्रदान करे ताकि हम ख्रीस्तीय जीवन के मनोभावों को सीख सकें, येसु ख्रीस्त का प्रचार करें, अत्याचारों में धीर बने रहें तथा प्रार्थना द्वारा येसु से मुलाकात कर शक्ति प्राप्त करें।


(Usha Tirkey)

काबुल में आत्मघाती बम के शिकार लोगों के प्रति संत पापा ने सहानुभूति प्रकट की

In Church on June 1, 2017 at 2:53 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के वीआईपी इलाक़े में 31 मई को हुए एक आत्मघाती कार बम धमाके के शिकार लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया।

बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक आत्मघाती कार बम धमाके में कम से कम 90 लोग मारे गए और करीब 350 ज़ख़्मी हुए हो गये हैं।

वाटिकन राज्य सचिव कार्जिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से इटली में अफगानिस्तान के राजदूत को प्रेषित एक तार संदेश में कहा, ″काबुल में घृणित हमले तथा कई लोगों के मौत एवं जख्मी होने की खबर सुन, संत पापा क्रूर हिंसा के शिकार लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करते हैं। संत पापा मृतकों की आत्मा को सर्वशक्तिमान ईश्वर की करूणा तले सिपुर्द करते एवं अफगानिस्तान को लोगों को शांति हेतु अपनी निरंतर प्रार्थना का आश्वासन देते हैं।″

बीबीसी के अनुसार धमाका जर्मन दूतावास के पास हुआ है। इसी इलाक़े में सारे विदेश दूतावास हैं। जब लोग दफ़्तरों के लिए निकल रहे थे तभी यह विस्फोट हुआ।

धमाके से 100 मीटर के आसपास वाले घरों को ख़ासा नुक़सान पहुंचा है। हाल के महीनों में काबुल में कई धमाके हुए हैं। इन धमाकों को लेकर पूरे अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा से जुड़ी चिंता और गहरी हो गई है।


(Usha Tirkey)

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