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परिवार ख़मीर के समान है जो विश्व को अधिक मानवीय बनाने में मदद करता

In Church on June 1, 2017 at 3:04 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 1 जून को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में यूरोप में काथलिक परिवार संगठन के महासंघ से, संगठन की स्थापना की 20वीं वर्षगाँठ पर मुलाकात की।

संत पापा ने सदस्यों को सम्बोधित कर उन्हें 20 वर्षों तक उनकी प्रतिदिन की प्रतिबद्धता को जारी रखने हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनका संगठन परिवारों की सेवा हेतु दूसरों को आकर्षित करता है ताकि यूरोप के लोग परिवार को सबसे मूल्यवान खजाना मान सकें।

संत पापा ने परिवार की तुलना खमीर से की तथा उसकी सेवा हेतु प्रेरित करते हुए कहा, ″परिवार कोई संग्रहालय नहीं है किन्तु उसके द्वारा आपसी समर्पण एवं बच्चों के प्रति उदारता द्वारा वरदानों को ठोस बनाया जा सकता है और जिसके द्वारा कलीसिया की भी सेवा की जा सकती है। इस प्रकार, परिवार एक तरह का ख़मीर है जो विश्व को अधिक मानवीय और अधिक भ्रातृपूर्ण बनाने में मदद करता है, जहां कोई भी अस्वीकृत या परित्यक्त महसूस नहीं करता।″

संत पापा ने कहा कि हम वरदान को सुन्दरता एवं आपसी प्रेम के आनन्द द्वारा साकार रूप दे सकते हैं। आज भी परिवार ही समाज का आधार है तथा मानव के सर्वांगीण विकास हेतु सबसे उपयुक्त संरचना। संत पापा ने परिवार के सदस्यों के बीच एकता तथा परिवार का समाज के साथ भाईचारा पूर्ण समर्पण पर जोर दिया जो सार्वजनिक भलाई एवं शांति का समर्थक है। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का ख्याल रखें एवं एक ऐसा माहौल बनायें, जहाँ परिवार का हर सदस्य स्थान पा सके, न कि किसी तरह के अलगाव अथवा दबाव से प्रभावित हो। आज हम मुलाकात की संस्कृति की आवश्यकता को कहीं अधिक महसूस करते हैं जो विविधता, पारस्परिकता और पीढ़ियों के बीच एकता को बढ़ा सकता है।

संत पापा ने संगठन के सदस्यों को सलाह दी कि उनका संगठन विभिन्न समस्याओं के मद्देनजर गठित की गयी है। उन समस्याओं के समाधान हेतु उन्हें प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान एवं प्रतिष्ठा का ख्याल करना चाहिए जिसके लिए मुलाकात की संस्कृति, वार्ता तथा एक-दूसरे को सुनना हमेशा आवश्यक है। संत पापा ने कहा कि उनकी वार्ता सदा कार्यों, साक्ष्यों, अनुभवों एवं जीवन शैली पर आधारित हो।

संत पापा ने कहा कि उन कार्यों को आगे बढ़ाने में परिवार को अलग नहीं किया जा सकता। परिवारों को अपने दायरे से बाहर निकलने, वार्ता करने और दूसरों के साथ मुलाकात करने की आवश्यकता है ताकि एकता स्थापित किया जा सके, जिसका अर्थ एकरूपता नहीं हो और जो सार्वजनिक भलाई को आगे ले सके।

संत पापा ने परिवारों को अपने पूर्वजों के धरोहर को बनाये रखने की सलाह दी जो उन्हें प्रज्ञा प्रदान करता है। इस प्रज्ञा के द्वारा वे जीवन की पवित्रता, पीढ़ीयों के बीच की खाई भरने तथा विकलांग एवं अनाथ बच्चों की सेवा हेतु प्रेरित होते हैं। यह विस्थापितों के प्रति एकात्मता का भाव उत्पन्न करता, अजन्मे के अधिकारों की रक्षा तथा वयोवृद्धों के लिए सम्मानित स्थिति सुनिश्चित करता है।

संत पापा ने संगठन के सभी सदस्यों को प्रोत्साहन दिया कि वे विकास एवं रचनात्मक नई प्रणाली तथा संसाधनों को प्रोत्साहन दें जिससे कि परिवार, कलीसिया एवं समाज में नयी पीढ़ी को जीवन के रास्ते पर मूल्यों एवं जीवन के अर्थ हेतु उनका साथ दिया जा सके।


(Usha Tirkey)

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