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संत पापा ने याजकों के धर्मसंघ के सदस्यों से मुलाकात की

In Church on June 1, 2017 at 2:58 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने याजकों के धर्मसंघ की आमसभा में भाग ले रहे 100 प्रतिभागियों से बृहस्पतिवार को कहा कि वे युवा पुरोहितों को आगे बढ़ने में मदद दें।

याजकों के धर्मसंघ की आमसभा 30 मई को शुरू हुई जिसमें विभिन्न विषयों पर चर्चा की गयी। सभा में पल्ली, पल्ली पुरोहित की प्रेरिताई, धर्मप्रांत के विभिन्न पल्ली तथा कलीसियाई कानून संख्या 517 के आलोक में मेषालीय देखभाल आदि विषयों पर भी विचार विमर्श किया गया।

संत पापा ने अपने सम्बोधन में पुरोहितों के प्रशिक्षण पर हाल ही में प्रकाशित दस्तावेज राशियो फंडामेटालिस इंस्टीट्यूशनीस सचरदोतालिस पर चिंतन किया। उन्होंने पुरोहितों की बुलाहट एवं उनसे अपेक्षा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ″युवा पुरोहितों को अकसर सतही रूप में देखा जाता है एवं उन्हें जुनून और आदर्शों से रहित “तरल” पीढ़ी मान लिया जाता है। निश्चय ही, वे उपभोक्तावाद और व्यक्तिवाद की संस्कृति से संक्रामित होते हैं किन्तु इसके कारण उनके उस पक्ष को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए कि वे “दृढ़ता से” जीवन को आगे ले जाने में सक्षम होते तथा उदारता के साथ भविष्य को देखने और आशा की हानि के प्रतिकारक के रूप में, रचनात्मक, कल्पनाशील और उदार होकर समाज को बदलने का साहस करते हैं। जब दूसरों के लिए या एकता, न्याय और शांति जैसे मामलों के लिए खर्च करने की बात आती है, तब  वे अपनी सभी सीमाओं के साथ, हमेशा एक संसाधन होते हैं।″

संत पापा ने युवा पुरोहितों के संदर्भ में हमारे दृष्टिकोण पर गौर करने का आग्रह करते हुए कहा कि हम युवा पुरोहित को किस तरह देखते हैं? उन्होंने युवा पुरोहितों को समझने के लिए ईशवचन से आलोकित किये जाने की सलाह दी जो हमें दिखलाता है कि प्रभु उन्हें किस तरह बुलाते, उनपर विश्वास करते तथा मिशन के लिए भेजते हैं।

संत पापा ने कहा कि बाईबिल में हम पाते हैं कि ईश्वर ने नबी सामुएल, राजा दाऊद, नबी येरेमियाह और अन्य नबियों को बुलाया जो छोटे थे अथवा दूसरों की तुलना में कमजोर थे। सुसमाचार में हम पाते हैं कि येसु ने छोटे समझे जाने वाले लोगों को चुना तथा उन्हें सुसमाचार के मिशन को सौंपा। संत पापा ने कहा कि बुलाहट मानव शक्ति पर नहीं किन्तु पवित्र आत्मा द्वारा संचालित किये जाने हेतु हमारे खुलेपन पर निर्भर है।

संत पापा ने पुरोहितों को सम्बोधित कर कहा, ″आप चुने गये हैं आप प्रभु के लिए प्रिय हैं। ईश्वर आप पर पिता की कोमलता से दृष्टि डालते हैं और जब आप अपने दिल में उनके प्रेम का एहसास करते हैं तो वे आप को गिरने नहीं देंगे। उनकी नजरों में आप मूल्यवान हैं तथा वे विश्वास करते हैं कि जिस मिशन के लिए उन्होंने आपको बुलाया है उसे आप पूरा करेंगे।″ संत पापा ने पल्ली पुरोहितों एवं धर्माध्यक्षों को सलाह दी कि वे युवा पुरोहितों को प्रोत्साहन दें, न कि उनके द्वारा खाली स्थानों को भरने का प्रयास करें।

संत पापा ने युवा पुरोहितों के प्रति अपना मनोभाव बतलाते हुए कहा कि उन्हें उनसे मुलाकात कर खुशी होती है क्योंकि वे उनमें युवा कलीसिया को देखते हैं। वे एक नये तर्क की याद करते हैं जो पुरोहितों को मिशनरी शिष्य के रूप में प्रस्तुत करता है जो हमेशा प्रशिक्षित किया जाता है।

संत पापा ने युवा पुरोहितों के लिए महत्वपूर्ण मनोभावों पर बल दिया : अथक प्रार्थना, हमेशा चलते रहना एवं हृदय से बांटना।

संत पापा ने कहा कि उन्हें बिना थके निरंतर प्रार्थना करना चाहिए क्योंकि खुद को प्रभु की कोमलता द्वारा फंसाये गये समझे जाने के द्वारा ही वे ″मनुष्यों के मछवारे″ बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी बुलाहट तभी आरम्भ होती है जब हम अपने आप एवं निजी योजनाओं से बाहर निकलते हैं।

संत पापा ने कहा कि एक शिष्य हमेशा सुसमाचार एवं जीवन के तीर्थ हेतु यात्रा पर है जो अपनी नजरें ईश्वर के रहस्यों, पवित्र भूमि एवं उन्हें सौंपे गये लोगों की ओर रखता है। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी संतुष्ट नहीं हो जाना अथवा रूकना चाहिए। हमेशा नयी चीजों के लिए खुला होना चाहिए। वास्तव में, एक पुरोहित के जीवन के हर दृष्टिकोण में यह महत्वपूर्ण है कि वह विश्वास, प्रेम एवं प्रेरितिक उदारता में दूसरों से आगे हो।

संत पापा ने कहा कि युवा पुरोहित हृदय से बांटे क्योंकि पुरोहितीय जीवन कोई एक नौकरशाही कार्यालय नहीं है जहाँ हर काम को समाप्त करने की चिंता होती है किन्तु उनका कार्य है लोगों के आनन्द एवं दुःख को प्रभु के पास लाना। जिसके लिए उन्हें लोगों को समय देना, उनकी बात सुनना, उनके घावों को समझना तथा उन्हें पिता की कोमलता प्रदान करना है। संत पापा ने कहा कि वे लोगों के बीच रहें, विशेषकर, युवाओं के जिसके लिए विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता नहीं है किन्तु ईमानदारी से उनके जीवन में संलग्न होने, उन्हें सम्मान देने और प्यार से सुनने की आवश्यकता है।


(Usha Tirkey)

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