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ईद अल-फ़ित्र संदेश में ईसाई और मुसलमानों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों की शुभकामना

In Church on June 2, 2017 at 3:25 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 जून 2017 (सेदोक): वाटिकन स्थित अन्तरधर्म सम्वाद परमधर्मपीठीय परिषद ने रमादान एवं ईद अल-फ़ित्र के उपलक्ष्य में विश्व के समस्त इस्लाम धर्मानुयायियों के नाम एक सन्देश प्रकाशित कर ईसाई और मुसलमानों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों की शुभकामना की है।

परमधर्मपीठीय समिति का सन्देश वाटिकन द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित किया गया।

रमादान के दौरान रोज़ों के दिनों में प्रार्थनामय एकात्मता तथा ईद अल-फ़ित्र महापर्व के अवसर पर आनन्द, शांति एवं विपुल आध्यात्मिक वरदानों की मंगलकामना करते हुए परमधर्मपीठीय समिति ने अपने सन्देश में शांति निर्माण तथा शिक्षा द्वारा आपसी सम्मान के प्रति विशेष ध्यान आकर्षित कराया है।

सन्त पापा फ्राँसिस के विश्व पत्र “लाओदातो सी” को उद्धृत कर परमधर्मपीठीय समिति ने लिखा, “सन्त पापा फ्राँसिस पर्यावरण को नुकसान पहुँचानेवाली हमारी जीवन शैलियों की ओर ध्यान आकर्षित कराते हैं। मसलन, कुछेक दार्शनिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य ऐसे अवरोध प्रस्तुत करते हैं जो मानवजाति एवं प्रकृति के बीच बने सम्बन्धों को ख़तरे में डालते हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिये सभी धर्मों के लोगों को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।”

सन्देश में इस तथ्य को रेखांकित किया गया कि “विश्व एक सामान्य घर है, मानव परिवार के समस्त सदस्यों के रहने का यह निवास स्थल है। अस्तु, कोई भी एक व्यक्ति, देश या जाति के लोग धरती विषयक अपने निजी विचारों को अन्यों पर नहीं थोप सकते।” इसीलिये, सन्देश में कहा गया, “सन्त पापा फ्राँसिस नये सिरे से सम्वाद की अपील करते हैं जिसमें इस पर विचार किया जाये कि हम किस प्रकार धरती के भविष्य को संरचित कर रहे हैं क्योंकि पर्यवरणीय परिवर्तन से हम सभी का जीवन प्रभावित होता है।”

वाटिकन की समिति ने शुभकामना व्यक्त की कि समस्त इस्लाम धर्मानुयायियों को उपवास, प्रार्थना एवं कल्याणकारी कार्यों से उत्पन्न होनेवाली आशीष प्राप्त हो जिससे वे सम्पूर्ण मानवजाति के हित में शांति, न्याय एवं पर्यावरण की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध हो सकें।


(Juliet Genevive Christopher)

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02 जून को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on June 2, 2017 at 3:21 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 जून 2017 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि संघर्ष के युग में हममें से प्रत्येक प्रकाश की लौ बन सकता है।

शुक्रवार, 02 जून को एक ट्वीट सन्देश में उन्होंने लिखा, “संघर्षों से भरे वर्तमान युग के अन्धकार में, हममें से प्रत्येक व्यक्ति प्रज्वलित मोमबत्ती बन सकता है तथा यह स्मरण दिला सकता है कि प्रकाश अन्धकार को अभिभूत कर लेगा।”


(Juliet Genevive Christopher)

पेरिस जलवायु समझौते से ट्रम्प के पीछे हटने पर काथलिक नेता निराश

In Church on June 2, 2017 at 3:15 pm

वाशिंग्टन, शुक्रवार, 2 जून 2017 (सीएनआ): अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा, गुरुवार को, पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हटने की घोषणा पर सम्पूर्ण विश्व के काथलिक नेताओं को निराशा हुई है।

2015 में सम्पन्न पेरिस जलवायु समझौते का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान में हो रही बढ़ोतरी को दो डिग्री से नीचे रखना है किन्तु ट्रम्प की घोषणा के बाद समझौते के लक्ष्यों को पाना शेष विश्व के लिये और अधिक मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में अमरीका का 15 फ़ीसदी योगदान है। इसके साथ ही अमरीका विकासशील देशों में बढ़ते तापमान को रोकने के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद मुहैया करना वाला सबसे अहम स्रोत है।

इस सिलसिले में, वाटिकन में न्याय एवं शांति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष, कार्डिनल पीटर तुर्कसन ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा था, “इस समय समझौते से पीछे हटने का निर्णय ऐसा फ़ैसला है जिसकी हम आशा करते हैं कि वह कभी न आये।”

“सृष्टि की देखभाल, आर्थिक न्याय, शरणार्थी संकट, और शांति पर वाटिकन का परिप्रेक्ष्य” शीर्षक से  वाशिंग्टन में आयोजित सम्मेलन से पूर्व संवाददाताओं से उन्होंने कहा था, “यह एक विश्वव्यापी सार्वजनिक सम्पदा है जिसकी देखभाल करने की नितान्त आवश्यकता है।”

इसके अलावा गुरुवार दोपहर राष्ट्रपति ट्रम्प की घोषणा से पूर्व अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षों ने भी पेरिस जलवायु समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए सरकार पर दबाव डाला था।

इसी बीच गूगल, ऐपल और सैकड़ों बड़े जीवाश्म ईंधन उत्पादक कंपनियों ने राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह किया था कि वह पेरिस जलवायु समझौते के साथ बने रहें किन्तु ट्रम्प की घोषणा के बाद इन कम्पनियों ने भी निराशा व्यक्त की है।

ग़ौरतलब है कि सन् 2015 में पेरिस समझौते पर विश्व के 190 राष्ट्रों ने हस्ताक्षर किये थे।


(Juliet Genevive Christopher)

अपहृत पुरोहित के रिश्तेदारों ने केरल राज्यपाल से की हस्तक्षेप की अपील

In Church on June 2, 2017 at 3:12 pm

तिरूवनन्तपुरम, शुक्रवार, 2 जून 2017 (ऊका समाचार): यमन में अपहृत और लापता काथलिक पुरोहित फादर टॉम ऊझुन्नालिल के रिश्तेदारों ने केरल के राज्यपाल पी. सत्यसिवम से मुलाकात कर उनसे फादर की रिहाई हेतु हस्तक्षेप की अपील की है।

04 मार्च 2016 को, संदिग्ध इस्लामिक चरमपंथियों ने, यमन में, फादर टॉम का अपहरण कर लिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चण्डी के नेतृत्व में फादर टॉम के रिश्तेदारों ने राज्यपाल सत्यसिवम से मुलाकात की थी।

टाईम्स ऑफ इन्डिया समाचार का हवाला देकर ऊका समाचार ने बताया कि उक्त मुलाकात के बाद राज्यपाल ने रिश्तेदारों की याचिका को केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज के सिपुर्द करते हुए उनसे लापता पुरोहित की खोज को सघन करने का आग्रह किया था।

राज्यपाल के पत्र के जवाब में श्रीमती स्वराज ने ट्विटर पर कहा, “हम कोई भी प्रयास करने से नहीं चूक रहे हैं।”

मदर तेरेसा के मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित स्वास्थ्य आश्रम पर आतंकवादियों के हमले के उपरान्त फादर टॉम लापता हो गये थे।

आतंकवादी हमले के बाद फादर टॉम के कई विडियो सन्देश प्रकाश में आये थे जिनमें उन्होंने अपने जीवन की रक्षा हेतु सहायता का आग्रह किया था। कुछ सप्ताह पूर्व जारी वीडियो में उन्होंने कहा था कि स्थिति संकटपूर्ण हो चुकी थी तथा केवल केंद्र सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के जरिए ही उनका बचाव हो सकता था।

मुख्य मंत्री पीनाराई विजयन ने 25 मई को विधान सभा में कहा था कि वे इस मुद्दे को प्रधान मंत्री मोदी के पास ले जायेंगे।

इस बात की ओर मुख्य मंत्री ने ध्यान आकर्षित कराया कि केरल राज्य ने 25 अप्रैल 2016 तथा 27 फरवरी 2017 को केन्द्र से सहायता की अपील की थी किन्तु उन्हें कोई जवाब नहीं मिला था। मुख्य मंत्री ने इस वर्ष 14 मार्च को प्रधान मंत्री को भी एक पत्र लिखा था।


(Juliet Genevive Christopher)

प्रेरक मोतीः सन्त जस्टीन, शहीद (दूसरी शताब्दी)

In Church on June 2, 2017 at 3:11 pm

वाटिकन सिटी, 01 जून सन् 2017:

शहीद जस्टिन का जन्म फिलिस्तीन के एक ग़ैरविश्वासी परिवार में, लगभग सन् 120 ई. में हुआ था। प्लेटो, अरस्तु तथा अन्य महान यूनानी विचारकों एवं दार्शनिकों की कृतियों का अध्ययन कर वे ख़ुद एक महान दार्शनिक बन गये थे। एक दिन, समुद्र के किनारे जब वे दर्शन की एक किताब पढ़ रहे थे तब वहाँ से एक वृद्ध महाशय गुज़रे। दोनों में बातचीत शुरु हो गई जो दर्शन एवं धर्म जैसे गूढ़ विषयों पर वार्तालाप में सम्पन्न हुई। बुजुर्ग सज्जन एक ख्रीस्तीय धर्मानुयायी थे जिन्होंने जस्टीन के समक्ष अपने विश्वास का साक्ष्य देते हुए उन्हें येसु मसीह के बारे में बताया। उन्होंने उन्हें बताया कि कैसे यहूदी पवित्रग्रन्थों की सारी भविष्यवाणियाँ प्रभु येसु मसीह में पूरी हुई थीं। बुजुर्ग सज्जन की बातें सुनने के बाद जस्टीन ने दार्शनिक जाँच पड़ताल की और उस विवेक एवं प्रज्ञा को मिलते पाया जिसकी खोज वे अपने जीवन में करते रहे थे।

इस घटना के बाद जस्टीन ने ख्रीस्तीय धर्म का आलिंगन कर लिया तथा एफेसुस के विख्यात ख्रीस्तीय धर्मशिक्षक बन गये। यहाँ से उन्होंने रोम का रुख़ किया। रोम में उन्होंने स्वतंत्र और मुक्त रूप से ख्रीस्तीय विश्वास का प्रचार-प्रसार किया। ख्रीस्तीय धर्म के समर्थन एवं बचाव में उन्होंने रोमी सम्राट को सम्बोधित दो “अपोलोजीज़” लिखी और इस प्रकार दूसरी शताब्दी के सर्वाधिक प्रभावशाली धर्मशिक्षक सिद्ध हुए। यद्यपि, तत्कालीन लेखकों के अनुसार, जस्टीन ने कई विषयों पर  पुस्तकें लिखीं, उनके द्वारा रचित दो “अपोलोजीज़” तथा यहूदी धर्मानुयायी ट्राईपो के साथ उनके वार्तालाप पर आधारित कृतियाँ ही आज उपलब्ध और विख्यात हैं।

जस्टीन के सहपाठियों को उनसे ईर्ष्या थी जिसके चलते उनके ही एक साथी दार्शनिक ने उनके विरुद्ध शिकायत कर दी थी। सन् 165 ई. में रोमी अधिकारियों के हाथों जस्टीन को कड़ी यातनाएँ दी गई और मार डाला गया। सन्त जस्टीन की शहादत का स्मृति पर्व पहली जून को मनाया जाता है।

चिन्तनः प्रभु ईश्वर में ध्यान लगाकर ही यथार्थ विवेक एवं प्रज्ञा का वरदान पाया जा सकता है। प्रज्ञा ग्रन्थ के आठवें अध्याय के 6-11 तक के पदों में: “सुनो, मैं महत्वपूर्ण बातें बताऊँगी। मैं जो कहूँगी, वह बिलकुल सही है; क्योंकि मेरा मुख सत्य बोलता है। मुझे कपटपूर्ण बातों से घृणा है। मेरे मुख से जो शब्द निकलते है, वे सच्चे हैं; उन में कोई छल-कपट या कुटिलता नहीं। वे समझदारी के लिए तर्कसंगत हैं और ज्ञानियों के लिए कल्याणकारी। चाँदी की अपेक्षा मेरी शिक्षा ग्रहण करो, परिष्कृत सोने की अपेक्षा मेरा ज्ञान स्वीकार करोक्योंकि प्रज्ञा का मूल्य मोतियों से भी बढ़कर और वह किसी भी वस्तु से अधिक वांछनीय है।”


(Juliet Genevive Christopher)

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