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कलीसिया को संतों के मध्यस्त प्रार्थना की जरुरत, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 7, 2017 at 2:38 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार,7 जून 2017 (आर.ई.आई) :  संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 7 जून को ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी विश्वासियों को कलीसिया द्वारा घोषित संतों के माध्यम से प्रार्थना करने हेतु प्रेरित किया।

संत पापा ने संदेश में लिखा,″कलीसिया को प्रतिदिन उन संतों के मध्यस्त प्रार्थना की जरुरत है जिन्होंने अपने सामान्य जीवन को सामंजस्य के साथ व्यतीत किया था।″


(Margaret Sumita Minj)

“पिता हमारे” पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on June 7, 2017 at 2:36 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 07 जून 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

येसु की प्रार्थना में कुछ तो अति आश्चर्यजनक करने वाली बात थी जिसके कारण शिष्यों ने उनसे एक दिन प्रार्थना करने हेतु सिखलाने का आग्रह किया। संत लूकस रचित सुसमाचार हमारे लिए येसु की प्रार्थना के रहस्य का वृतांत प्रस्तुत करता है। शिष्यों ने येसु के जीवन में इस बात को देखा था कि वे सुबह और शाम को एकांत में जाते और प्रार्थना में “लीन” हो जाते थे। येसु के जीवन की यह दिनचर्या उन्हें प्रभावित करती है और वे आग्रह करते हैं कि वे उन्हें भी प्रार्थना करने को सिखलाये।

इस तरह येसु हमें अपने पिता के पास प्रार्थना करने को सिखलाते हैं जो ईसाइयों की एक प्रार्थना “पिता हमारे” बन जाती है। संत पापा ने कहा कि वास्तव में संत मत्ती की तुलना में संत लूकस हमें येसु की प्रार्थना का एक छोटा रूप देते हैं जो “पिता” की पुकार से शुरू होती है।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय प्रार्थना का रहस्य इस बात में समाहित है कि हम ईश्वर को पिता कह कर पुकारने का साहस करते हैं। यूख्रारिस्त धर्मविधि के दौरान येसु द्वारा सिखलाई गई प्रार्थना को एक समुदाय के रुप में करने के पूर्व हम इस तथ्य की घोषणा करते हैं, “हम यह कहने का साहस करते हैं…”

संत पापा ने कहा कि हम अपने में ईश्वर को “पिता” कह कर बुलाने के योग्य नहीं हैं। हमें ईश्वर को उनकी सर्वशक्तिमत्ता के अनुसार और अधिक आदरसूचक संबोधन करने की जरूरत है लेकिन उन्हें “पिता” कह कर पुकारना हमें एक विश्वास के संबंध में संयुक्त करता है मानों एक अबोध बालक अपने पिता की ओर अभिमुख होता हो क्योंकि वह अपने में विश्वस्त है कि पिता प्रेम में उसकी चिंता करते हैं। संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय धर्म के अनुसार हम यहाँ दुनिया के सामने मानव की धार्मिकता में एक मनोवैज्ञानिक तथ्य को रखते हैं जो अपने में एक महान क्रांति है। ईश्वर का रहस्य जो हमें सदैव आश्चर्यचकित करता और हमें अपने में नगण्य होने की अनुभूति प्रदान करता है लेकिन यह हमें अपने ईश्वर के सम्मुख आने से भयभीत नहीं करता और न ही हम हतोत्साहित और अपने में दुःख का अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक हमारे हृदय के लिए एक मुश्किल क्रांति है क्योंकि पुनरुत्थान की घटना में जहाँ नरियों ने कब्र को खुला और वहाँ स्वर्ग दूतों के बैठा पाया तो “वे आश्चर्यचकित हो कर काँपती हुई वहाँ से निकल कर भाग गयीं और उन्होंने डर के मारे किसी से कुछ नहीं कहा।” (मारकु16.8) लेकिन येसु हमें इस बात को प्रकट करते हैं कि ईश्वर एक अच्छे पिता हैं अतः “हमें उनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।”

संत पापा ने कहा कि हम करुणावान पिता के दृष्टांत पर चिंतन करें।(लूका.15.11-32) इसके द्वारा येसु हमें उस पिता के बारे में कहते हैं जिनके हृदय में अपने बच्चों के लिए सिर्फ स्नेह है। वे अपने बेटे को उसके घमंड की सज़ा नहीं देते हैं। वे उसे उसकी संपत्ति का हिस्सा दे देते और घर से दूर जाने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। येसु हमें कहते हैं कि ईश्वर पिता के सामन हैं लेकिन मानवीय पिता के समान नहीं क्योंकि दुनिया में कोई ऐसा पिता नहीं है जो उड़ाऊ पुत्र के दृष्टांत के पिता की तरह पेश आयेगा। ईश्वर अपने में उस पिता के समान हैं जो हम मानव की स्वतंत्रता के सम्मुख निःसहाय हैं, वे अपने में केवल “प्रेम” रूपी क्रिया को जानते हैं। इस तरह जब घर से दूर गया हुआ पुत्र अपनी धन संपत्ति उड़ा कर अंत में वापस घर लौट कर आता तो वह पिता मानवीय व्यवहार के अनुसार उसका न्याय नहीं करते हैं लेकिन वे सर्वप्रथम उसकी गलतियों को क्षमा करते की आवश्यकता का अनुभव करते हैं। वे अपने आलिंगन द्वारा उस पुत्र को इस बात का एहसास दिलाते हैं कि उसकी अनुपस्थिति उनके लिए कितना दुखदायी रही। संत पापा ने कहा कि यह हमारे ईश्वर का अपने बच्चों हेतु प्रेम का एक गूढ़़ रहस्य प्रकट करता है जिसकी गहराई हम कभी माप नहीं सकते हैं।

यही कारण है कि प्रेरित संत पौलुस रोमियों और गलातियों के नाम अपने पत्र में येसु के द्वारा उपयोग किये गये शब्द “अब्बा” को ज्यों का त्यों रखते हैं (रोमि. 18.5, गला.4.6) क्योंकि यह पिता और संतान के बीच की घनिष्ठ को प्रदर्शित करता है।

संत पापा ने कहा कि हम अपने में कभी अकेले नहीं हैं। हम अपने में ईश्वर के बिना, उनसे दूर और उनसे क्रोधित हो सकते हैं लेकिन येसु सुसमाचार में हमें इस बात से स्पष्ट कराते हैं कि वे हमारे बिना नहीं रह सकते हैं। वे “मानव के बिना” एक ईश्वर कभी नहीं हो सकते। संत पापा ने जोर देते हुए कहा, “वे हमारे बिना नहीं रह सकते, वे मानव के बिना नहीं रह सकते जो कि एक महान रहस्य है…। यह हमारे लिए निश्चय ही आशा का स्रोत है जो पिता की पुकार में सदैव बना रहता है। जब हमें सहायता की जरूरत होती है तो येसु हमें विश्वास में अपने पिता की ओर उन्मुख होने को कहते हैं। हमारे जीवन की सारी आवश्यकताएं जैसे कि भोजन, स्वास्थ्य, कार्य, क्षमा प्राप्ति और परिक्षाओं से बचे रहना हमारे अकेलेपन में नहीं वरन पिता की प्रेम भरी नज़रों में सदैव पूरी होती है क्योंकि वे हमें जीवन में कभी नहीं छोड़ते हैं।

अपनी धर्मशिक्षा के अंत में संत पापा ने कहा कि मैं आप सभों से निवेदन करना चाहता हूँ, हमारे जीवन में बहुत सारी तकलीफ़ें और आवश्यकताएं हैं। आइए हम थोड़ी देर मौन रह कर उन पर चिंतन करें। हम उस पिता के बारे में, हमारे स्वर्गीय पिता के बारे में भी विचार करें जो हमारे बिना कभी नहीं रह सकते, जो अभी भी हमें देख रहे हैं। आइए हम सब मिलकर विश्वास और आशा में उसी पिता के पास प्रार्थना करें। इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासी समुदाय के साथ “हे पिता हमारे” की प्रार्थना की और तदोपरान्त उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और सभों को शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा दवारा ‘शांति के लिए एक मिनट प्रार्थना’ की अपील

In Church on June 7, 2017 at 2:35 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 7 जून 2017 (आर.ई.आई) : बृहस्तपतिवार 8 जून को रोम के स्थानीय समयानुसार अपराह्न एक बजे “शांति के लिए एक मिनट” की प्रार्थना हेतु ली गई पहल को कई देशों में दोहराई की गई है।

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 7 जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान वहाँ उपस्थित हजारों तीर्थयात्रियों और विश्वासियों से 8 जून को एक बजे “शांति के लिए एक मिनट” प्रार्थना की अपील की। संत पापा ने कहा, ″वाटिकन में मेरे और इजरायल के राष्ट्रपति स्वर्गीय पेरेस तथा फिलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास के साथ मुलाकात के दौरान इस छोटी प्रार्थना की पहल की गई थी। वर्तमान में हम ख्रीस्तीयों, यहूदियों और मुसलमानों को शांति हेतु प्रार्थना की बहुत आवश्यकता है।″

8 जून सन् 2014 को वटिकन उद्यान में संत पापा फ्राँसिस ने राष्ट्रपति स्वर्गीय पेरेस और राष्ट्रपति अब्बास के साथ मुलाकात की और वहीं तीनों ने मिलकर शांति के लिए प्रार्थना की थी।


(Margaret Sumita Minj)

पेरिस, नोटर डेम महागिरजाघर के सामने एक अफ़सर पर हथौड़े से हमला

In Church on June 7, 2017 at 2:33 pm

पेरिस, बुधवार,7 जून 2017 (एशिया न्यूज) :  खुद को “इस्लामी राज्य में एक सैनिक” के रूप में परिभाषित करने वाले एक चालीस वर्षीय पुरुष ने कल 6 जून अपराहन को पेरिस में  नोटर डेम महागिरजाघर के सामने एक पुलिस अफ़सर पर हथौड़े से हमला किया था। पुलिस अफ़सर को एक गंभीर चोट लगी और उसके एक साथी पुलिस अधिकारी ने हमलावर के पैरों में गोली मारी और उसे घायल कर दिया। हमलावर के जेब में किचन का एक छूरा भी था।

पेरिस में नोटर डेम महागिरजाघर पर्यटकों की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। पुलिस अफ़सर पर हमला होते देखकर बहुत से पर्यटक अपने बचाव में नोटर डेम महागिरजाघर में प्रवेश किये। पुलिस ने अन्य हमलावरों की खोज पड़ताल करने तक सभी को गिरजाघर में रहने के लिए बाध्य किया।

हमलावर की पहचान कर ली गई है। सन् 1977 में जन्में फरीद इककेन अल्जीरियाई मूल हैं जो मार्च 2014 में फ्रांस पहुंचे थे। वे लोरेन विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता और समाजशास्त्र में स्नातक हैं। हाल ही के महीनों में फरीद इककेन चेरी- पोंतिस परिसर में रहते थे। उसके अपार्टमेंट में एक वीडियो पाया गया जिसमें उसने आईसिस की निष्ठा की शपथ ली और हमले करने का वादा किया।

फ़्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री जेहा कोलोम ने कहा कि हमलावर ने चिल्लाते हुए कहा था कि ‘यह सीरिया के लिए है’। सरकारी वकीलों ने इसे आतंकवादी घटना मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

फ़्रांस अमरीका की अगुवाई वाले उस गठबंधन का हिस्सा है जो सीरिया में चरमपंथी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ पर हमले कर रहा है।


(Margaret Sumita Minj)

‘अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु आवश्यक’ : परमधर्मपीठ

In Church on June 7, 2017 at 2:32 pm

जेनेवा, बुधवार,7 जून 2017 (वीआर रेई) : परमधर्मपीठ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे वैश्विक चुनौतियों का समाधान देशों के बीच एकजुटता और सहयोग के साथ करें।

संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान जुर्कोविक ने जेनेवा में मानवाधिकार परिषद के 35 वें सत्र में यह अपील की थी।

उन्होंने कहा,″ हमारे मानव परिवार की भलाई और विकास तथा सबकी की रक्षा और मौलिक मानवाधिकारों के सही उपयोग के लिए अनिवार्य तत्व के रूप में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की भूमिका को पहचानने की तत्काल आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता देशों को वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में सहायक होगी, “जैसे कि प्रवासन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं, सशस्त्र संघर्ष और गरीब और अमीर के बीच बढ़ते अंतर।”

महाधर्माध्यक्ष इवान जुर्कोविक ने कहा, “एकता संप्रभुता का विरोध नहीं करती; इसके बजाय, यह लोगों की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के रूप में संप्रभुता की अवधारणा की गहरी समझ देती है।”

एकता किसी व्यक्ति के अधिकारों पर कुचलने के बजाय, पूरक के सिद्धांत की मान्यता को शामिल करती है।

एकजुटता केवल सामाजिक कार्य नहीं है, जैसा कि संत पापा फ्राँसिस कहते हैं, एकजुटता “राजनीतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक विकल्पों में, साथ ही देशों और लोगों के बीच आपसी मनोभाव को मजबूत करती है। लोगों को सच्ची एकजुटता की शिक्षा देकर हम “कचरे की संस्कृति” को दूर करने में सक्षम होंगे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस द्वारा वेनेजुएला संकट पर देश के धर्माध्यक्षों के साथ चर्चा

In Church on June 7, 2017 at 2:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार,7 जून 2017 (आर.ई.आई) : संत पापा बृहस्तपतिवार को वेनेजुएला के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष और समिति के सदस्यों के साथ निजी बैठक करेंगे।

मंगलवार को परमधर्मपीठीय प्रेस ऑफिस के निदेशक ग्रेग बर्क ने एक बयान में बैठक की घोषणा की थी।

बयान के अनुसार, ″वेनेजुएला के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा देश की स्थिति के बारे में चर्चा करने हेतु संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करने का अनुरोध किया गया था।”

विदित हो कि राजनीतिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहे वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के विरोधियों और लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और उन्होंने सेना से मादुरो का साथ छोड़ने की अपील की है। साथ ही अपनी शक्तियों को मजबूत करने के लिए उठाए मादुरो के कदम को ‘तख्तापलट’ करने की कोशिश करार दिया है। भोजन की कमी और हिंसक अपराधों का सामना कर रहे संकटग्रस्त देश में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।


(Margaret Sumita Minj)

भारत ने कपड़ा मजदूरों की मौत के लिए मुआवजे में दोगुना किया है

In Church on June 7, 2017 at 2:28 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार,7 जून 2017 (रायटर) : श्रम प्रधान क्षेत्र के श्रमिकों की गंभीर समस्याओं को दूर करने के लिए एक लाभ योजना के तहत, भारत ने अपने बिजली द्वारा संचालित वस्त्र उद्योग में कार्यरत श्रमिकों की मौत के लिए मुआवजा दोगुना कर दिया है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा उत्पादकों में से एक है और विदेशी मुद्रा कमाने और रोजगार के मामले में पारंपरिक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था का एक आधारशिला रहा है। कपड़ा उद्योग में बिजली चालित करघे कुल नौकरियों का लगभग 70 प्रतिशत अर्थात लगभग 6.5 लाख लोगों को रोजगार देता है।

एक व्यक्ति 12 धंटों से भी अधिक समय तक काम करता है अक्सर तंग स्थान के अंदर छह से नौ करघों में काम करता है। बिजली चालित करघों के तेज गति से चलने से उसे चोट भी लगती है और पूरा समय उसे मशीनों के शोर शराबों के बीच काम करना पड़ता है। वे जो कपड़े और वस्त्रों का उत्पादन करते हैं उसका लगभग 60 प्रतिशत भाग निर्यात करते हैं।

‘पावरटेक्स इंडिया’ नामक सरकारी कार्यकर्ता सुरक्षा योजना अप्रैल में शुरू हुई और इसमें श्रमिकों के लिए एक हेल्पलाइन भी शामिल है साथ ही नियोक्ताओं के लिए अपने मशीनों का उन्नयन हेतु आर्थिक सहायता की भी व्यवस्था है।

भारत के कपड़ा आयुक्त कविता गुप्ता ने रायटर को बताया, “हमें कपड़ा मूल्य श्रृंखला विकसित करना और अधिक प्रतिस्पर्धी बनने के लिए प्रौद्योगिकी का उन्नयन करना है सभी योजनाएं कड़ी मेहनत को देखते हुए, काम की स्थिति को बेहतर बनाने और आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण करने के लिए बनाई गई है।”

उन्होंने कहा कि एक कार्यकर्ता की सामान्य मृत्यु के मामले में बीमा 200,000 रुपए ($ 3,100) है और काम के समय दुर्धटना के कारण हुई मृत्यु में बीमा 400,000 रुपये तथा इसके अलावा 200,000 रुपए विकलांगता मुआवजे इस महीने से तय किया गया है।


(Margaret Sumita Minj)

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